नीतिवचन 22:10

ठट्ठा करनेवाले को निकाल दे, तब झगड़ा मिट जाएगा, और वाद–विवाद और अपमान दोनों टूट जाएँगे।

शांति बनाए रखना आसान है! आप अपने घर या ऑफिस में झगड़ा और कलह को आसानी से सुलझाकर ख़त्म कर सकते हैं। बस ठट्ठा करने वाले को बाहर निकाल दे! कुछ लोग दोस्तों, परिवार, चर्च या नौकरी करने के लायक नहीं होते। वे ठट्ठा करने वाले होते हैं, और उनके घमंडी विद्रोह के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए उन्हें अपनी संगति से ही बाहर कर दिया जाना चाहिए।

अगर ठट्ठा करने वालों को निकाल दिया जाए, तो वाद–विवाद और झगड़ा और लज्जाजनक बातें मिट जाएगी। ठट्ठा करने वाले लोग किसी भी समाज के लिए अभिशाप हैं, और इसलिए उन्हें दूर कर किया जाना चाहिए। चूँकि मृत्युदंड ही सरकार के पास एकमात्र विकल्प है, इसलिए उनसे छुटकारा पाने के लिए आप जो भी अन्य साधन अपना सकते हैं, उनका उपयोग करें : ऐसा करने से आप ही की आशीष और सफलता सुनिश्चित होगी।

ठट्ठा करने वाला क्या है? यह एक अभिमानी और अपनी कल्पनाओं में जिद्दी व्यक्ति होता है जिसे सुधार पर गुस्सा आता है, जो अधिकार को तुच्छ जानता है, और जो उसे सिखाने या चेतावनी देने की कोशिश करते हैं उनके प्रति वह अपमानजनक रुख अपनाता है। ठट्ठा करने वाला मूर्ख से भी बदतर होता है, क्योंकि अहंकारपूर्ण प्रतिरोध स्वच्छंद अज्ञानता से भी बदतर है (नीतिवचन 26:12)। एक इन्सान जो अपने शिक्षकों का अनादर करता है, शिक्षा का मज़ाक उड़ाता है, या शासकों का मज़ाक उड़ाता है, वही ठट्ठा करने वाला है। ऐसे लोग आज बहुत आम हैं, और जहाँ कहीं भी उन्हें किसी भी तरह का प्रभाव डालने का मौका दिया जाता है, वे बहुत परेशानी पैदा करते हैं।

ठट्ठा करने वाले अपने अहंकार में रहकर यह मान बैठते हैं कि वे ही सही हैं, इसलिए वे सुधार पाने या चेतावनी को मानने से इनकार करते हैं। वे सीखने के बजाय सिखाना चाहते हैं। वे अहं में आकर अपना रास्ता खुद चुनना चाहते हैं। वे शिक्षा को ठुकराने या शिक्षकों की निंदा करने के लिए किसी भी मौके की तलाश में रहते हैं। वे अधिकारियों की आलोचना या निंदा करने के लिए छोटी-छोटी बातों को चुनने के लिए कुख्यात हैं (यशायाह 29:20-21)। उनमें अच्छाई की कोई भावना नहीं है, और दूसरों को वे जो दर्द देते हैं उसको लेकर उनमें कोई संवेदनशीलता या ज़मीर नहीं है।

परमेश्वर ठट्ठा करने वालों से घृणा करता है, और वह उन्हें नष्ट कर देगा। धन्यवाद, धन्य परमेश्वर। यशायाह के दिनों में ठट्ठा करने वालों के खिलाफ उनकी कठोर चेतावनी पढ़ें (यशायाह 28:14-22)। फरीसी और अन्य यहूदी धार्मिक नेता लगातार ठट्ठा करते थे – यीशु मसीह की निंदा करते थे और उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकें ऐसी कोई बात खोजने की फिराक में रहते थे। लेकिन धन्य और एकमात्र सामर्थ्यवान प्रभु ने उन्हें सन 70 में रोमी सेनाओं को भेजकर कुचल दिया (मत्ती 3:7-12; 21:41-46; 22:1-7)।

