नीतिवचन 24:25
किन्तु दुर्जन को डांटनेवाले न्यायाधीश जनता की दृष्टि में आदरणीय होंगे, उन पर शुभ आशिषों की वर्षा होगी।
दुष्टों को क्षमा करना या उनका बचाव करना बहुत गलत है, विशेषकर सरकारी शासकों या न्यायाधीशों के लिए। नागरिक और राष्ट्र ऐसे न्यायाधीशों और उनकी सरकार को कोसते हैं और उनका तिरस्कार करते हैं (नीतिवचन 24:23-24)। इस संदर्भ में राजा सुलैमान ने हमें सिखाया कि क्यों सरकारी अफ़सरों ने दुष्टों को दण्ड देना चाहिए।
आपके सामने जो नीतिवचन है उसमें सुलैमान ने राजनेताओं और न्यायाधीशों को चुनौती दीं कि वे दुष्ट लोगों को डाँटे ताकि वे परमेश्वर और जनता की दृष्टि में आदरणीय हो, और उन पर शुभ आशिषों की वर्षा बरसे। उचित न्याय करना और सभी दुष्टों को फटकारना धर्मी लोगों का, विशेषकर अधिकार के पदों पर बैठे लोगों का, पवित्र कर्तव्य है।
यह नीतिवचन मुख्य रूप से सरकारी शासकों के लिए है, क्योंकि राजा सुलैमान ये वचन अपने बेटे को, जो इस्राएल का भावी राजा था, संबोधित कर रहा है (नीतिवचन 24:21-24)। अच्छे शासकों को न्यायपूर्वक शासन करना चाहिए, जिसमें जहां कही भी अत्याचार हो उसे निपटना और दण्ड देना शामिल है (नीतिवचन 16:12; 20:8,26)। यह एक राष्ट्रीय विपत्ति और शर्म की बात है जब शासक दुष्टों से समझौता कर लेते हैं। यीशु मसीह ही एकमात्र सिद्ध और परिपूर्ण शासक है (इब्रानियों 1:9; प्रकाशितवाक्य 19:15)।
लेकिन यह नीतिवचन सभी तबकों के मनुष्यों पर भी लागू होता है, विशेषकर उनके अधिकार के छोटे पदों पर, क्योंकि धर्मी मनुष्यों का कर्तव्य है कि वे पाप को धिक्कारें और असामाजिक तत्वों को चेतावनी दें। आप जिसे भी जानते हों या मिलते हों वह अगर गलत काम करता है और आप उसे बिना डांट-फटकार के पाप करते रहने देते हैं तो यह आपका नफरती आचरण है (लैव्य 19:17)। यदि आप एक मालिक, पति या पिता हैं, तो धार्मिकता को कायम करने के लिए पापियों को दण्ड देना आपका कर्तव्य है।
यदि धर्मी लोग दुष्ट को सुधारते या फटकारते नहीं हैं, तो मूर्खों को शिक्षा और चेतावनी कैसे दी जाएगी, और परमेश्वर के पवित्रों को कैसे शिक्षा दी जाएगी कि उन्हें प्रत्येक भले काम के लिए सिद्ध बनाया जाए? यदि दुष्टों को डाँटा नहीं जाता और दण्ड नहीं दिया जाएगा, तो कौन उनपर रोक लगाएगा? एक ऐसा जीवन जीना और बातें बोलना आपका कर्तव्य है जिसमे अन्धकार के निष्फल कामों को उलाहना देने की ताकत हो (इफि 5:11)। ऊपर से नीचे तक, सभी मनुष्यों को अवश्य है कि वे पापियों को सही संदेश भेजने के लिए फटकार लगाएँ (सभोपदेशक 8:11)।
