नीतिवचन 25:15

धीरज रखकर शासक को समझाया जाता है; कोमल रस्सी पत्थर को भी काट देती है।

क्या आप किसी शासक या अधिकारी का दिल जीत सकते हैं? विनम्रता ताकत पर विजय पा सकती है। एक कठोर दिल के या गुस्सैल-स्वभाव के मनुष्य पर क़ाबू पाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? धीरज और मन की दीनता से प्रतिशोध की भावना को कुचला जा सकता है। सफलता पूर्वक रिश्तें निभाने के लिए यहां अनमोल बुद्धि और ज्ञान है। किसी भी समस्या को अपने जन्मजात स्वभाव से प्रवृत्त होकर प्रतिक्रियाएँ व्यक्त करना शायद ही कभी काम करेगा।

बुद्धि में सत्ता में बैठे लोगों को अपनी बात मनवाने की क़ाबलियत शामिल है, जो बहुत उपयोगी ज्ञान है। मनुष्य के जीवन में मुख्य अधिकारी उसके माता-पिता, पति, नियोक्ता, चर्च के पास्टर और लोकतांत्रिक सरकार होते हैं। इन अधिकारियों पर बहादूरी से की गई बहस से अधिक धीरज और विनम्रता का ज्यादा असर पड़ता है। यद्यपि आपका मुद्दा महत्वपूर्ण और सही हो सकता है, फिर भी सतर्क और सम्मानजनक अनुरोध ही बुद्धिमत्ता है।

अपने से ऊपर के लोगों से निपटने के लिए यह बहुत बड़ी बुद्धिमत्ता है। आप पर अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपने बॉस को मनाने या अपनी किन्हीं गलतियों लिए उसके दंड को रोकने की नौबत आ सकती है। यह नीतिवचन किसी बात के प्रतीतीकरण या अनुनय करने की शिक्षा देता है, लेकिन वही बुद्धि किसी बात का विरोध या निषेध करने में भी काम आती है (सभो. 10:4)। यह नियम, यदि इसे सिखा और याद रखा जाए, अधिकारियों से व्यवहार करने में आपको शांति की स्थापना करने में बड़ा निपुण और कौशल्यवान बनाएगा।

संसार इस ज्ञान के विपरीत शिक्षा देता है, और परिणाम भयानक होते हैं। किसी अधिकारी से अपने तरीके से मांग करना और किसी उनसे अपनी बात या मांगों पर विचार करने के लिए दबाव डालना आज के समय का ऐसा विद्रोह है जिसकी शेखियां हांकी जाती हैं और इससे सिर्फ़ कड़वाहट ही पैदा होती है। इससे असल में यह होगा कि अधिकारी आपकी मांगों को पूरा करने के बजाए, वह अपना पक्ष और भी मज़बूती से पेश करने और आपकी ढीठ और दुस्साहसी अवज्ञा को दंडित करने के लिए मजबूर हो जाएगा।

मानव स्वभाव घमंडी, विद्रोही और स्वार्थी है। उसे लगता है कि सभी मनुष्य एक जैसे काम और बराबरी के पद के लिए बनाए गए हैं और उनके पास कई अधिकार हैं। लेकिन बाइबल ऐसी अहंकारपूर्ण कपोल-कल्पना को ख़ारिज करती है। कोई भी दो व्यक्ति समान नहीं बनाए गए हैं, और कुछ मनुष्यों को ऊपर वर्णित पांच मुख्य अधिकार के पद पर पहले से रखा गया है जो उन्हें अन्य सब मनुष्यों पर अधिकार देते हैं। सत्ता के पदों की व्यवस्था परमेश्वर ने की है और उनका उच्च आदर करने से समाज महान बनता है। दुष्ट और विद्रोही दुनिया में सत्ता का अनादर करना पूरे विश्व में एक व्यापक समस्या है।

सुलैमान ने एक सम्राट के रूप में लिखा, एक ऐसे समयकाल में जब राजा और राजकुमार अपने राज्य और जनता पर सम्प्रभु हुआ करते थें। उनके पास जीवन देने और मृत्युदण्ड देने की सामर्थ होती थी, और उन दिनों शक्तियों का कोई पृथक्करण, त्रिशंकु जूरी का खतरा, मीडिया का हस्तक्षेप या शासन करने में कोई अन्य सीमा नहीं होती थी। इस नीतिवचन में उदाहरण एक शासक है। सुलैमान ने हमें इस नीतिवचन में दिव्य बुद्धि और ज्ञान दिया, ताकि अपने व्यक्तित्व और अपने पक्ष पर विचार करने के लिए एक शक्तिशाली अधिकारी को मनाने में आपकी मदद कर सके। दूसरों को समझाना और मनाना हमारे जीवन का महत्वपूर्ण भाग है, इसलिए यह पाठ महत्वपूर्ण है।

मतभेदों या बुरे बर्ताव को सहन करना ही धीरज है। यह विपरीत परिस्थितियों में भी सब सहते हुए धीरज धरने की शक्ति है। इस शब्द का उपयोग यहाँ आपको शासकों के प्रति कैसा दृष्टिकोण रखना है इसका ज्ञान देने के लिए किया गया है। यदि आप किसी अधिकारी के मन को बदलना चाहते हैं, तो आपको धीरज धरकर तब तक प्रतीक्षा करनी चाहिए जब तक वे आपके मुद्दे पर विचार नहीं करते। उनसे उनका मन बदलने की अधीरतापूर्वक मांग करना आप ही के सिर आ पड़ेगा। उनका मन बदलने तक इंतज़ार करो।

