नीतिवचन 22:22

कंगाल पर इस कारण अन्धेर न करना कि वह कंगाल है, और न दीन जन को कचहरी में पीसना;

क्या होता है, यदि आप गरीबों या पीड़ितों का लाभ उठाते हैं? परमेश्वर यहोवा उनका मुकद्दमा स्वयं अपने हाथ में लेगा और उनका मुकद्दमा लड़ेगा; क्योंकि आपने उनके प्राणों को लूटा, इसलिए वह भी आपके प्राणों को लूट लेगा।

यह नीतिवचन सुलैमान की पूरी चेतावनी का केवल आधा हिस्सा है। अगले पद में लिखा है, “क्योंकि यहोवा उनका मुकद्दमा लड़ेगा, और उनके लूटनेवालों का प्राण हर लेगा” (नीतिवचन 22:23)।

एक और नीतिवचन आगे चेतावनी देता है, “क्योंकि उनका छुड़ानेवाला सामर्थी है; उनका मुक़द्दमा तेरे संग वही लड़ेगा” (नीतिवचन 23:11)। दाऊद ने चेतावनी दी कि परमेश्वर गरीबों की देखभाल करता है, ” परमेश्वर अपने पवित्र धाम में, अनाथों का पिता और विधवाओं का न्यायी है ” (भजन 68:5)।

परन्तु मूसा ने सचित्र रूप से यह चेतावनी दी, “किसी विधवा या अनाथ बालक को दु:ख न देना। यदि तुम ऐसों को किसी प्रकार का दु:ख दो और वे मेरी दोहाई दें, तो मैं निश्चय उनकी दोहाई सुनूँगा; तब मेरा क्रोध भड़केगा, और मैं तुम को तलवार से मरवाऊँगा, और तुम्हारी पत्नियाँ विधवा और तुम्हारे बालक अनाथ हो जाएँगे” (निर्ग 22:22-24)। यह बहुत ही गंभीर मामला है।

गरीब या पीड़ित अपना बचाव कामयाबी से नहीं कर सकते। कुछ लोग सोचते हैं कि उनकी यह दुर्बलता उन्हें एक आसान लक्ष्य बनाता है, लेकिन वे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण वास्तविकता को भूल जाते हैं। परमेश्वर आप उनकी रक्षा करेगा। खबरदार! किसी भी प्रकार की डकैती चोरी है (निर्गमन 20:15), लेकिन जब यह गरीबों के हक़ पर डाका डाला जाता हो तो यह परमेश्वर की दृष्टि में एक भयानक अपराध है। “तेरे लोगों में से जो दरिद्र हों उसके मुक़द्दमे में न्याय न बिगाड़ना” (निर्गमन 23:6)।

गरीबों को लूटना उनका आर्थिक फायदा उठाना है। उनका आर्थिक फायदा उठाने से अच्छा है कि आप उन से कोई वस्तु खरीदते समय बिना मोल-भाव किए वस्तु ख़रीदे और 10-20 रुपये उनके बच्चें के हाथ में दे, या अगर वे खरीदने आते हैं तो कम दाम में वस्तु बेचें, क्योंकि यह अच्छा है कि आप ही लूट लिए जाए, बजाए इसके कि आप गरीबों को लूटे (नीतिवचन 20:14; 11:26; 1 कुरिन्थ 6:7-8)। नगर के फाटकों में किसी भी कानूनी तरीके से या उससे सम्बंधित तरीके से उनका आर्थिक शोषण करना उनका फायदा उठाना है। सुलैमान के दिनों में नगर के पुरनिएँ नगर के फाटकों पर न्याय देकर विवाद निपटाते थे।

ऐसे तीन तरीके हैं जिनसे आप गरीबों और पीड़ितों के साथ से व्यवहार कर सकते हैं, और आपके लिए प्रत्येक का अपना परिणाम है। सबसे पहला, आप उनसे छीन सकते हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं, या उनका दुरुपयोग कर सकते हैं, जैसा कि ऊपर नीतिवचन और चेतावनियां बताती हैं। जो स्वयं की रक्षा नहीं कर सकते हैं उनकी रक्षा परमेश्वर आप करता है, और वह आपको या उस हर व्यक्ति को नाश करके उनका बदला लेगा जिन्होंने उनका लाभ उठाने का दुस्साहस किया।

दूसरा, आप बहुत व्यस्त होकर और उनके साथ कोई संगती न रखके उन्हें और उनकी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। सुलैमान ने ऐसे दुर्व्यवहार के विषय में चेतावनी दी, “जो कंगाल की दोहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी” (नीतिवचन 21:13)। और, ” जो निर्धन को दान देता है उसे घटी नहीं होती, परन्तु जो उससे दृष्टि फेर लेता है वह शाप पर शाप पाता है” (नीतिवचन 28:27)।

तीसरा, आप उनकी और उनकी ज़रूरतों की ओर ध्यान दे सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं, और परमेश्वर आपको आशीष देगा, क्योंकि यह उसका शुद्ध धर्म है (याकूब 1:27; लूका 10:25-37; 14:12-14)। सुलैमान ने लिखा, “जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा” (नीतिवचन 19:17)। जब यहोवा बदला देता है, तो वह बदला एक बड़ा भुगतान होता है (लूका 6:38)!

