नीतिवचन 25:14
जैसे बादल और पवन बिना वृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ–मूठ दान देनेवाले का बड़ाई मारना होता है।
क्या आपका दान देना आपकी बड़ाई मारने से अधिक है? या क्या आप दान कम देते हैं और बड़ाई ज्यादा मरते हैं? क्या आपने दान देने के अपने सभी वादे निभाए हैं? या क्या आप वादा निभाने में असफ़ल रहें और कुछ लोगों को निराश किया है? मदद करने के बारे में बातें करना वास्तव में मदद करने की तुलना में बहुत आसान है। वास्तव में उदार होने की तुलना में उदारता पर घमंड करना कहीं अधिक आसान है। यदि आपने अपना मुंह खोला है, तो फिर देने का समय आ गया है।
इज़राइल जैसे शुष्क प्रदेश में, जहां सुलैमान रहता था, बादल और पवन उन लोगों के लिए बारिश की बड़ी आशा लेकर आते थें जो जिवित रहने के लिए खेती पर निर्भर थें (नीतिवचन 3:20; 16:15; लैव्य 26:3-5; व्यवस्था 11:10- 15; 1 राजा 18:41-46; अय्यूब 36:26-28; भजन 68:9; 147:8; यिर्म 5:24; ज़कर्याह 10:1)। जब वे आसमान में बादलों को देखते और पवन के झोंके महसूस करते तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता था। लेकिन जब बादल और पवन बिना बारिश के ही लुप्त हो जाते तो यह उनके लिए बड़ी भयानक निराशा की बात होती थी।
यह नीतिवचन एक उपमा है, जहां तुलनाओं के माध्यम से व्याख्या की गई है। इस नीतिवचन के सबक को समझने के लिए आपको बड़ाई मारनेवाले और झूठ–मूठ दान देनेवाले की पहचान करनी होगी। क्या झूठ–मूठ का दान रिश्वत है, और बड़ाई मारनेवाला उसे देनेवाला है या लेनेवाला है? क्या झूठ–मूठ का दान एक बेकार वस्तु है, और बड़ाई मारनेवाला उस वस्तु को देनेवाला है या लेनेवाला है? क्या झूठ–मूठ का दान निष्कपट प्रेम का प्रतीक है, और बड़ाई मारनेवाला प्रेम देनेवाला है या प्रेम पानेवाला है? नहीं, तीनों मामलों में! तुलना से पता चलता है कि यह एक ऐसा दान है जिसके बारे में वादा तो किया जाता है, पर दिया कभी नहीं जाता, और बड़ाई मारनेवाला वह घमंडी व्यक्ति है जो परोपकारी होने का दिखावा करता है।
बादल और पवन बारिश की उम्मीद लेकर आते हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों में खुशी और आशा जाग जाती है। जब बादल और पवन उम्मीद के अनुसार और आवश्यक वर्षा नहीं होती है, तो बड़ी निराशा और दुःख होता। जो व्यक्ति कोई काम करने का वादा करता है लेकिन पूरा नहीं करता वह उतना ही निराशाजनक और उम्मीदों पर खरा नहीं उतरनेवाला होता है। सबक क्या है? दूसरों की मदद करने का अपना वचन पूरा करें। ऐसे वादें कभी न करें जिन्हें निभाना आपके बस में न हो। अय्यूब की धार्मिकता ऐसी थी कि जरूरतमं उससे जो उम्मीद रखते थें उन्हें वह निभाता था और उनकी देखभाल करता था (अय्यूब 29:13; 31:16)।
जब फिरौन के पिलानेहारों के प्रधान को फिरौन के जन्मदिन के अवसर पर बंदीगृह से रिहा किया गया और उसके पद पर फिर से नियुक्त किया गया, तो वह यूसुफ के साथ बड़ी तत्परता से सहमत हुआ था कि वह उसकी रिहाई के लिए फिरौन से चर्चा करेगा। लेकिन पिलानेहारों के प्रधान को दो वर्षों तक इस वादे का स्मरण नहीं आया, उसने यूसुफ को स्मरण न रखा; परन्तु उसे भूल गया (उत्पत्ति 40:1-23)। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जब यूसुफ ने पिलानेहारों के प्रधान या फिरौन से एक भी शब्द सुने बिना दिन और सप्ताह काट दिएँ तब यूसुफ को कितनी निराशा हुई होगी बादल और पवन बिना वृष्टि के ही निकल गएँ।