कोमल जीभ सौम्य और सम्मानजनक वाणी के लिए पर्यायवाची शब्द है (नीति 15:1)। इसमें इतना प्रभाव होता है कि इसका वर्णन शासक की हड्डियाँ तोड़ने में सक्षम के रूप में किया गया है। अपना पक्ष रखते समय बहस या वाद-विवाद करने की तुलना में एक विनम्र भाव से किया गया श्रद्धापूर्ण अनुरोध कहीं ज्यादा प्रभावशाली ढंग से काम करता है। आक्रामक और कटुवचन से उसके महत्वपूर्ण पद का अपमान होता है और उसके अधिकार की अखंडता पर हमला है। आपके मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के बजाय, वह आपके अनुरोध और विनती को ठुकरा देगा और अपने पद और उसकी गरिमा का बचाव करेगा।

आप जितना अधिक विनम्र होंगे, और किसी व्यक्ति को उसके पद की गरिमा का ख़याल रखते हुए उसे ऊपर उठाते हैं, आपको उतना ही लाभ होगा और अपना पक्ष जीतने में सफ़लता मिलेगी। जिस हद तक आप अपना पक्ष-बचाव करते हैं और श्रद्धापूर्ण, कोमल और धीरजपूर्ण रवैया कम करते हैं, आप उतनी ही हद तक अपना ही नुक्सान करते हैं, और अपना पक्ष कमज़ोर करते हैं। बुद्धि से काम लेना सच में लाभदायक है।

दाऊद ने इसी बुद्धि और ज्ञान का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जब उसने राजा शाऊल से दया की याचना कीं (1 शमू 24:1-22; 26:1-25)। और अबीगैल, जो बेहद खूबसूरत और समझदार स्त्री थी, उसने इसी बुद्धि और ज्ञान का तब बड़ी कुशलता से उपयोग किया जब उसने दाऊद को उस वक़्त बदला न लेने के लिया राज़ी किया जब वह उसके पति पर अति क्रोधित हुआ था (1 शमू 25:1-42)। इन तीन अध्यायों को पढ़ें और दाऊद और अबीगैल के शब्दों के चयन पर ध्यान दें।

बच्चों, अगर तुम अपने माता-पिता को किसी उचित बात के लिए मनाना चाहते हो, और उन्हें राज़ी करना चाहते हो तो उन पर चिल्लाकर झगडा करने या बहस करने की अपेक्षा एक सम्मानजनक और अनुग्रहपूर्ण अनुरोध करना कहीं बेहतर रीति से काम करेगा। चिल्लाना, बहस करना या झगड़ना दिखता है कि तुम बिगड़ी हुई औलाद हो और उनसे किसी भी चीज़ के लायक नहीं हो। अपने माता-पिता को उनकी भलाई के लिए धन्यवाद दो, और उनके प्रति अपने प्रेम और आज्ञाकारिता को सबके सामने दिखाओ। विनम्रतापूर्वक अपनी विनती रखो, और फिर बड़े धीरज के साथ उनके उत्तर की प्रतीक्षा करो। वे आपकी किसी भी मांग को पूरा करने आपके कर्ज़दार नहीं हैं, और न आपका उन पर कोई एहसान है।

पत्नियों, अगर आप समय और जगह के हिसाब से सावधानीपूर्वक चुने गएँ शब्दों के साथ अपने पति से एक श्रद्धापूर्ण और विनम्र विनती करती हो, तो यह आपकी ज़िद्दी मांगों, कपोल-कल्पित अधिकारों की सोच या उसे यौन सुख से वंचित रखने की अपेक्षा कहीं बेहतर रीति से काम करेगी। याद रखें, वह आपकी कोई भी मांग तत्काल पूरी करने के लिए आपका कर्ज़दार नहीं है। धीरज धरें और अपनी विनती पूरी करने पर उसे विचार करने का समय दें और प्रतीक्षा करें। सारा और बतशेबा ने अपने पतियों को स्वामी कहा, और इन शक्तिशाली पुरुषों ने उनकी विनतियों को पूरा किया जिससे उन्हें बड़े लाभ प्राप्त हुए। धर्मपरायण स्त्रियाँ ऐसा सौभाग्य पाने के लिए अपने कपोल-कल्पित “अधिकार” को त्याग देती हैं।

ऐसा ही व्यवहार अपने नियोक्ता और सरकार के साथ किया जाना चाहिए। जब आप किसी दुखद परिस्थितियों में काम करने या किसी ऐसे काम के लिए मज़बूर किएँ जाते हैं जो आरामदायक नहीं है, तो शिकायत करने, मांगें रखने, अवज्ञा करने या त्यागपत्र देने की धमकियां देने की तुलना में उस काम को पूरे सम्मान और धैर्य के साथ स्वीकार करने से कहीं बेहतर फल प्राप्ति होगी। हर कोई जानता है कि महामार्गों पर खड़े यातायात अधिकारी या गश्त लगानेवाले पुलिस अधिकारी सम्मानजनक उत्तर देने पर शराफ़त से पेश आते हैं, बजाये इसके कि आप उनसे बहस करें।

अगर आप इस नीतिवचन की बुद्धि और ज्ञान का धार्मिकता से व्यावहारिक उपयोग करते हैं, तो आपके जीवन में शांति और समृद्धि आएगी, और जब शासन के पदों पर बैठे लोगों का सावधानीपूर्वक और धैर्यपूर्वक सम्मान किया जाता है, तो इससे पृथ्वी पर धर्मपरायण अधिकार और भी उन्नत होगा, और क़ानून-व्यवस्था में सुधार होगा। यह पाठ एक प्रतिभाशाली राजा ने आपके लाभ के लिए लिखा था। इस पर विश्वास करो। प्रभु यीशु मसीह, जो राजाओं का राजा है, उसको पूरा सम्मान दिया जाए जिसके केवल वही योग्य है।

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