नीतिवचन 24:5

बुद्धिमान पुरुष बलवान् भी होता है, और ज्ञानी जन अधिक शक्तिमान् होता है।

यहाँ पर शक्तिमान होने का अर्थ है जीवन के सभी क्षेत्रों में भलाई क्या है यह जानने और उसे करने, और गलत क्या है यह जानने और उसका विरोध करने की क्षमता। बुद्धि लोगों को यह शक्ति प्रदान करती है। एक बुद्धिमान व्यक्ति बलवान होता है। एक ज्ञानी व्यक्ति अधिक शक्तिमान होता है। मूर्ख कमज़ोर होते हैं। वे नहीं जानते कि उन्हें क्या करना चाहिए, इसलिए वे ऐसा नहीं करते और जो उन्हें नहीं करना चाहिए उसे न ही वे समझ सकते हैं, और न उसका विरोध कर सकते हैं।

सर फ्रांसिस बेकन (1561-1626) ने कहा था कि “ज्ञान ही शक्ति है।” लेकिन वह यहाँ पर केवल सुलैमान के वचनों की साहित्यिक नक़ल कर रहे थे, जिसने इन शब्दों को 2500 वर्षों पहले लिखा था। परमेश्वर को महिमा दें! पाठक गण, बुद्धि और ज्ञान की ताकत और शक्ति आपके सामने है। नीतिवचन की पुस्तक को अपना लें!

बुद्धि किसी भी स्थिति में सही निर्णय लेने की ताकत है। यह संकटों और खतरों को पहचानने की, उनकी ओर से आने वाले प्रलोभन और फंदों से बचने की, और कदम उठाने का एक बेहतर तरीका चुनने की क्षमता है। यहोवा का भय मानना बुद्धि का प्रारंभ है (नीतिवचन 1:7; 9:10), लेकिन इसमें व्यावहारिक क्षेत्र के मामलों में विवेक से काम लेना भी शामिल होता है। बुद्धि वास्तव में शक्ति ही है (नीतिवचन 8:14; 10:29)।

मूर्खता सही और गलत के बीच का भेद न जानने का भ्रम है और मानव-हृदय की लालसाओं और प्रवृत्तियों में फंस जाना है। मूर्खता आनेवाले संकटों और खतरों को पहचान नहीं पाती, जीवन के फंदों और प्रलोभन का विरोध नही कर पाती, और न ही सही चीज़ करने का निर्णय कर पाती है। मूर्खता परमेश्वर के भय को नहीं मानती, बल्कि अपने मन पर भरोसा करती है (भजन संहिता 14:1; 53:1)। यह जीवन के सामान्य मामलो में असंख्य गलतियां करके स्वयं को दर्शाती है (नीतिवचन 13:16; 14:8,18; 15:21; 16:22; 26:11)। मूर्खता वास्तव में कमज़ोरी ही है।

बुद्धि और मूर्खता में कितना अंतर होता है? राजा सुलैमान ने इस दुनिया में हो रही हर चीज़ को देखने और उसका विश्लेषण करने के बाद, यह निष्कर्ष निकाला कि बुद्धि मूर्खता से उतनी ही श्रेष्ठ है जितना कि प्रकाश अंधकार से (सभोपदेशक 2:12-14)। एक बुद्धिमान लड़का दरिद्र होने पर भी एक ऐसे बूढ़े और मूर्ख राजा से जो सुधार की नहीं मानता, अधिक उत्तम है (सभोपदेशक 4:13)। प्रत्येक युवा पाठक को इस अद्भुत अवसर पर कि वह बुद्धि के द्वारा राजाओं से भी अधिक शक्ति प्राप्त कर सकता है, आनंदित होना चाहिए।

कल्पना करें कि एक बुद्धिमान व्यक्ति और एक मूर्ख व्यक्ति, दोनों एक थोथे कुल्हाड़ी से एक पेड़ को काटने की कोशिश कर रहे हैं। मूर्ख व्यक्ति उस भारी कुल्हाड़ी से बार-बार पेड़ पर वार करता है जब तक कि वह थक नहीं जाता और मुश्किल से सिर्फ छाल को काट पाता है। वहीं बुद्धिमान व्यक्ति छाया में बैठकर, एक रेती से धार को पैनी करता है और पेड़ को केवल कुछ ही वार में काट डालता है। यह सुलैमान द्वारा दिया गया बुद्धि की शक्ति का उदाहरण है (सभोपदेशक 10.10)। परमेश्वर को महिमा दें!

