नीतिवचन 22:5

टेढ़े मनुष्य के मार्ग में काँटे और फन्दे रहते हैं; परन्तु जो अपने प्राणों की रक्षा करता, वह उनसे दूर रहता है।

कुछ लोगों के साथ अकसर बुरा क्यों होते रहता हैं? वे हमेशा ऐसी दर्दनाक परिस्थितियों में क्यों फंस जाते हैं जहां से बच निकलने का कोई रास्ता नहीं होता? तो वही कुछ लोग ऐसे क्यों है जिनके जीवनों में शान्ति और समृद्धि होती है, और बहुत कम तकलीफ़ें और परेशानियाँ होती हैं? यह फ़र्क इस बात पर निर्भर करता है कि लोग अपने प्राणों और मन की कैसे रक्षा करते हैं। जो लोग मूर्ख हैं, और सुधार और शिक्षा ग्रहण नहीं करना चाहते, उन्हें निश्चित रूप से दंड दिया जाएगा।

टेढ़ा मनुष्य उपदेश और शिक्षा के विपरीत चलता है; वह मानसिक रूप से विकृत होता है, उसे निपटना मुश्किल, और प्रसन्न करना कठिन होता है; वह दुर्गुणी, चंचल, बुरा, दुष्ट स्वभाव वाला, और ‘शरारती’ होता है। आप इन ज़िद्दी लोगों को सही और ग़लत की शिक्षा दो तौभी वे उसकी परवाह किए बिना चीजों को अपने ही तरीके से करते हैं। आप चाहे तो टेढ़े मनुष्य की इस परिभाषा की पुष्टि बाइबल में कुछ और शास्त्र-सन्दर्भों को देखकर कर सकते हैं (नीतिवचन 2:15; 4:24; 6:12,14; 8:8; 10:32; 16:28; 17:20; भजन 101:4; 1 पतरस 2:18)।

अपनी मनमर्जी करना भयानक पाप है (2 पतरस 2:10-12)। हर कोई सोचता है कि उसके विचार और काम करने के तरीके सही हैं, लेकिन उनके विचार शायद ही कभी सही होते हैं (नीतिवचन 16:2,25; 21:2)। वह यह सोचकर कि वह अपने पापों से बच जाएगा अपनी ही खुशामद करता है, लेकिन जल्द ही सबकुछ उल्टा हो जाता है जो उसके लिए सिर्फ़ दुख और बर्बादी ही ले आता है (नीतिवचन 14:9; 28:14; भजन 36:1-2)। उसके मन ने उसे धोखा देकर उसे काँटों और फन्दों में फँसा दिया (यिर्मयाह 17:9)।

युवा-पुरुष सबसे ज्यादा टेढ़े होते हैं। अपने माता-पिता और बड़ों की शिक्षा की ओर ध्यान न देते हुए, वे पाप के मार्ग पर बड़ी तेज़ी से निकल पड़ते हैं और फिर खुद को पाप के परिणामों के कांटों और जाल में फँसा हुआ पाते हैं। उन्हें यकीन है कि वे ख़तरों के खिलाड़ी हैं, और कांटों पर चलकर सुरक्षित बचकर निकल सकते हैं और फंदे से बच सकते हैं, इसलिए वे बड़े आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं। सुलैमान ने युवाओं की मूर्खता और उनके घमंड के खिलाफ चेतावनी दी (नीतिवचन 22:15; सभो 11:9-10; भजन 25:7)।

कांटे मानव-जीवन में आनेवाली कष्टदायक कठिनाइयाँ हैं। सरल और आसान रास्ते के बजाय, कांटों का बाड़ा आपके रास्ते को परेशानी और समस्याओं से भर देता है (नीतिवचन 15:19)। अपराधियों का मार्ग कड़ा होता है (नीतिवचन 13:15); उनका जीवन आसान और सुखद नहीं होगा। जब परमेश्वर ने अदन की बाग़ में मनुष्य को उसके पाप के लिए अभिशाप दिया तब उसने सबसे पहले यह कहा कि मनुष्य का जीवन काँटों से भरा होगा (उत्पत्ति 3:17-19), और वे कांटें आज भी उसके लिए अभिशाप हैं (यशायाह 5:1-7 )।

