नीतिवचन 22:1
बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है, और सोने चाँदी से दूसरों की प्रसन्नता उत्तम है।
आपकी प्रतिष्ठा आपके द्वारा खरीदी जा सकने वाली किसी भी चीज़ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण संपत्ति है। दूसरों से मिलनेवाला सम्मान और आपके प्रति उनका स्नेह वह इज्ज़त और शोहरत है जिसे आप सावधानीपूर्वक जीवन जीने से ही कमाते हैं। आपका चरित्र और आचरण, जैसा कि दूसरों को दिखाई देता है, सबसे बड़ा ख़ज़ाना है जिसे आपको हर दिन बुद्धिमानी भरे फैसलों द्वारा कमाना चाहिए।
आपका नाम सुनते ही लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं? क्या वे आपके नाम के साथ दयालुता, सच्चाई, परिश्रम, नम्रता और विश्वासयोग्यता को जोड़ते हैं? क्या आपका नाम उनके कानों और मन को मधुर लगता है? वे आपके बारे में दूसरों से कैसे बातें करते हैं? क्या आपकी अनुपस्थिति में अक्सर आपकी प्रशंसा की जाती है? क्या अन्य लोग आपकी उपस्थिति से प्रसन्न होते हैं और आपके साथ समय बिताना चाहते हैं? क्या वे आपको स्नेह, उपहार और सेवा से सम्मानित करना चाहते हैं?
या आपका नाम सुनते ही लोग कड़वाहट से अपना मुँह बनाते हैं? क्या वे आपके नाम के साथ घमंड, स्वार्थ, मनमौजीपन, आलस्य, नासमझ या कठोरता को जोड़ते हैं? क्या वे आपसे बचने की कोशिश करते हैं? क्या वे आपको अनदेखा करते हैं? जब दूसरे आपके बारे में बातें करते हैं, तो क्या उन्हें आपके आचरण के लिए शर्मिंदा होना पड़ता है? क्या वे निमंत्रण या कोई ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए आपको अनदेखा कर देते हैं, क्योंकि आप प्रसन्न करने की बजाय चिढ़ दिलानेवाले वाले के नाम से जाने जातें हैं?
आप इन सवालों से बचकर खुद को बुद्धिमान नहीं कह सकते। आपकी प्रतिष्ठा और दूसरों से रिश्ते आपके जीवन का सही मूल्यांकन है। शान्त हो कर बैठें और दूसरों की नज़रों में आपकी क्या इज्ज़त है इसकी जांच करें। दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं, यह आपके जीवन की उससे कहीं अधिक सटीक तस्वीर है जो आप अपने बारे में सोचते हैं, क्योंकि आपमें तथ्यों को अपने पक्ष में विकृत करने का एक स्पष्ट पूर्वाग्रह है, और आपके अन्दर एक ऐसा धोखेबाज दिल है जो खुद के बारें में सिर्फ़ अच्छा ही सोचता है (नीतिवचन 16: 2; 20:6; यिर्मयाह 17:9;
कुछ लोगों के नामों के साथ कहावतें या लोकोक्तियाँ जोड़ी जाती हैं। उन कहावतों या लोकोक्तियों का उपयोग उनके ख़राब चरित्र और उनके दुर्गुणों को दिखाने के लिए उदाहरणों के रूप में किया जाता है। आपके नाम के साथ कौन-सी कहावतें या लोकोक्तियाँ जोड़ी जाती हैं? क्या लोग आपके साथ स्नेहपूर्वक और सम्मानपूर्वक बातें करते हैं, या आलोचनात्मक और नकारात्मक रूप से बातें करते हैं? कई लोगों के पास कोई अच्छा गुण नहीं होता है, इसलिए वे अपना सारा जीवन बिना किसी सम्मान के गुजारते हैं, जो उनमें सच्चाई और सदाचार के जीवन के लिए उनके परिश्रम और प्राथमिकता की कमी को दर्शाता है।
अच्छा नाम क्या है? यह आपके माता-पिता द्वारा सुन्दर अक्षरों या अक्षरों का ऐसा संयोजन चुनना नहीं है जिससे आपका नाम परिष्कृत, उत्तम दर्जे का या कानों को प्रसन्न करनेवाला लगता हो। न ही इसका अर्थ अपने किसी सम्मानित पूर्वज, या किसी पराक्रमी व्यक्ति के नाम पर अपना नाम रखना होता है। आपके अक्षरों वाले नाम का कोई मूल्य नहीं है। सुलैमान ने इस नीतिवचन में “अच्छे नाम” वाक्यांश का उपयोग दूसरों से प्राप्त सम्मान और समाज में अच्छी प्रतिष्ठा की ओर संकेत देने के लिए किया है। उन्होंने अपने बेटे को जीवन के मुख्य लक्ष्यों में से एक के रूप में परमेश्वर और अच्छे लोगों की स्वीकृति जीतने पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित किया (नीतिवचन 3:4)।
