नीतिवचन 22:4

नम्रता और यहोवा के भय मानने का फल धन, महिमा और जीवन होता है।

केवल परमेश्वर यहोवा ही महान प्रतिज्ञाओं से निहित चौदह शब्दों में गुप्त ज्ञान सिखा सकता है। उसके गौरवशाली नाम की स्तुति करो! और सच्चे और जीवित परमेश्वर से दिव्य सत्य सीखने के अवसर के लिए उसका धन्यवाद करो। यह दुनिया अपनी शिक्षित अज्ञानता में ठोकर खाती है, और नहीं जानती कि उसमें इतने गरीब, तिरस्कृत और नाकाम लोग क्यों हैं। इस दुनिया के लोग इस ज्ञान या इसके प्रतिफलों को कभी नहीं जान पाएंगे।

यहाँ तीन आशिषों के लिए दो शर्तें हैं। एक बुद्धिमान व्यक्ति इस सरल और प्रत्यक्ष नीतिवचन के पाँच पहलुओं में से प्रत्येक को समझ लेगा। ऐसे ईश्वर-प्रेरित रत्न की उपेक्षा करना खुद को धोखा देना और खुद ही से नफ़रत करना है, क्योंकि ये आशिषे बहुत बड़ी हैं और शर्तें बिलकुल आसान। अपने सृष्टिकर्ता के सामने खुद को नम्र करें, और आपके सामने मौजूद इस ज्ञान के विपरीत उठनेवाले हर एक विचार को त्याग दें।

तो फिर, पहली शर्त है नम्रता। यह अपने बारे में छोटी सोच रखना है। नम्रता मानती है कि आप एक पापी हैं, आपके पास सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं हैं, और परमेश्वर की मदद के बिना आप कुछ भी अच्छा या सही नहीं कर सकते। यह एक ऐसा सद्गुण है जो सुधार को अपनाने, माफ़ी मांगने, सार्वजनिक प्रशंसा से बचने, चुपचाप दूसरों की सेवा करने, सबके सामने संयम रखने, कभी भी अपने बारे में बात न करने और दूसरों की प्रशंसा करने से साबित होता है।

यहोवा का भय मानना इसकी दूसरी शर्त है। यह आपके द्वारा किए जाने वाले हर काम में परमेश्वर का आदर करने की श्रद्धापूर्वक कोशिश करना है। ऐसा व्यक्ति सच्चे परमेश्वर की आज्ञा मानने और उसे प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास करता है, और वह यथासंभव उसके नाम को कलंकित करने से बचता है। आप यहोवा का भय मानते हैं यह इस बात से पहचाना जाता है कि आप में उपदेश को सुनने, बाइबल और धार्मिकता के लिए कितनी लालसा है, और आप पाप से कितनी घृणा करते हैं (नीतिवचन 8:13)।

इसमें धन पहली आशीष है। कभी-कभी ये वित्तीय आशीष होती हैं, लेकिन अक्सर ये अन्य चीजें भी होती हैं। लालची कंजूसों को छोड़कर हर किसी के लिए बैंक खाते में पड़े रूपयों से बढ़कर कई चीजें हैं (नीतिवचन 15:17; 16:8; 17:1)। इसमें वे आध्यात्मिक अशिषे भी शामिल हैं जो आपको इस जीवन और आनेवाले नए जीवन में प्राप्त होती हैं। यदि आप स्वर्गीय धन से निराश या अप्रभावित हैं, तो आप में न तो नम्रता है और न ही आप यहोवा का भय मानते हैं, और न ही आप यह समझते हैं कि वास्तविक धन क्या है (लूका 16:11)।

महिमा दूसरी आशीष है। एक विनम्र व्यक्ति जो प्रभु का भय मानता है, वह परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता जाएगा (लूका 2:52)। महान परमेश्वर अपनी महिमा करनेवालों की महिमा करता है (1 शमूएल 2:30; याकूब 4:10)। जो व्यक्ति यहोवा का भय मानता है, उसकी महिमा सब लोग करते हैं, क्योंकि उसका आचरण अनुग्रहपूर्ण और धर्मी है (नीतिवचन 18:12; 22:11)। लोग उसके मित्र बनना चाहेंगे, और इन दो उत्कृष्ट और असाधारण गुणों के कारण अन्य लोगों के बीच उसे ऊपर उठाया जाएगा।

जीवन तीसरी आशीष है। यहाँ जीवन का अर्थ जिन अर्थों में है, उनमें ऐसी चीजें शामिल हैं जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता (1 कुरिंथ 2:9)। लेकिन शास्त्र में भरपूर जीवन, अच्छा जीवन, आनंदमय जीवन, शांतिपूर्ण जीवन, उत्पादक जीवन, लम्बा जीवन और अनंत जीवन का उल्लेख है। और वर्तमान और अनंत काल दोनों ही परमेश्वर के साथ व्यतीत होंगे जो आपका मित्र होगा (उत्पत्ति 15:1; निर्गमन 33:11)।

आपने कभी ऐसे चौदह शब्द नहीं पढ़े होंगे जो आपको इतने कम में इतना कुछ देने का वादा करते हैं। राजा सुलैमान की कलम द्वारा परमेश्वर की प्रेरित बुद्धि के साथ आप क्या करेंगे? आप किसी और मार्ग से ऐसा धन, ऐसी महिमा और ऐसा जीवन नहीं पा सकते। समृद्धि और सफलता के लिए आवश्यक शर्तों के रूप में नम्रता और परमेश्वर के भय से बचने का कोई शॉर्टकट नहीं है। इस ज्ञान को थाम लो और इसके साथ आगे बढ़ो!

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