नीतिवचन 24:23
बुद्धिमानों के वचन यह भी हैं। न्याय में पक्षपात करना, किसी रीति भी अच्छा नहीं।
यहाँ बुद्धि है – बिलकुल साफ़ और स्पष्ट रूप में प्रकट। बुद्धिमान व्यक्ति – अर्थात् कुलीन पुरुष और महिलाएँ – इस नियम को जानते हैं और उसे व्यवहार में लाते हैं। सुलैमान ने आपके लिए बुद्धि का एक नियम लिखा जिसके पालन से आप परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में महान बन सकते हैं। क्या आप इस नियम पर विचार करेंगे, इसे समझेंगे और इसे अपने जीवन में लागू करेंगे? इस नियम के अनुरूप आपका चरित्र और आचरण आपको अपने साथियों के बीच सम्मान और इज्ज़त देगा।
जब आप किसी मामले पर न्याय करते हैं, तो उस समय इस बात पर विचार न करें कि उस मसले में कौन लोग शामिल हैं। आपको चाहिए कि आप मित्रों के प्रति प्रेम या शत्रुओं से घृणा या उनके प्रति भय को नज़रअंदाज कर दें। चाहे गरीब हो या अमीर, दोनों के प्रति सहानुभूति को बाहर रखना आवश्यक होता है। यह परमेश्वर की न्याय-प्रणाली का एक पाक नियम है, ताकि समानता और न्याय की शुद्धता कायम रहे, और बाइबल इस चेतावनी को बार-बार दोहराती है, क्योंकि यह परमेश्वर और मनुष्य दोनों पर लागू होती है (नीतिवचन 18:5; 28:21; लैव्य 19: 15; व्यवस्था 1:17; 2 इतिहास 19:7; याकूब 2:1-10;
बुद्धिमान लोग न्याय करते समय इस बात पर विचार नहीं करेंगे कि पक्ष-प्रतिपक्ष में कौन लोग शामिल है, चाहे रिश्ता कितना भी प्रिय क्यों न हो या पक्षपात करने का कितना ही गंभीर प्रलोभन क्यों न हो। वे किसी दुष्ट व्यक्ति की रक्षा या उसका बचाव नहीं करेंगे, चाहे वह कोई भी हो; वे उसे दण्ड देंगे। परमेश्वर और लोग ऐसे विश्वासयोग्य मनुष्य से प्रेम रखते हैं। वे उस मनुष्य को शाप देंगे जो न्याय को बिगाड़ता है और अपराधियों को रिहा करता है या उनकी रक्षा करता है।
सुलैमान ने अपने युवराज पुत्र को बुद्धि सिखाई (नीतिवचन 24:21), और उसने उसे यहां एक नियम दिया जिसका बुद्धिमान लोग पालन करते हैं। वे रिश्ते, स्थिति या शामिल व्यक्ति के आधार पर पक्षपात या भेदभाव किए बिना, न्याय करने में पूरी तरह से निष्पक्ष होते हैं। अधिकांश लोग मित्रों के लिए समझौता कर लेते हैं या संभावित लाभ प्राप्त करने के लिए न्याय को बिगाड़ देते हैं, इसीलिए यह नियम इतना महत्वपूर्ण है।
यह नीतिवचन सबसे पहले सरकारी न्याय-व्यवस्था पर लागू होता है। नागरिकों को चाहिए कि वे सख्ती से क़ानून का पालन करें और विद्रोही सोच को त्याग दें (नीतिवचन 24:21-22)। लेकिन यहाँ सुलैमान ने राजाओं और न्यायाधिशों का कर्तव्य जोड़ा कि वे देश के नागरिकों का न्याय पूरी निष्पक्षता से करें, क्योंकि परमेश्वर ने देश के शासकों पर नैतिक सीमाएँ लगा दी हैं। लेकिन बुद्धि का यह नियम घर से लेकर ऑफिसों और चर्च तक न्याय के सभी मामलों पर भी लागू होता है।
दुष्टों को डाँटने के बजाय उनकी रक्षा करना मूर्खतापूर्ण भूल है। अच्छे या बुरे न्याय-व्यवस्था के फैसलों के परिणाम और प्रभाव दूरगामी और इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं (नीतिवचन 24:24-25)। दुष्टों को दोषमुक्त करने वाले मनुष्य को सब लोग शाप देते हैं और उससे घृणा रखते हैं; परन्तु दुष्टोंको डाँटनेवाले से लोग प्रसन्न होते हैं, और परमेश्वर की आशीष पाते हैं। यहां एक ऐसी आज्ञा है जिसके साथ प्रतिफल की प्रतिज्ञा जुडी है, इसलिए आपको बारीकी से ध्यान देना होगा और इसका पालन करना होगा।
