नीतिवचन 22:16

जो अपने धन को बढ़ाने दरिद्र का दमन करता है, और वह जो धनी को देता है, निश्चय दरिद्र होगा। (केजेवी)

यहां पर आपकी आर्थिक सफलता के लिए दो नियम हैं। परमेश्वर आपको आर्थिक रूप से या तो आशीषित करेगा, या शापित, जो इस पर निर्भर है कि आप धनवानों के साथ निर्धनों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यहां स्वर्ग के रहस्य प्रकट किए गए हैं।

यदि आप धन-संचय करने निर्धनों का दुरुपयोग करते हैं और उनका फायदा उठाते हैं, तो परमेश्वर और मनुष्य दोनों ही आपको दरिद्रता की खाई में ढकेल देंगे। यदि आप किसी धनवान को ऐसा ही लालची लक्ष्य हासिल करने पर पुरस्कृत करते हैं, तो आपका अंत भी कंगाली में होगा। भले लोग कंगालों को देते हैं और धनवानों के साथ भी समानता का आचरण रखते हैं, क्योंकि यह न्यायपूर्ण और धर्मपरायणता है।

परमेश्वर चाहता है कि आप कंगालों और दरिद्रों के साथ कृपा और भलाई का आचरण रखें, विशेषकर विधवाओं और उनके बच्चों जैसे निर्धनों और ज़रूरतमंदों के साथ। सुलैमान ने बाद में इस अध्याय में इस नियम का पालन किया (नीति 22:22-23)। बुद्धि का यह नियम कितना महत्वपूर्ण है? परमेश्वर किसके पक्ष में है इसके विषय में चेतावनी को समझो और देखो वह दरिद्रों का शोषण करनेवालों का क्या हश्र करता है। जो कमज़ोरों और ज़रूरतमंदों के साथ बुरा आचरण, और बुरा व्यवहार, और बुरा बर्ताव करते हैं, परमेश्वर उन्हें कठोरता से दण्ड देगा (अय्यूब 20:15-29; यशा. 5:8-10; ज़कर्याह 7:8-14)।

धर्मी जन दबे और कुचले हुओं को आशीष देते हैं और उनकी मदद करते हैं, क्योंकि वे अच्छे से जानते हैं कि मनुष्यों के बीच अमीरी-गरीबी का अंतर परमेश्वर के सम्प्रभु चुनाव से है, इसलिए नहीं क्योंकि वे इस के योग्य हैं (रोमि 12:16; 1 कुरिं 4:7)। वे जानते हैं कि परमेश्वर विधवाओं और अनाथों पर विशेष प्रेम करता और उनकी खास देखभाल करता है, इस कारण वे उनके साथ अपने आर्थिक व्यवहारों में अत्यंत सावधान और दानशील होते हैं (नीति 23:10-11; भजन 12:5; 68:5)।

तरक्की करने के लिए गरीबों को कुचलना पाप और अधर्म है, यह मूर्खता है, और हानिकारक है जिसके नतीजे ठीक उल्टे होंगे, क्योंकि परमेश्वर उनके लिए लड़ेगा (नीति 28:16)। जब आप उन से कोई वस्तु खरीदते हैं, तब उन्हें बिना कोई मोल-भाव के पूरा-पूरा दाम चुकाए, या उससे भी अधिक दे (नीति 20:14)। और जब वे आपसे कोई वस्तु खरीदते हैं, तब उन्हें सही-सही नाप और मात्रा दे (नीति 16:10)। जब वे आपसे कुछ खरीदारी करें तो वस्तुओं के दाम कम करें, भले ही बाज़ार पर आपका दबदबा क्यों न हो (नीति 11:26 )। उदार और दानशील बनो (व्यवस्था 15:7-11; लूका 6:38)। दरिद्रों को देने से आपका कभी कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि परमेश्वर आपको दाम चुकाएगा (नीति 14:21, 31; 19:17; 28:27)।

वह कौन है जो दरिद्रों को देने के बजाय धनवानों को देता है? वह जो लालची है, जो केवल अपने सम्भाव्य लाभ के लिए तंत्र का निर्माण करने या अपने लिए तरफदारी पाने की सोचता है। ऐसे लोग धनवानों को सिर पर चढ़ाने के लिए निर्धनों को पीस डालते हैं। प्रभु यीशु मसीह का धर्म संसार के सब धर्मों से अलग है, क्योंकि उसका ईश्वर-प्रेरित नियम यह कहता है कि आप अपने मित्रों को टाल दें और उनके बदले ऐसे लोगों को निमंत्रित करें जो तुम्हें बदला नहीं चुका सकते (लूका 14:12-14)। अपने मित्रों और रिश्तेदारों पर अपनी उदारता दिल खोलकर ख़र्चा करने में कोई वास्तविक भलाई या धार्मिकता नहीं है (लूका 6:32-36)।

धनवानों का पक्ष लेना, विशेषकर तब जब दरिद्रों को मदद से इनकार किया जाता है, एक मानसिक विकृति है, और इससे परमेश्वर का दण्ड अवश्य ही आएगा कि मानो किसी विधवा या अनाथ के घर को ही लूट लिया हो। रिश्वतखोरी के विचार से ही घृणा रखे, या उस हर बात से घृणा रखें जो रिश्वतखोरी से ताल्लुक रखती है (नीति 15:27)। यद्यपि आप धनवानों को अपना मित्र बनाएं, तो भी वे आपको परमेश्वर के प्रकोप से नहीं बचा पाएंगे (नीति 11:21)। परमेश्वर को ऐसे अनर्थकारियों से घृणा है (भजन 5:5; 11:5)। सत्य और धार्मिकता से उनकी हमेशा शत्रुता ही रही है (याकूब 2:1-7; 5:1-9; प्रेरितों 13:50)।

परमेश्वर ने अपने चुने हुओं के साथ जो आचरण रखा उस पर विचार करें। यीशु मसीह कंगाल बना कि उन्हें धनवान बनाए (2 कुरिं 8:9)। यद्यपि यह सत्य मानव-सोच के विपरीत लगे, यह आत्मिक अदला-बदली परमेश्वर की गौरवशाली बुद्धि से हुई थी। परंतु जो इस अनुग्रह की उपेक्षा करते हैं, जो आज वह उन पर प्रकट कर रहा है, तो वह निर्धनों के पास जो थोड़ा है जिसे वे अपना समझते हैं, उसे भी उनसे ले लेगा और विश्वासयोग्य धनवानों को दे देगा (लूका 8:18; 19:24-26)।

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