नीतिवचन 24:2

क्योंकि उनके मन विनाश सोचते रहते हैं, और उनके मुँह से दुष्टता की बात निकलती है।

बुरे लोगों के विषय में कभी डाह न करना, उनकी संगति की कभी चाह न रखना (नीति 24:1)। परमेश्वर जानता है कि उनके बाहरी दिखावे के कारण आप उनकी प्रशंसा करने के लिए ललचाएंगे, परंतु इसके विरूद्ध में मजबूत कारण उपलब्ध हैं। यहां उन कारणों में से एक कारण है – उनका चरित्र भ्रष्ट है और उनके लक्ष्य बुरे हैं। अगर आप परमेश्वर से प्रेम करते हैं, तो आप उनकी महत्वाकांक्षाओं और इरादों से घृणा करेंगे। उनकी राय र्इश्वरीय बुद्धि के विपरीत है।

यह पद एक नीतिवचन का दूसरा आधा भाग है। पहले भाग में लिखा है, ‘‘बुरे लोगों के विषय में डाह न करना, और न उनकी संगति की चाह रखना’’ (नीति 24:1)। सुलेमान ने अपने पुत्र को यहां और अन्य स्थलों पर चेतावनी दी कि वह दुष्टों से इर्ष्या न करे, और न ही उनकी दिखार्इ पड़ने वाली समृद्धि और सुखों से क्षुब्ध हो (नीति 24:19-20; 3:31-32; 23:17-18)। दाऊद ने उसे यह सिखाया था (भजन 37:1-2, 7-10; 73:1-3)।

परमेश्वर कुछ दुष्टों को सुख और सफलता देता है, क्योंकि यह संसार ही उनके लिए एकमात्र स्वर्ग है जो उन्हें मिलता है (भजन 17:14; अय्यूब 12:6-11; 21:7-26)। ऐसी आशीष मूर्खो की समृद्धि है, और केवल मूर्खो को ही इसे देखकर प्रलोभन आता है (नीति 1:32; भजन 50:21; यिर्म 48:11-12)। यह धनी और प्रख्यात लोगों की सुखद जीवनशैली है, जो अब पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है, जो अच्छे मनुष्यों को लुभा सकती है।

परंतु परमेश्वर और सुलेमान की चेतावनियां जोर से गूंजती हैं: उनसे डाह न करो! उनके कारण क्षुब्ध मत हो! उनके साथ रहने की इच्छा मत करो! उनके दिखावे को नजरअंदाज करो; समझदार बनो; लुभावने कपड़े, तेज गति वाली कारें, बड़े-बड़े घर, विलासमय छुट्टियां, और ठेर सारा नगद रूपया जैसे प्रलोभनों से ऊपर उठकर बहुत गहरार्इ से विचार करो। विचार करने के लिए और दूसरी चीजें हैं जो कहीं अधिक वजनदार हैं और जिसमें भावी समय के भाग्य के बड़े उलटफेर भी शामिल हैं।

परमेश्वर के प्रति र्इमानदार रहें (यिर्म 12:1)। क्या आप कभी चाहते हैं कि आपके पास उनके जैसे सुंदर जीवनसाथी, विशाल घर, शानदार व्यवसाय, सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में बच्चों की पढाई, प्रसिद्धि भरा सम्मान, आर्थिक ताकत, और बहुत-सी चीजें हो? उन्हें परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए सतर्क और अनुशासित जीवनों के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है – वे जो कुछ चाहते हैं, वे कर सकते हैं। क्या आप कभी उनकी जीवनशैली से डाह रखते हैं?

आपको दुष्टों से डाह क्यों नहीं रखना है? इस नीतिवचन में यह शिक्षा दी गयी है क्योंकि उनका चरित्र विध्वंस और उत्पात के कारण भ्रष्ट होता है। वे यौन शुद्धता को आकस्मिक यौन संबंध से नष्ट कर देते हैं, विवाह को प्रेम संबंधों और तलाक से, विवेक को समलिंगी यौन संबंध वाली बकवास से, और बच्चों को लाड़-प्यार से नष्ट कर देते हैं। वे एक भूकंप के बाद हैती के शैतान-आराधकों के पास धन लेकर जाते हैं, जबकि अपने स्वयं के अजन्मे बच्चों को पृथक करने के लिए गर्भपात चिकित्सक का उपयोग करते हैं क्योंकि उनका कहना है कि वे एक बच्चे का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं!

उन्हें विध्वंस पसंद है। वे गर्भ में पल रहे बच्चे को मार देते हैं। वे कला को पिकासो से, संगीत को रैप से, और मनोरंजन को हास्य नाटकों से खत्म कर देते हैं। वे कंपनियों को संघों से, एक उचित दृष्टिकोण को विकासवाद से, और वित्तिय र्इमान को घाटे के खर्च से नष्ट कर डालते हैं। वे घर की शांति को कुत्सित महिलाओं और बिगड़ैल संतानों से भंग करते हैं। वे लाभ को उधार से, श्रम को कल्याण से, जीवन को हत्यारों को बचाकर, और प्रेम को लालसा से नष्ट कर डालते हैं। वे विध्वंस को पसंद करते हैं।

