नीतिवचन 25:17

अपने पड़ोसी के घर में बार-बार जाने से अपने पाँव को रोक, ऐसा न हो कि वह तुझ से अघा जाय, और तुझ से बैर रखे।

किसी के घर मेहमान बनकर अधिक लम्बे समय या कई दिनों तक ठहरे रहना अशिष्ट और आपत्तिजनक आचरण है। कुलीन मनुष्य इससे बचते हैं, क्योंकि यह शिष्टाचार, मर्यादा, तहज़ीब और सभ्य चाल-चलन की कमी को दिखाता है। यह दूसरों का ध्यान न रखनेवाला और स्वार्थी व्यवहार है, और इस से आप अपने अच्छे मित्रों और रिश्तेदारों को खो सकते हैं। बुद्धि में दूसरों के लिए ग्रहणीय और प्रसन्नतादायक होने का गुण सीखना भी शामिल है।

परमेश्वर के बच्चों को दूसरों के लिए कभी भी दुखदाई नहीं होना चाहिए, क्योंकि बाइबल के दिव्य पुस्तकालय में व्यावहारिक सलाह शामिल है, जैसा कि इस नीतिवचन में। जो लोग बाइबल को अप्रासंगिक और अव्यवहारिक इतिहास तथा केवल एक धार्मिक पुस्तक मानते हैं, उन्होंने इसे कभी नहीं पढ़ा है। इस पुस्तक के लिए परमेश्वर की स्तुति करें, और आशा करें कि आपका पड़ोसी इसे पढ़ेगा।

मित्रता में एक-दुसरे के घर जाना और संपर्क में रहना शामिल हैं। परन्तु इन दोनों ही बातों की अति दोस्ती को बोझ बना सकता है और इसे नष्ट कर सकता है, जैसे बहुत अधिक मधु खाने से आपको उल्टी हो सकती है (नीति 25:16)। अति करने से आप अपना सम्मान खो देंगे या अपने लिए घृणा उत्पन्न कर लेंगे, इसलिए सुलैमान ने आग्रह किया कि मित्रों के सम्बंध में भी संयम और संतुलन बनाकर रखा जाए।

सामान्य शिष्टाचार उतना सामान्य नहीं है जितना आप सोचते हैं। लेकिन ख्रिश्चनों के लिए यह सामान्य होना चाहिए, जिन्हें सभी मनुष्यों के सम्बंध में, और विशेष रूप से अन्य पवित्रजनों के सम्बंध में निर्दोष रहना है (1 कुरिन्थ 10:32)। इस स्वार्थी पीढ़ी में, शिष्टाचार और मर्यादा की उपेक्षा की जाती है, या उनका तिरस्कार किया जाता है जिससे इस पीढ़ी को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

इस नीतिवचन की बुद्धि के दो सामान्य रूप हैं, एक नकारात्मक और एक सकारात्मक। मित्रों या रिश्तेदारों के साथ अत्यधिक समय बिताने के विरोध में चेतावनी देने के लिए अक्स्रर ऐसा कहा जाता है, “किसी के यहाँ बार-बार जाने से इज्ज़त कम हो जाती है।” केवल बहुत ही थोड़े जिगरी मित्रों या एकदम ही करीबी रिश्तों को अगर छोड़ दिया जाए, तो दूसरे के साथ ज़रूरत से ज्यादा अत्यधिक समय बिताने से मेजबानों का अक्सर मन खट्टा हो जाता है।

मित्रों के बीच भी विराम या फासला और एकांत समय की आवश्यकता को रेखांकित करने के लिए यह भी कहा जाता है कि, “दूरियां प्रेम को बढ़ा देती हैं।” दूरियों से मूल्यवान मित्रों की पहचान प्रकट होगी, क्योंकि इस से अपने मित्रों के लिए प्रेम और एक-दूसरे को देखने की इच्छा और प्रबल होती जाएगी। क्या आप इन दोनों नियमों को जानते और उनका पालन करते हैं?

