नीतिवचन 24:12

यदि तू कहे कि देखो हम जानते न थे; तो क्या वह जो अंतःकरण को जांचता है, यह नहीं सोचेगा? और जो तेरे प्राण का रक्षक है सो क्या नहीं जानता? और क्या मनुष्य को उसके कार्य के समान पलटा न देगा? (केजेवी)

अपने बहाने बचाकर रखो। वे काम न आएंगे। आप उस परमेश्वर को, जो आपके अंतःकरण को जांचता है, और आप के प्राण का रक्षक है, उसे आप न तो धोखा दे सकते हैं और न ही फंसा सकते हैं। वह आपके विचारों को जानता है, और वह आपको उसके अनुसार बदला देगा। आप अपनी बहानेबाजी से दूसरों को बेवकूफ बनाकर अपने को निर्दोष ठहराने का प्रयत्न कर सकते हैं; परंतु महान परमेश्वर पर इतनी आसानी से कोई असर नहीं पड़ता।

इस गम्भीर चेतावनी को इससे पहले के नीतिवचन के प्रकाश में समझा जाना चाहिए, “यदि तू मृत्यु की ओर खींचे गयों को और उन्हें जो मारे जाने पर हैं, बचा न ले” (नीति 24:11)। किसी निर्दोष को अन्यायपूर्ण मृत्यु से बचाने में आपकी विफलता के लिए परमेश्वर आपको जवाबदेह ठहराएगा। यदि आप जीवन को बचाने में विफल हो जाते हैं, तो परमेश्वर उचित ही आपको दण्ड देगा, चाहे आप कितने ही बहाने क्यों न बनाएं कि आप इससे अनजान थे।

जहां कहीं खर्चा, परिश्रम, या खतरा हो, वहां ज्यादातर लोग शामिल नहीं होंगे, जैसा कि प्रभु यीशु मसीह द्वारा सिखाए अच्छे सामरी का सबक हमें दिखाता है। याजक और लेवी, जो भले ही घायल यहूदी के हमवतन थे, उन्होंने उसकी कोई मदद नहीं की। यह एक सामरी ही था जो सांस्कृतिक रीति से यहूदियों का शत्रु होने के बावजूद घटनास्थल पर रुका, और ज़ख्मी मनुष्य की व्यापक और विस्तृत रूप से मदद की (लूका 10:29-37)।

अधिकतर लोग अपने सुखद क्षेत्र से बाहर नहीं निकलना चाहते। ज्यादातर लोग उम्मीद करते हैं कि समस्या को कोई और सम्भाल लेगा। अधिकतर लोग किसी झंझट में नहीं पड़ना चाहते, क्योंकि इससे उनका समय और पैसा दोनों ही खर्च हो जाएंगे। ये स्वार्थी और कामचोर लोग अपने आसपास की घटनाओं की अनदेखी करके अपनी दोष-भावना से बचने का प्रयास करते हैं। परंतु कुलीन और सद्गुणी पुरुष और स्त्रियां जागरूक होते हैं और मदद करने शामिल हो जाते हैं, क्योंकि वे भले होते हैं।

इस नीतिवचन में वर्णित व्यक्ति घटना से अनजान बनने का दावा करता है। किसी जीवन को बचा न पाने का यह उसका बहाना है। ऐसी बहानेबाजी से परमेश्वर का दण्ड आता है “जो कंगाल के रोने से अपने कान मूंदता है, वह आप भी रोएगा, परंतु उसका रोना सुना न जायगा” (नीति 21:13); और, “जो कंगालों को देता है उसकी घटी न होगी, परंतु जो आंखें छिपाता है बहुत श्राप पाएगा” (नीति 28:27)।

यहां बेखबरी या आनाकानी करने का पाप है – आपको कुछ करना चाहिए था, परंतु आपने नहीं किया। बहुतेरे केवल ज्ञात पापों के विषय में सोचते हैं – कुछ ऐसा कर देना जो नहीं करना चाहिए था। परंतु परमेश्वर का भय माननेवाले लोग अपना आत्म-परीक्षण उन बातों के प्रकाश में करते हैं जो परमेश्वर ने उनके करने के लिए प्रकट की है, क्योंकि बाइबल कहती है “इसलिए जो कोई उचित काम करना जानता है और नहीं करता, उसके लिए यह पाप है” (याकूब 4:17)।

अपने पापों के लिए कोई बहाने मत बनाओ, क्योंकि वे इस धर्मी न्यायी, अर्थात् परमेश्वर पर बिल्कुल ही कोई प्रभाव नहीं डाल पाएंगे। वह प्रत्येक मनुष्य के मन के उद्देश्य और कार्यों को बारीकी से जांचता है, उनके विषय में सोचता है, और तौलता है (नीति 5:21; 21:2)। जब जब और जहां जहां आपको दूसरों की मदद करने जाना चाहिए वहां जाना मत टालों और न सहभाग लेने से बचों, क्योंकि वह आपसे जवाब मांगेगा (नीति 3:28-29; 17:5; याकूब 4:17; मत्ती 25:41-46)।

परमेश्वर का वचन, जो प्रभु यीशु मसीह है, बहुत तेज और सामर्थ्यशाली है, और वह आपके मन के विचारों और इरादों को जांचता है (इब्रा 4:12)। उसकी आंखों के सामने आपके जीवन की सब बातें खुली और प्रकट हैं (इब्रा 4:13)। इस कारण, अच्छा होगा यदि आप अपने सब कर्तव्यों पर गम्भीरता से विचार करें जो आपको उसके सामने निभाने हैं, और इस नीतिवचन में वह कर्तव्य यही है कि आप उनकी जो जानलेवा खतरों में हैं सहायता करें और उन्हें छुड़ाए (इब्रा 4:14)।

सूचना: ‘सुलैमान’ नाम बाइबल में वर्णित इजराइल के राजा ‘सौलमन’ का हिंदी लिप्यान्तरण है।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।