यहाँ प्रयुक्त वाक्यांश ‘दूसरों की प्रसन्नता’ का क्या अर्थ है? इसका अर्थ दूसरों को प्रेम देने और प्रसन्न करना नहीं है, बल्कि अपने लिए उनसे प्रेम और अपने प्रति उनकी प्रसन्नता प्राप्त करना है। यह अन्य कुलीन मनुष्यों से अपने लिए स्नेह और सम्मान प्राप्त करना है। यह आपके जीवन के प्रति उनकी मान्यता और अनुमोदन जीतना है। दूसरों से अपने लिए ऐसी बहुमूल्य राय प्राप्त करने के लिए आपको अवश्य है कि आप अपने आचरण को हमेशा सच्चा और महान बनाए रखने में सावधान रहें। उनकी नज़रों में अपनी इज्ज़त और विश्वास को बनाए रखने के लिए आपके एकनिष्ठ और बुद्धिमानीपूर्ण व्यवहार रखने की आवश्यकता है (सभो 10:1)।
इस नीतिवचन में दीर्घवृत्त है, जिसमें ऐसे शब्द साइलेंट होते हैं जिनकी अनुपस्थिति से वाक्य संक्षिप्त हो जाता है और उसे दृढ़ बना देते हैं। दूसरा खंड कहता है, “और सोने चाँदी से दूसरों की प्रसन्नता उत्तम है।” पहले उपवाक्य से लिए गए ये शब्द नीतिवचन के संपूर्ण अर्थ को भरने के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों खंडों में तुलना और विकल्प सिखाया जा रहा है।
दोनों ही मामलों में यह आपका चुनाव है। आप अपने लिए अच्छा नाम और दूसरों की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता कमाने का चुनाव कर सकते हैं। यह आपका फैसला है। दोनों बातें प्राथमिकता होनी चाहिए। दोनों ही सफलता के अन्य सभी आयामों से अधिक महत्वपूर्ण हैं। परिस्थितियाँ या भेदभाव उन मूर्ख या आलसी मनुष्यों के लिए बहाना हैं जिन्होंने इन दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों का ठीक से पीछा नहीं किया है। एक बुद्धिमान व्यक्ति अच्छा नाम और दूसरों की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता कमाने के लिए परिश्रम करेगा।
इस नीतिवचन का सबक क्या है? आपको अपनी प्रतिष्ठा और दूसरों के साथ अपने रिश्तों पर बहुत अधिक मेहनत करनी है। जहाँ एक ओर कई लोग अपनी पूरी ताकत से वित्तीय और व्यावसायिक सफलता (बड़ा धन और सोना-चाँदी) का पीछा करते हैं, सुलैमान ने अपने बेटे को इन अन्य लक्ष्यों की तुलना में अपनी प्रतिष्ठा और रिश्तों को अधिक महत्व देने के लिए प्रोत्साहित किया। वह चाहता था कि उसका बेटा परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़े, और उसने इस उपलब्धि के महत्व को बड़े धन से अधिक मूल्यवान माना (नीतिवचन 3:4; 1 शमू 2:26; लूका 2:52)।
आप सुलैमान के पाठ का मूल्यांकन कैसे करते हैं? आपकी प्रतिष्ठा आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है? क्या यह किसी भी बड़े धन या सफलता से अधिक महत्वपूर्ण है? क्या आप आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के बजाय अपने नाम की प्रतिष्ठा बढाने के लिए अधिक मेहनत करते हैं? आप सज्जन लोगों से मिलनेवाले आदर और सम्मान को कितना महत्व देते हैं? क्या आप अपराधरहित बने रहने के लिए नियमित रूप से अपने आचरण का परिक्षण करते हैं? क्या आप यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं कि आप जो भी काम करें वह सभी संबंधित पक्षों के लिए बहुत अच्छा हो?
