नीतिवचन 24:21
हे मेरे पुत्र, यहोवा और राजा दोनों का भय मानना; और बलवा करनेवालों के साथ न मिलना;
क्या आप दायरे से बाहर सोचते हैं? सुनिश्चित करें कि यह उस सरकार का दायरा नहीं है जिसे परमेश्वर ने आपके लिए चुना है। परमेश्वर ने आपकी सरकार को और उसके सब सरकारी पदों पर प्रत्येक व्यक्ति को चुना है। वह इसे तब बदल देगा जब उसकी मर्जी में आएगा, लेकिन आपके पास उसे हटाने की ताकद, कर्तव्य या अधिकार नहीं है (दानि 2:21)। आपको उन लोगों के प्रति समर्पित होना चाहिए जिन्हें उसने आपके ऊपर अधिकारी नियुक्त किया है, जैसा कि आप भी उम्मीद करते हैं कि जो लोग आपके अधीन काम करते हैं वे भी आपको समर्पित हो।
आपके लिए सबसे मूल्यवान नीतिवचन वे हैं जिनसे आप समझौता करते हैं या जिनका आप उल्लंघन करते हैं। उन नीतिवचनों से प्रेम करना मानव-स्वभाव है जो दूसरों, विशेषकर अपने प्रतिस्पर्धियों या दुश्मनों को दोषी ठहराते हैं। लेकिन वास्तविक बुद्धि, जो केवल कुछ दुर्लभ लोगों के पास है, उन नीतिवचनों से प्रेम रखना है जो गलत सोच पर पर चोट करते हैं और आपकी गलतियों और दोष को उजागर करते हैं। क्या आप इतने विनम्र और बुद्धिमान हैं कि यहां परमेश्वर पर पूरा भरोसा कर सकें?
महान परमेश्वर यहोवा आपको सरकारी शासकों का सम्मान करने और उनकी आज्ञा मानने का आदेश देता है। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, महापौर, शेरिफ, क्लर्क और सभी सरकारी अधिकारी शामिल हैं। परमेश्वर ने इन पदों को नियुक्त किया और उनके निर्वहन के लिए व्यक्तियों को चुना, इसलिए वह उनके प्रति आपकी श्रद्धा को अपने प्रति आपकी श्रद्धा से जोड़ता है। यहां परमेश्वर की महिमा और राष्ट्रों की शांति के लिए बुनियादी बुद्धि है।
वह आपको क्रांतिकारी बयानबाजी करनेवाले, विचारोंवाले या योजनाओं वाले लोगों से बचने का भी आदेश देता है। ऐसे क्रांतिकारी बयानबाजी करनेवाले, विचारोंवाले या योजनाओं वाले लोग मनुष्यों के विरूद्ध राजद्रोह और देशद्रोह और परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह करने के दोषी हैं, और वे दण्ड के पात्र हैं (रोमियों 13:1-2)। चूँकि आप नहीं चाहते कि आपका जीवनसाथी, बच्चे या कर्मचारी आपके विरुद्ध विद्रोह भड़काएँ, इसलिए यह आपका कर्तव्य है कि आप सरकारी शासकों के लिए भी वही मानक स्थापित करें।
यदि आप एक शांतिपूर्ण, समृद्ध, परमेश्वर द्वारा अशिषित जीवन चाहते हैं, तो इस नीतिवचन और इसके कठोर ज्ञान के प्रति समर्पण करें। परमेश्वर स्वतंत्र विचारकों और बात करने वालों से, और उन्हें पढ़ने या सुनने वालों से बैर रखता है। वह कहता है, “वे ढीठ, और हठी हैं, और ऊँचे पदवालों को बुरा भला कहने से नहीं डरते” (2 पतरस 2:10)। आपने बुद्धि के लिए परमेश्वर का वचन पढ़ा है। यह वही वचन है। इसे मान लें, और फलवंत हो जाएं।
क्या आप 1957-58 की या 1942 की भारत स्वतंत्रता की क्रान्ति का हिस्सा होते? यह एक अच्छा प्रश्न है, लेकिन कई ऐतिहासिक कारकों और बहुत अधिक संशोधन को अगर देखें तो ऐसी स्वतंत्रता की क्रान्तियाँ इस नीतिवचन के दायरे से बाहर हैं। फिर भी, इसका उत्तर बुद्धिमान व्यक्तियों द्वारा संजीदगी से दिया जा सकता है और दिया जाना चाहिए। सोचें; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि परमेश्वर ने उस क्रांति का उपयोग कैसे किया; यह मायने रखता है कि उसने क्रांति के बारे में क्या कहा।
