नीतिवचन 24:22

क्योंकि उन पर विपत्ति अचानक आ पड़ेगी, और दोनों की ओर से आनेवाली विपत्ति को कौन जानता है

अपने राष्ट्रपति का सम्मान करें! पुलिसकर्मियों का आदर करें! उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद दें और प्रार्थना करें। जो व्यक्ति सरकारी अधिकारियों का अनादर करता है, चाहे वे उच्च पद पर हो या निम्न पद पर, उनसे दूर रहें। आपके भविष्य की सुरक्षा और सफलता इस पर निर्भर करती है, क्योंकि यह नीतिवचन अचानक आने वाली विपत्ति और विनाश की चेतावनी देता है।

विद्रोह की भावना ने संपूर्ण पृथ्वी को संक्रमित कर दिया है, और यह भावना स्वर्गीय नहीं है। इसमें अमेरिका सबसे आगे है, जहाँ के नागरिक विवेक के अभाव में सर्वोच्च आधिकारिक पदों का ठट्ठा उड़ाते हैं और उनका उपहास करते हैं। आप इस चेतावनी को पुराने ज़माने का कह सकते हैं, परंतु यही अधिकार को लेकर परमेश्वर की अनंत इच्छा है।

सच्ची बुद्धि में राज्य की सरकार के प्रति अधीनता शामिल होती है। परमेश्वर उन लोगों पर विपत्तियां और विनाश लाने का वादा करता है जो नागरिकों को विद्रोह करने का बढ़ावा देते हैं, और उन पर भी जो उनकी बातों को सुनते या पढ़ते हैं। परमेश्वर के न्याय से बचने ,और उसके बजाय उसकी आशीषों को प्राप्त करने के लिए, किसी भी प्रकार के शासक के प्रति अनादर न दर्शाएँ।

एक व्यवस्थित समाज का एक महत्वपूर्ण भाग अधिकारियों के अधीन रहना होता है। यदि आपको लगता है कि राज्य के अधिकारी आपकी प्रशंसा, सम्मान, आज्ञाकारिता, और समर्थन के योग्य नहीं हैं, तो इसका अर्थ है कि आप उसी भावना के अधीन हैं जो बच्चों को विद्रोही, पत्नियों को घृणित, कर्मचारियों को हड़ताली, और कलीसियाओं को हठी बना देती है।

यह वचन उस नीतिवचन का दूसरा भाग है, इसलिए आपको उन लोगों के बारे में इसके पहले भाग के व्याख्यान की आवश्यकता है, जो बताता है कि कौन लोग अचानक विपत्तियों और विनाश के पात्र बनते हैं। यह कहता है: “हे मेरे पुत्र, यहोवा और राजा दोनों का भय मानना; और उनके विरुद्ध बलवा करनेवालों के साथ न मिलना” (नीतिवचन 24:21)। यदि आप वास्तव में बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस वचन के व्याख्यान को भी पढ़ें।

यह परमेश्वर की आज्ञा है कि आप और सभी मनुष्य उसका और अपने राज्य के सर्वोच्च अधिकारियों का भय मानें। वे आपस में जुड़े हुए हैं, क्योंकि परमेश्वर ही ने आपके राज्य के के अगुओं को अधिकृत किया है (1 पतरस 2:17)। उसने बाइबल में उन्हें प्रधान के रूप में भी संदर्भित किया है, ताकि आप समझ सकें कि वे सच में कितने उच्च हैं (निर्गमन 22:28; भजन संहिता 82:1,6; यूहन्ना 10:34-35)। ऐसे हर व्यक्ति से दूर रहें जो उनके बारे में नकारात्मक बातें कहता है।

स्वयं को नम्र बनाओ, अपनी सरकार के अधीन रहें, और उनके लिए प्रार्थना करो। तब भी जब वे ऐसे निर्णय लें जिनसे आप सहमत न हों। तब भी जब वे गलत निर्णय लें। ये आपके लिए स्वर्ग के महान परमेश्वर के आदेश हैं (रोमियों 13:1-7; 1 तीमुथियुस 2:1-2; 1 पतरस 2:13-17)। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे, तो इसका परिणाम क्या होगा? आप शीघ्र ही भयप्रद और नष्ट कर दिए जाएंगे। परमेश्वर ने सुलैमान के माध्यम से यह नीतिवचन आपको चेतावनी देने के लिए दी है। सावधान रहें, ऐसा न हो कि आपके पास अधिक समय नहीं बचें।

