नीतिवचन 22:27

यदि भर देने के लिये तेरे पास कुछ न हो, तो वह क्यों तेरे नीचे से खाट खींच ले जाए?

1908 में जब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अपना बिजनेस स्कूल खोला उससे 3000 साल पहले ही सुलैमान ने जोखिम-प्रबंधन की शिक्षा दी थी। सत्य, बुद्धि और ज्ञान समाजवादी शिक्षा, उदार-पंथी प्रोफेसरों, केस स्टडी पद्धति, कीन्स की कोरी कल्पनाओं वाली पाठ्यपुस्तकों, एमबीए, सीपीए या आज के ऑनलाइन शिक्षा-तंत्र पर निर्भर नहीं करते हैं। सच तो यह है, कि शिक्षित मूर्खों के इन शिक्षा प्रणालियों में सत्य और ज्ञान हैं ही नहीं। इससे आपको अचंभित या हतोत्साहित होने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आप इन विकसित बंदरों से और क्या उम्मीद कर सकते हैं।

सबसे अच्छी और प्रतिभाशाली इन शिक्षा प्रणालियों ने हमें क्या दिया है? अवसाद और निराशा की महामारी, बार बार आनेवाली आर्थिक मंदियाँ, तेजी और मंदी के व्यापार चक्र, उन्मादी राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां, देश पर अविश्वसनीय कर्ज़, बचत का खात्मा, खर्च करने का जुनून, हिसाबों में धोखाधड़ी और दिवालियापन की महामारी! स्वर्ग से प्रेरित यह प्राचीन नीतिवचन हमारा बेहतर कल्याण कर सकता था। इसे अपने जीवन में लागू करें, क्योंकि बिजनेस स्कूल के स्नातक इतने आत्म-विश्वासी हैं कि वे इस नीतिवचन की बुद्धि को सीखने का कष्ट नहीं उठाएंगे (नीतिवचन 26:12,16)।

सुलैमान ने इस नीतिवचन को इसलिए लिखा कि युवाओं को आर्थिक मामलों में बुद्धि, ज्ञान और विवेक दे (नीतिवचन 1:4)। पुरुषों, विशेष रूप से युवा पुरुषों में आवश्यकता से अधिक जोखिम उठाने की एक आवेगपूर्ण प्रवृत्ति होती है, जिसके प्रलोभन में वे बार बार फँस जाते हैं। नुकसान का बड़ा डर कई युवाओं को वित्तीय संकट या विनाश से बचाएगा। साथ ही, निवेश और करियर योजना के लिए अधिक अनुशासित और धैर्यवान रवैया रखने से भी काफ़ी लाभ होगा। अनावश्यक जोखिम को कम करना ही इस नीतिवचन का सबक है।

नीतिवचन के दो भाग हैं। पहला भाग आर्थिक निर्णय की उस ग़लती से परिचित कराता है जिसके परिणामस्वरूप यहां सजा मिल रही है। नीतिवचन 22:26 में लिखा है, “जो लोग हाथ पर हाथ मारते, और ऋणियों के उत्तरदायी होते हैं, उन में तू न होना”। जो लोग मूर्खतापूर्ण वित्तीय निर्णय लेते हैं या संभावित खतरे या अत्यधिक जोखिम वाले सौदे करते हैं उन पर भयानक पीड़ा और संकट आनेपर है। सुलैमान अपने नीतिवचनों में ऋण गारण्टर के रूप में ऐसे ऋणियों के उत्तरदायी बनने के विषय में बार बार आगाह करता है (नीतिवचन 6:1-5; 11:15; 17:18; 20:16; 27:13)।

हाथ पर हाथ मारने का अर्थ है हम ऋण लेनेवाले के लिए ऋण देनेवाले से हाथ मिलाते हैं – और सौदा तय हो जाता है। यहां मुद्दा कर्ज़ लेनेवाले के लिए ज़मानतदार बनने का है, जिसे हम ऋण पर हस्ताक्षर करना या दूसरे की गारंटी देना कहते हैं। वित्तीय लेनदेन में दोस्तों की मदद करने के लिए इन अनुबंधों में प्रवेश करना कई लोगों को बडप्पन महसूस होता है, इसलिए सुलैमान यहाँ संभावित दर्दनाक परिणाम का वर्णन करके उनके खिलाफ चेतावनी देता है – लेनदार आपकी खाट पर कब्ज़ा करके उसे खींच ले जा सकते हैं, अर्थात्, आपकी सम्पत्ति। यदि आप वित्तीय जोखिम से नहीं बचते हैं, तो अंत में यह आपको ही ख़त्म कर देगा।

