नीतिवचन 24:24

जो दुष्ट से कहता है कि तू निर्दोष है, उसको तो हर समाज के लोग शाप देते और देश-देश उससे घृणा करते हैं;

शासकों, सावधान! तुम्हें अपनी मनमानी करने का कोई अधिकार नहीं है; तुम्हारा कर्तव्य यह है कि तुम वैसा ही करों जैसा परमेश्वर तुम्हें बाइबल में करने के लिए कहता है। उसने बाइबल में अपनी जो इच्छा प्रकट कीं है उसकी तुलना में तुम्हारी सही और ग़लत की परिभाषा कुछ भी नहीं हैं।

राजनीति-विज्ञान या राजनीति के नियम बाइबल के नीतिवचनों में सिखाए गएँ हैं। यहाँ राजा सुलैमान ने सरकारी शासकों को चेतावनी दी कि वे दुष्टों का बचाव न करें और न ही उन्हें दोषमुक्त करें। न्याय को इस प्रकार उपहास का विषय बनाने से देश के नागरिकों और देखनेवाले अन्य देशों को भी ऐसे भ्रष्ट शासक से घृणा करने पर मजबूर कर देगा।

इस नीतिवचन को संदर्भ में समझने के लिए इसके पहले का नीतिवचन महत्वपूर्ण है, “न्याय में पक्षपात करना उचित नहीं है” (नीति 24:23)। सत्ता में बैठे लोगों को मनुष्यों के बीच पक्षपात करना उचित नहीं है, पक्षपात का अर्थ है अपराध को देखने के बजाय यह देखना कि अपराधी कौन है, और उसके आधार पर सही को ग़लत और गलत को सही ठहराकर फैसला सुनाना।

नीति 24:25 का संदर्भ एक तुलना को प्रस्तुत करता है, “किन्तु जो अपराधी को दण्ड देंगे, सभी जन उनसे हर्षित रहेंगे और उनपर आर्शीवाद की वर्षा होगी।” जो शासक दुष्टों को दण्ड देते हैं, वे नागरिकों और राष्ट्रों को प्रसन्न करते हैं, और ऐसे लोगों को आशीर्वाद और अनुग्रह प्राप्त होगा।

कुछ लोगों की सोच के विपरीत, परम सत्य और ग़लत अस्तित्व में है। पीलातुस ने यीशु से पूछा, “सत्य क्या है?” एक शिक्षित रोमी शासक होने के बावजूद, वह पूर्ण सत्य से अनभिज्ञ था, और आज भी शासकों के बीच सत्य की बहुत ही कम जानकारी है। सत्य न केवल है, बल्कि सभी मनुष्य इसके लिए उत्तरदायी ठहराएं जाएंगे (सभो 12:13-14)।

सामान्य नियम यह रहा है कि मनुष्य जितनी अधिक शिक्षा प्राप्त करेगा उसे सत्य का ज्ञान उतना ही कम होगा। उदारवादी शिक्षा-प्रणाली मनुष्य की सोच से, जो बाइबल में प्रकट परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध है, भरी होती है, इसलिए ऐसी डिग्री हासिल करने वालों के दिमाग में सत्य का निवास हो सकता है इसकी बहुत कम उम्मीद है।

आज इस नीतिवचन का उल्लंघन हर तरफ हो रहा है। क्या आप ऐसा होते देख सकते हैं? यह जानने में कोई चुनौती नहीं है कि सरकारें आज क्या कानून बना रही हैं, कैसे फैसलें ले रही हैं और क्या क्या लागू कर रही हैं, क्योंकि जैसे ही ऐसा कुछ होता है उसे सभी प्रकार के समाचार मीडिया तुरन्त सार्वजनिक कर देते हैं, जिसमें केवल गोदी मीडिया अपवाद है।