सुलैमान यहाँ अपने पुत्र को यहोवा का भय मानना सिखा रहा है। परमेश्वर का भय सिखाया जा सकता है, जैसा कि दाऊद ने दिखाया (भजन 34:11)। चूँकि यह बुद्धि और ज्ञान का आरम्भ और लक्ष्य है, इसलिए इसे सबसे पहले और बार बार सिखाया जाना चाहिए (नीतिवचन 1:7; 9:10; 19:23; 22:4; 23:17; भजन 111:10; सभो 12: 13)। यह बुद्धि का झरना और नींव है, पृथ्वी पर सबसे कीमती चीज़ है (अय्यूब 28:1-28)।
फिर उसने राजा का भय मानने को कहा, क्योंकि भय दोनों का मानना है। यहोवा पहले है, क्योंकि आप सबसे पहले परमेश्वर का भय मानते हो। उसका भय मानना राजा के ऊपर है, और आप परमेश्वर के कारण राजा का भय मानते हो। आप सबसे पहले परमेश्वर के प्रति कर्तव्य के कारण सरकार से डरते हैं और उसका पालन करते हैं (रोमियों 13:1-5; 1 पतरस 2:13-17)। फिर आप परमेश्वर द्वारा निर्धारित अधिकार को बनाए रखने और राष्ट्र की शांति बनाए रखने के लिए शासकों का समर्थन करते हैं।
राजा से डरने का एक और कारण है – वह अपने अधिकार का विरोध करने पर आपको दंडित कर सकता है। पौलुस ने लिखा कि सरकारी शासक व्यर्थ में तलवार नहीं उठाते; वे अपने शासन के अधीन लोगों पर परमेश्वर-प्रदत्त नियंत्रण बनाए रखने के लिए जुर्माना लगाने, कैद करने या मारने के लिए अपने अधिकार का उपयोग करेंगे (रोमियों 13:3-4)। इसलिये तुम्हें उनसे डरकर और विवेक के कारण परमेश्वर के प्रति समर्पण करना चाहिए।
आंतरिक और बाहरी राजनीतिक अशांति, सरकार की अत्यधिक जांच और प्रदर्शन, सरकारी हस्तक्षेप और विनियमन में वृद्धि, क्रांतिकारी नागरिकों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग और अहंकारी, अज्ञानी मीडिया की दुनिया, इन सब के बीच, यहां स्वर्ग से आवश्यक, मूल्यवान, और ईश्वर-प्रेरित बुद्धि है। कुलीन लोग इस पर विचार करेंगे और तदनुसार अपना जीवन समायोजित करेंगे। वे जानते हैं कि इसे एक राजा ने स्वर्ग में विराजमान राजाओं के राजा से प्रेरित होकर लिखा।
जब आप इस नीतिवचन पर ध्यान से विचार करेंगे तो आपको दो शब्द समझ में आएंगे जो आज शायद ही कभी इस्तेमाल किए जाते हैं:
साथ मिलना। लोगों में घुलना-मिलना या शामिल होना; दखलंदाजी करना, संगति करना।
बलवा करनेवाले। की ओर झुकाव रखना, प्रवृत्त, आदी, प्रेरित।
जब आप लोगों के साथ मिल जाते हैं या उनके साथ जुड़ते हैं तो आप उनके साथ मिलकर “बलवा” करते हैं, या दखलंदाजी करते हैं। परमेश्वर उन लोगों से घृणा रखता है जो सरकार की आलोचना करते हैं, इसलिए अगर आप उनके साथ मिल जाते हैं तो वह आपकी भर्त्सना करता है। आपको उनसे, उनके दर्शन से और उनकी योजनाओं से बचना चाहिए। उनके साहित्य को पढ़ने, उनकी बातें सुनने, या उन राजनीतिक घटनाओं के लिए उनके स्पष्टीकरण पर विचार करने में कोई बुद्धिमानी नहीं है जिनके बारे में वे कुछ भी नहीं जानते हैं।