यहोवा उन लोगों से घृणा करता है जो अधिकारियों की, विशेष रूप से राज्य की सरकार की, दुष्टता से आलोचना करते हैं या उसका विरोध करते हैं। वह ऐसे लोगों के साथ संगति करने की भी निंदा करता है (नीतिवचन 24:21)। यहाँ वह ,इन दोनों पर अचानक विपत्ति और विनाश लाने का वायदा करता है, अर्थात विद्रोह और राजद्रोह के अगुओं और उनके अनुयायियों पर। परमेश्वर का भय मानना और राज्य की सरकार का सम्मान करना संयोजित होते हैं, अर्थात परमेश्वर का उचित रूप से भय मानना और साथ ही उसके द्वारा नियुक्त अधिकारियों की आलोचना करना असंभव है (नीतिवचन 24:21)।

सुलैमान ने अपने पुत्र को परमेश्वर और राजा का भय मानने की चेतावनी दी थी (नीतिवचन 24:21)। आपको पहले परमेश्वर का भय मानना चाहिए; परंतु आपको प्रधानों से भी डरना चाहिए, क्योंकि उन्हें परमेश्वर द्वारा अधिकृत किया गया है। किसी प्रधान का विरोध करना या राज्य किसी भी अधिकारी का विरोध करना, परमेश्वर और उसके आदेश का विरोध करना कहलाता है (रोमियों 13:1-2)। आप दो कारणों से सरकार के अधीन रहते हैं – परमेश्वर और अधिकारियों, दोनों द्वारा दंडित होने के भय के कारण (रोमियों 13:3-7)। जो लोग सरकार ही को बदलना चाहते हैं, उनके दो सामर्थशाली और भयावह शत्रु होते हैं – परमेश्वर और प्रधान।

राज्य के अधिकारियों के अधीन रहना ही सच्चा मसीहत है। पतरस ने भी यही सिखाया था कि परमेश्वर का भय मानना और प्रधान का सम्मान करना संयोजित होते हैं। उसने लिखा है कि परमेश्वर और मनुष्य के प्रति हमारा कर्तव्य है कि हम राज्य की सरकार के हर अध्यादेश के अधीन रहें (1 पतरस 2:13-17)। वह ऊंचे पद वालों के बारे में बुरा सोचने या बोलने की निंदा करता है, और ऐसे लोगों को अज्ञानी दुष्टों, क्रूर पशुओं और समलैंगिकता जैसी अभद्र चीज़ों के अनुसरण करने वालों के समान ठहराता है, जिन्हें बाहर निकालकर गोली मार देनी चाहिए (2 पतरस 2:10-12; यहूदा 1:8-10)।

स्वर्ग में एक परमेश्वर है। भले ही लोग गुप्त में राज्य के प्रधानों पर आरोप लगाएं, उनकी आलोचना करें, उनका तिरस्कार करें, उनका उपहास करें, या उन्हें कमतर आंके, वह यह सब सुनता और देखता है। भयावह परमेश्वर इसका बदला लेगा। उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि आप अपमानजनक विचारों और बोली को बढ़ावा देते हैं, या आप ऐसे लोगों के मात्र एक अनुयायी हैं और उन्हें स्वेच्छा से सुनते हैं। दोनों ही पक्षों का सामना विपत्ति और भयावह विनाश से शीघ्र होगा। परमेश्वर को महिमा मिले! राज्य के प्रधानों के विरुद्ध भौंकने वाले पागल कुत्तों को मार गिराया जाएगा।

क्यों कुछ लोग अपने जीवन, परिवार, और व्यवसाय में इतनी विपत्तियों का सामना करते हैं? इसका एक निश्चित कारण प्रधानों के प्रति उनका दुष्टतापूर्ण व्यवहार और बोली है। परमेश्वर का उपहास नहीं उड़ाया जा सकता। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वे क्या करने का प्रयास करते हैं; क्योंकि कुछ भी सफल नहीं होगा। परमेश्वर उनके विरुद्ध है। वे उसके नियुक्त अधिकार का अनादर करके बच नहीं सकते। क्यों कुछ लोग अपने जीवन, परिवार, और व्यवसाय में इतने धन्य होतें हैं? इसका एक निश्चित कारण प्रधानों के प्रति उनका शांतिपूर्ण और विनम्र समर्पण हो सकता है। परमेश्वर धर्मी लोगों को आशीष देता है और उन्हें उसका प्रतिफल देता है।

अपने हृदय या यहाँ तक कि अपने कमरे में भी प्रधानों का अनादर या विद्रोह करने से घृणा करें। सुलैमान ने लिखा है कि, “राजा को मन में भी श्राप न देना, न धनवान को अपने शयन की कोठरी में श्राप देना; क्योंकि कोई आकाश का पक्षी तेरी वाणी को ले जाएगा, और कोई उड़नेवाला जन्तु उस बात को प्रगट कर देगा ” (सभोपदेशक 10:20)। विद्रोही शब्द सब के कानों तक पहुंचते हैं। और हमारा महान परमेश्वर हृदय के विचारों और इरादों को भी देखता है; वह उन लोगों को दंडित करेगा जो अपने से उच्च पदों वालों की आलोचना करते हैं।

