नीतिवचन 25:12

जैसे सोने का नथ और कुन्दन का जेवर अच्छा लगता है, वैसे ही माननेवाले के कान में बुद्धिमान की डाँट भी अच्छी लगती है।

आप एक किस्म का शुद्ध जेवर बना सकते हैं – इसे बनाने के दो तरीकें हैं। यह जेवर दुकानों में बिकने वाली किसी भी मूल्यवान चीज़ से उत्तम है। परमेश्वर अपना सत्य और अपना ज्ञान को उन लोगों के द्वारा कायम रखता है जो उसे सिखाते हैं और जो इसका अपने जीवन में व्यावहारिक उपयोग करते हैं। क्या आप सत्य और ज्ञान को मानने में कुशल हैं? बुद्धिमान व्यक्ति के लिए आज्ञाकारी व्यक्ति को शिक्षा देना मधुर लगता है।

किसी भी झगड़े में कम से कम दो जनों की ज़रूरत होती है। टैंगो नृत्य करने के लिए भी दो जनों की जरूरत होती है। मानवीय संबंधों के लिए भी कम से कम दो लोगों की आवश्यकता होती है। उसी रीति से, परमेश्वर के दुर्लभ सत्य और ज्ञान को पृथ्वी पर कायम रखने के लिए एक शिक्षक और एक अनुयायी की आवश्यकता होती है। क्या आप एक शिक्षक और एक अनुयायी दोनों में अच्छे हैं? एक अनुयायी होने के नाते क्या आप परमेश्वर के सत्य का पूर्णतः पालन करते हैं? एक शिक्षक होने के नाते क्या आप सत्य की शिक्षा ठीक ठीक देते हैं?

उत्तम किस्म का शुद्ध जेवर बनाने के लिए दो लोग लगते हैं। यदि बुद्धिमान उपदेशक अपने विनम्र श्रोता को सुधारता है और निर्देश देता है, तो मिलकर एक सुंदर संयोजन अस्तित्व में आता है और यह संयोजन सत्य का प्रसार करता है और ज्ञान को बढ़ाता है। क्या आप इसकी सुंदरता को देख पा रहे हैं? क्या आप इसकी शक्ति को समझ पा रहे हैं? क्या आप एक अच्छे श्रोता और अच्छे एक शिक्षक हैं?

आपके पास आज्ञाकारी श्रोता बनने के कई अवसर हैं, जैसे कि इस नीतिवचन और अन्य नीतिवचनों की हमारी शिक्षाओं की श्रुंखला को पढ़ना और उनपर चिंतन करना, और अपने जीवन में अमल में लाना। यह एक शुद्ध सोने का जेवर बनाने का पहला भाग है। फिर, आपके पास एक बुद्धिमान सुधारक बनने के भी अवसर हैं, जैसे कि इस नीतिवचन और अन्य नीतिवचनों की हमारी शिक्षाओं को गलती कर रहें व्यक्तियों को सुधारने के लिए उपयोग में लाना। यह एक शुद्ध सोने का जेवर बनाने का दूसरा भाग है।

जब आपके मन में इस दुष्ट संसार में परमेश्वर के सत्य और ज्ञान को कायम रखने का विचार आता है, तब क्या आपका मन आनन्द से भर जाता है? आपको आनंदित होना चाहिए! क्या ही अद्भुत अवसर! आपको सबसे पहले तो एक आज्ञाकारी श्रोता होना ज़रूरी है, ताकि आप दूसरों को बताने के लिए पहले खुद परमेश्वर के सत्य और ज्ञान को प्राप्त कर सकें। फिर आपके लिए ज़रूरी है कि आप खुद उन बातों का अपने जीवन में व्यवहारिक लागुकरण करें इसलिए कि आप उन बातों को परमेश्वर के वचन से सिखाने और उनकी सत्यता के लिए संघर्ष करने में सक्षम बन सकें (नीतिवचन 22:17-21; इब्रानियों 5:12-14; 1 पतरस 3:15)।

