नीतिवचन 24:34

तब तेरा कंगालपन डाकू के समान, और तेरी घटी हथियारबन्द मनुष्य के समान आ पड़ेगी।

आलसीपन के कुछ निश्चित परिणाम हैं। आप उनसे बच नहीं सकते। जिस प्रकार यात्रा करना यक़ीनन आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाता है और जिस प्रकार एक हथियारबंद व्यक्ति किसी भी निहत्थे व्यक्ति को पराजित कर सकता है, ठीक वैसे ही आलसीपन आपको बर्बाद कर देगा। यह सोचना कि आज आपको जो करना चाहिए वह अगर आप नहीं भी करते हैं, तो भी इसके कोई दुखद परिणाम नहीं होंगे, सरासर झूठ और भ्रम है।

यदि आप कड़ी मेहनत नहीं करेंगे तो आप अपने ऊपर आनेवाली कंगाली को नहीं रोक सकते। कंगाली निश्चित आ रही है। प्रश्न यह नहीं है कि कंगालपन आएगा या नहीं, बल्कि प्रश्न यह है कि वह कब आएगा। आप गरीब होते जा रहे है – यह अर्थशास्त्र का न्याय और स्वर्ग से उतर आया सिद्ध दंड है। क्योंकि परमेश्वर जानता था कि आप इस निश्चित तथ्य पर संदेह करेंगे या इसका उपहास उड़ायेंगे, इसलिए उसने सुलैमान को इसे दो बार लिखने के लिए प्रेरित किया (पढ़ें नीतिवचन 6:11)।

सुलैमान जानता था कि कोई व्यक्ति कितना परिश्रमी है यह उसके व्यवसाय की स्थिति और आर्थिक हालतों से प्रकट होता है (नीतिवचन 24:30-34)। जब वह किसी व्यक्ति को चढ़ी हुई आँखों, बिखरे बालों और अस्तव्यस्त हालत में देखता, तो वह जान लेता था कि वह व्यक्ति बहुत देर तक सोया हुआ था। चूँकि संभवतः आपके पास खेत या अंगूर के बगीचे, या चाय के बागान नहीं हैं, इसलिए आपकी कमाई कितनी है देखें। बढ़ती महंगाई में अगर एक सर्वेक्षण की माने तो, भारत के हर व्यक्ति को सालाना कम से कम दो लाख रुपये कमाना चाहिए।

सच्चे ख्रिश्चन लोग कड़ी मेहनत करते हैं (रोमियों 12:11; 1 कुरिन्थ 15:10)। वे जानते हैं कि आदम अदन में परिश्रम किया करता था और प्रभु यीशु आप ही बड़ी लगन से काम किया करता था (उत्पत्ति 2:15; यूहन्ना 9:4)। परिश्रम से व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद होती है, उसी से वह उन्नति कर सकता है (नीतिवचन 22:29; सभो 9:10), और सद्गुणी स्त्रियों की भी यही पहचान है (नीतिवचन 31:10-31)। केवल ऐसे मेहनती पुरुष और महिलाएं ही परिश्रम से मिलने वाले सम्मान और धन के पात्र बनते हैं (नीतिवचन 10:4; 12:24)।

इसके विपरीत, आलसीपन ऐसे पुरुषों और महिलाओं को चिन्हित करता है जिन्हें भोजन से वंचित कराने के बाद यीशु मसीह की मण्डली से भी बाहर निकाल दिया जाना चाहिए (2 थिस्स 3:6-15)। यदि आपको लगता है कि यह बहुत कठोर निर्णय है, तो आप बाइबल या बुद्धि के सबब को नहीं जानते हैं (नीतिवचन 20:4; 16:26)। जब तक आप उनसे उनकी सुविधा और आपूर्ति छीन नहीं लेते, तब तक आलसियों को परिश्रम करने बाहर जाने की कोई आवश्यकता दिखाई नहीं देती है।

मनुष्यों के लिए परमेश्वर की योजना में, अमीर और अधिक अमीर हो जाते हैं और गरीब और भी गरीब हो जाते हैं (मत्ती 25:29)। स्त्रीवत पीढ़ी के समाजवादी विचारधारा वाले लोगों को ऐसा सत्य चुभता है, लेकिन वे यह नहीं देख पाते कि अमीर कैसा परिश्रम करता है, और गरीब कितना आलसी है। परमेश्वर मेहनती इन्सान को उसके परिश्रम का फल देता है और आलसियों को दण्ड देता है। धर्मी मनुष्य के दिमाग के लिए यह समझना बिल्कुल आसान है, और वह इसे न्यायपूर्ण ही समझता है, और अवश्य है कि आप स्वर्ग में विराजमान परमेश्वर की स्तुति करें और उसकी बाइबल से प्रेम करना सीखें।

बेशक, यदि आप एक सुबह सोते रहते हैं, तो आपको तुरन्त इसका कोई वास्तविक परिणाम दिखाई नहीं देगा, और यही वह दृष्टिकोण है जिस के कारण आपको अगले दिन भी सुबह देर तक सोते रहना बहुत मामूली बात दिखाई देती है। यदि आप हर दूसरे दिन काम से छुट्टी लेते हैं क्योंकि आप को अपनी तबियत अच्छी नहीं लग रही है (जब तक कि डॉक्टर के निष्कर्ष के अनुसार आप वास्तव में बीमार न हों), तो संभवतः आप आलसी हैं। हर किसी को कुछ न कुछ दर्द और तकलीफ़ तो होती ही है, और कई लोगों को आपसे कहीं अधिक ज़्यादा दर्द और तकलीफ़ होती है, फिर भी वे कड़ी मेहनत करते हैं!