किसी के यहाँ अधिक समय तक मेहमान बनकर रहना, बहुत बार-बार आना, बहुत बार फोन करना, लम्बे समय तक बातें करना, बार-बार ईमेल करना, या बार-बार संदेशे भेजना आसान है। किसी के जीवन में इस तरह घुसपैठ करना एक बोझ हो सकती है और आक्रोश और घृणा को जन्म दे सकती है। जो आप किसी अजनबी के साथ कभी नहीं करेंगे, वह आप किसी दोस्त के साथ बड़ी आसानी से करने का फायदा उठा सकते हैं। खबरदार!

पवित्रशास्त्र आपको उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बना सकता है (2 तीमु 3:15) और वह सेवकों के लिए आवश्यक सब कुछ प्रदान करता है (2 तीमु 3:16-17), लेकिन पवित्रशास्त्र अद्भुत व्यावहारिक बुद्धि भी सिखाता है। यहाँ अच्छी सलाह है जो आपको मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ने में मदद करेगी, जैसा कि यीशु मसीह बढ़ गया था (लूका 2:52)।

आज अधिकांश शिक्षा बिल्कुल बेकार है। स्कूल में यह शिक्षा देने के बजाए कि कैसे एक बंदर मनुष्य में विकसित हुआ, उन्हें शिष्टाचार, सामाजिक नैतिकता और व्यावहारिक बुद्धि पर शिक्षा दीं जानी चाहिए। स्कूलों में सुलैमान की नीतिवचन की पुस्तक पाठ्यक्रम में होनी चाहिए। परन्तु फिर भी, परमेश्वर की उंगली से लिखित यह पुस्तक उसके पवित्रजनों के लिए खज़ाना है। उन्हें इसे सीखना चाहिए, कुलीनता और बुद्धि में इस संसार को मात देनी चाहिए, और आनन्द मनाना चाहिए।

इन थोड़े ही शब्दों में निहित बुद्धि एक बच्चे को आधा-आधा काट के दोनों माँओं के बीच बाँट देने के सुलैमान के समाधान के बराबर है (1 राजा 3:25)। इसका मूल्य समझो। स्पष्टों शब्दों में क्या ही मूल्यवान सलाह। मूर्ख को लगता है कि बार-बार फोन करना और बहुत बातें करना मित्रता हैं, और कभी समझ ही नहीं पाता कि आखिर उसके इतने कम मित्र क्यों हैं। इसका उत्तर इसी नीतिवचन में है।

कमज़ोर और राजनीतिक रूप से सही लोग दिखाई देनेवाले लोग अस्पष्ट सामान्यताओं के विषय में दबी आवाज़ में बातें करते हैं, लेकिन सुलैमान ने यहां बार-बार किसी के घर जाने के अपराध को किसी को तंग करने और उसकी घृणा को उकसाने की जड़ के रूप में वर्णित किया। बाइबल की इस स्पष्ट और सरल पुस्तक से और इस नीतिवचन से प्रेम रखो। परमेश्वर चाहता है कि आप दयालु, विनम्र, शिष्टाचारी और सफल बने।

आज के आसान संचार माध्यम इस नीतिवचन की शिक्षा को पहले से कहीं अधिक आवश्यक बना देते हैं। बीते ज़माने में अपने पड़ोसी से मिलने तीन से चार मीलों की पैदल यात्रा करके जाना अत्यधिक हतोत्साहित किया करता था। लेकिन आज कार, फोन, ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया और अधिक खाली समय की उपलब्दियों के चलते मिलने-जुलने जाने की आदतों को सीमित करनेवाले कारक कम हो जाते हैं। आज, अपनी कारों में सेल फोन पर बातें करनेवाले लोगों को यह लगता है कि हर कोई उनसे बातें सुनने का इंतजार कर रहा है।