ज्यादातर लोग सिर्फ़ बड़ी बड़ी बातें करते हैं – वे आपको थोड़े से उत्साह में आकर आपसे बताएंगे कि वे कितने दयालु और उदार हैं; परन्तु ऐसा विश्वासयोग्य मनुष्य ढूंढ़ना कठिन है जो अपना किया हुआ वादा पूरा करता हो (नीतिवचन 20:6)। मूसा की व्यवस्था में एक दिन की भी मज़दूरी को रोके रखना धोखाधड़ी कहा गया है (लैव्य 19:13; व्यवस्थाविवरण 24:14-15)। और सुलैमान ने अपने पड़ोसी की मदद न करने या उसकी मदद करने का वादा करके भी वास्तविक रूप से मदद न करने की निंदा की है (नीतिवचन 3:27-28)।
बड़ी बड़ी बातें करनेवाले ये लोग चाँद-तारे भी तोड़कर लाने का या उससे भी बढकर बातों का वादा करते हैं, क्योंकि इस तरह से लोगों से अपनी प्रशंसा बटोरना आसान है और काम कर जाता है। लेकिन इन झूठे लोगों का या तो वादा निभाने का कोई इरादा नहीं होता है, या फिर वादा निभाने में असमर्थ होते हैं, या जब वे किसी दूसरे मामले में फँस जाते हैं तो वे अपना वादा भूल जाते हैं। तीनों मामलों में, वादा की गई उम्मीद व्यर्थ झूठ साबित हो जाती है। जो लोग ऐसे झूठ की बड़ाई मरते हैं वे बड़ी मुसीबतों के कारण बनते हैं। जहां जरूरतमंदों की अपेक्षाएं और आशाएं दांव पर हों, वहां धर्मी लोग अपने झूठे वादों से उन्हें कभी गुमराह नहीं करते।
राजनेताओं पर विचार करें. सुलैमान ने राजाओं और शासकों के बारे में अन्य कई नीतिवचनों के साथ साथ इस नीतिवचन को भी लिखा (नीतिवचन 25:2-7,15)। शासक बेहद लोकप्रिय शासक बनने के भूखे होते हैं, इसलिए वे अपनी लोकप्रियता सुनिश्चित करने के लिए लोगों से ‘अच्छे दिनों’ के वादे करते हैं। समाज के प्रत्येक समूह को विशेष लाभ का वादा करना बहुत आसान है। लोकतंत्रों और गणतंत्रों में, जहां नेताओं को जनता द्वारा चुना जाता है, अधूरे वादों की मानों सेना हैं। यदि आप किसी भी प्रकार के नेता हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप अपने सभी वादे बिना किसी असफलता के पूरे करते हैं।
शैतान पर विचार करें. उसने आपकी आदि-माता से वादा किया कि यदि वह वर्जित फल खा लेगी तो वह ईश्वर बन जाएगी (उत्पत्ति 3:1-7)। ईश्वर बनने के बजाय, वह खुद पर, अपने पति पर और अपने सभी बच्चों पर मृत्यु को ले आई और अनंतकाल के लिए उन्हें नरकदण्ड के योग्य बना दिया। शैतान तब से झूठ बोलता आ रहा है, और जब आप पाप करते हैं, तो परमेश्वर द्वारा उस पाप की निंदा किए जाने के बावजूद आप खुद को खुश करने के उसके झूठे वादे पर दांव लगा देते हैं। वह पाप के सुख के बारे में झूठ बोलकर मनुष्यों को धोखा देते आया है और उनका नाश करता आया है, बस अम्नोन और यहूदा से पूछें (2 शमू 13:1-29; प्रेरितों 1:18)।
सुसमाचार के सेवकों पर विचार करें। बहुत से प्रचारक शैतान के झूठे दूत हैं, जो आशीष का वादा करते हैं जो नहीं आएँगी (1 राजा 22:19-23; यूहन्ना 8:44; 2 कुरिन्थ 11:1-4,13-15; 1 तीमु 4:1-3)। कई लोग कर-कटौती योग्य दान के ऐवज में शानदार चमत्कार और धन का वादा करते हैं। अपने सुननेवालों को खुश करने के लिए झूठे प्रचारक जिस झूठे सुसमाचार का प्रचार करते हैं, जो पश्चाताप और पवित्रता से रहित स्वतंत्रता का वादा करता है, वह झूठ–मूठ का दान है (2 पतरस 2:14-19)। इन धोखेबाजों को उनके फलों से पहचाने, न कि उनके वादों से (मत्ती 7:15-20)।