हालाँकि, परमेश्वर की इच्छा जानने के लिए उसके वचन का अध्ययन किया जाना ज़रूरी है। जब तक आप बाइबल को नहीं जानते, आप परमेश्वर द्वारा परिभाषित सही-गलत को नहीं जान पाएंगे। न्याय, सत्य या बुद्धि को कब बिगाड़ दिया जाता है उसे आप पहचान नहीं पाएंगे। बल्कि आप स्वयं भी इन्हें भ्रष्ट करने प्रवृत्त होंगे। सत्य को सीखें, भले ही सत्य का ज्ञान लेने से आपको दुःख का सामना करना पड़े, जैसा कि सुलैमान ने माना (सभो 1:18)।

प्रत्येक शासक, माता-पिता से लेकर राष्ट्रपति तक, को यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर ने उन्हें नियुक्त किया और वह काम सौंपा है, इसलिए उसका यह फर्ज़ बनता है कि वह प्रत्येक फैसले और निर्णय में परमेश्वर की आज्ञा का कड़ाई से पालन करें। कुछ दिन पहले वह अपनी माँ की गोद में था और उसे बिल्कुल भी समझ नहीं थी, और अब वह न्याय के सिंहासन पर बैठा है, इसलिए उसे विनम्रतापूर्वक और पूरी तरह से परमेश्वर ने जो लिखा है उसके प्रति समर्पित होना चाहिए।

आज उन अपराधियों को जो बच्चों की उनकी माँ की खोख में ही हत्या कर देते हैं (गर्भपात करने वाले), जो समलिंगी शादियों की पैरवी करते हैं, जो जबरन वसूली करने वाले (श्रमिक संघ), जो विज्ञानं की आड़ में झूठ बोलते हैं (उद्विकासवादी शिक्षक), जो विकृत मानसिकता के हैं (ट्रांससेक्सुअल), जो अपने कर्तव्यों से भागते हैं (तलाक लेने वाले), व्यभिचार करते हैं (आकस्मिक सेक्स), जो परस्त्रीगमन करते हैं (किसी के साथ प्रेम-प्रसंग करना), जो झूठे शिक्षक हैं (टीवी के लोकप्रिय झूठे भविष्यद्वक्ता ), जो ख्रिश्चनों के साथ ठगी करते हैं (टेलीवेंजेलिस्ट), आलसी हैं (कल्याण का दुरुपयोग करने वाले), जो बर्बादी करते हैं (खर्च करने वाले), जो विद्रोही हैं (माता-पिता की अवज्ञा करने वाले), जो अहंकारी हैं (आत्मसम्मान से भरे), जो डींग मारते हैं, जो मज़ाक उड़ाते हैं (धार्मिक चुटकुले), बकवाद करते हैं (कानाफूसी), निरपराध घोषित कर दिया जाता है।

इससे पहले कि आप अपनी सरकार से कानून बनाने, निर्णय लेने या सच्चा न्याय लागू करने की उम्मीद करें, आपको स्वयं यह सब करना सीखना होगा। वास्तव में, इससे पहले कि आप एक धर्मी सरकार के लिए प्रार्थना कर सकें, आपको खुद ही परमेश्वर के वचन के अनुसार धार्मिकता का जीवन जीने की आवश्यकता है, क्योंकि यह केवल एक धर्मी व्यक्ति की प्रभावशाली उत्कट प्रार्थना ही है जो कुछ भी हासिल कर सकती है (याकूब 5:16)।

न्याय का वह दिन जल्द ही आने पर है जब सब मनुष्यों का न्याय पूरी शुद्धता और परम सत्य के अनुसार किया जाएगा। परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह को इस न्याय के लिए न्यायाधीश बनाकर नियुक्त किया है, और हर पुरुष, महिला और बच्चा उसे अपने जीवन का हिसाब देगा। मनुष्यों में कोई पक्षपात नहीं किय जाएगा और आपको कुछ भी बोलने की इजाज़त नहीं होगी। सभी पापियों को आग की झील में डाल दिया जाएगा, सिवाय उन लोगों को छोड़ जिनके नाम परमेश्वर ने जीवन की पुस्तक में लिखें हैं (प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।

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