मनुष्य के पाप और समस्त मानवजाति के नैतिक पतन के कारण, पृथ्वी पर सच्चा न्याय कम होता जा रहा है। अदालतें गुनहगारों के प्रभाव और अपनी भावनाओं के आधार पर न्याय करते हैं, जैसे अपने मित्रों की रक्षा करना, समृद्ध लोगों को बिना दण्ड के छोड़ देना, गरीब और अमीरों के प्रति दोहरी नीति लागू करना या रिश्वतखोरी, सामाजिक स्थान देखना, चुनावों में गड़बड़ी को नज़रअंदाज करना आदि। इस पर अचम्भित न हो और न ही निराश हों! परमेश्वर ने आपको यह अवसर दिया कि आप खुद को ऐसे लोगों से अलग रखें और पक्ष लें और अपनी एक अलग पहचान बनाए, ताकि आप उससे पुरुस्कार पा सकें।
पाठक, आपको अपने सभी व्यवहारों में पूर्णतः न्यायप्रिय होना चाहिए। बाइबल न्याय को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है, और बाइबल न्याय में व्यक्तिगत प्रेम, सम्मान, भावुकता या धार्मिक परंपरा के लिए समझौता करने को दुत्कारती है। परमेश्वर की सच्चाई और बुद्धि को सभी मामलों में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। यहीं बुद्धिमत्ता है, क्योंकि यह मूर्ख ही हैं जो व्यक्तियों के प्रति भय, घृणा, प्रेम, सम्मान या इच्छा को धूमिल कर देते हैं और न्याय को विकृत कर देते हैं। कमज़ोर चरित्र का पता तब चलता है जब व्यक्ति न्याय और सत्य के स्थान पर रिश्तों या धर्म की भावना को चुनता है।
माता-पिता, क्या आप अपने बच्चों के बीच न्याय करने पक्षपाती हैं, या न्यायप्रिय? क्या आप अपने मूर्ख और गलती करनेवाले बच्चों को डांटते और दण्ड देते हैं? या क्या आप अपने परिवार में पापियों की रक्षा करते हैं? दो चीज़ें होंगी – आपका परिवार आपके समझौते के लिए आपका तिरस्कार करेगा, और परमेश्वर आपका न्याय करेंगे। अगर आप आपने परिवार का सुख चाहते हैं और परमेश्वर का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपका उच्च लक्ष्य पूर्ण निष्पक्षता होना चाहिए। यदि आप अपने फैसलों पर भावुकता को हावी होने देते हैं, तो आप अपने और अपने परिवार के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं।
नियोक्ताओं और वरिष्ठ अधिकारियों, क्या आप अपने दफ्तरों में अपने सभी व्यवहारों में पूर्ण निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं? क्या सभी लोग आपके न्याय पर पूरी तरह से निष्पक्ष और न्यायसंगत होने पर भरोसा कर सकते हैं? पौलुस ने लिखा, “हे स्वामियो, अपने अपने दासों के साथ न्याय और ठीक ठीक व्यवहार करो, यह समझकर कि स्वर्ग में तुम्हारा भी एक स्वामी है” (कुलुस्सियों 4:1)। यहां आपके पालन के लिए स्वर्ग से एक स्पष्ट कर्तव्य दिया गया है जिसका आपको निर्वहन करना है। यदि आपके कनिष्ठ किसी भी विवादों में ख़ुशी से आपकी राय मानेंगे, तो आप नेकी की राह पर हैं।
पास्टरों, क्या आप अपने पद में सभी पक्षपात से मुक्त हैं? पौलुस ने चेतावनी दी, “परमेश्वर, और मसीह यीशु और चुने हुए स्वर्गदूतों को उपस्थित जानकर मैं तुझे चेतावनी देता हूँ कि तू मन खोलकर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर” (1 तीमु 5:21)। क्या आप परमेश्वर के समस्त अभिप्राय को बिना किसी पक्षपात के सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू करते हैं? क्या आप अपने निकटतम लोगों को सार्वजनिक और निजी तौर पर अन्य सदस्यों के समान सख्ती से डांटते हैं?