पुरुषों पर विचार करें। कितनी बार उन्होंने औरतों को ऐसी ऐसी चीजों का वादा करके बहकाया है जो जिन्हें देना उनके बस में कभी नहीं था? पतियों पर विचार करें। कितनी बार पत्नियों की उम्मीदें उन पतियों ने धराशायी कर दीं हैं जिन्होंने अपना वचन पूरा नहीं किया? पिताओं पर विचार करें। अपने वादे पूरे न करने वाले पिताओं द्वारा बच्चे कितनी बार निराश और हतोत्साहित हुए हैं? इन में से कई झूठ बोलनेवालों ने केवल वादों के आधार पर अपनी उदारता का दावा किया है। केवल एक ही पिता ऐसा है जो हमेशा उतना ही देता है जितने का उसने वादा किया है (रोमियों 8:32; 1 कुरिन्थ 2:9; इफि 3:20; 1 पतरस 4:19)।
प्रभु यीशु मसीह का सुसमाचार, जो कि पृथ्वी पर एकमात्र शुद्ध सत्य हैं, उन लोगों की कड़ी निंदा करता है जो गरीबों की मदद करने की सिर्फ़ बातें करते हैं लेकिन अपने वादों को पूरा नहीं करते हैं (याकूब 2:15-16; 1 यूहन्ना 3:16-19)। दान और उदारता का असली माप जो कहा उसे पूरा करने से होता है, न कि मात्र सांत्वना देने वाले शब्दों या वादों से। पौलुस ने कुरिन्थ की कलीसिया को पत्र लिखा और उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उन्होंने यरूशलेम के गरीब पवित्रजनों को जो देने का वादा किया था उसे पूरा करें (2 कुरिन्थ 8:1-15)।
क्या आपने किसी से कभी कहा है, “चिंता मत करो, मैं सम्भाल लूँगा,” लेकिन फिर अपना दायित्व निभाने में असफल रहे? क्या आपने किसी से कभी कहा है, “मैं यह देखने के लिए आपकी जानकारी लेता रहूँगा कि क्या आपको किसी और चीज़ की ज़रूरत है,” लेकिन अपना वचन भूल गए? क्या आपने कभी किसी समूह से कहा है, “इस पर अब आगे से चिन्ता मत करो, क्योंकि मैंने पहले ही इसका ध्यान रखने का वादा किया है,” लेकिन क्या आप जानते थे कि आप अपनी ज़िम्मेदारी को बढ़ा रहें थें? यह नीतिवचन देने के बारे में इस तरह के आडंबरपूर्ण झूठ की निंदा करता है। यह आपका कर्तव्य है कि आप अपने शब्दों पर संयम रखें और सोच समझकर दान देने का वादा करें, ऐसा न हो कि कोई आपके कारण निराश हो जाए।
सबसे अच्छा देना वह नहीं जो आपका मुँह कहता है, बल्कि वह है जिसमें आप वास्तव में बिना कहे रूपये देते हैं। ज़रूरतमंद लोगों के दिलों में अपनी सस्ती और आसान बातों से बड़ी उम्मीदें जगाने के बजाय, चुपचाप एक उदार उपहार दें या एक महत्वपूर्ण सेवा प्रदान करें जिससे मदद की उनकी ज़रूरत ख़त्म हो जाए। अब यह बरसनेवालें बादल हैं! परमेश्वर को ऐसे विचारशील लोग प्रिय हैं जो देने के इरादे से जरूरतमंदों के लिए उदार उपहारों के बारे में सोचते हैं, लेकिन ऐसे लोग उसकी दृष्टि में निकम्मे हैं जो बहुत कुछ करने की सिर्फ़ बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन देते कुछ नहीं (यशायाह 32:8)।
परमेश्वर ने आप ही अब तक के सबसे महान उपहार का वादा किया था, और उसने निश्चित रूप से सही समय पर उसे पूरा भी किया। उसने जगत की उत्पत्ति से पहले अपने चुने हुए लोगों को अनन्त जीवन देने का वादा किया था (तीतुस 1:2), और उसने अपने एकलौते पुत्र को ठीक उसी समय रोमी क्रूस पर क्रूर मृत्यु मरने के लिए भेजा, जिसकी उसने योजना बनाई थी (दानि 9:24-27; गला 4:4-5). परमेश्वर के अनुग्रह के बादल बारिश से भरे हुए हैं। उसने अपने लोगों को उनके पापों से बचाया है, और वे अब आनन्दित होंगे और अनंत काल के लिए उसकी आराधना करेंगे।
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