विश्वविद्यालयों में मनुष्य के ज्ञान को सीखने के लिए जो परिश्रम, खर्च, बल और सम्मान लगता है उनपर ज़रा विचार करें। ज़रा सोचकर देखो! विश्वविद्यालयों में नैतिकता, उत्पत्ति, दर्शन जैसे विषयों पर केवल झूठ और मूर्खतापूर्ण बातें ही पढ़ाई जाती है। पीएचडी प्राप्त करने के प्रयासों और उसके लिए लगनेवाले वर्षों के बारे में सोचें, और वह भी सिर्फ़ इसलिए कि आप इतने मूर्ख और अज्ञानी हो सकें कि आप बन्दर से मानव-विकास, ग्लोबल वार्मिंग, समलिंगी विवाहों, शारीरिक और मृत्युदंड से कुछ हासिल न होने के सिद्धांतों, जैसी बेवकूफी से भरी बातों पर भी विश्वास कर सकें।

पिताओं के पास अपने बच्चों को परमेश्वर का सत्य और बुद्धि-ज्ञान सिखाने का शानदार अवसर है, और परमेश्वर उन बच्चों को ऐसे शिशुओं के रूप में पिताओं को सौंपता है जिनके मन कोमल और सुननेवाले आज्ञाकारी कान होते हैं। बाइबल में पिताओं को उन चार पीढ़ियों के बारे में जिनपर वे अपनी छाप छोड़ सकते हैं, सोचने के लिए उपदेश दिया गया है (भजन 78:1-8; योएल 1:1-3; व्यवस्थाविवरण 4:9; अय्यूब 42:16; भजन 34:11; यशायाह 38:19)। कितना सुंदर! पिता दुनिया को बदल सकते हैं, लेकिन ज्यादातर पिता ऐसे हैं जिन्होंने खुद परमेश्वर का सत्य और बुद्धि-ज्ञान नहीं सिखा है कि वे विरासत के रूप में उन्हें अपने बच्चों को सिखाएं, और ज्यादातर पिता अपने बच्चों को मूर्ख बनने के लिए विश्वविद्यालय में भेजने और पैसा लुटाने पर अधिक ज़ोर देते हैं। भयानक!

इस वचन में प्रयुक्त उपमा “जैसे…वैसे” दो चीज़ों के बीच तुलना करती है। डाँटने वाला बुद्धिमान मनुष्य जो सुननेवाले आज्ञाकारी व्यक्ति को सुधारता है, वह मानों सोने की बाली या आलंकारिक सोने के जेवर के समान है। सोने की बालियाँ सुंदर होती हैं, और बढ़िया सोने से बने अन्य जेवर भी सुंदर होते हैं। उसी प्रकार, एक सावधान डाँटनेवाला शिक्षक भी जो अपने आज्ञाकारी अनुयायी से विश्वासयोग्यता और अनुग्रह सहित बातें करता है, एक सुन्दर बात है।

डाँटनेवाला बुद्धिमान मनुष्य जानता है कि धार्मिकता के मार्ग से हटनेवालों को कैसे डाँटना और चेतावनी देना है। वह विवेकशील और समझदार होता है। वह मौके की नज़ाकत को समझता है और उसी के अनुसार बोलने के लिए अपने शब्दों का चयन बड़ी सावधानी से करता है। वह न तो अति कठोर होता है और न ही अति उदार। वह अपनी व्यक्तिगत राय तो नहीं थोपता, लेकिन परमेश्वर के वचन से बातों को साबित कर करके अपनी बात को रखता है। वह नम्रता और प्रेम के साथ सामना करता है, और सच में अपने सुनने वाले की वास्तविक भलाई चाहता है (लैव 19:17; गलातियों 6:1-3; 1 थिस्स 5:14; 2 तीमु 2:24-26)।

माननेवाले कान वह है जो सुनने में विनम्र और तत्पर होता है – शब्द कान उस व्यक्ति के लिए पर्यायवाची उपमा है जो अपने कानों से इसलिए सुनता है कि कही हुई बातों को माने। बिरीया के कुलीन लोगों के समान, वह बड़ी लालसा से वचन की फटकार और सुधार को ग्रहण करता है (प्रेरितों 17:11)। कुरनेलियुस के समान, वह जानना चाहता है कि परमेश्वर और मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए उसे क्या करना चाहिए (प्रेरितों 10:33)। वह एक असाधारण व्यक्ति है क्योंकि वह फटकार और शिक्षा के मूल्य को समझता है (नीतिवचन 1:5; 9:9; 12:1; 27:5-6; भजन 141:5)।