ठट्ठा करने वाले दया, धैर्य या सत्य के लायक नहीं होते हैं। सुलैमान ने चेतावनी दी कि ठट्ठा करने वालों से निपटने में अपना समय बर्बाद न करें, क्योंकि यह केवल झगड़ा और लज्जा को उत्पन्न करता है (नीतिवचन 9:7-8; 14:7; 23:9; 26:4-5)। यीशु ने उन्हें कुत्ते और सूअर कहा और अपने चलों को हिदायत दीं कि वे उनके सामने अपने वचन के बेशकीमती मोती न डालें (मत्ती 7:6)। जब उसके चलों ने उसे बताया कि फरीसी उनकी शिक्षा आहत हुएं थें, तो उसने उनकी और उनके अनुयायियों की उनकी अज्ञानता के लिए उचित ही भर्त्सना कीं (मत्ती 15:12-14)।

क्या आप ठट्ठा करने वाले हैं? इस भयानक पाप में पड़ना आसान है। क्या आप उनसे, जो आपको सुधारते हैं या डांटते हैं, प्रेम रखते हैं (नीतिवचन 9:8; भजन 141:5)? क्या आप अपने शिक्षकों से प्रेम रखते हैं (नीतिवचन 12:1)? क्या आप आसानी से और पूरी तरह से स्वीकार करते हैं कि आप गलत हैं और सच कहनेवाले व्यक्ति की प्रशंसा करते हैं? क्या आप अपना अपराध बिना किसी विलम्ब के स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि आपको खेद है? क्या आपको लगता है कि आप एक अज्ञानी बालक हैं और आपको सिखाया जाना ज़रूरी है? क्या आप अपने ऊपर अधिकार रखने वालों की गलतियों को आसानी से और जल्दी से माफ कर पाते हैं?

आप यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप कभी किसी का ठट्ठा नहीं करेंगे? अपने ऊपर के लोगों के खिलाफ़ कभी कोई विद्रोही विचार न बोलें या मन में न सोचें (सभोपदेशक 10:20)। सुलैमान के इस नियम को याद रखें कि सुधार, निर्देश और डांट से प्रेम रखना ही बुद्धि है (नीतिवचन 9:8-9; 12:1; 13:18; 25:12; 27:5)।

अपने कान झुकाएँ और बुद्धिमानों के वचन सुनें – जो आपके ऊपर अधिकार या शिक्षकों के पदों पर हैं (नीतिवचन 5:1; 22:17)। जब परमेश्वर ने सुलैमान से वरदान मांगने के लिए कहा तो उसने जिस नम्रता से बुद्धि मांगी उसी विनम्रता को उससे सीखें(1 राजा 3:5-13)। उपदेश से बैर न रखें – अर्थात परमेश्वर के उन सेवकों के मुँह से निकलनेवाले परमेश्वर के सत्य की उपेक्षा करना या मानने से इनकार करना (1 थिस्सलुनीकियों 5:20; 2:13; 2 तीमुथियुस 4:3-4)।

क्या आप किसी ठट्ठा करने वाले को पहचान सकते हैं? आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लोग ऐसे होते हैं। क्या आप शरीर के हावभाव और आँखों की हरकतों को पहचान सकते हैं जो विद्रोह को प्रकट करती हैं? क्या आप अधिकार का ठट्ठा, शिक्षकों के बारे में अपमानजनक वाणी, या निर्देश और चेतावनियों के बारे में अभिमानी रवैया पहचान सकते हैं? शिक्षा या सुधार के प्रति कोई भी रक्षात्मक या आक्रामक प्रतिक्रिया एक ठट्ठा करने वाले को इंगित करती है, क्योंकि एक बुद्धिमान व्यक्ति नसीहत से विनम्र हो जाता है और केवल बदलाव करने के बारे में सोच सकता है।

कई पुरुष ठट्ठा करने वाली औरतों से शादी करते हैं, जो अपने पति के अधिकार का तिरस्कार करती हैं, उनके विचारों का ठट्ठा करती हैं, बच्चों के सामने उनके प्रति तिरस्कार दिखाती हैं, और घमंड से ऐसा व्यवहार करती हैं जैसे कि उन्होंने जीवन को समझ लिया हो। वे अपने सबसे अच्छे दिनों में भी, उस नम्र और शांत आत्मा की कल्पना भी नहीं कर सकती जिसकी परमेश्वर ने आज्ञा दीं (1 पतरस 3:3-4)। ये घिनौनी औरतें अपने वैवाहिक जीवन और घरों की शांति को बर्बाद कर देती हैं, और इसलिए उन्हें तिरस्कृत किया जाना चाहिए (नीतिवचन 12:4; 19:13; 21:9,19; 25:24; 27:15-16; 30:21-23)।