ख्रिश्चन, क्या आप अपनी राय और दूसरों के प्रति न्याय में पूरी तरह से ईमानदार हैं? यीशु ने कहा, “मुँह देखा न्याय न करो, परन्तु ठीक ठीक न्याय करो” (यूहन्ना 7:24)। क्या आप कुछ पापों और पापियों से अन्य पापों और पापियों से अधिक घृणा करते हैं? क्या परमेश्वर की भी यही न्याय प्रणाली है, या आपने अपनी खुद की बना ली है? प्रत्येक मनुष्य का निष्पक्ष न्याय केवल परमेश्वर के मानकों के आधार पर करें। और सब लोगों में आपकी प्रतिष्ठा ऐसी बनाएं जिसमें आप बिना किसी अपवाद के न्यायप्रिय और ईमानदार व्यक्ति के रूप में जाने जाते हो।
अधिकार और न्याय का प्रयोग ऐसा किया जाना चाहिए कि मानों परमेश्वर की ओर से, क्योंकि वह सभी का न्यायाधीश है। समानता और सच्चाई के संबंध में उसकी इच्छा बाइबल में स्पष्ट रूप से प्रकट की गई है। यह समझ की कमी नहीं है जो अधिकांश मानवीय समझौते का कारण बनती है, बल्कि केवल पवित्रशास्त्र पर दृढ़ता से खड़े होने की अनिच्छा है जिसके चलते लोग न्याय को बिगाड़ देते हैं (भजन 119:128)। परिवार और दोस्तों का प्रभाव और गरीबों या अमीरों के प्रति सहानुभूति अधिकांश लोगों की सच की सोच को भ्रष्ट कर देती है।
स्वर्गीय न्यायाधीश के रूप में बाइबल के परमेश्वर का होना क्या ही अद्भुत आशीष है! जो लोग अपने पापों को मान लेते हैं, उन्हें वह क्षमा करने में विश्वासयोग्य और न्यायी है (1 यूहन्ना1:9)। उसका पुत्र ही एकमात्र विश्वासयोग्य और सच्चा गवाह है (प्रकाशितवाक्य 3:14); उसका चरित्र और न्याय इतना सिद्ध रूप से धर्मी है कि उसका नाम ही विश्वासयोग्य और सत्य है (प्रकाशितवाक्य 19:11)। प्रिय पाठक, आप उस पर अपना भरोसा रख सकते हैं। आज विनम्र पाप-स्वीकारोक्ति और पश्चाताप में अपने आप को उसके सामने पूरी तरह से खोल दें। वह अनुग्रह करेगा, क्योंकि अनंत पाप की कीमत पहले ही चुकाई जा चुकी है, जिसे वह कभी नहीं भूलेगा और न कम आंकेगा।
चूँकि परमेश्वर मनुष्यों में कोई पक्षपात नहीं करता (रोमियों 2:11), अत: हर पापी को उसके आने के दिन से डरना चाहिए। वह प्रतिशोध और धधकती आग में अपने सामर्थी स्वर्गदूतों के साथ उन सबका नाश करने के लिए आएगा जो उसकी आज्ञा को नहीं मानते हैं (2 थिस्स 1:7-9)। यह वह गंभीर और भयानक संदेश है जो पौलुस ने एथेंस में सर्वश्रेष्ठ यूनानी दार्शनिकों को बताता था (प्रेरितों 17:30-31)। आपको आपके पापों की पूरी सज़ा मिलेगी, यहाँ तक कि उसकी उपस्थिति से निकाल बाहर कर हमेशा के लिए आपको विनाश के नरक में डाल दिया जाएगा। आमीन।
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