नातान भविष्यद्वक्ता और दाऊद राजा अच्छे थे। दाऊद व्यभिचार और हत्या के एक गंभीर अपराध का दोषी था। नातान, जो बुद्धिमान डांट-फटकार लगानेवाला परमेश्वर-प्रेरित मनुष्य था, वह दाऊद के पास एक ऐसे धनवान मनुष्य का दुखद और भड़काऊ समाचार लेकर आया जो एक दरिद्री मनुष्य पर क्रूरता से अत्याचार करता है। दाऊद, जो माननेवाले कानों का था, उचित ही इस क्रूरता से भड़क उठता है और जब जान लेता है कि वह क्रूर अत्याचारी वह खुद है, वह अपने पाप को मान लेता है (2 शमू 12:1-14)।

पिन्तेकुस्त का दिन अच्छा था। पतरस, पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर, सच में डांटनेवाला बुद्धिमान मनुष्य था, क्योंकि उसने प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाने के लिए यहूदियों को डांटा (प्रेरितों 2:14-36)। तीन हजार लोग, जिनके दिलों को यह गौरवशाली उपदेश चुभ गया, वास्तव में माननेवाले कान थे, क्योंकि वे तुरंत जानना चाहते थे कि उन्हें अपना मन फिराने के लिए क्या करना था (प्रेरितों 2:37-41)।

एलीहू फटकार लगाने वालों में अब तक के सबसे महान मनुष्यों में से एक है। बाइबल में अय्यूब की पुस्तक बताती है कि कैसे परमेश्वर ने अय्यूब की परीक्षा लेने के लिए उस पर भयानक विपत्तियाँ भेजीं। अय्यूब और उसके तीन मित्रों, चार बूढ़े लोग जो पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान व्यक्ति थे, के बीच एक उत्तेजक बहस छिड़ गई , जिसमें सत्य और ज्ञान का गलत इस्तेमाल किया गया और कोई विनम्रता या करुणा नहीं दिखाई गई। युवा एलीहू ने अय्यूब अध्याय 32-37 में उन सबका सीधा सामना किया। प्रत्येक युवा को चाहिए कि वह साहसी और बुद्धिमान बनने के लिए अय्यूब 32 को स्मरण रखें।

बुद्धिमान डांटनेवाले लोग कभीकभार आज्ञा न माननेवाले कानों से चिड जाते हैं। जब घमंडी, जिद्दी या विद्रोही श्रोता बुद्धिमान और कुशल डांटने वालों की शिक्षा को मानने से इनकार कर देते हैं तो यह अच्छी बात नहीं होती। यद्यपि वे गलत करनेवाले के पास बड़ी सावधानी और प्रेम के साथ जाते हैं, लेकिन जब साहस के साथ उन्हें सुधारने के लिए फटकार लगाई जाती है तब वे उनसे नफरत करते हैं (नीतिवचन 9: 7-8; 23: 9; 29: 1; मत्ती 7: 6)। यीशु मसीह, जो हमेशा एक बुद्धिमान डाँटनेवाला था, अत्यधिक दयालु होने के बावजूद, उसके अपने नगर वासियों ने उसकी न सूनी (लूका 4:14-30)।

आज्ञा माननेवाले कान अक्सर मूर्ख और आलसी डांटने वालों से निराश हो जाते हैं। कभी-कभी बिना किस बात के डांट दिया जाता है, इसलिए सुनने वाले नाराज हो जाते हैं (1 राजा 12:1-19)। तो वाही कुछ अवसर ऐसे होते हैं जब उन्हें उनकी गलतियों के लिए बिल्कुल भी डांटा नहीं जाता, इसलिए जरूरतमंद श्रोता,जो सुधार और धार्मिकता की शिक्षा की लालसा रखते हैं, बिना किसी सहायता के अपने रास्ते चले जाते हैं (यिर्मयाह 23:22; यहेज़केल 33:7-9; मत्ती 9:37-38)। आज यह बेहद सच है, जब राजनेताओं की तरह मुस्कुराते हुए स्त्रैण पास्टर उन्हें कभी भी कोई मूल्यवान बात नहीं बताते।