माता-पिता! आपको अपने बच्चों में इस बुरी आदत को खत्म करना चाहिए। अगर आपको अपने बच्चों में अपने निर्देशों, नियमों, चेतावनियों या पद पर तिरस्कार की ज़रा भी गंध आती है, तो आपको उसे कड़ी सज़ा देनी चाहिए। न ही आप शिक्षकों, प्रशिक्षकों, पास्टरों, नियोक्ताओं या शासकों के प्रति ऐसा करने की अनुमति दे सकते हैं। परमेश्वर की राय में, एक बच्चा जो माता-पिता के बारे में अपमानजनक बातें बोलता है या अपनी आँखों से उनका मज़ाक उड़ाता है, वह मृत्यु के योग्य है (नीतिवचन 20:20; 30:17; व्यवस्थाविवरण 27:16)। अगर आपके घर में कोई किशोर या बड़ा बच्चा है जो परेशानी पैदा कर रहा है, तो यह नीतिवचन पढ़ें और जानें कि आपको क्या करना चाहिए। उसे बाहर निकाल दें! यदि मौखिक निर्देश और चेतावनियों से परिणाम नहीं मिलते हैं, तो शारीरिक दंड कारगर साबित होगा।

परमेश्वर ने सरकार-व्यवस्था का नियोजन किया, और उसने स्थानीय पुलिसकर्मियों से लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक, विशिष्ट शासकों को पद पर बिठाया। उनका सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी आज्ञा का पालन किया जाना चाहिए, जब तक कि उनका आदेश परमेश्वर के वचन के ख़िलाफ न हो। परमेश्वर उन लोगों को पागल जानवर मानता है और उन्हें कुचलता है जो शासकों के खिलाफ बोलते हैं और गणमान्य व्यक्तियों का तिरस्कार करते हैं। वह उन्हें उनके इस अहंकारपूर्ण अनुमान के कारण कि किसी राष्ट्र को सम्भालने के लिए क्या करना पड़ता है यह वे अच्छे से जानते हैं, तुच्छ समझता है (नीतिवचन 24:21-22; 2 पतरस 2:10-12; यहूदा 1:8-10)।

यदि किसी चर्च में कोई ठट्ठा करने वाला है, तो चर्च को उसे बाहर निकाल देना चाहिए। ठट्ठा करने वाले के बाहर जाते ही शांति कायम होगी। मसीह के चर्चों में वाद–विवाद, विरोध, प्रतिकार, अडिगता, गाली-गलौच, निंदा, विद्रोह, झगड़ा, बखेड़ा, हंगामा या मतभेद के लिए कोई जगह नहीं है (रोमियों 1:29-31; 1 कुरिं 5:11; 6:9-10; 2 कुरिं 12:20-21; गलातियों 5:19-21; यहूदा 1:11)। ये बहिष्कृत अपराध हैं जिन्हें सदस्यता में या प्रभु की मेज पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

सुलैमान ईश्वर-प्रेरणा, अवलोकन और अनुभव से जानता था कि मानव समाज में किन चीजों से व्यवस्थापन चलता है। उसने घर और अन्य स्थानों में शांति बनाए रखने के लिए यहाँ एक अनमोल नियम दिया। ठट्ठा करने वालों को बाहर निकाल दें। आप अपने अंदर बसे ठट्ठा करने वाले गुणों से घृणा करके और दूसरों में इन दुर्गुणों को पनपने का मौका न देकर इस नीतिवचन के नियम का व्यावहारिक उपयोग कर सकते हैं। अगर कोई ठट्ठा करने वाला लगातार ठट्ठा करते रहता है, तो उसे बाहर निकाल देना ही उचित है।

सभी ठट्ठा का पिता शैतान है, जिसने परमेश्वर के अभिषिक्त करूब के रूप में अपने पद को तुच्छ जाना और स्वयं परमेश्वर जैसा बनने का दुस्साहस किया (यशायाह 14:12-14; यहेजकेल 28:13-15; 1 तीमुथियुस 3:6)। लेकिन परमेश्वर ने उसे हमेशा के लिए नरक में डाल दिया है, और उसने आपको उसके अधिकार और दावों से मुक्त कर दिया है (लूका 11:20-22; कुलुस्सियों 2:15)। यीशु मसीह ने शैतान के कामों को नष्ट कर दिया है, जिसमें आपका अपना ठट्ठा करने का स्वभाव और विद्रोह भी शामिल है (इब्रानियों 1:3; 2:14-15; 1 यूहन्ना 3:8)। उसके महिमामंडित नाम की स्तुति करो!

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