उन्हें उत्पात पसंद है। वे हिंसक फिल्मों की अनुमति देते हैं, और फिर हैरान होते हैं कि विद्यालयों में हिंसा क्यों होती है। वे उद्विकासवाद को आगे बढ़ाने के लिए सृष्टि के निर्माण से इंकार करते हैं और हैरान होते हैं कि क्यों युवा अधिकाधिक जानवरों जैसा व्यवहार करते हैं। वे जहां सत्ता का मजाक उड़ा सकते हैं, उड़ाते हैं और हैरान होते हैं कि क्यों कोर्इ भी उनका अनुसरण या आज्ञा पालन नहीं करता है। वे खर्च को एक गुण के रूप में आगे बढ़ाते हैं और हैरान होते हैं कि कोर्इ बचत क्यों नहीं करता। उन्हें लगता है कि बिछौने में दो पुरूषों का होना विवाह है और दो महिलाओं कां बच्चों को गोद लेना परिवार है। उन्हें उत्पात पसंद है।

यह संसार विकृत है और बिगड़ता जा रहा है। पीढ़ियों से समाज में लाभकारी नैतिक विचार नहीं रहा है। उनसे डाह क्यों? इस संसार के भ्रष्ट विद्रोह के कारण परमेश्वर के धर्मी प्रतिशोध से यह संपूर्ण संसार और जो कुछ भी इसमें है, वह जल्द ही उष्ण गर्मी से पिघल जाएगा। किंतु इससे भी बढ़कर कि उनका निश्चित विनाश जो नजदीक आ रहा है, आप प्रत्येक विषय पर उनकी भ्रष्ट और विकृत सोच के लिए क्योंकर ललचाएंगे? सब मिथ्या मार्गों से बैर रखना सीखिए (भजन 119:128)।

धर्मी मनुष्य विध्वंस और उत्पात की मानसिकता व जीवनशैली से कोर्इ संबंध नहीं रखना चाहते हैं। इसके बजाय वे रचनात्मक और महान बनना चाहते हैं। विध्वंस करने के स्थान पर, वे बचाएंगे। उत्पात की योजना के स्थान पर, वे दूसरों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं। वे किसी भी दोषपूर्ण चीज से घृणा करते हैं, अत: वे बुद्धि, सत्य, और धार्मिकता का अनुसरण करने के लिए अनुशासित व संरचित होते हैं। ऐसे मनुष्यों से डाह रखने का कोर्इ कारण नहीं है जो आपके पवित्र लक्ष्यों के विपरीत जीवनशैली जीते हैं। उन्हें ठुकरा दो!

आपको दुष्टों से डाह क्यों नहीं रखना है? क्योंकि परमेश्वर उनसे घृणा करता है और उनका न्याय करेगा (नीति 3:31-32)। क्योंकि वे पुरस्कृत किए जाने के बजाय नष्ट किए जाएंगे (नीति 24:19-20)। क्योंकि केवल धर्मी ही अपनी उम्मीदों को पूर्ण करेंगे (नीति 23:17-18)। क्योंकि दुष्टों को इस जीवन में पृथक कर दिया जाएगा और अगले जीवन में नरक भेज दिया जाएगा (भजन 37:1-2, 7-10; 49:6-15; 73:17-20; 37:34-38)।

सफलता को परिस्थितियों या उन चीजों से मत आंकिए जिन्हें आप देख सकते हैं (लूका 12:15)। इस जीवन में एक व्यक्ति के लिए परमेश्वर का प्रेम प्राय: उसकी संपत्ति से प्रतिबिंबित नहीं होता है (याकूब 2:5)। एक व्यक्ति जो आज धनी है, कल मर जाएगा और नरक की पीड़ा को भोगेगा, किंतु जो आज निर्धन है, कल आसानी से स्वर्ग में होगा, जैसा कि यीशु ने सिखाया (लूका 16:25)।

उनके संग रहने की चाह मत करो क्योंकि वे आपकी र्इश्वरीय अनुभूति वाली आदतों और उत्तम चालचलन को भ्रष्ट कर डालेंगे (1 कुरिन्थ 15:33)। मूर्खों के साथी नाश होंगे, किंतु जो बुद्धिमान के साथ संगति रखते हैं, वे बुद्धिमान होंगे (नीति 13:20)। संसारी मनुष्यों का निरंतर उत्पात की ओर झुकाव आपको उनकी अज्ञानता के कारण पैदा हुर्इ विकृत समस्याओं में डूबो देगा। उनसे दूर हो जाए! उनसे डाह मत करें! इसके बजाय उनका और उनकी तुच्छ वस्तुओं का तिरस्कार करें!

अब दुष्ट लोगों से डाह करने के बजाय उनसे घृणा करने के कारण हैं, किंतु एक दिन ऐसा भी आ रहा है जब धर्मी और दुष्टों की समृद्धि और सुख पूर्ण रूप से उलट जाएंगे। केवल इस जीवन के विषय में न सोचें, यह आपको निराश कर सकता है – क्योंकि मसीहत मुख्यत: अगले जीवन का धर्म है (1 कुरिन्थ 15:19; 2 कुरिन्थ 4:17-18)। भले लोगों की देह जल्द ही परिवर्तित हो जाएगी और वे अनंतकाल तक के लिए नर्इ पृथ्वी और नए स्वर्ग का आनंद लेंगे (2 पतरस 3:10-14)।

यीशु मसीह ने कभी भी दुष्टों से डाह नहीं किया, और न उनके साथ रहने की चाह की, जब तक कि वे पश्चाताप करने वाले पापी न हों। उसने स्वर्ग के आनंद और सुख को महत्व दिया, इसलिए क्रूस पर की मृत्यु ने भी उसे निरूत्साहित नहीं किया (इब्र 12:1-2)। जब शैतान ने संसार के राज्यों का प्रस्ताव उसके सामने रखा, वे भी उसे लुभा न सके (मत्ती 4:8-10)। क्या आप मूसा के समान, इस संसार के सुखों और आनंद को परमेश्वर और उसकी प्रजा के कष्ट और दुःख तक के लिए उड़ा देंगे? (इब्र 11:24-26)।

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