नीतिवचन 24:32

तब मैं ने देखा और उस पर ध्यानपूर्वक विचार किया; हाँ, मैं ने देखकर शिक्षा प्राप्त की।

आप दूसरों की गलतियों से बुद्धि प्राप्त कर सकते हैं। देखना और उस पर ध्यानपूर्वक विचार दोनों ही महान शिक्षक हैं, और सुलैमान दोनों में माहिर था (सभोपदेशक 1:12-14; 2:11-13)। दूसरों की गलतियों से सीखना और अपने बच्चों को भी यही गुण सिखाना आपका कर्तव्य है (नीतिवचन 19:19; 22:29)।

बेशक, आप बुद्धिमान लोगों के अच्छे फैसलों और कामों को देखकर भी बुद्धि प्राप्त कर सकते हैं (भजन 37:37; फिलिप्पियों 3:17-21)। किसी व्यक्ति के चरित्र या आचरण जो उसे मूर्ख या बुद्धिमान के रूप में प्रकट करता है, को देखना और पहचानना उपयुक्त आदत है। यह बुद्धिमान बनने के नियमों में से है।

यहाँ सुलैमान ने आलसी लोगों का उपहास किया है (नीतिवचन 24:30-34)। माता-पिता को बच्चों को सबसे पहले जो सबक सिखाना चाहिए, वह है बिस्तर से उठना, कड़ी मेहनत करना और काम पूरा करना। नीतिवचन की पुस्तक में आलस्य की बारबार भर्त्सना कीं गई है (पढ़ें, नीतिवचन 6:6-11; 10:4; 12:24; 19:15,24; 20:4,13; 22:29)। चींटियों को देखना और उनकी आदतों पर ध्यानपूर्वक विचार करना भी ऐसी बुद्धि को सिखा सकता है (नीतिवचन 6:6-8; 30:25)। सुलैमान जानता था कि अगर उसके बेटे को सफल होना है तो इस के लिए खुद उसके बेटे को ही परिश्रम करना होगा, और वह यह भी चाहता था कि वह अपने राज्य में आलसी प्रशासकों को न रखे।

गरीबी को समझाना अपेक्षाकृत आसान है। सुलैमान ने देखा कि नींद के प्रति प्रेम के कारण कई लोगों की आर्थिक सफलता बर्बाद हो जाती है। जब उसने खण्डहर बने घरों और संपत्ति की बर्बादी को देखा, तो उसे एहसास हुआ कि उन स्थानों में आलस्य के कुछ निश्चित परिणाम हावी हो गए थे। जो लोग सुबह सोना पसंद करते हैं और शाम को अपना काम टालते हैं, वे निश्चितही गरीब बनेंगे। बेशक, गरीबों के पास अक्सर अपने बहाने होते हैं, लेकिन उनके जीवन की सच्चाई अब भी वही हैं।

जो माँ-बाप बुद्धिमान होते हैं, वे अपने बच्चों के लिए सुलैमान की भूमिका निभा सकते हैं। वे उन्हें उन लोगों के उदाहरण देकर शिक्षा दे सकते हैं जो बाइबल की नीतियों का पालन न करने के कारण जीवन में हार गएँ हैं और अब बुरे नतीजों को भुगत रहें हैं। जीवन का अनुभव मूर्खता और बुद्धिमत्ता के बीच के भेद को समझने की दृष्टि से सामाजिक अध्ययन के लिए पाठ मार्गदर्शक हो सकता है। पुत्र, क्या तुम किसी घर की छत को धीरे धीरे गिरते हुए देखते हो? उसका मालिक उसे ठीक करना तो चाहता है, लेकिन वह हमेशा प्रतीक्षा करने का कोई कारण ढूँढ़ लेता है। यदि वह उसे जल्दी से ठीक नहीं करता है, तो अंत में वह घर गिर जाएगा, जैसा कि बाइबल कहती है (सभोपदेशक 10:18)।