क्या यह चेतावनी आपको एक अतिशयोक्ति प्रतीत होती है? लूसिफ़र, परमेश्वर का अभिषिक्त स्वर्गदूत, अधिकार अर्थात सर्वशक्तिमान परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह के कारण सदा के लिए आग की झील में तड़पता रहेगा। मूसा की प्रिय बहन, मिर्याम केवल एक बार परमेश्वर के अधिकार के विरुद्ध उठी थी, और उसने उसे भयंकर कोढ़ से हिम के समान श्वेत बना दिया था (गिनती 12:1-15)। कोरह, और यहाँ तक कि विद्रोहियों की पत्नियों और बच्चों को भी मूसा के विरुद्ध बलवा करने के कारण जीवित ही अधोलोक में डाल दिया गया था (गिनती 16:1-34)।

अबशालोम ने दाऊद के विरुद्ध विद्रोह किया, इसलिए परमेश्वर ने उसे योआब के तीरों द्वारा उसे जीवित ,एक वृक्ष पर लटके हुए मार डाला (2 शमूएल 18:9-18)। अदोनिय्याह ने नए राजा को उचित रूप से सम्मान नहीं दिया, इसलिए सुलैमान ने अपने ही भाई को मरवा दिया (1 राजाओं 2:12-25)। योआब ने अपने पद के लिए अपने प्रतिद्वंद्वियों की हत्या की, इसलिए सुलैमान ने अपने चचेरे भाई को मरवा डाला (1 राजाओं 2:28-34)। शिमी ने दाऊद को श्राप दिया; और हालांकि दाऊद ने उसे क्षमा कर दिया था, पर सुलैमान ने अंततः उसे मरवा डाला (1 राजाओं 2:35-46)। बयालीस बच्चों ने एलीशा को उसके गंजे सिर के कारण उसका उपहास किया, और परमेश्वर ने उन्हें दो रीछनियों द्वारा मरवा डाला (2 राजाओं 2:23-24)।

राजा सिदकिय्याह ने यिर्मयाह की चेतावनियों की उपेक्षा की और राजा नबूकदनेस्सर के खिलाफ़ विद्रोह किया; इस अपराध के लिए उसके समक्ष हीे उसके पुत्रों का घात हुआ, और फिर उसकी आँखें फोड़ दी गईं (2 राजाओं 25:1-7)। विद्रोही यहूदियों ने रोम के खिलाफ़ विद्रोह किया, जिसने तीतुस को उनके नगर और मंदिर को नष्ट करने और उन पर इतना बड़ा संकट लाने के लिए मजबूर किया जो संसार ने कभी नहीं देखा था। विद्रोह के इन उदाहरणों में निम्न, उच्च, और संपूर्ण राज्य शामिल हैं।।

क्या यह सीख बहुत अधिक तीव्र है? स्वर्गदूत, जो मनुष्यों की तुलना में बुद्धि और शक्ति में कहीं अधिक महान हैं, पृथ्वी पर प्रधानों के विरुद्ध अपमानजनक आरोप नहीं लगाते और न उनका उपहास करते हैं (2 पतरस 2:11)। सच में! एक मूर्ख व्यक्ति, जिसे अपने अगुओं के महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में कुछ नहीं पता, ऐसा क्यों करेगा? परंतु स्वर्गदूत स्त्रियों के बालों की लंबाई को जाँचते हैं, यह देखने के लिए कि क्या वे लंबे बाल रखने के द्वारा अपने पतियों के प्रति सार्वजनिक रूप से समर्पण दर्शाती हैं (1 कुरिन्थियों 11:10)। यह चेतावनी बहुत अधिक तीव्र है। इसे गंभीरता से समझें!

माता-पिता के बारे में अपमानजनक रूप से बात करना परमेश्वर की नज़र में मृत्युदंड के योग्य था (व्यवस्थाविवरण 27:16)। जो लोग अपने माता-पिता को श्राप देते थे, उन्हें कठोर दंड दिया जाता था (नीतिवचन 20:20)। और परमेश्वर माता-पिता के प्रति अनादर दिखाने वालों को भयंकर दण्ड के योग्य मानता है (नीतिवचन 30:17)। धन्य परमेश्वर अपने नियुक्त अधिकारियों का बचाव करता है और अनादर करने वालों को दंडित करता है। क्या इस चेतावनी में अतिशयोक्ति दिखाई देती है? इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि विद्रोह की आत्मा ने बहुतों को संक्रमित कर दिया है।

