नीतिवचन 22:7

धनी निर्धन लोगों पर प्रभुता करता है, और उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास होता है।

पैसा ताकत है। जिनके पास यह होता है, वह प्रभुता करते हैं। जिनके पास यह नहीं होता, वह सेवा करते हैं। सुलैमान ने मानव समाज का अवलोकन करके, इस तथ्य को जाना (सभोपदेशक 1:12-18)। यह नीतिवचन एक अवलोकन है: आपको इसमें सीख को खोजना है। सुलैमान ने न तो धनवानों को अत्याचार करना सिखाया और न ही निर्धनों को बलवा करना। बाइबल इन दोनों ही बुराईयों की निंदा करती है। परमेश्वर ने धनी और निर्धन, दोनों को एक दूसरे के लिए बनाया (नीतिवचन 22:2)। इस नीतिवचन का वित्तीय बुद्धि गुप्त है ताकि परिश्रमी लोग उसकी खोज करें (नीतिवचन 1:6)।

पैसा भ्रष्ट करता है। जिनके पास यह होता है, वह अक्सर बुद्धि (नीतिवचन 18:11; 28:11), धर्म (नीतिवचन 30:9; मत्ती 19:24) और अन्य लोगों (नीतिवचन 18:23) के प्रति अंधे होते हैं । जो इसे चाहते है वे इसके घमंड (नीतिवचन 23:5; सभोपदेशक 5:10), प्रलोभन (नीतिवचन 28:20,22) और खतरे (1 तीमुथियुस 6:9-10) के प्रति अंधे हो जाते हैं। पैसा अपने आप में चरित्र का प्रमाण नहीं है, क्योंकि परमेश्वर मूर्खों को भी समृद्धि देता है (नीतिवचन 1:32; भजन 49:6-20)। वह स्वामी और दास, दोनों को भ्रष्ट कर सकता है, परंतु दोनों ही मसीह के प्रति जवाबदेह हैं (इफिसियों 6:5-9)।

पैसों में उद्यमता की शक्ति होती है। यह आपको संकट से निकाल सकता है (सभोपदेशक 7:12; 10:19)। यह दूसरों को उधार में दिया जा सकता है, जो उन्हें देनेवाले का दास बना देता है। परमेश्वर ने इज़राइल में निर्धनों की आर्थिक शोषण से रक्षा की, लेनदारों द्वारा ब्याज या शर्तो का उपयोग नहीं किया जा सकता था (नीतिवचन 14:31; 22:16,22; निर्गमन 22:25; लैव्यव्यवस्था 25:36-37; व्यवस्थाविवरण 15:1- 11)। ब्याज केवल मूर्तिपूजक अविश्वासियों से लिया जाता था (व्यवस्थाविवरण 23:19-20। लोग जो काम नहीं करते थे, उन्हें आर्थिक सहायता से वंचित रखा जाता था, क्योंकि भूख सबसे अच्छी शिक्षक है (नीतिवचन 16:26; 20:4; 2 थिस्सलुनीकियों 3:10)।

परमेश्वर इज़राइल को एक साहूकार राष्ट्र बनाना चाहता था, जो ऋण देता है (व्यवस्थाविवण 28:12-13, 43-44)। उधार देने वाला सिर और उधार लेने वाला पूँछ होता है। लेनदार, देनदार पर प्रभुता करता है। यदि इज़राइल ने परमेश्वर की आज्ञा मानी, तो उसने उन्हें लेनदार बनाने का वादा किया; यदि उन्होंने उसकी अवज्ञा की, तो उसने उन्हें देनदार बनाने का वादा किया। वित्तीय ऋण के कारण दास बन जाने की तुलना में, परमेश्वर के पास अपने लोगों के लिए कहीं बेहतर चीज़ें हैं। आपको काम-काज करते रहना चाहिए और कर्ज़ से बचने के लिए बचत करनी चाहिए (रोमियों 13:8; 1 कुरिन्थियों 7:21)।

पवित्र जीवन जीने की महत्वाकांक्षाएं मूर्खतापूर्ण या अनावश्यक उधार से बचाती है (1 कुरिन्थियों 3:32)। ऋण का भुगतान समय पर किया जाना चाहिए (नीतिवचन 3:27-28; रोमियों 12:17)। व्यक्तिगत दिवालियापण ख्रिश्चनों के लिए नहीं है (भजनसंहिता 37:21; 1 पतरस 4:15)। धर्मीजन पर्याप्त आय और संपत्ति के लिए प्रार्थना करते हैं (नीतिवचन 30:7-9)। प्रत्येक विश्वासी के पास स्वयं के लिए पर्याप्त और इतना धन होना चाहिए कि वह दूसरों की मदद कर सके (थिस्सलुनीकियों 4:11-12; इफिसियों 4:28)। सच्चे उद्धार में वह सब कुछ चुकाना भी शामिल होता है जो आप पर बकाया है (लूका 19:8-9)।