परमेश्वर टेढ़े लोगों से बैर रखता है (नीतिवचन 3:32; 11:20), इसलिए वह भी उनके साथ तिर्छा बनता है (भजन 18:26; लैव्य 26:23-28)। उन्हें आशीर्वाद देने के बजाय, वह उन्हें शाप देता है और उनका न्याय करता है (यिर्मयाह 23:12)। वह उनके हाथों के काम को सुफल करने के बजाए उन्हें अपनी ज्वाला में फूंक देता है और उनकी समृद्धि को रोक देता है (आमोस 4:9; हाग्गै 2:17)। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने कितनी मेहनत कीं, टेढ़े लोगों को परमेश्वर कांटों से चुभाता है, उन्हें फाड़ देता है, उन्हें घायल कर देता है और उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर बिखेर देता है।

बच्चों की परवरिश में लापरवाही करनेवाले पिताओं को उनके विद्रोही बच्चें दुःख के तीर चुभाते हैं (नीतिवचन 19:13; 29:15; 1 राजा 1:6)। बिना सोचे-समझे सिर्फ़ भावना के आवेग में किया गया विवाह अगले पचास वर्षों के लिए दर्दभरे काँटों से भर जाता (नीतिवचन 12:4; 27:15-16; 30:21-23)। बुरी आदतें, अगर उन्हें सुधारा न जाए, तो वे मित्रों की संगति के टूटने का कारण बनती हैं (नीतिवचन 18:24)। लुसलुसी में आकर मूर्खतापूर्ण खरीदारी करने का नतीजा लम्बे समय की दरिद्रता हो सकता है, और आपातकाल के समय जान पर बनी आ सकती है (नीतिवचन 21:17,20)। तीखी जीभ वाद-विवाद और लड़ाई का कारण बनती है (नीतिवचन 15:1,18)। अमीर बनने की जल्दबाजी व्यक्ति को आर्थिक घोटालों और आर्थिक ठगी का शिकार बना देती है (नीतिवचन 28:19,22)।

फंदे वे जाल हैं जो मनुष्यों को पकड़ कर सज़ा देते हैं। डर और परेशानी से मुक्त जीवन जीने के बजाय, मूर्ख लोग अपने पापों के जाल में फंस जाते हैं और विनाश पातें हैं (नीतिवचन 29:6,8; अय्यूब 18:8; 22:10; भजन 11:6)। क्योंकि उन्होंने यहोवा की बुद्धि और सलाह को नहीं माना, इस कारण वह उन्हें सुकून से नहीं जीने देगा (यहोशू 23:13; सभोपदेशक 9:12)। वह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें परिणाम भुगतना पड़े (गिनती 32:23)।

पाप ऐसी समस्याएँ उत्पन्न करता है जिनसे कोई बच नहीं सकता। मनुष्य अपनी मूर्खता में फंस जाते हैं, और यह उन्हें बिना किसी राहत या छुटकारे के दंडित करता रहता है (नीतिवचन 18:7; सभो 10:13; 1 तीमु 6:9)। “धोखा न खाओ; परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा (गला 6:7)।

व्यभिचारी मनुष्य व्यभिचारिणी और उसके घातक पति के बीच फंस जाता है, और अपनी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर देता (नीतिवचन 7:22-23; 6:26-35; 5:20-23)। जो वयक्ति भावावेश के आवेग में आकर किसी ऋण मामले में ज़मानतदार बन जाता है वह खुद को गंभीर देनदारियों में फंसा हुआ पाता है जिसकी उसने कभी योजना नहीं बनाई थी (नीतिवचन 22:26-27)। बेलगाम बात करने वाला अपने पड़ोसी की डाँट-फ़टकार के कारण खुद को शर्मिंदा कर बैठता है (नीतिवचन 25:8-10)।

जो मनुष्य अपने मन और आत्मा की रक्षा करता है वह कांटों और फन्दों से कोसों दूर रहेगा (नीतिवचन 16:17)। इस जीवनरक्षक लक्ष्य को पूरी लगन से प्राप्त किया जाना ज़रूरी है (नीतिवचन 4:23)। ऐसा मनुष्य नम्रतापूर्वक ज्ञान और शिक्षा की बातें सुनता है, और उनका पालन करता है। वह विरोध नहीं करता, विद्रोह नहीं करता, या अपनी राय की रक्षा करने का प्रयास नहीं करता। वह परमेश्वर के वचन को अपने पूरे जीवन में लागू करने के प्रति सावधान रहता है।