परमेश्वर आपको इस आधार पर मापता है कि दूसरे आपके बारे में क्या सोचते हैं। आप एक ही समय में परमेश्वर को प्रसन्न और सज्जन लोगों को नाराज नहीं कर सकते। यह असंभव है। यदि आप परमेश्वर को प्रसन्न कर रहे हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन कर रहे हैं, तो आप दूसरों को भी प्रसन्न करेंगे (1 शमू 18:14-16; 1 यूहन्ना 5:2)। और आपके परिवार और करीबी दोस्तों की कोई गिनती नहीं होगी, क्योंकि सज्जन लोगों की दृष्टि में आपकी प्रतिष्ठा ही सबसे बढकर है। आप किसी व्यक्ति के चरित्र का आंकलन इस बात से कर सकते हैं कि उसके कितने मित्र हैं, और वे किस प्रकार के मित्र हैं। ये तथ्य झूठ नहीं बोलते।
निःसंदेह, दूसरों की राय आपका एकमात्र माप नहीं है, या सबसे महत्वपूर्ण नहीं है (यूहन्ना 5:44)। लेकिन आपके बारे में दूसरों की राय एक तरीका ज़रूर हैं। यदि सज्जन लोग और महिलाएँ आपके प्रति कम आदर रखते हैं, तो आप अपने जीवन और आचरण को ज्यों का त्यों रखकर खुद को मूर्खतापूर्वक धोखा देते हैं। यूसुफ और दानिय्येल को उनकी उत्तम आत्माओं और निर्दोष जीवन के कारण विदेशी भूमि में बन्दियों के रूप में भी बहुत अधिक सम्मान दिया जाता था।
प्रेरितों और सभी मनुष्यों के बीच दिमेत्रियुस नामक मनुष्य का बहुत बड़ा नाम और प्रतिष्ठा थी (3 यूहन्ना 1:12); तीमुथियुस को पौलुस से मिलने से पहले और बाद में बहुत सम्मान दिया जाता था (प्रेरितों 16:1-2; फिलि 2:19-22)। दुनिया में अच्छी प्रतिष्ठा का यह उच्च स्तर यीशु मसीह के चर्चों के पास्टरों के लिए एक आवश्यक योग्यता है (1 तीमु 3:7)। आप इस माप पर कहाँ हैं?
दुनिया के सामने अच्छा नाम कमाना संभव है, लेकिन कुछ दुष्ट लोग आपकी सच्चाई का मूल्य नहीं समझेंगे (1 थिस्स 4:12; 1 पतरस 2:12; दानिय्येल 6:3-5; लूका 6:26)। सुलैमान का इरादा मुख्य रूप से सज्जन और बुद्धिमान लोगों का था, जो परमेश्वर के मन और इच्छा को जानते हैं और अन्य लोगों को उनकी सच्चाई से मापते हैं। संसार से समझौता करना या मित्रता करना पापियों का लक्षण है (याकूब 4:4)।
अपने बारे में आपकी राय बिलकुल बेकार है। अपने बारे में आपकी राय आमतौर पर तथ्य के विपरीत होती है। अच्छी प्रतिष्ठा वाले लोग आमतौर पर अपने बारे में आत्म-धर्मी सोच नहीं रखते हैं, और यह उन्हें दूसरों के प्रति विनम्र और संवेदनशील रखता है; लेकिन खराब प्रतिष्ठा वाले लोग खुद को चाहनेयोग्य समझते हैं, उन्हें लगता है कि हर कोई उन्हें पसंद करता है जिसके कारण वे आपत्तिजनक वाणी और आचरण करते हैं विनम्र विनम्रता और आत्म-धार्मिकता के बीच का अंतर एक अच्छे नाम का एक बड़ा हिस्सा है, जो अपने बारे में आत्म-धार्मिक सोच के बिना बनाया जाता है, अर्थात् खुद को दूसरों से कम सज्जन समझना।