कोई व्यक्ति तब बलवा करता है जब उसका रुझान उस ओर होता है। कुछ लोग सरकार की आलोचना और तिरस्कार करते हैं और बदलाव चाहते हैं। ऐसे लोग आम तौर पर घृणित, आलोचनात्मक, घमंडी और विद्रोही होते हैं। वे बात करना, नेतृत्व करना और न्याय करना चाहते हैं, हालाँकि परमेश्वर ने उन्हें शिक्षक, नेता या न्यायाधीश नहीं बनाया है। परमेश्वर तुम्हें उनसे बचने का आदेश देता है। आपको चेतावनी दी गई है।
आप क्रांतिकारी नहीं हो सकते। सरकार लोगों द्वारा नहीं है – सरकार परमेश्वर द्वारा है। स्वतंत्रता की घोषणा न तो बाइबल से प्रेरित है और न ही उससे ली गई है। अगर आप बदलाव के लिए वोट करना चाहते हैं तो वोट करें, जो आपका संवैधानिक हक़ है। बाइबल परिवर्तन के लिए वैध कामों का समर्थन करती है (नेह 2:1-8; प्रेरितों 22:25; आदि)। लेकिन आप सरकार का तिरस्कार नहीं कर सकते या सरकार की अवज्ञा का समर्थन नहीं कर सकते, क्योंकि परमेश्वर ऐसे विद्रोहियों को गंभीरता से दण्ड देता है, जैसा कि अगले ही नीतिवचन में बताया गया है (नीतिवचन 24:22)।
किसी भी स्थापित सरकार को बदलने की कोशिश करना देशद्रोह का पाप है; यह शरीर का काम है और ऐसा मनुष्य परमेश्वर के राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगा (गला 5:20; 2 तीमु 3:1-5)। जबकि कुछ लोग खुद को देशभक्त कहते हैं, वे अराजकतावादी हैं – मौजूदा सत्ता के खिलाफ विद्रोही। सरकार के प्रति यह रवैया ख्रिश्चन धर्म के विपरीत है (रोमियों 13:1-7; 1 पतरस 2:13-17)। यीशु ने परमेश्वर के अपने राष्ट्र पर एक वास्तविक सरकार का सम्मान किया, इसलिए अपने वैधानिक संवैधानिक पाखंड को दूर करें।
जो लोग सरकार की आलोचना करते हैं, तिरस्कार करते हैं, या उसे चुनाव से पहले ही गिराना या बदलना चाहते हैं, वे परमेश्वर के अनुसार क्रूर जानवर हैं, जिन्हें पागल कुत्तों की तरह नष्ट करने की आवश्यकता है (2 पतरस 2:10-12; यहूदा 1:8-10)। उन्हें सरकार के बारे में कोई जानकारी नहीं है और वे अपनी अज्ञानता में ही नष्ट हो जायेंगे। उनका वर्णन और निंदा करने के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को अच्छी तरह पढ़ें, क्योंकि यह परमेश्वर के प्रेरित शब्द हैं। वह ऐसे “स्वतंत्र विचारकों” के प्रति इतना कठोर क्यों है? क्योंकि वे उसका और उसके अध्यादेश का विरोध करते हैं।
सरकार का तिरस्कार या विरोध करने वाले नागरिक वैसे ही हैं जैसे बच्चे माता-पिता के खिलाफ विद्रोह करते हैं, पत्नियाँ पतियों को कमजोर करती हैं, और यूनियनें कम्पनियों को बंद करा देती हैं। यह विद्रोह है, और केंद्रीकृत सत्ता के प्रति लोगों की नफरत इसे स्कूल के शुरुआती दिनों से ही बढ़ावा देती रही है। बच्चों, पत्नियों या कर्मचारियों के उस रवैये या कार्यों के परिणामों पर विचार करके सरकार के प्रति अपने दृष्टिकोण या कार्यों का मूल्यांकन करना उपयोगी ज्ञान है।
सरकार विरोधी विचारकों और बात करने वालों को उनके वैवाहिक जीवनों और घरों में विद्रोह का सामना करते देखना सिर्फ उनके विद्रोह का प्रतिफल है। मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा (गला 6:7), जिसमें अहंकार या किसी अधिकारी के प्रति विद्रोह भी शामिल है। आपको चेतावनी दी गई है। परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि सरकारी शासकों के विरुद्ध तुम्हारा अहंकार उसके विरुद्ध है। वह आपके घर या व्यवसाय में आपके नेतृत्व को बर्बाद कर देगा और आपको नीचे गिरा देगा।