गरीब होने का दावा करने वाले सभी लोग गरीब नहीं होते हैं, और जो पीड़ित होने का दावा करते हैं वे सभी पीड़ित नहीं होते हैं। आज पहले से कहीं अधिक भिखारी हैं और जो सोचते हैं कि वे मुफ्त भोजन के हकदार हैं। इसलिए ऐसे मामले में आपको परमेश्वर की इच्छा को खोजने के लिए प्रत्येक मामले की धार्मिकता से जांच करनी अवश्य है (यूहन्ना 7:24)। अच्छा सामरी लंबे समय तक विचार नहीं करता रहा, इसलिए क्योंकि घायल मनुष्य की सख्त जरूरत बिलकुल स्पष्ट दिखाई दे रही थी, लेकिन यहोशू ने शत्रुओं को चाल को समझने और उनसे से बचने के लिए पर्याप्त समय नहीं लिया (यहोशू 9:3-16)।

परमेश्वर ने आपके जीवन में किस गरीब या पीड़ित को रखा है? किसी से भी अन्जान मत रहों। परन्तु जल्दबाजी भी मत करो। शुरुवात अपने ही परिवार से करें, फिर अपनी कलीसिया से, फिर सत्य पर विश्वास रखनेवाली अन्य कलीसियाओं से, और फिर उनकी मदद करें जिन्हें परमेश्वर आपके मार्ग में ले आता है। यह परमेश्वर का व्यवस्था-क्रम और प्राथमिकता है। क्या आपके परिवार में सभी, जैसे बूढ़े माता-पिता और दादा-दादी, का ख़याल रखा जाता है? क्या आपके चर्च में कोई विधवा, अनाथ, या ऐसे लोग हैं जिनपर “परमेश्वर के प्राकृतिक कहर” के कारण कंगाली आ पड़ी है?

आप टिप कैसे देते हैं? क्या आप इतने बुद्धिमान हैं कि आप को पता हो कि कुछ लोग बैंकों का प्रबंधन करने के बजाय होटलों में वैटर का काम करते हैं क्योंकि वे गरीब हैं और उनमें से हैं जिनका यह नीतिवचन वर्णन करता है? क्या आप टिप देते समय उदारता से देते हैं या कंजूसी से? वैटरों का टिप मिलना उनके वेतन का एक बड़ा हिस्सा होता हैं, जिसके विषय में होटल का मालिक और यहाँ तक कि सरकार भी अनुमान लगाकर बैठे हैं। जब आप किसी होटल में ठहरते हैं तो क्या आप रूम सर्विस को टिप देते हैं? परमेश्वर यह सब देखता है।

आपका भविष्य इस पर निर्भर करता है। जीवन के सबसे उल्लेखनीय परीक्षणों में से एक है उन लोगों को देखना जो मुश्किल से टिप देते हैं, बचानेवाले और कंजूस, जो आर्थिक रूप से संघर्ष करते हैं, जबकि एक ओर वे जो उदार हैं, दिल खोल के देते हैं और समृद्ध होते जाते हैं। सुलैमान ने हमें इस नीतिवचन में सिखाया है कि ऐसा क्यों है, लेकिन कुछ ही इस पाठ को समझने और इसे अपने आचरण में लाने में सक्षम हैं (नीतिवचन 11:24-25)। अगर आप किसी की गरीबी को समझते हैं और उदार मनवाले बनते हैं तो आप कभी नुकसान में नहीं होंगे।

बाइबल का परमेश्वर अद्वितीय रूप से न्यायी, दयालु और बुद्धिमान है। उसे छोटे से छोटे मनुष्यों का भी ख़याल है, और वह आपकी दूसरों के लिए छोटी से छोटी देखभाल, उनकी उपेक्षा, या उनके साथ दुर्व्यवहार का प्रतिफल देता है। उसने जो बाइबल लिखी है वह बुद्धि और ज्ञान का एक दिव्य पुस्तकालय है, जिसमें नीतिवचन की यह पुस्तक भी शामिल है, ताकि आपको उसकी महिमा के लिए, आपके आसपास के लोगों के कल्याण के लिए, और आपकी समृद्धि और सफलता के लिए बुद्धि और ज्ञान सिखाया जा सके।

आप इस पाठ का क्या करेंगे? हर एक मनुष्य उन बातों का लेखा देगा जो उसे सिखाई गई थीं और जिस हद तक उसने उन्हें अपने आचरण में लाया था। इस परमेश्वर से प्रेम करो। उसके वचन से प्रेम करो। गरीबों से प्रेम करो और परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार जब जब आपको अवसर मिले तब तब उनकी मदद करो। परमेश्वर आपको आशीष दें, अगर आप अपने धर्म और जीवन को गंभीरता से लेते हैं और इस नीतिवचन की बुद्धि को अपने आचरण में लाकर उसका पालन करते हैं।

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