नीतिवचन 22:24
जिस मनुष्य का स्वभाव क्रोधी है, उससे मित्रता मत करना; तुरन्त नाराज होनेवाले मनुष्य के साथ मत रहना।
क्रोधी मनुष्य अंगार से भरे हुए मूर्ख होते हैं। उनके बारे में कुछ भी पवित्र, महान या मर्दाना नहीं है, चाहे आप उनके क्रोध को कैसे भी सही ठहराने की कोशिश करें या इसके लिए अलग अलग निमित्त या बहानें क्यों न प्रस्तुत करें। क्रोधी मनुष्य मूर्ख होते हैं। यदि आप एक बुद्धिमान व्यक्ति बनना चाहते हैं, तो आप हर कीमत पर उनसे मित्रता करने से बचेंगे, अन्यथा आप उनकी नफ़रतपूर्ण और दुष्ट आदतों को सीखने का जोखिम उठाएंगे और अपने ही प्राण का विनाश कर बैठेंगे (नीतिवचन 22:25; 13:20)।
क्रोधी मनुष्य मूर्ख होते हैं। यदि आप शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं, तो आप उनसे दूर ही रहेंगे, क्योंकि वे आपके जीवन में कभी न खत्म होने वाला संघर्ष पैदा कर देंगे (नीतिवचन 15:18; 19:19; 29:22)। क्रोधित व्यक्ति जीवन जीने के नए तरीके नहीं सीख सकते, इसलिए आपको उन्हें बार-बार उनकी मुसिबतों से बाहर निकालने के लिए बाध्य होना होगा। सबसे अच्छा विकल्प यह समझ लेना है कि वे अपने ही भ्रष्ट जज़्बातों के असहाय गुलाम हैं और भला होगा आप उनसे बचें।
आपको अपनी इच्छानुसार कोई भी मित्र बनाने का अधिकार नहीं है। आपके मित्रों की सूचि को सीमित करने का सब अधिकार परमेश्वर के पास है। परमेश्वर ने मित्र बनाने की अपनी जिस बुद्धिमत्ता को प्रगट किया है बुद्धिमान लोग उसका मूल्य समझते हैं, और इसलिए वे मित्रों को उसी के अनुसार चुनते हैं। अपने आप को धोखा मत दो; बुरी संगति अच्छे आचरण को बिगाड़ देती है (1 कुरिन्थ 15:33)। क्रोधी पुरुष की मित्रता से आप स्वयं क्रोध की आदतें सीखने के लिए प्रेरित होंगे, और वे आपके लिए बहुत मुसिबतों का कारण बनेंगे।
क्रोध मूर्खों ही के हृदय में रहता है (सभोपदेशक 7:9) बुद्धिमान लोग क्रोध से बचते हैं (नीतिवचन 19:11)। बुद्धिमान लोग अपनी भावनाओं पर क़ाबू रखते हैं और क्रोध करने में धीमे होते हैं (नीतिवचन 14:29)। क्यों? क्योंकि वे जानते हैं कि केवल महान लोग ही अपनी भावनाओं पर क़ाबू रखना और क्रोध से बचना जानते हैं (नीतिवचन 16:32)। क्यों? क्योंकि वे जानते हैं कि क्रोध उन्हें कभी भी परमेश्वर की धार्मिकता का काम करने में मदद नहीं करता है (याकूब 1:19)। क्यों? क्योंकि वे जानते हैं कि ऐसे किसी भी मामले में क्रोध में की गई जल्दबाजी उन्हें ही लज्जित कर देगी (नीतिवचन 25:8)।
क्रोधी पुरुष अक्सर अपने क्रोध को मर्दानगी या बहादूरी के गुणों के रूप में महिमामंडित करते हैं, लेकिन केवल मूर्ख ही शीघ्र क्रोधित होते हैं, क्योंकि वे अपनी नीच वासनाओं के गुलाम होते हैं (नीतिवचन 14:17,29)। वे अपनी आत्माओं पर शासन नहीं कर सकते, इसलिए परमेश्वर और सुलैमान ने उनकी तुलना उन नगरों से की जिनकी कोई शहरपनाह नहीं है – कोई भी छोटी-मोटी मामूली-सी घटना भी उनके पूर्ण पतन और बर्बादी का कारण बनेगी (नीतिवचन 25:28)।