मूर्ख और ठट्ठा करने वाले राजनीतिक शासन के द्वारपाल होने के बारे में भौंकेंगे और विलाप करेंगे, लेकिन वे उसे भूल जाते हैं जो सर्वोच्च से भी ऊंचा है (सभो 5:8)। अगर आप अपने विचारों में भी राजा को कोसते हैं तो वह उसकी भी निंदा करता है (सभो 10:20)। राजा का मन परमेश्वर के हाथ में है, जहां वह आपकी तुलना में कहीं अधिक बढकर धार्मिकता और अधिक कुशलता से बदलाव ला सकता है (नीतिवचन 21:1-4)। यदि आप सोचते हैं कि आप इसे बेहतर कर सकते हैं, तो आपको परमेश्वर होना चाहिए, और उसे आपका सेवक होना चाहिए।
किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और सुरक्षा शासकों से सवाल करने या उनका विरोध करनेवाले सतर्क नागरिकों पर निर्भर नहीं करती है – बल्कि वे राष्ट्रों के शासक का पालन करने और उससे प्रार्थना करनेवालें नागरिकों के विश्वास और धार्मिकता पर निर्भर करती हैं। परमेश्वर उचित रूप से राजाओं को स्थापित करता है और उन्हें नीचे गिरा देता है, मनुष्य नहीं (दानि 2:20-21)। आपको क्या लगता है कि क्यों यीशु मसीह को राजाओं का राजा कहा जाता है? परमेश्वर को आपकी आवश्यकता नहीं है कि आप उसके द्वारा स्थापित सरकार की अवज्ञा करके पापपूर्ण ढंग से धार्मिक कार्य करने में उसकी सहायता करें।
एक ख्रिश्चन व्यक्ति को सरकार की अवज्ञा कब करनी चाहिए? केवल तभी जब सरकार उसे परमेश्वर की आज्ञा तोड़ने का आदेश देती है। प्रेरितों ने घोषणा की, “मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही हमारा कर्तव्य है” (प्रेरितों 5:29)। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार आपके जीवन के बाहर क्या करती है, क्योंकि वे परमेश्वर को जवाब देंगे। उनके द्वारा आपके लिए बनाए गए हर अध्यादेश का तब तक पालन करना आपका कर्तव्य जब तक कि परमेश्वर के लिखित वचनों की स्पष्ट आज्ञाओं के साथ स्पष्ट और प्रत्यक्ष व्यक्तिगत टकराव न हो।
हो सकता है कि सरकारी शासक दुष्ट जीवन जी रहें हो; हो सकता है कि वे पापपूर्ण जीवनशैली को बढ़ावा दे रहें हो; वे बाइबल की नैतिकता के विपरीत भी कानून स्थापित कर सकते हैं; वे कर राजस्व का उपयोग दुष्ट उद्देश्यों के लिए भी कर सकते हैं; वे धर्मी पर अन्धेर कर सकते हैं; वे अधर्मियों का बचाव कर सकते हैं। लेकिन जब तक उनके कानून सीधे तौर पर आपको व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं करते, तब तक आपको परमेश्वर के अधीन अवज्ञा करने या विद्रोह को बढ़ावा देने का कोई अधिकार नहीं है।
आपको प्रभु यीशु मसीह का अनुसरण करना ज़रूरी है, जिन्होंने राजाओं का राजा होते हुए भी, इस्राएल पर कैसर की कर लगाने वाली सरकार के अधीन कर दिया और सभी अनावश्यक राजनीतिक अपराधों से दूर रहे (मत्ती 17:24-27; 22:15-22)। बाद में, दुनिया पर अपने संप्रभु शासन का प्रयोग करते हुए, उसने सन 70 में इस्राएल राष्ट्र और 476 में रोमी साम्राज्य का अन्त कर दिया। वह लोहे के राजदण्ड के साथ स्वर्ग और पृथ्वी पर शासन करता है, और कोई भी सांसारिक शासक उसे कोई दुःख नहीं पहुँचा सकता।
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