नीतिवचन 24:8

जो सोच विचार के बुराई करता है, उसको लोग दुष्ट कहते हैं।

क्या आप किसी घातक मनुष्य को पहचान सकते हैं? सोच विचार के बुराई की कल्पना करना मन और दिमाग में पाप की सक्रिय योजना बनाना है। यह ऐसा पाप है जो परीक्षा में पड़ने या कमज़ोरी के कारण होनेवाले पाप से भी बदतर है – यह शैतानी प्रतिबद्धता और सोच विचार के पाप करना है। एक बार पता चलने पर, ऐसे व्यक्ति से सावधानीपूर्वक बचना ही बुद्धिमानी है, क्योंकि वह एक दुष्ट मनुष्य है – खतरनाक और जानलेवा। परमेश्वर ऐसे मनुष्यों से बैर रखता है (नीतिवचन 6:16-19)।

क्या इतना सरल अवलोकन बुद्धि सिखा सकता है? बिलकुल सिखा सकता है, अगर आप इस पर ध्यान से विचार करेंगे तो। राजा सुलैमान ने अपने पुत्र को चालाक होना सिखाया। देश पर सफल शासन करने के लिए, उसके बेटे के लिए आवश्यक था कि वह घातक लोगों की पहचान करने और उनसे बचने में सक्षम हो (नीतिवचन 23:6; 25:5)। यहाँ एक घिनौने मनुष्य का वर्णन है जिसका दुर्भावनापूर्ण मन बुराई करने पर तुला हुआ है।

पाप करना एक बात है, लेकिन सोच विचार के पाप की योजना बनाना अलग बात है। नशे के कारण नूह और लूत पाप करने लगे, लेकिन उन्होंने पाप करने की योजना नहीं बनाई थी। दाऊद ने बतशेबा को नग्न देखकर व्यभिचार किया, परन्तु उस रात उसने ऊरिया की पत्नी को अपने हरम में ले जाने की योजना पहले से नहीं बनाई थी। ये लोग अहाब और इज़ेबेल से बेहतर चरित्र के थे (1 राजा 21:25)। बुराई करने के लिए भीड़ का अनुसरण करना पाप है, लेकिन दूसरों को बुराई की ओर ले जाने की योजना बनाना बहुत बड़ी दुष्टता है (नीतिवचन 28:10; निर्गमन 23:2; याकूब 3:1)।

लेकिन ऐसे दुष्ट लोग भी होते हैं जो पाप करने के लिए लगातार विध्वंसक और उपद्रवी तौर-तरीके सोचते रहते हैं। उनके मन धर्मी नहीं हैं – वे लालच के साथ कामुकता के वश में हो गए हैं (इफि 4:17-19)। बाइबल उन्हें दोषी ठहराकर उनका वर्णन करते हुए कहती है कि वे बुरी–बुरी बातों के बनानेवाले हैं (रोमियों 1:30)। वे दूसरों के खिलाफ नए अपराध की योजना बनाए बिना खुश नहीं रह सकते (नीतिवचन 4:16; भजन 36:4; मीका 2:1)।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर उन्होंने हमेशा बहुत बुरा काम नहीं किया हो; यह उनके भ्रष्ट और दुष्ट मन हैं जो ख़तरा पैदा करते हैं। यह नीतिवचन सीधे तौर पर उन लोगों के खिलाफ चेतावनी नहीं दे रहा है जो बुराई करते हैं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ चेतावनी दे रहा है जो ऐसा करने की योजना बनाते हैं। यदि वे अक्सर वह बुराई नहीं करते जिसका वे षडयंत्र रचते हैं, तो फिर आप उन्हें कैसे पहचानेंगे? उनके होठों की बातचीत से, जो उनके मनों को प्रकट करती है (नीतिवचन 6:12-15; 24:2; मत्ती 12:34-37; 15:10-20)। उन लोगों की बातें सुनें जो आम तौर पर पाप के बारे में उपद्रवी तरीके से और बड़ी सहजता से चर्चा करते हैं।

ऐसे लोग पाप का मज़ाक उड़ाते हैं (नीतिवचन 14:9)। वे अपनी बुरी योजनाओं के लिए बहाने ढूंढते हैं (नीतिवचन 26:18-19)। वे मन में किए जानेवाले के पापों को हलके से लेते हैं (नीतिवचन 24:9)। वे दूसरों के बारे में बुरी बुरी अटकलें लगाते हैं (1 तीमु 6:3-5)। उनके भ्रष्ट दिमाग अक्सर दूसरों के कार्यों में द्वेष-भावना को देखते हैं (नीतिवचन 21:10)। वे दुष्ट लोगों की प्रशंसा करते हैं और उनसे ईर्ष्या भी करते हैं (नीतिवचन 12:12)। वे घिनौने और विकृत विचार सोचते हैं (नीतिवचन 16:29-30)। वे दुष्ट हैं, और वे घातक होते हैं। उनसे दूर ही रहें (नीतिवचन 23:6-8; भजन 144:11-15)!

आप क्या क्या युक्तियाँ बनाते हैं? दुष्टता की, या धार्मिकता की? कुलीन लोग दिन-रात परमेश्वर की व्यवस्था पर ध्यान करते हैं (भजन 1:2; 119:197)। दूसरों के प्रति उनके विचार अच्छे और सम्मानजनक होते हैं। जब आप ऐसे दुष्ट मन की पहचान करते हैं जो दूसरों के प्रति बुरा सोचता है, तो आपको ऐसे मनवाले मनुष्य से दूर हो जाना चाहिए, क्योंकि वह दुष्ट हृदय संभवतः आपके प्रति भी हानिकारक विचार रच रहा है। उसके स्थान पर उन अनमोल पवित्रों की खोज करें जो अक्सर एक-दूसरे के साथ परमेश्वर की बातों पर चर्चा करते हैं (मलाकी 3:16)।

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