सबक बिलकुल स्पष्ट है। आप इस सबक को कैसी प्रतिक्रिया देंगे? जो परिचित या दोस्त बड़े जल्दी या बार-बार गुस्सा हो जाते हैं, उनसे दूरी बना लें। वे आपके मित्र बनने के लायक नहीं हैं। उन्हें अकेले ही जीने और मरने दो। क्रोधित व्यक्तियों को अपने ही क्रोध में सड़ने के लिए छोड़ देना ही बेहतर है। निम्नलिखित नीतिवचन में सुलैमान का तर्क बिलकुल साफ़ और स्पष्ट है, “कहीं ऐसा न हो कि तू उसकी चाल सीखे, और तेरा प्राण फन्दे में फँस जाए” (नीतिवचन 22:25)।
सबक बिलकुल स्पष्ट है। क्रोधी पुरुषों से बचकर रहें। उनसे मित्रता न करें, उनके साथ संगति न करें, और न किसी भी तरह से जुड़े रहें जिससे आप बच सकें। किसी क्रोधी व्यक्ति के साथ व्यवसायिक साझेदारी न करें, क्योंकि जब आप पर मुसीबत आ पड़ेगी तब इसका आपको सिर्फ़ अफ़सोस होगा। क्रोधी व्यक्ति से विवाह मत करो, क्योंकि वह तुम्हें बहुत कष्ट पहुँचाएगा या पहुँचाएगी। यदि हो सकें तो, तो क्रोधी व्यक्ति से कोई वस्तु न खरीदें और न ही बेचें। अपने लिए लगातार सिरदर्द क्यों पैदा करें? ऐसे व्यक्ति के साथ होटल में खाने पर भी मत जाएं (नीतिवचन 17:1; 21:9)।
यीशु ने सिखाया कि बिना कारण क्रोध करना परमेश्वर की दृष्टि में हत्या है (मत्ती 5:21-22)। निःसंदेह, वर्तमान पीढ़ी के नपुंसक धर्मवादियों और मूर्ख स्त्रियों ने इन तीन शब्दों को अपनी नई बाइबल से हटा दिया है, और इस वचन को ऐसा स्वरुप दिया है कि मानों इसमें सब प्रकार के क्रोध की भर्त्सना की गई है (2 तीमु 3:1-7)। परन्तु, परमेश्वर और उसके नबी और प्रेरित पाप और पापियों पर क्रोधित हुएँ थें। पौलुस ने लिखा कि ऐसा क्रोध करना संभव है जो पाप की ओर नहीं ले जाता (इफि 4:26-27)।
मूर्ख मनुष्य जब जब क्रोध करते हैं तब तब वे पाप करते हैं, क्योंकि वे सूर्य अस्त होने से पहले अपना क्रोध शांत नहीं कर पाते (इफि 4:26-27)। क्रोध को धारण करके और अक्सर क्रोधित होकर, वे शैतान को अपने अंदर प्रवेश करने और अपने दिल और दिमाग में कहर बरपाने का मौका देते हैं। दूसरों को माफ करने से इनकार करना शैतान की युक्तियों में से एक है जिसकी वजह से वह उनका फायदा उठाता है (2 कुरिन्थ 2:7-11)। शैतान की युक्तियों से सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि आप अपने अपराधी को तुरन्त अपने पूरे मन से पूरी तरह से क्षमा करें (मत्ती 18:21-35)।
क्रोधी व्यक्तियों को मित्र बनाने या क्रोधित व्यक्तियों के साथ खतरों से भरें स्थानों पर घुमने-फिरने के लिए जाने के बजाय, केवल धर्मनिष्ठ व्यक्तियों को अपने मित्र बनने के लिए चुनें, और उनके साथ परमेश्वर के घर, अर्थात् चर्च जाएँ। परमेश्वर के सच्चे बच्चे क्रोधित या क्रुद्ध नहीं होते। वे प्रेम, आनंद, शांति, सहनशीलता, नम्रता, भलाई, विश्वास, मन की दीनता और संयम से भरे हुए होते हैं (गला 5:22-23)। क्या ये नौ लक्षण आपके चरित्र-गुण हैं? क्या ये आपके दोस्तों के चरित्र-गुण हैं? क्या ये गुण आपके चर्च की पहचान है? होने ही चाहिए।
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