अपने पर ऋण को कम करना बाइबल के अर्थशास्त्र का एक नियम है। आज हमारा देश और देश के नागरिक, दोनों ही कर्ज में डूबे हैं; हमारी सरकार देश की भोलीभाली जनता को मूर्ख बनाने के लिए देश तरक्की का दिखावा करने बाहरी देशों से कर्जा ले लेकर इसका प्रचार करती है; आसानी से मिलने वाले उधार इसे बढ़ावा देते हैं; कर के नियम इसे प्रोत्साहित करते है, हमारी अदालतें दिवालियापण के क़ानून की आड़ में आर्थिक घोटालेबाजों को बचाती हैं। परमेश्वर इसे मूर्खता और दासत्व समझता है (व्यवस्थाविवरण 1516; नेहम्याह 5:1-13)। आज हमारा देश एक पूँछ बनकर रह गया है! एक आर्थिक रूप से गुलाम राष्ट्र! सरकार के भक्त चाहे कुछ भी सोचें! हमारी सरकार ने ऋण के पिरामिड के ऊपर ताश के पत्तों का घर बनाया है। शून्य गिरवी शुल्क और केवल ब्याज ऋण? परमेश्वर न करे ऐसा हो! सिर (वे देश जिनसे सरकार ने ऋण लिया है) जल्द ही पूँछ को हिलाएगा, और ताश के पत्तों का घर वित्तीय अव्यवस्था में ढह जाएगा और बर्बाद हो जाएगा।

केवल मूर्ख ही उत्तोलन से प्रेम रखते हैं; क्योंकि वह दोनों ओर से कटौती करता है। सुलैमान ने अक्सर वित्तीय जोखिमों के विरुद्ध चेतावनी दी (नीतिवचन 6:1- 5; 11:15; 17:18 ; 20:16; 22:26-27; 27:13)। निर्धन को कभी भी उधार नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ब्याज उनके लिए अधिक होता है, और उनके पास उधार चुकाने के लिए कोई संपत्ति नहीं होती। निर्धन लोग अपने मूर्खतापूर्ण खर्चों और उधार लेने की आदतों के कारण हमेशा निर्धन ही रहते हैं। क्रेडिट कार्ड सभी के लिए एक अभिशाप है, केवल उन्हें छोड़कर जो सच में बुद्धिमान हैं – उधार जितनी आसानी से मिलता है, शुल्क उतना ही अधिक होता है।

एक धर्मी मनुष्य देनदारी में यथार्थ होता, क्योंकि वह हमेशा समय पर उधार चुकाता है (लूका 16:10-12; 1 कुरिन्थियों 10:32; 1 थिस्सलुनीकियों 4:12)। वह दूसरों को उधार देने की क्षमता चाहता है, यदि उसे कभी उसकी आवश्यकता पड़े (नीतिवचन 22:3)। वह एक उधार देने वाला और एक दाता है, जो अनंत जीवन को थामे हुए जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए तैयार रहता है (नीतिवचन 28:8; भजन संहिता 112:9; 1 तीमुथियुस 6:17-19)। वह जानता है कि संपत्ति बुद्धिमान लोगों का रहस्य है (नीतिवचन 21:20; इफिसियों 4:8)।

यदि आप उचित ही निर्धन हैं, तो व्याकुल न हों। यह एक अच्छा चिन्ह है, क्योंकि परमेश्वर के चुने हुएं लोगों में कई निर्धन हैं (लूका 1:53; 1 कुरिन्थियों 1:26-29; यूहन्ना 2:5)। हो सकता है, आप पृथ्वी पर एक धनी अत्याचारी व्यक्ति के दास हों, परंतु आप प्रभु के स्वतंत्र व्यक्ति भी हो। और यदि आप पृथ्वी पर एक स्वतंत्र व्यक्ति हो, तो आप प्रभु के दास हो (1 कुरिन्थियाँ 7:22)। परमेश्वर ने दोनों को भली चीजों के लिए बनाया है ( नीतिवचन 22:2)। आनंद मनाएं!

धनी और निर्धन की एक सच्ची घटना है जिसमे पवित्रजनों को आशीषित किया गया है। यीशु मसीह स्वयं परमेश्वर होने के नाते अति धनी थे (फिलिप्पियों 2:5-6)। वह नासरत के एक निर्धन बढ़ई के पुत्र बने और एक क्रूस पर मारे गए (फिलिप्पियों 2:7-8)। क्यों? ताकि परमेश्वर के चुने हुए लोग, जो अपने पापों के कारण अनंत पीड़ा की मजदूरी देने के लिए दोषी ठहराए गए थे, वे उनकी (परमेश्वर की) निर्धनता के माध्यम से अनंत जीवन और स्वर्ग के धनवान उत्तराधिकारी हों (2 कुरिन्थियों 8:9)। परमेश्वर ने यीशु के कार्यों का प्रतिफित किस प्रकार दिया? उसे युगानुयुग के लिए ऊँचा किया गया (फिलिप्पियों 2:9-11)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।