आप अपने भाई के रखवाले हैं (उत्पत्ति 4:9), चाहे आप अपना यह कर्तव्य निभाने से कितनी ही नफ़रत करें। सुलैमान ने कहा, “लोहा लोहे को चमका देता है,” (नीतिवचन 27:17), और पापियों को डांटना एक सुंदर बात हो सकती है (नीतिवचन 25:12)। चर्च में भी अवश्य है कि बुद्धिमान और धर्मपरायण सदस्य मनमानी करनेवाले उपद्रवी सदस्यों को उलाहना दें, और हर चर्च में कुछ उपद्रवी सदस्य होते ही हैं (1 थिस्स 5:14)। मण्डली की आध्यात्मिक उन्नति ऐसे ही होती है (गला 6:1; याकूब 5:19-20)। यहां तक कि जब मूर्ख और भोले लोग उपद्रवियों को दंडित होता देखते हैं तो वे भी अनुशासन सीख सकते हैं और सुधर कर सकते हैं (नीतिवचन 19:25; 21:11)।
पापियों को डाँटना पास्टरों का सबसे बड़ा कर्तव्य और भूमिका है, जिस प्रकार एलीहू ने अय्यूब को उसकी मूर्खतापूर्ण बातों के लिए डाँटा (अय्यूब 32:1-2) और बपतिस्मा देनेवाले युहन्ना ने भी हेरोदेस को उसके नाज़ायज विवाह के लिए डाँटा (मत्ती 14:3-5)। परमेश्वर का दास जब भी उपदेश-मंच पर कदम रखता है तो वह युद्ध की स्थिति में होता है – अपने श्रोताओं की मूर्खतापूर्ण धारणाओं के विरुद्ध युद्ध (2 कुरिन्थ 10:4-6)। खुलकर पाप करनेवाले पापियों को, यहां तक कि अन्य सेवकों को भी सबके सामने फटकारा जाना चाहिए जिससे कि पूरे चर्च का ध्यान आकर्षित किया जाएं (1 तीमु 5:20; गला 2:14)।
पास्टरों को को तुरही के समान अपनी आवाज बुलन्द करनी चाहिए और कलिसियाओं को उनके पाप दिखाने चाहिए (यशा 58:1)। यह कार्य कई बार इतना कठोर-वचनी बन जाता है कि प्रचारकों का उल्लेख ऐसे मनुष्यों के रूप में किया गया है जो मानो उन पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें काट डालते, और अपने वचनों से उनको घात करते हैं, जिससे कि परमेश्वर का न्याय प्रकाश के समान चमक उठे (होशै 6:5)। उन्हें वचन का प्रचार करना है, चाहे लोग इसे सुनना चाहें या नहीं (2 तीमु 4:1-4)। और उनके अधिकार को तुच्छ समझने के किसी भी प्रयास का उन्हें मज़ाक उड़ाना चाहिए (तीतुस 2:15)।
जिनकी पापी पीढ़ियाँ लालसा करती हैं ऐसी चिकनी-चुपड़ी बातों का प्रचार करने से उन्हें बचना चाहिए (यशा 30:8-11)। जब परमेश्वर के वचन का प्रचार उचित रूप से किया जाता है तब वह एक हथौड़ा और आग है – यह हठीले और जिद्दी श्रोताओं की चट्टानों को चूर चूर कर देता है (यिर्मया 23:28-29)। लोग यीशु मसीह के अधिकार पर चकित होते थे, क्योंकि उसने उनके प्रचारकों के मुँह से निकलनेवाली कुटिल बातों से कभी कोई समझौता नहीं किया (मत्ती 7:28-29)।
इस नीतिवचन की शिक्षा मुख्य रूप से सरकारी शासकों और न्यायाधीशों के लिए है, लेकिन यह शिक्षा अधिकार के पद पर बैठे प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से सुसमाचार के प्रचारकों पर भी लागू होती है। अगर आप यहां वर्णित आदर और शुभ आशिषों की वर्षा प्राप्त करना चाहते हैं तो उन पापियों को डांटने में सतर्क और विश्वासयोग्य रहें जिन्हें परमेश्वर आपकी जानकारी में लाता है। यदि आप अपने अधिकार का का उपयोग उचित और न्यायपूर्ण रूप से करते हैं, तो आप अपने समय की दुनिया का कल्याण ही करेंगे, फिर चाहे कितने ही संकट और बाधाएं आयें।
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