परमेश्वर और खरे मनुष्यों की दृष्टि में “प्रेमपूर्ण प्रसन्नता” में बढ़ना आपका सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए, जैसा कि शमूएल और प्रभु यीशु मसीह का था (नीतिवचन 3:4; 1 शमू 2:26; लूका 2:52)। ऐसा तब होता है जब आप दो महान आज्ञाओं का पालन करते हैं – “परमेश्वर से प्रेम और अपने समान अपने पड़ोसी से प्रेम।” इस नीतिवचन में प्रयुक्त “प्रसन्नता” यह है कि परमेश्वर और अन्य सज्जन लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जिसे आप उनके सामने भक्ति और प्रेम का निरंतर जीवन जीकर चुन सकते हैं। आप में एक उत्तम आत्मा दूसरों को आपसे प्रेम करने के लिए प्रेरित करेगी।
ये लक्ष्य इतने महान हैं – आपका अच्छा नाम और दूसरों से सम्मान – कि इन्हें किसी भी अन्य लक्ष्य से अधिक होना चाहिए। अमीर बनने के लिए लोग कई वर्षों कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन एक अच्छा नाम और प्रतिष्ठा बनाना अधिक महत्वपूर्ण है। यदि आपके पास अच्छा नाम और अच्छी प्रतिष्ठा कमाने तथा बहुमूल्य सोना-चाँदी कमाने के बीच विकल्प हो, तो आपको अच्छा नाम कमाने का चुनाव करना चाहिए (सभो 7:1)।
अपनी अन्तिम यात्रा पर विचार करें (नीतिवचन 10:7)। सच्चे मनुष्य का स्मरण धन्य है, परन्तु दुष्टों का नाम सड़ जाएगा। आपको कैसे याद किया जाएगा? आपको कब तक याद किया जाएगा? क्या आपकी स्मृति लोगों के मनों में प्रसन्न विचार को जन्म देगी, और आपकी याद में उनकी आँखे नम हो जाएंगी? या ज्यादातर लोग कड़वाहट से मुँह बनाएँगे और राहत महसूस करेंगे कि अच्छा हुआ आप मर गएँ? किसी भी अंतिम यात्रा में लोगों की संख्या, मरनेवाले के चरित्र और उसकी प्रतिष्ठा के विषय में बहुत कुछ कह जाती है।
आपके दो नाम हैं। आपका पहला नाम वह है जो आपके माँ-बाप ने रखा था, जो पृथ्वी पर अरबों लोगों के बीच एक आपकी एक विशिष्ट पहचान है। आप कैसे रहते हैं और दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इससे आपके पहले नाम की प्रतिष्ठा बनती है। परमेश्वर ने आपको जन्म के समय वह नाम दिया जिसकी कोई प्रतिष्ठा नहीं थी । तब से आपने इसके साथ क्या किया है? आपने या तो इसकी प्रतिष्ठा बढ़ाई है या इसे मिट्टी में मिला दिया है। आपके नाम का पहला अक्षर सुनते ही दूसरों में आपके बारे में प्रतिक्रियाएँ और विचार उत्पन्न हो जाते हैं। उनकी भावनाएँ और विचार क्या हैं?