बेशक, मूर्ख व्यक्ति थोथे कुल्हाड़ी को पूरे दिन एक ही पेड़ पर चलाने से बने अपने प्रभावशाली अग्रभुजाओं और डोलों (बाइसेप्स) को खाने की मेज़ पर सभी को दिखाता है। परंतु बुद्धिमान व्यक्ति बीस पेड़ों को काटकर, छीलकर, आकार देकर, और ढेर बनाकर भी चुपचाप सुनता रहता है और खाना खाता है। आ…हा, बुद्धि! सच्ची शक्ति आपकी भुजाओं का आकार नहीं, बल्कि आपकी बुद्धि की मात्रा है। बुद्धि के बिना, चाहे आप जो कुछ भी कर रहे हों, आपको हमेशा और अधिक प्रयास करना पड़ेगा (सभोपदेशक 10:10)।

सुलैमान बुद्धि को शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक महत्व देता था (नीतिवचन 21:19; सभोपदेशक 7:19)। उसने वर्णन किया कि कैसे एक छोटे से नगर का एक दरिद्र बुद्धिमान पुरुष, एक ऐसे महान राजा को पराजित करने में सक्षम हुआ, जिसने नगर की चारदीवारी से घेराबंदी कर रखी थी (सभोपदेशक 9:13-18)। सुलैमान ने लिखा कि “बुद्धि बल से उत्तम है – बुद्धि युद्ध के हथियारों से भी उत्तम है।” कितना शक्तिशाली वचन है! एक बुद्धिमान राजा, एक छोटी सेना और कम हथियारों के बावजूद भी, सदैव एक मूर्ख राजा को पराजित करने में सक्षम होगा।

ऐसी बुद्धि संसार के विलक्षण आविष्कारों में दिखाई देती है (नीतिवचन 8:12)। ऐसा कहा गया है कि “आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है”। परंतु केवल एक बुद्धिमान व्यक्ति ही फिज़ूल के श्रम और कठिनाई को बचने के लिए किसी चीज का आविष्कार पर विचार करेगा। मूर्ख व्यक्ति आदत, परंपरा, और अपने कम अक्ल के कारण अत्यधिक प्रयास करना ही जारी रखेगा। कई महाद्वीप और राष्ट्र अभी भी इस हठी अज्ञानता को अपने विचार और जीवनशैली से प्रदर्शित करते हैं।

वर्तमान पीढ़ी में कई लोग ऐसी मशीनों और उपकरणों के प्रसार का आनंद लेते है जो शारीरिक बल और ताकत को हजारों गुना बढा देते हैं। इन आविष्कारों का वृहत विस्तार, पिछली दो शताब्दियों में अंग्रेज़ी-बोलने वाले देशों में परमेश्वर के ज्ञान के माध्यम से मिली बुद्धि का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रभु का भय मानना बुद्धि का प्रारंभ है! बुद्धि ही शक्ति है!

