नीतिवचन 24:27
अपना बाहर का काम–काज ठीक करना, और खेत का काम तैयार कर लेना; उसके बाद अपना घर बनाना।
पत्नी पाने से पहले अपने जीवन का निर्माण करें। घर खरीदने से पहले अपना पेशा स्थापित करें। कार खरीदने से पहले एक वास्तविक नौकरी प्राप्त करें। सुख-चैन से पहले ज़रूरतें आती हैं। खर्च से पहले कमाई का संसाधन आता है। महंगी और ख़र्चीली वस्तुओं को पाने की प्रतिबद्धता से पहले अपनी आय के स्रोत को सुरक्षित करें। घर के निर्माण की योजना बनाने से पहले तैयार हो जाइए, ऐसा न हो कि अपनी परियोजनाएं अधूरी छोड़ देने के लिए समाज में आपकी हंसी उड़ाई जाए (लूका 14:28-30)।
क्या बढ़िया सलाह है! धन्यवाद, महान परमेश्वर। यहाँ बहुत ही व्यावहारिक निर्देश है – घर बनाने से पहले अपने व्यापार या व्यवसाय में निपुण हो जाएँ। यहां तक कि व्यवसाय में भी इस तरह के ज्ञान से उन्नति प्राप्त हो सकती है – लाभांश घोषित करने या शानदार ऑफिस बनाने से पहले अवश्य है कि कंपनी में कमाई को पुनर्स्थापित किया जाए। उपदेशक सुलैमान बुद्धिमान था।
इस्राएल के कृषक समाज में, अधिकांश पुरुष बाहर खेतों में काम करते थे, वे या तो उपज उगाते थे या भेड़-बकरियों और गाय-बैलों की देखभाल करते थे। कैन और हाबिल ऐसे समाज के दो मुख्य उद्योगों का प्रतिनिधित्व करते थे – एक ज़मीन जोतता था, और एक भेड़ पालता था (उत्पत्ति 4:2)। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए इनमें से किसी एक पेशे को चुनना होता था. और इसमें उसे निपुण बनना होता था।
यह बुद्धिमान मनुष्य, सुलैमान अपने बेटे को बताता है कि मनुष्य के जीवन का एक सही क्रम है। घर के आभूषण और विलासिता में निवेश करने से पहले, जिसमें आय पैदा होने के बजाय खपत होती है, अवश्य है की वह अपनी व्यावसायिक बुलाहट को पहचान ले कि उसे क्या काम करना है और उसमें खुद को मज़बूती से स्थापित करना है। जीवन के इन दो चरणों को उलटे क्रम से कर बैठकर कई लोग अपने परिवारों के लिए कठिनाई पैदा करते हैं, और कुछ ऐसी कठिनाई से कभी उभर ही नहीं पाते हैं।
अधिकांश क्रिश्चन लोग इतने अधीर हैं कि वे सुलैमान के इस नियम का पालन नहीं करते। वे आज ही चमक-दमक से भरा जीवन चाहते हैं; वे घर खरीदने के लिए पूंजी अर्जित करने से पहले ही लोगों को अपना घर दिखाना चाहते हैं; उनके पास कोई वित्तीय आधार होने से पहले ही वे एक अच्छी कार चलाना चाहते हैं। वे पहले बचाना और प्रतीक्षा नहीं करना चाहते; उनमें चीजों को उनके उचित क्रम में रखने के लिए आवश्यक आत्म-अनुशासन और विनम्रता की कमी होती है; वे आज ही दिखावा करना चाहते हैं।
युवा पुरुष यह नहीं देख सकते कि यदि वे अभी संयम रखेंगे तो भविष्य में वे जीवनभर सुख-विलास का एक लम्बा जीवन जी पाएंगे, जितना कि आज नहीं जी पाएंगे। वे अदूरदर्शिता के कारण असफल हो जाते हैं, जिसकी जड़ उनकी अपनी वासनाओं में है। हकीकत यह है कि, आवेग में आकर खर्च करने वाला व्यक्ति योजनाबद्ध तरीके से उद्दम करनेवाले बुद्धिमान व्यक्ति के लिए मज़दूरी करेगा, और उसका मालिक सेवानिवृत्ति के समय एक आलिशान घर और साज़ो-सामान का आनंद लेने के लिए तैयार रहेगा, जबकि यह मूर्ख उसी समय देनदारों के कर्ज़ तले दरिद्रता में सेवानिवृत्त होगा और अपनी बची-खुची ज़िन्दगी तंगहाली में बिताएगा।
एक युवा तब तक आराम, विलासिता या मनोरंजन का ख़तरा नहीं उठा सकता जब तक कि उसका करियर निर्माण, उसकी वित्तीय स्थिति ठीक न हो जाए, और जब तक अन्य सभी दायित्वों का ध्यान न रखा जाए। लेकिन इसके लिए जिस संयम और विवेक की आवश्यकता होती है, वह इतना दुर्लभ है कि कुछ ही युवाओं में यह पाया जाता है। अधिकांश युवक अधिक खर्च करते हैं और कम कमाते हैं और फिर सोच में पड़ते हैं कि वे अपने अनुशासित साथियों की बराबरी क्यों नहीं कर पाते।