समझदार लोग कोई भी ज़िम्मेदारी लेने से पहले संभावित खतरे का विश्लेषण करते हैं और ज़िम्मेदारी लेने से बचते हैं (नीतिवचन 22:3; 27:12)। परन्तु मूर्ख खुद को बाज़ीगर समझते हैं और खतरा उठा लेते हैं। किसी ने बुद्धिमानी से क्या खूब कहा है, “मुसीबत के वक़्त बच निकालने में ही बहादुरी है।” ऐसे व्यक्ति में कुछ भी साहसी या महान नहीं है जो सावधानीपूर्वक, सतर्क और निराशावादी दृष्टिकोण रखकर विश्लेषण किए बिना ही लेनदेन के सौदों में उतरता है। भले ही उससे पहले अन्य मूर्खों को इस तरह से सफलता मिली हो, इससे कुछ भी साबित नहीं होता; परमेश्वर ऐसे मूर्खों के विषय में कहता है कि “निश्चिन्त रहने के कारण मूढ़ लोग नष्ट होंगे” (नीतिवचन 1:32)। उद्यमशीलता की महत्वाकांक्षा तभी सद्गुण कहलाता है जब वह विवेक से बंधी हो। बुद्धिमान लोग जोखिम से नफरत करते हैं और उससे बचते हैं।

क्या आप किसी कर्ज़ के लेनदेन में जमानतदार बने हैं – एक ऐसी वित्तीय जोखिम जिसमें लेनदार आपके नीचे से आपकी खाट को छीन कर ले जा सकता है? क्या आपका जीवन, स्वास्थ्य, घर और वाहन ठीक से बीमाकृत हैं? क्या आप इस बाज़ीगर और खतरों के खिलाड़ी वाली पीढ़ी में दायित्व लेने के निर्णयों से खुद को सुरक्षित रखते हैं? क्या आप कर्ज़ में किसी के बड़ी आसानी से गारंटर बनते हैं? क्या आप फूटपाथ पर सोने के लिए तैयार हैं?

क्या आप जानते हैं कि घाटे से कैसे बचा जाता है? इसका मतलब यह स्वीकार करना है कि आप गलत हैं और गलत जगह कियें अपने निवेश बेच दें, घाटे के व्यवसायों को बंद कर दें, या एक बेकार नौकरी छोड़ दें। जब शर्तें इतनी आसान होती हैं कि उनपर विश्वास नहीं होता तब क्या आपको झूठ और हेराफेरी की गंध आती है? इसका मतलब है कि वे सच नहीं हैं, और आप शिकार बनने वाले हैं। अपने निवेश पर रिटर्न न मिलने का जोखिम उठाने से अच्छा है आप आगे निवेश को रोक दें। आपने कितने ऋण पर हस्ताक्षर किये हैं? आज ही अपने को उन दायित्वों से छुड़ा लों (नीतिवचन 6:1-5)!

अटकलें लगाने से बचें। आर्थिक खतरें न उठाएं। कर्ज़ लेने से घृणा रखें। अपनी जमा-पूंजी की रक्षा करें। महत्वपूर्ण संपत्तियों का बीमा करें। जानकार बनो। भविष्य को निराशावाद से देखें। कभी भी किसी भी चीज़ के लिए अपनी सम्पत्ति दाँव पर न लगाएं। अगर कोई कम्पनी बाजार मूल्यों से ऊपर के रिटर्न देने का दावा करे तो उस पर विश्वास न करें। सामान्य रिटर्न से संतुष्ट रहें। कड़ी मेहनत करें। बुद्धिमानी से काम करें। अपनी कमाई में से कुछ भाग बचायें। एक अतिरिक्त कौशल को विकसित करें, जो मुसीबत के वक़्त काम आए। इस अद्भुत नीतिवचन के लिए परमेश्वर की महिमा करें क्योंकि इसका सबक आपको बहुत दर्द और संभावित संकट से बचा सकता है।

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