जीवन के कांटों और जालों से बचने के लिए आप अपने मन और आत्मा की कैसे रक्षा करते हैं? सबसे पहले आप परमेश्वर का भय मानते हैं, और मनुष्य से नहीं डरते (नीतिवचन 13:14; 29:25)। दूसरा, आप मूर्ख मनुष्यों की संगति से दूर रहते हैं (नीतिवचन 22:25; व्यवस्थाविवरण 7:16; न्यायियों 2:1-5)। तीसरा, आप परमेश्वर के वचन को सुनने में किसी भी चीज़ को बाधा नहीं बनने देते (लूका 8:18)। चौथा, आप जो भी सत्य सुनते हैं उस पर चलते भी हैं। पाँचवा, आप परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह आपको समझने के लिए बुद्धि और आज्ञा मानने का अनुग्रह दे। छटवां, आप उद्धार पाने के लिए अपने मन की गहराई से प्रार्थना करते हैं (भजन 139:23-24); सातवां, आप अपने पैरों के लिये सीधा मार्ग बनाते हैं (इब्रानियों 12:12-13)। और आप जीवन की किसी भी अन्य चीज़ से अधिक परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बनने के लिए शिद्दत से परिश्रम करते हैं (रोमियों 12:1-2)।

यहोवा का भय मानना, और धर्म के मार्ग पर चलना जीवन का सोता है, जिससे आप मृत्यु के फन्दों से बच जाते हैं (नीतिवचन 14:27)। बुद्धिमान पुरुषों के निर्देश और कानून छुटकारे के अतिरिक्त मार्ग हैं (नीतिवचन 13:14)। परमेश्वर का जूआ आसान है और उसका बोझ हल्का है (मत्ती 11:28-30)। आखिर क्यों कर आप अच्छे और आसान मार्ग को त्यागकर दुःखदायी काँटों और भयानक फन्दोंवाले मार्ग को चुनना चाहते हैं?

परमेश्वर कभी-कभी आपको आपके गलत कामों के लिए दंड देने, आपका विश्वास बढ़ाने, आपको किसी अन्य तरीके से सिद्ध करने या अपनी महिमा के लिए आपके जीवन में कांटे भेजता है। बस अय्यूब से पूछो! लेकिन परमेश्वर आपके जीवन में ऐसे कांटे आपके लाभ के लिए एक प्रेमी पिता के रूप में भेजता है। ये ऐसे कष्ट हैं जिनके लिए आपको आनन्दित होना चाहिए, क्योंकि वे आपकी सर्वोच्च भलाई के लिए ठहराएं गए हैं (भजन 119:67,71,75)।

प्रिय पाठक, प्रभु से प्रार्थना करें कि वह आपको पाप से दूर रखने के लिए आपके जीवन में कांटें भेजे। अपने पैरों को बुरी चाल से पीछे रखने के लिए ऐसे फन्दे मांगो जो आपके पैरों को जकड़ लें और आपको धर्म के मार्ग में बनाएं रखें। परीक्षा से बचने के लिए प्रार्थना करो, परन्तु यह भी प्रार्थना करो कि यदि तुम पाप में पड़ जाओ, तो तुम शीघ्र ही सूअर की मानसिकता से घृणा रखते हुए तुरन्त होश में आ जाएं (लूका 15:14-20)। कांटे और फंदे जो आपको आपके पिता की ओर मोड़ते हैं वे शुद्ध भलाई की करुना से भरी चुभन हैं।

प्रभु यीशु ने अपने पिता के प्रति विश्वासयोग्य आज्ञाकारिता में रहकर अपने प्राण की रक्षा की। और जिन कांटों को उसने मुकुट के रूप में पहना था, और जिस फंदे ने उसे तीन दिनों तक कब्र में जकड़े रखा था, उन्हें उसने अपनी इच्छा से इसलिए चुना कि अपने चुने हुओं के पापों के लिए प्रायश्चित्त करे। उन काँटों और उस कब्र के द्वारा हमें नरक के अनन्तकाल की मृत्यु के फंदे से छुटकारा मिल गया है। उसने अपनी सुइच्छा से हमारा अनंतकाल का छुटकारा प्राप्त करने के लिए काँटों से भरा मार्ग चुना (यूहन्ना 10:16-18)। आज ऐसी दया के लिए परमेश्वर की स्तुति करें और दुनिया के लिए यीशु मसीह का जीवित संदेश बनें।

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