आसान क्रेडिट कार्ड और ऋण-सब्सिडी कर नीतियां इन मूर्खतापूर्ण विकल्पों को प्रोत्साहित करती हैं। क्रेडिट कार्ड, किस्त ऋण, और संपत्तियों को गिरवी रख मिलने वाले आसान ऋण उन्हें अपने उद्दम में या वित्तीय रूप से क़ाबिल बनने से पहले महंगे उपभोक्ता सामान और घर खरीदने के लिए आकर्षित करते हैं। और कर उद्देश्यों के लिए ऋण ब्याज की कटौती इन खतरनाक विकल्पों को और बढ़ावा देती है।
मूर्ख परामर्शदाता घर को निवेश का नाम देकर इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। सही क्रम के अनुसार, एक युवा व्यक्ति का लक्ष्य यह होना चाहिए कि वह अपने बाप-दादाओं से मिली विलासिता और संपत्ति की चिंता करने से पहले इस बात की पहचान करें कि उसे अपने जीवन में कौन-सा काम करना है, उसमें निपुण हो जाए, और कुछ पूंजी जमा करें (नीतिवचन 19:14)। अपनी आय सुरक्षित कर लेने के पश्चात् वह एक घर खरीदने और विवाह करने के बारे में सोच सकता है, लेकिन तब तक नहीं। उसके लिए आय का उत्पादन करना आय का उपभोग लेने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए।
जो युवा पुरुष इस कहावत को मानता है उसे पुरानी कार चलाने और अपने माता-पिता के साथ रहने में कोई शर्म नहीं महसूस होती। वह अपने काम पर ध्यान देना चाहता है और जितनी जल्दी हो सके पूंजी जमा करना चाहता है। वह जानता है कि अपने पेशे में निपुण बनना और पूंजी दोनों ही बातें सुख या विलासिता से अधिक महत्वपूर्ण हैं। अच्छी कारें या घर परिश्रम की पूंजी बर्बाद करते हैं। वह तय कर लेता हैं कि घर, एक अच्छा और बड़ा घर बाद में बनाएगा।
घर एक महँगी विलासिता है, जैसा कि पिता जानते हैं। एक युवा के लिए यह एक मूर्खतापूर्ण बोझ है, जब तक कि वह अपने पेशे में स्थापित नहीं हो जाता। उसकी दृष्टि में एक ही बेडरूम का छोटा फ्लैट, पुरानी कार, एक मामूली अलमारी और सीमित मनोरंजन ठीक है। घर केवल खर्च पैदा करता है। एक बैल, या कोई आय-उत्पादक संपत्ति, एक घर ख़रीदने की तुलना में बेहतर विकल्प है (नीतिवचन 14:4)।
उतावले लोग ऐसे मुख्य निर्णयों को गलत तरीके से लेते हैं और वित्तीय बर्बादी का जोखिम उठाते हैं (नीतिवचन 21:5; 28:20-22)। एक बुद्धिमान पिता अपनी बेटी को ऐसे व्यक्ति को नहीं देगा जो इन प्राथमिकताओं को लेकर भ्रमित हों। उसकी बेटी को अनावश्यक अभाव और वित्तीय तनाव का सामना करना पड़ेगा, जैसा कि कई वैवाहिक जीवनों में होता भी है, जहां पिता ने इस बुद्धि को लागू करके अपनी बेटी की उचित सुरक्षा नहीं की।
याकूब ने राहेल के लिए सात वर्ष कार्य किया (उत्पत्ति 29:18-20)। तब तक उसने संपत्ति के लिए आधार बना लिया था और अपने ससुर के सामने खुद को साबित कर दिया था। खर्चीले लोगों को अच्छी लड़कियों से शादी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। केवल एक सफल व्यापार और पूंजी वाले युवक ही इस्राएल की कुलीन बेटियों से विवाह कर सकते थे।
हर मसीही पाठक सावधान रहें। धैर्यपूर्ण परिश्रम वित्तीय सफलता के लिए परमेश्वर की योजना है (नीतिवचन 12:11; 27:23-27; 28:19)। लालची राष्ट्र के “अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें” के मंत्र का विरोध करने के लिए अपने मन को तैयार करें। कर्ज का दैत्य काटने के लिए अक्सर लौट आता है। आपका ‘अमेरिकी सपना’ यही हो कि आप अपने खुद के घर के बजाय अपने खुद के व्यवसाय (या पेशे) में स्थापित हो जाएं।
यीशु मसीह ने इस नीतिवचन की प्राथमिकताओं का पालन किया। उसने सबसे पहले अपना कार्य तैयार किया, उसे बड़ी शिद्दत से किया, और उसे पूरा किया। फिर उसने अपना घर – अर्थात् कलीसिया बनाना आरम्भ किया (मत्ती 16:18)। और वह अपनी दुल्हन के लिए एक स्थायी स्थान तैयार करने लगा (यूहन्ना 14:2-3)। उसके जीवन के पहले के बलिदान के बिना, कलीसिया और स्वर्ग असंभव और अर्थहीन होंगे।
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