नीतिवचन 22:15
लड़के के मन में मूढ़ता की गाँठ बन्धी रहती है, परन्तु अनुशासन की छड़ी के द्वारा वह खोलकर उस से दूर की जाती है।
बच्चे स्थापित, ढ़ांचाबद्ध (programmed) अवस्था में जन्म लेते हैं। वे स्वाभाविक रूप से मूर्खता करते हैं। यह उनका पसंदीदा और बुनियादी चुनाव है। उनकी माताएं उन्हें कितना ही प्रिय जानें, उनके हृदय में बुद्धि की कमी होती है और वे मूर्खता से भरे हुए होते हैं। वे उत्तम या सही होना नहीं जानते और न होना चाहते हैं। परंतु परमेश्वर ने और सबसे बुद्धिमान मनुष्य ने अचूक उपाय सिखाया – शारीरिक दंड का बुद्धिमानीपूर्ण उपयोग।
दाऊद ने कहा कि उसने पाप में गर्भधारण किया (भजन 51:5), क्योंकि जन्म से उसका स्वभाव भ्रष्ट था और वह बुद्धि से फिरकर मूर्खता की ओर लौट गया। उसने आगे लिखा कि बच्चे जन्म से ही झूठ बोलते हैं (भजन 58:3)। विवेकी माता पिता देखते हैं कि शिशु बिना किसी कारण चीखने और चिल्लाने (रोने से कहीं ज्यादा) से पाप करते हैं – वे झूठ बोलते हैं और अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गुस्सा दिखाते हैं।
बच्चे स्वार्थी, हठीले, उतावले, आलसी, असंतुष्ट, झूठे, घमंडी, विद्रोही आदि होते हैं। उन्हें ये बातें सिखाने की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि वे जन्म से ही सहज प्रवृत्ति के अनुसार उन्हें जानते हैं। किसी भी शिक्षा संस्थान का क्षेत्र और क्रम और पाठ्यक्रम के चुनावों में मूर्खता को शामिल करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि बच्चे बिना किसी शिक्षा या उकसावे के अपने आप ऐसा करते हैं।
बिना शिक्षा के, बच्चों की विचार-प्रक्रियाएं और जीवन के प्रति उनकी प्रतिक्रियाएं केवल मूर्खतापूर्ण होती हैं। यदि इन प्रवृत्तियों, आदतों या वरीयताओं को सुधारा न जाए, और यदि बच्चों को बुद्धि न सिखाई जाए, तो वे इन गलतियों को करते रहेंगे और जल्द ही विकृत जीवन तथा विनाश में पड़ जाएंगे। सुलैमान की ईश्वर-प्रेरित बुद्धि के द्वारा, उन्हें प्रशिक्षण देने का उत्तम और एकमात्र तरीका है छड़ी का उपयोग।
छड़ी लकड़ी या अन्य सामग्री की एक सीधी, पतली डंड़ी होती है जिसे पीठ पर मारा जाता है, जिससे बिना किसी शारीरिक चोट के थोड़ासा दर्द होता है। यह बजती नहीं परंतु चुभती है। इसे सुधार की छड़ी कहा जाता है, क्योंकि इसका उद्देश्य प्रत्येक बालक में समाहित मूर्खता की ओर झुकाव को सुधारना है। बुद्धिमान बच्चों को प्रशिक्षण देने का प्रयास करने के लिए किसी भी घर में यह सबसे साधारण किन्तु सबसे उपयोगी उपकरणों में से एक है।