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बुद्धि चरित्र की शक्ति भी है। वह व्यक्ति जो यहोवा का भय मानता है और अपने परमेश्वर को जानता है, वह पाप के प्रलोभनों का सामना करने में सक्षम होता है और उसके स्थान पर धार्मिकता को चुनता है। ऐसे व्यक्ति के पास परमेश्वर के वचन की निदेशात्मक शक्ति होती है, जो उसे शैतान के सामने और परमेश्वर के विरुद्ध किए जाने वाले पापों के संसार के तीनों आकर्षणों के सामने मज़बूत बनाए रखती है (भजन संहिता 119:9; 1 यूहना 2:16)।

यूसुफ एक बुद्धिमान मनुष्य था। यह सुंदर युवक एक विस्तारित व्यापारिक यात्रा पर एक परदेशी नगर में था। वह इस दूरवर्ती नगर में सफल और गुमनाम, दोनों था। एक सुंदर महिला उसके साथ सोना चाहती थी। उसने इस तरह के व्याभिचारी संबंध को “बड़ी दुष्टता और परमेश्वर के विरुद्ध पाप” कहते हुए, उसे कड़ाई से ठुकरा दिया। वह महिला प्रतिदिन यूसुफ को लुभाने की कोशिश करती रही। वह उसे नजरअंदाज करता रहा। एक दिन काम-काज के दौरान जब वे दोनों साथ में अकेले थे, तब उस स्त्री ने उसे पकड़ा और उसे अपने साथ सोने के लिए कहा। वह एक शब्द या एक सेकेंड की भी देरी के बिना वहां से भाग निकला (उत्पत्ति 39:7-20)। वह शक्तिशाली था! वह अंततः मिस्र के सिंहासन पर बैठा।

वहीं, शिमशोन एक मूर्ख मनुष्य था। शारीरिक रूप से मज़बूत, यह युवक परदेशी नगरों की सुंदर महिलाओं को निहारने के लिए वहाँ यात्रा किया करता था। वह अक्सर वहाँ की वेश्याओं के साथ परेशानियों मे पड़ता था। आखिर उनमें से एक ने उसे ऐसे बहकाया, जिसने उसे तीन बार कहा था कि वह उसे नष्ट कर देगी, लेकिन उसने फिर भी उसके आगे अपने दिल की सभी बातें कह डाली। उसने उसे उसके शत्रुओं को बेच दिया। उन्होंने उसकी आँखें निकाल लीं, उसे बेड़ियों से जकड़ा और बंदीगृह में रहने के लिए छोड़ दिया। उसका जीवन समाप्त हो गया था। शिमशोन बहुत ही कमज़ोर था!

इन दोनों में कौन-सा मनुष्य अधिक शक्तिशाली था? सामर्थी शिमशोन या गुलाम यूसुफ? सुलैमान ने कई शक्तिशाली पुरुषों के विषय में बताया है जिनका पराई स्त्रियों ने विनाश कर दिया (नीतिवचन 7:26), और शिमशोन उनके शिकारों में से एक था। परंतु यूसुफ परमेश्वर को जानने के कारण बुद्धिमान था, जिसने उसे बल दिया। जो व्यक्ति एक अकेली या असभ्य महिला के करीब भी जाता है, वह एक भोला निर्बुद्धि होता है (नीतिवचन 7:7)। चरित्र की शक्ति, जो कि परमेश्वर की वृद्धि का परिणाम है, बहुत ही बहुमूत्य होती है। जो अपने परमेश्वर को जानते हैं वे हियाब बाँधकर बड़े काम करेंगे (दानिय्येल 11:32), जबकि वे मूर्ख जो भक्तिहीन होते हैं, एक मामूली स्त्री द्वारा नष्ट कर दिए जाएंगे!

बुद्धिमान मनुष्य कोई भी निर्णय लेने से पहले मामलों पर सावधानीपूर्वक विचार करता है। वह जानता है कि दूसरों की बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह, और ऐसे सलाहकारों की अधिकाई के द्वारा, वह गंभीर खतरों से बच सकता है (नीतिवचन 24:6)। ऐसी बुद्धि शक्ति प्रदान करती है। यह व्यक्ति को सही काम करने और परेशानी से दूर रहने में मदद करती है। बुद्धि शक्ति है, और कुछ बुद्धि मंत्रियों से भी प्राप्त होती है। मूर्ख खतरों को नहीं देख पाते, और न ही वे इसमें दूसरों कि सलाह लेते हैं। वे आँख मूंद कर आगे बढ़ते हैं (नीतिवचन 14:15; 22:3; 27:12)। जीवन के बड़े बड़े फैसले, जैसे कि युद्ध, पर्याप्त सम्मतियों के आधार पर और युक्ति के साथ ही किए जाने चाहिए (नीतिवचन 24:6)।