क्या आपको यह दिखाई नहीं देता कि जो सबसे व्यस्त होते हैं, वे सबसे अधिक काम करते हैं और स्वेच्छा से ज्यादा से ज्यादा काम करते हैं? यह सच में आश्चर्यजनक है! जिनके पास करने के लिए कुछ नहीं है वे वास्तव में कुछ नहीं करते हैं और शायद ही कभी स्वयंसेवा करते हैं। वे चाहते हैं कि जो लोग हर समय काम करते हैं, वे न केवल उन्हें खाना खिलाएं बल्कि उनकी बाकी सब ज़रूरतों को भी पूरा करें, जैसे कि हाल ही में बाज़ार में आया कोई नए मॉडल का फ़ोन। जो मेहनती होते हैं, वे बहुत रूपया कमाते हैं, परन्तु आलसी लोग मुश्किल से अपना पेट भर पाते हैं। अद्भुत!

आप परमेश्वर के वचन पर कितना विश्वास करते हैं? परमेश्वर के वचन में बुद्धि और ज्ञान है। कुछ माता-पिता और सरकारें आलसी बच्चों या नागरिकों की मदद करके इस नीतिवचन की ईश्वरीय व्यवस्था को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। इस षडयन्त्र को ग़रीबी भत्ता, समाज-कल्याण, बेरोजगारी भत्ता या अन्य नामों से जाना जा सकता है। इरादा एक ही है – बाइबल का परमेश्वर और सुलैमान बहुत कठोर हैं, तो आओ हम सोएं हुए लोगों को उनके बिस्तर पर खिलाने के लिए परिश्रम करनेवालों पर और अधिक आयकर लगाएं।

परमेश्वर का वचन सत्य है। कंगालपन उन कीड़ों के रूप में आ जाएगा जो ऐसी ज़रूरतों के लिए भी सरकार और सामजिक संस्थाओं से मदद लेते हैं जो न तो वास्तविक हैं और न ही सख्त। ऐसे देशों में भी कंगालपन आ जाएगा जहाँ ऐसे कानून बनाए जाते हैं, जैसा कि कई देश अब सीख रहे हैं। नियम सर्वथा अटल है: अगर मेहनती लोगों को पुरस्कृत और आलसी को दंडित करके कड़ी मेहनत को बढ़ावा नहीं दिया जाता है, तो कंगालपन आलसियों और उनकी सरकारों को खा जाएगा।

इस नीतिवचन का सबक यह है कि जो लोग कड़ी मेहनत नहीं करते उनके लिए कंगालपन तय है, अटल है। यह ईश्वर का नियम है। सुलैमान ने इसे देखा और इसके बारे में कई बार चेतावनी दी (नीतिवचन 6:6-11; 19:15; 20:13; 24:30-34)। यह सोचकर अपने आप को धोखा मत दों कि आप इन चेतावनियों को हल्के से लेकर दूसरों की तुलना में कम मेहनत करके अपना भला कर लेंगे। पश्चाताप करो। जागो। जिस चीज की आपको ज़रूरत है, उसे अपनी मेहनत से कमाने के लिए अभी से काम करना शुरू करो।

कंगालपन का एक और रूप है जो आर्थिक कंगाली और बदहाली से भी बदतर है – आत्मिक कंगालपन। यह आलसीपन का निश्चित परिणाम भी है। आप इससे बच नहीं सकते। जो लोग केवल इसलिए चर्च की सेवा करना या अपने अन्य आत्मिक कर्तव्यों का निर्वहन करना छोड़ देते हैं क्योंकि वे थके हुए होते हैं, वे चर्च के सबसे अभागे और कंगाल सदस्य होते हैं। स्वर्ग के राज्य में उनका योगदान और प्रतिफल बहुत कम है, जबकि उनका योगदान कही अधिक हो सकता है।

परन्तु जो विश्वासी परमेश्वर की बातों में परिश्रमी हैं उनके लिए महिमा का धन प्रतीक्षा कर रहा है, अर्थात उनके लिए जो साल-दर-साल सबसे पहले परमेश्वर के राज्य की खोज करते हैं और किसी भी तरह से उसकी और दूसरों की सेवा करने के लिए हमेशा लगन से काम करते हैं – वे और और आत्मिक उन्नति करते जाते हैं तथा विजयी जीवन जीने के लिए अधिक सामर्थ्य पाकर परमेश्वर की बातों में धनवान बनते जाते हैं (लूका 8:18) ;16:10-12; 19:11-27; 2 तीमु 4:7-8)। वे बुढ़ापे तक फल देते रहते हैं (भजन 92:12-14)।

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