जिद्दी और विद्रोही श्रोताओं – कान जो आज्ञा मानने से इनकार करते हैं (यिर्मयाह 25:4; 29:19; येहज़केल 33:30-33) के कारण विश्वासयोग्य पास्टरों को बहुत कम फल मिला है। न सुननेवालों का लहू उन्हीं के सिर पर होगा। मूर्ख और आलसी पास्टरों के कारण माननेवाले लोग ज्ञान के बिना नाश हुए हैं (यिर्मयाह 23:25-32; 1 तीमु 4:16)। इन सुननेवालों का लहू इन पास्टरों के सिर पर होगा।

क्या आप दोनों बातों में अच्छे हैं? क्या आप दोनों बुद्धिमान डाँटनेवाले और आज्ञाकारी सुननेवाले श्रोता हैं? आपको परमेश्वर और मनुष्य को प्रसन्न करना होगा और साथ ही साथ परमेश्वर की ठहराई नियति को पूरा करना होगा। बुद्धि माप इस बात से होता है कि व्यक्ति फटकार या चेतावनी को कैसे लेता है और उसमें सीखने की कितनी क़ाबलियत है (नीतिवचन 1:5; 2:1-5; 5:1-2; 8:33-36; 15:5,31-32; 22: 17)। लेकिन बुद्धि का माप इस बात से भी होता है की उसका दावा करनेवाला जरूरतमंदों को कितना डांटता है या उसमें शिक्षा देने की कितनी क़ाबलियत है (नीतिवचन 24:26; 25:11; रोमियों 15:1; गलातियों 6:1; इफिसियों 4:29; इब्रानियों 5:12-14)।

क्या आप परमेश्वर की दृष्टि में और भले मनुष्यों की दृष्टि में शुद्ध सोने का जेवर हैं? या क्या आप उसकी दृष्टि में वह मैल हो, जिसे सोने या चाँदी को शुद्ध करते वक़्त निकाल दिया जाता है? ध्यान रखें कि आप कैसे सुनते और बोलते हैं। आप उस सत्य और ज्ञान का लेखा देंगे जो आपने सुना है, और उस सत्य और ज्ञान का भी जो आपने दूसरों को बताया है। यहाँ आपको चेतावनी दी जा रही है।

यीशु मसीह की कलिसियाँ इस विश्व में सबसे अच्छा जेवर है। वहां आपको परमेश्वर के बच्चों का एक समूह मिलेगा जो एक-दूसरे के आज्ञाकारी श्रोता बनने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहां आपको ऐसे लोग मिलेंगे जिन्हें परमेश्वर ने चुना और जिन्हें यीशु ने आदेश दिया है कि वे पूरी ईमानदारी से और सम्पूर्ण रूप में उसके सुसमाचार का प्रचार करें। आप एक सच्ची कलीसिया में जाकर एकत्रित माननेवालों और नियुक्त डाँटनेवालों को देखें। सुंदर और मधुर बात!

पवित्र आत्मा द्वारा पवित्र किया गया यह संयोजन, शानदार रूप से सुंदर और शक्तिशाली रूप से जीवन बदलने वाला है। प्रत्येक चर्च सत्य का खंभा और नींव है जब तक कि यीशु मसीह इस दुष्ट दुनिया और सभी अधर्मी मनुष्यों को जलाने और नष्ट करने के लिए वापस नहीं आता (1 तीमु 3:15)। यदि आप ऐसे मूर्ख हैं जो बाइबल से प्रचार करनेवाले सच्चे चर्च का हिस्सा नहीं हैं, तो आपने न तो एक आज्ञाकारी श्रोता बनना चुना है और न ही एक बुद्धिमान फटकार लगाने वाला। आप आज हारे हुए हैं और न्याय का दिन तेजी से निकट आ रहा है।

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