आह, प्रिय ख्रिश्चन पाठक, अपने आप को धोखा मत दो। आप इस नियम के लिए अपवाद नहीं हैं, भले ही आपका कपटी दिल ऐसा सोचता है, पर यह आपपर भी अमल होता है। आपका फोन करना और मुलाकातें दूसरों के समयों की तुलना में अधिक कीमती नहीं हैं, और इसे पक्का-पक्का समझ लेना आपको ही अपने मित्रों और रिश्तेदारों की नफरत से बचाएगा, और आपके मित्र बढ़ जाएंगे। दूसरों से अपना अपमान करवाने का खतरा उठाने के बजाय, बेहतर होगा कि आप बुद्धिमान बने और अपने पर प्रतिबन्ध रखने की गलती करें।

क्या इस से बड़ी कोई पीड़ा है कि आप मेहमानों को रात के खाने के लिए आमंत्रित करें और खाना हो जाने के बाद वे देर रात तक इधर-उधर की बेमतलब बातें करते बैठें रहे, इस बात की परवाह किए बिना कि आपको साफ़-सफ़ाई करनी है, और सुबह जल्दी उठना भी है ताकि समय पर काम पर जा सके? आपको प्रश्न पड़ता है कि वे क्यों रुके हुए हैं, परन्तु इसका उत्तर सरल है। वे स्वार्थी हैं और उन्हें लगता है कि आप उन्हें पूरी रात सुनना चाहते हैं।

अतिथि के रूप में आप क्या कर सकते हैं? अपने मेजबान से केवल यह कहें कि आपको ज्यादा रात होने से पहले ही निकल जाना चाहिए, और अपने मेजबान को तय करने दें कि आप को कितने समय तक रुकना चाहिए। अगर वे आपके अनुरोध से सहमत होते हैं कि आपको ज्यादा रात होने से पहले घर के लिए निकलना चाहिए, तो तुरंत निकल जाएं और जान लो कि आप एक बुद्धिमान मनुष्य हैं। यदि वे आपसे रुकने के लिए अनुरोध करते हैं, तो अवश्य रुके, परन्तु एक घंटे बाद फिर से कृपापूर्वक निकल जाने की कोशिश करें।

एक संबंधित नीतिवचन अभिमान को कुचलता है और कुलीनता की शिक्षा देता है। जब आपको किसी कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है, तब नीचले स्थान के आसन पर बैठें। कोई आपको उठाकर नीचले आसन पर बैठने के लिए कहे, इससे बेहतर है कि आप स्वयं ही कम महत्त्व के आसन पर बैठें, और मेजबान आपको वहां से उठाकर महत्वपूर्ण आसन पर बैठने के लिए कहे (नीति 25:6-7; लूका 14:8-10)। अपने पड़ोसियों से भेंट करने के विषय में इस नीतिवचन की शिक्षा को अगर लागू किया जाए तो- अपने मेजबान के द्वारा अधिक समय तक रहने के लिए कहा जाना, वह आपसे जाने के लिए कहने से अधिक बेहतर है।

सच्चे मित्रों को याद रहता है कि समय कीमती है। उन्हें दूसरों के समय का ख़याल रहता है। जब आप के पास करने के लिए कुछ न हो तो आप ऊब सकते हैं, परन्तु इसका अर्थ यह नहीं होता है कि अन्य लोग आपकी ओर से फोन की घंटी बजने का इंतजार कर रहे हैं। विवेकशीलता यही है कि आप दूसरों और उनकी समय सीमाओं या जरूरतों के प्रति सचेत रहें। अपने आप को दूसरों पर सिर्फ इसलिए मत थोपो क्योंकि आपके पास करने के लिए कुछ नहीं है।

जीवन छोटा है, और पर्याप्त समय किसी के भी पास नहीं होता है। सारे कामकाज़ करने के लिए आवश्यक समय लगता है। सप्ताह में एक बार पांच मिनट का फोन कॉल मित्रता की अनमोल याद दिलाता है। परन्तु सप्ताह में दो बार एक-एक घंटे तक फोन पर बातें करना एक बोझ है जिसे कोई भी व्यक्ति सह नहीं सकता। बातचीत को मर्मस्पर्शी रखें, और जल्दी से सम्माप्त करें। एक सच्चे मित्र बनें, और अपने लिए अपने मित्रों के प्रेम और भाईचारे को बनाए रखें!