आप राष्ट्रपति के बारे में किस प्रकार बात करते हैं? आदर के साथ या तिरस्कार के साथ? क्या आप उनके या अन्य अधिकारियों का उपहास करते हैं? आप सरकार के बारे में किस प्रकार की बातें पढ़ते हैं – समर्थक, मध्यस्थ, या आलोचनात्मक? क्या आप सम्मानपूर्वक करों का भुगतान करते हैं? क्या आप उनके द्वारा लिए गए हर निर्णय या उनके द्वारा किए गए हर कार्य में किसी साज़िश या कुछ छिपाए जाने की दुष्टतापूर्वक कल्पना करते हैं? क्या आप नए कानूनों की आलोचना करते हैं? आप किन प्रकार के लोगों के साथ सरकार के विषय में चर्चा करते हैं? क्या आप प्रधानो के लिए प्रार्थना करते हैं और परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं?

यदि आपके बच्चे हैं, तो क्या आप चाहते हैं कि वे आपके निर्णयों की आलोचना करें, आपकी गलतियों का उपहास करें, आपका मज़ाक उड़ाएँ, और आपके अन्य बच्चों में अशांति उत्पन्न करें? यदि आप एक पति हैं, तो क्या आप चाहते हैं कि आपकी पत्नी दूसरों के समक्ष आपका उपहास करे और उल्टा जवाब दे? यदि आप एक नियोक्ता हैं, तो क्या आप चाहते हैं कि आपके कर्मचारी एक संघ बनाकर आपके पद और व्यवसाय पर घात करें और उसे हानि पहुंचाए? क्या आप यह देख नहीं पा रहे कि जब तक आप दूसरों को सम्मान और आदर नहीं देते, तब तक आप दूसरों से सम्मान प्राप्त करने के योग्य नहीं ठहरते?

अधिकार के प्रति अनादर का मूल कारण अहंकार और विद्रोह है, जो कि शैतान द्वारा किए गए पाप थे (नीतिवचन 13:10; 1 तीमुथियुस 3:6)। यह कोई सिद्धांत नहीं है; यह अहंकार और विद्रोह है। मनुष्य सिद्धांत के लिए करों की चोरी नहीं करता, बल्कि लोलुपता और लोभ के लिए करता है। सिद्धांत का अनुसरण करने के वैध और शांतिपूर्ण तरीके भी होते हैं परंतु उनकी युक्तियाँ ,उनकी दुष्टता को प्रमाणित करती हैं। परमेश्वर अहंकारी और विद्रोही लोगों को कुचल देगा।

मसीही लोग प्रधानों के लिए प्रार्थना करते हैं, और वे धार्मिकता और ईमानदारी के साथ स्थिर और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, भले ही वे प्रधान मूर्तिपूजक या दुष्ट क्यों न हों (यिर्मयाह 29:4-7; 1 तीमुथियुस 2:1-4)। वे अधिकार को तुच्छ नहीं जानते। उन्हें पता होता है कि परमेश्वर या उनका प्रधान ऐसे विद्रोहियों से बदला लेने आएगा। वे जानते हैं कि परमेश्वर की आशीष उन लोगों पर होती है जो अधिकार का आदर करते हैं। वे जानते हैं कि परमेश्वर सर्वोच्च से भी ऊँचा है और शीघ्र ही वह संसार के हर गलत कार्य को सही कर देगा (सभोपदेशक 5:8)।

यदि आप यीशु मसीह के एक बपतिस्मा प्राप्त अनुयायी हैं, तो आप एक अनंत साम्राज्य, अर्थात परमेश्वर के राज्य के नागरिक हैं, जहाँ यीशु दाऊद के पुत्र के रूप में संपूर्ण सामर्थ और सिद्ध धार्मिकता के साथ राज्य करता है। वह किसी भी सरकारी निर्णय के एक भी पहलू से चूकता नहीं है। उनके लिए परमेश्वर के वचन का क्या महत्व है? “पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ, क्योंकि क्षण भर में उसका क्रोध भड़कने को है। धन्य है वे जो उसमें शरण लेते है” (भजन संहिता 2:12)।

पौलुस जैसे विश्वासयोग्य सेवक आपके लाभ के लिए बाइबल में पाई जाने वाली परमेश्वर की हर सलाह और हर बात का प्रचार करता है (प्रेरितों के काम 20:17-27)। आपने अभी-अभी अपने जीवन के इस हिस्से के लिए परमेश्वर की इच्छा को सुना है। आप इस जानकारी का क्या करेंगे? आपको राज्य के प्रधानों या अन्य अधिकारियों के प्रति भूतकाल में किए गए हर गलत कार्य के लिए पश्चाताप करना चाहिए, और आपको परमेश्वर से वायदा करना चाहिए कि आप परमेश्वर द्वारा नियुक्त किए गए अधिकार के पाँचो क्षेत्रों में से किसी का भी कभी अनादर या विद्रोह नहीं करेंगे।

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