पाठक, क्या आप बाइबल को इतनी अच्छी तरह से जानते हैं कि अपने आस-पास की दुनिया में इसका प्रमाण देख सकें? क्या आप इस मूर्ख दुनिया के बेकार जीवन और राजनीतिक अराजकता में बाइबल की चेतावनियों को पूरा होते हुएं देख सकते हैं? क्या आप अपने बच्चों और दूसरों को परमेश्वर के वचन को न मानने के दर्दनाक परिणामों को सिखा सकते हैं? क्या आप जानते हैं कि छोटे और बड़े प्राणियों से वस्तुगत सबक कैसे निकाले जाएँ (नीतिवचन 30:24-31)? या क्या आप इतने कमज़ोर हैं कि आपको यह काम लगभग असंभव लगता है?

कई बेघर लोग शराबी क्यों हैं? क्योंकि नशे और लोलुपता के कारण इन्सान के चिथड़े निकलते हैं (नीतिवचन 23:21)! कुछ बच्चे चरवाहों पर क्यों भीख मांगते हैं? उन्हें इलाज की ज़रूरत है (नीतिवचन 29:15)! क्या आर्थिक कंजूसी सफलता लाएगी? नहीं, यह गरीबी लाएगी (नीतिवचन 11:24-26)! कुछ पुरुष अपना खाली समय उबाऊ शौक में क्यों बिताते हैं? क्योंकि वे घर पर एक झगडालू पत्नी से बच रहे होते हैं (नीतिवचन 21:9,19)! क्या व्यभिचार के कोई परिणाम हैं? सिर्फ़ मृत्यु और नरक (नीतिवचन 9:18)! क्या राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बात सुनना ठीक है? अगर आप भरी जवानी में मरना चाहते हैं तो ज़रूर सुनें (नीतिवचन 24:21-22)!

वर्तमान में यौन पाप और हिंसा इतनी लोकप्रिय क्यों है? क्योंकि इसे टेलीविज़न पर ग्लैमराइज़ किया जाता है (भजन 101:3; 1 कुरिन्थियों 15:33)! कैथोलिक राष्ट्र अक्सर गरीब क्यों होते हैं? क्योंकि बचपन से ही वे यह मानकर वास्तविकता को नकार देते हैं कि वे प्रभुभोज में जिस चिप्स को खाते हैं वह यीशु मसीह का वास्तविक शरीर, वास्तविक रक्त, वास्तविक आत्मा और वास्तविक परमेश्वरत्व है (1 कुरिन्थियों 11:24-25)! उनके पादरियों के बीच काफ़ी हद तक समलैंगिकता और बाल यौन शोषण क्यों है? क्योंकि उन्होंने स्त्री के लिए परमेश्वर-प्रदत्त भूमिका को अस्वीकार कर दिया (1 तीमुथियुस 4:1-3; रोमियों 1:27; 1 कुरिं 7:1-5)!

क्या अच्छे लोगों को देखकर कोई लाभदायक सबक मिल सकता है? सुलैमान ने देखा कि जो लोग परमेश्वर का भय मानते हैं वे सफल होते हैं और जीवन में उनका अनुसरण किया जाना चाहिए (सभोपदेशक 7:18)। इब्रानियों 11 में विश्वास के गवाहों का एक बड़ा समूह दिया गया है जो परमेश्वर पर विश्वास करने और उसकी आज्ञा मानने के लाभ को साबित करता है (इब्रानियों 11:2; 12:1)। और प्रभु यीशु मसीह, जिन्होंने परमेश्वर की आज्ञा मानने के लिए स्वेच्छा से दुःख सहा, अब परमेश्वर के दाहिने हाथ पर बड़े सम्मान और महिमा के साथ विराजमान हैं (इब्रानियों 12:2; भजन 16:8-11)। आज आपका कर्तव्य और विशेषाधिकार है कि आप उनके आदर्श उदाहरण का अनुसरण करें और परमेश्वर से अशिषे प्राप्त करें।

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