शक्तिशाली लोग धन को नहीं खोते (नीतिवचन (11:16)। उनकी संपत्ति विशाल और सुरक्षित और बहुमूल्य वस्तुओं से भरी हुई होती है। पिछले संदर्भ पर विचार करें (नीतिवचन 24:3- 4)। जीवन में ऐसे कई जाल और फंदे होते हैं जो कि मनुष्य का धन छीन लेते हैं, परंतु शक्तिशाली लोगों का कुछ नहीं बिगड़ता। कैसे? क्योंकि वे बुद्धिमान होते हैं! पैसों से संबंधित खतरों और गलतियों से बचे रहने के लिए उनके पास समझ और विवेक होता है।

वे मूर्खता के उन गड्ढों से बचे रहते हैं, जिनके विरुद्ध सुलैमान ने अपने नीतिवचन में चेतावनी दी। वे आलस्य, अत्यधिक नींद, लालच, पियक्कड़पन, अति विलासिता, बर्बादी, पैसे कमाने की व्यर्थ युक्क्तियों, मूर्खतापूर्ण निवेश, वित्तीय स्वतंत्रता के विषय में बातचीत, राजनीतिक बदलाव, मित्रों के लिए ऋण लेना, पराई स्त्रियों, अधिकारीयों का अनादर, भारी खर्च, व्यापारिक धोखाधड़ी की नीतियों, व्यापार की उपेक्षा और अन्य सभी झूठे दिखावों से जो किसी भी मनुष्य से उसका धन छीन लेते हैं, दूर रहते हैं। वे बुद्धिमान होते हैं। वे शक्तिशाली होते हैं।

बुद्धि जीवन के उन प्रश्नों के उत्तर भी जानती है, जो मूर्ख को विचलित करते हैं। ये उत्तर पवित्र शास्त्र, अर्थात् बाइबल में पाए जाते हैं (यशायाह 8:20)। अत: बुद्धि हर वादविवाद या चर्चा के लिए शक्ति प्रदान करती है (नीतिवचन 15:28; 22,17-21; 24:26; 26:4-5; भजन संहिता 119:42)। जिसके पास परमेश्वर की बुद्धि होती है वह किसी भी संगति में लज्जित नहीं होता: वह आवश्यक सत्य को जानता है (भजन संहिता 119:46; दानिय्येल 3:16)।

सबसे शक्तिशाली लोग वे होते हैं जो मसीह प्रभु का भय मानते हैं, और अपने पापों की क्षमा और उद्धार के लिए उसपर विश्वास करते हैं, पवित्र शास्त्र को भली प्रकार से जानते हैं, आत्मा में चलते हैं, और बुद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। ये बुद्धि के परम स्रोत और महान शक्ति के आधार हैं (2 तीमुथियुस 3:15-17, इफिसियों 3:16; 6:10; याकूब 1:5)। यह आपकी आत्मा, आपके परिवार और आपकी कलीसिया का उद्धार है ताकि वे शक्ति के साथ सच्चाई में स्थापित हो (इब्रानियों 13:9), ऐसा न हो कि आप उस बालक के सामान हो जाओ जो उपदेश के हर झोंके से इधर-उधर पटक दिया जाता है (इफिसियों 4:14)।

सभी लोग शक्तिशाली बनना चाहते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही इन स्रोतों के पास आकर शक्ति को खोजेंगे। प्रिय पाठक, आप आज क्या चुनेंगे? शक्ति या कमज़ोरी? सर्वसामर्थ के साथ आपको शक्ति प्रदान की गयी है (कुलुस्सियों 1:9-11)। स्वयं को दीन करें, और आज ही परमेश्वर का भय मानना और बुद्धि को चुनें!

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