नीतिवचन 24:29

मत कह, “जैसा उसने मेरे साथ किया वैसा ही मैं भी उसके साथ करूँगा; और उसको उसके काम के अनुसार बदला दूँगा।”

आप हमारे प्रभु यीशु मसीह का “सुनहरा नियम” जानते हैं: “इसलिये जो कुछ तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उनके साथ वैसा ही करो।” पर क्या आप शैतान का नियम भी जानते हैं? इस नीतिवचन में बताया गया पाप वही है: जैसा दूसरों ने आपके साथ किया है, वैसा ही आप भी उनके साथ करें। पहला नियम प्रेम और दयालुता को बढ़ावा देता है; तो दूसरा नियम घृणा और प्रतिशोध को। बुद्धि शान्ति और एकता लाती है, पर घमण्डी मूर्खतापूर्ण द्वेष और युद्ध को।

किसी व्यक्ति से अन्याय होने पर आपके सामने दो मार्ग होते हैं, एक “राजसी” मार्ग, जो परमेश्वर को भाता है और शान्ति लाता है; और दूसरा स्वार्थी मार्ग, जो शैतान का अनुसरण करता है और कलह खड़ा करता है। आप क्रोध को टाल सकते हैं, अपने विरुद्ध किए गए अपराध को अनदेखा कर सकते हैं, और क्षमा तथा भलाई दिखा सकते हैं (नीति 19:11; 25:21-22)। या आप क्रोधित हो सकते हैं, उस अपराध को मन में पकड़े रह सकते हैं, और बदला लेने की योजना बना सकते हैं।

जीवन के इस क्षेत्र में बुद्धि के लाभ सचमुच अद्भुत हैं। यदि आप दूसरे के अपराध को अपने मन में सँजोकर रखते हैं, तो वही व्यक्ति, पुरुष हो या स्त्री, आपका स्वामी बन जाता है। दिन-रात आप उस स्मृति से सताए जाते हैं कि उसने आपके साथ क्या किया। दिन-रात आप यह सोचते रहते हैं कि प्रतिशोध लेकर और अपने आप को “साबित” करके आप क्या कर सकते हैं। कड़वाहट धीरे-धीरे आपकी आत्मा को कैंसर की तरह खा जाती है।

यदि आप बदला नहीं लेते, तो आप भीतर ही भीतर घुटते रहते हैं, जबकि वह व्यक्ति मुक्त और प्रसन्न रहता है। और यदि आप बदला लेते हैं, तो आप एक गंभीर और क्रूर संघर्ष को चालू कर देते हैं, जिसकी भारी कीमत आप ही को चुकानी पड़ेगी (नीति 15:18; 17:14; 26:21; 29:22; 30:33)। पर यदि आप अपने घमण्ड को मार डालें, और उस बात को दफ़ना दें, तो परमेश्वर की आशीषों के द्वारा आप शान्ति से समृद्ध होंगे (नीति 28:25; 1 पत 5:6-7)।

यदि आप डरते हैं कि जब तक आप पलटकर वार नहीं करेंगे, तब तक शत्रु आपको नष्ट करता रहेगा, तो आप अपने रक्षक परमेश्वर को भूल गए हैं (नीति 16:7; 20:22; भजन 27:1-6)। और यदि आप डरते हैं कि शत्रु आपके साथ किए गए अन्यायपूर्ण क्रूर व्यवहार से बच निकलेगा, तो आप प्रतिशोध करनेवाले परमेश्वर को भूल गए हैं (भजन 3:7; 94:1; रोम 12:19)। भावनाओं के पीछे चलने वाली अविश्वासी रीति के स्थान पर, सामर्थी परमेश्वर पर भरोसा रखिए।

यीशु मसीह ने सुलेमान के समान ही शिक्षा दी। छोटे व्यक्तिगत अपराध, जैसे किसी के द्वारा गाल पर थप्पड़ मारा जान, को पूरी तरह अनदेखा कर देना चाहिए (मत्ती 5:38-42)। उसने सिखाया कि छोटे व्यक्तिगत शत्रुओं के साथ भी भलाई करनी चाहिए, जैसे परमेश्वर प्रतिदिन अपने व्यक्तिगत शत्रुओं के साथ उदारता से व्यवहार करता है (मत्ती 5:43-48)। उसने यह भी सिखाया कि जो अपने शत्रुओं को अपने हृदय से क्षमा नहीं करते, उन्हें परमेश्वर यातना देगा (मत्ती 18:21-35)। यीशु की शिक्षा का अनुसरण करके अपनी आत्मा को मुक्त कीजिए।

पौलुस ने भी यही सलाह दी। उसने निजी प्रतिशोध के विरुद्ध चेतावनी दी, बदला परमेश्वर के हाथों में छोड़ देने की सम्मति दी, और अपने व्यक्तिगत विरोधियों के साथ बुराई के बदले भलाई करने की सामर्थ्य को महान ठहराया (रोम 12:17-21)। बुराई के बदले बुराई करने के स्थान पर, उसने यह सिखाया कि सब मनुष्यों के साथ क्षमा और कृपा का भला मार्ग अपनाया जाए (1 थिस्स 5:15)।

आज आप किसे क्षमा कर सकते हैं? कौन-सी कड़वाहट, कौन-सा बैर, या कौन-सा प्रतिशोध आप आज ही समाप्त कर सकते हैं? यदि आप दूसरों को क्षमा करते हैं, तो परमेश्वर आपको क्षमा करेगा; और यदि आप क्षमा नहीं करेंगे, तो परमेश्वर भी आपको क्षमा नहीं करेगा (मत्ती 6:14-15; 18:21-35)। परमेश्वर ने आपको क्षमा किया है, तो आप दूसरों को क्यों न क्षमा करें (इफि 4:31-32)? अभी कर दीजिए! “राजसी” बनिए, और ऊँचा मार्ग अपनाइए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की धार्मिकता का मार्ग।

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