यह एक प्रसिद्ध अमेरिकी पेड़ की हिकरी लकड़ी होती थी, और इसी पर से पुरानी शिक्षात्मक कहावत है, “वाचन, लेखन, और गणित, सभी हिकरी छड़ी की धून पर सिखाए जाते हैं।” पुराने समय के शिक्षाविदों ने, जिन्होंने बच्चों की पीढ़ियों को चरित्र और आत्मानुशासन के साथ सफलतापूर्वक सिखाया, उसके उपयोग पर कभी प्रश्न नहीं किया। वे जानते थे कि उसका उपयोग मूर्ख लड़कों को उपयोगी वयस्कों में बदलने में उसकी एक अत्यावश्यक भूमिका है। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के 14वें संस्करण में कोड़े मारने के विषय दी गई प्रविष्टि पर विचार करें :
कोड़े मारना सार्वजनिक अपराधों को सजा देने के लिए सर्वाधिक सार्वत्रिक तौर पर उपयोग की जानेवाली पद्धतियों में से एक रहा है, वैसे ही पारीवारिक, घरेलू, सैन्य और शैक्षणिक अनुशासन को बनाए रखने का एक साधन भी रहा है।
एक मूर्ख, विद्रोही बालक, बॉब डायलन ने (1964) लिखा, “द टाइम्स दे आर ए-चेंजिन (समय -वे तो बदलते रहते हैं)।” माता-पिता अब ज्यादा नहीं मारते; और बेशक, सार्वजनिक अपराध और सामान्य विद्रोह का प्रमाण, विशेष रूप से जवानों में, काफी ज्यादा है। लेकिन सच्चाई नहीं बदलती। राजा सुलैमान ने 3000 साल पहले बच्चों को शारीरिक दंड देने की शिक्षा दीं, और यह आज भी उतना ही आवश्यक तथा प्रभावी है कि उत्कृष्ट चरित्र वाले अनुशासित वयस्कों की पीढ़ी का निर्माण किया जाए।
यह सत्य सरल है। सुधार की छड़ी बच्चों को इस जीवन में नरक से बचाएगी। हम अभी भी हत्या के अपराधियों को मौत की सजा देते हैं, और यह उचित ही है; लेकिन कई हैं जो चाहते हैं कि बच्चों को मारने-पीटने की सज़ा को अवैध घोषित किया जाए, जो ऐसे मूर्खों को दूसरों की हत्या करने से और उसके द्वारा स्वयं बचाएगा (नीतिवचन 10:13; 13:24; 23:13-14; 26:3; 29:15)। जब बच्चा छोटा होता है तो शारीरिक दंड की थोड़ी-सी पीड़ा उसे भविष्य में अपने आप के लिए और कई अन्य लोगों के लिए बहुत दर्द, दुख और मुश्किल पैदा करने से बचाएगी।
इस नीतिवचन में सिखाई गई बुद्धि इतनी सच है कि स्वयं परमेश्वर अपने प्रिय बच्चों को अपनी महिमा के लिए और उनके लाभ के लिए सिद्ध बनाने हेतु ताड़ना देने के लिए छड़ी और कोड़े के उसके स्वयं के उपयोग का वर्णन करता है (नीतिवचन 3:11,12; इब्रानियों 12:5-11)। परमेश्वर द्वारा एक व्यक्ति के लिए छड़ी या कोड़े का उपयोग करना क्या साबित करता है? उनके प्रति उसका प्रेम! प्रेमी माता-पिता निश्चित रूप से छड़ी का उपयोग करेंगे और जब बच्चा बालक ही हो तब से ही करेंगे (नीतिवचन 13:24)।
यीशु का जन्म बिना मूर्खता के, बिना पापमय स्वभाव के हुआ था। उसने हमेशा ही अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया (लूका 2:51)। वह एकमात्र ऐसा बालक था जिसे अपने माता-पिता द्वारा छड़ी के प्रेमपूर्ण उपयोग की कभी ज़रूरत नहीं पड़ी। जन्म से ही उसका चरित्र बिना मूर्खता के बुद्धिमानी से परिपूर्ण था। प्रत्येक पाठक जो बड़ा हो गया है और माता-पिता की सहायक छड़ी से परे है, उसके सिद्ध उदाहरण का अनुसरण करे।
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