एक से दो भले हैं, और मित्रता एक बड़ी आशीष है (सभो 4:9-12)। जैसे सुगन्ध और इत्र से, वैसे ही मित्र की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है, और मित्रों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए (नीति 27:9-10)। ऐसा करने का एक तरीका यह है कि आप उनके समय को व्यर्थ न समझे।

यह नीतिवचन न तो मित्रता पर कोई पाबन्दी लगाता है और न ही इसके महत्त्व को कम करता है, बल्कि इसे सिद्द करता और इस की रक्षा करता है। यहाँ जोशपूर्ण और मैत्रीपूर्ण बातचीत की निंदा नहीं कीं गईं है, बल्कि दुस्साहसी और दूसरों के समय का ध्यान न रखनेवाले मित्रों द्वारा समय के दुरुपयोग की निंदा की जा रही है। बाइबल मित्रों की और सच्चा मित्र होने की प्रशंसा करती है।

क्या आपको अभी भी सामाजिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है? किसी निजी समारोह में जल्दी न पहुंचें, क्योंकि हो सकता है कि मेज़बान अभी भी तैयारी पूरी कर रहा हो। एक छोटा सा उपहार लाए, लेकिन मेज़बान से यह उम्मीद न करें कि वह इसे खोले या प्रभावित होकर आपकी प्रशंसा के पुल बांधे। कार्यक्रम के समाप्त हो जाने पर बाद धन्यवाद कार्ड भेजें। अगर आप बाहर खाना खा रहे हैं, तो भुगतान करने का प्रयास करें, ऐसा न हो कि आपके मेजबान को लगे कि आप उस का फायदा उठा रहे हैं। जिस कार्यक्रम में आप जा रहे हैं, कम से कम उस अवसर के बराबर पोशाक पहने।

यदि बातचीत करने की ललक आप पर हावी होती है, तो अपने घुटनों के बल बैठ जाएं और प्रार्थना करें। परमेश्वर के पास आपके करने के लिए बहुत-से काम हैं, जो आपके नश्वर मित्रों के पास नहीं हैं। परमेश्वर के साथ चलने और बातें करने से आप का और भी कल्याण होगा। यदि आप नहीं जानते कि क्या प्रार्थना करनी है, परंयु आपके मन में अपने किसी मित्र का ख़याल आता है, तो अपने मित्र के लिए प्रार्थना करें।

प्रार्थना में परमेश्वर के सिंहासन के निकट साहसपूर्वक और बार-बार आने और जब तक आपकी ज़रूरत है या इच्छा है, तब तक आते रहने में आपको कोई सावधानी या प्रतिबन्ध रखने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके महायाजक के रूप में यीशु सदैव जीवित है। परमेश्वर चाहता है कि आप उसके सामने आग्रह करे, हठ करें, जो उसे अपनी बात मनवाने के लिए बार-बार परेशान करना और ज़िद करना है, जिसे यीशु ने सिखाया (लूका 11:5-8; 18:1-7)।

परमेश्वर आपके आने से कभी नहीं उबता, और आप जितनी अधिक बार आयेंगे, वह उतना ही आपके और भी करीब आ जाएगा। उसके सिंहासन के निकट आने के लिए आज और अभी से बेहतर कोई समय नहीं है, क्योंकि वह न तो सोता है और न ही ऊँघता है। प्रिय मसीही, अपने इस सनातन मित्र के पास बार-बार आओ, और वहाँ युगानुयुग के लिए विश्राम पाओ।

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