आपका दूसरा नाम आपका उपनाम (सरनेम) या घराने नाम है। आपका परिवार कैसे रहता है और परिवार के लोग दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इससे आपके घराने के नाम की प्रतिष्ठा बनती है। क्या आप अपने घराने का नाम ऊँचा कर रहे हैं? या आप उसे मिट्टी में मिला रहे हैं? क्या अन्य लोग आपके परिवार के साथ रहना चाहते हैं? या क्या वे इतने आहत हो गए हैं कि आपके परिवार से छूट गएँ हैं? क्या लोग अपना नाम अच्छे घराने से जोड़ने के लिए आपके परिवार में अपने बेटों-बेटियों की शादियाँ करना चाहते हैं? घराने का नाम प्रतिष्ठित बनाने के लिए परिवार के हर सदस्य को अथक प्रयास और बिना टूटे सत्य और खराई से चलना पड़ता है।
बाइबल में वर्णित मनुष्य, दाऊद का बहुत बड़ा नाम था। उसका नाम इज़राइल में बहुत प्रतिष्ठित था (1 शमू 16:18; 18:30)। हालाँकि शाऊल राजा था, और उसका उत्तराधिकारी बनने उसका पुत्र योनातान राजकुमार था, फिर भी देश के लोग दाऊद से प्रेम रखते थे, क्योंकि वह किसी भी अन्य व्यक्ति से उत्तम था (1 शमू 18:1-16)। हर कोई दाऊद के साथ रहना चाहता था, दाऊद जैसा बनना चाहता था, या दाऊद से वैवाहिक रिश्ता बनाना चाहता था। दाऊद ने हर समय दयालु, विनम्र और बुद्धिमान रहकर इस नाम को अर्जित किया। परमेश्वर ने इस मनुष्य को, भले ही वह पापी था, इस्राएल में एक महान नाम की मिसाल बनने के लिए चुना।
सुलैमान के राज्याभिषेक के आशीर्वाद में उसके पिता दाऊद के नाम से बड़ा नाम होना शामिल था, जो आसानी से इज़राइल में सबसे बड़ा था (1 राजा 1:47)। यहाँ तक कि परमेश्वर ने बाद के सभी राजाओं की तुलना दाऊद से की, और उसे परमेश्वर के हृदय के अनुरूप व्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया। क्या लक्ष्य है! आप कैसे मापते हैं, पाठक? अच्छे पिता चाहेंगे कि उनके बेटे प्रतिष्ठा और लोगों का प्रेम तथा उनकी प्रसन्नता कमाने में उनसे आगे निकलें, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने कितनी गलतियाँ की हैं।
नाबाल इसके ठीक विपरीत था। वह निर्दयी था – कंजूस, कठिन और कठोर (1 शमू 25:2)। उसके नाम का मतलब ही मूर्ख था, और यहाँ तक कि उसकी पत्नी भी कहती थी कि वह मूर्ख है (1 शमू 25:25)। वह एक अधम मनुष्य था – दुष्ट और घिनौना। परमेश्वर ने उसे मारने से पहले दस दिनों तक मरने के बारे में सोचने दिया, ताकि दाऊद उसके अंतिम संस्कार के तुरंत बाद उसकी खूबसूरत पत्नी से विवाह कर सके (1 शमू 25:39)।
यूसुफ पर विचार करें। यद्यपि वह एक गुलाम था, उसने अपने अनुकरणीय आचरण से परमेश्वर और पोतीपर की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता हासिल कीं (उत्पत्ति 39:1-6)। हालाँकि उस पर बलात्कार के प्रयास का आरोप लगाया गया था, फिर भी उसने परमेश्वर और बंदीगृह के अधिकारी की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता हासिल कीं (उत्पत्ति 39:19-23)। लंबे समय तक कैदी रहने के बावजूद, उसने परमेश्वर और फिरौन की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता हासिल कीं (उत्पत्ति 41:38-45; प्रेरितों के काम 7:10)। जब कोई यह कहता है कि उसकी परिस्थितियों या अतीत ने उसके नाम को हमेशा के लिए मिट्टी में मिला दिया है, वह सिर्फ बहाना बना रहा है।
दानिय्येल पर विचार करें। यद्यपि वह एक पराए, छोटे से देश में बंदी था और उसे नपुंसक बना दिया गया था, फिर भी उसने परमेश्वर और बेबीलोन में नपुंसकों के राजकुमार अशपनज की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता हासिल कीं (दानिय्येल 1:9)। कई दशकों तक सार्वजनिक जीवन जीने के बावजूद, उनके दुश्मनों को उसमें एक भी कमी या दोष नहीं मिला ताकि वे राजा के सामने उसपर आरोप लगा सकें (दानिय्येल 6:1-5)। नव-जवानों के लिए यह क्या ही अद्भुत आदर्श है!
आप अपना नाम और प्रतिष्ठा बनाने और दूसरों की प्रेमपूर्ण प्रसन्नता जीतने के लिए क्या कर सकते हैं?
आप प्रतिदिन जो कुछ भी करते हैं वह आपकी प्रतिष्ठा बनाने और दूसरों की प्रसन्नता प्राप्त करने में योगदान देता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि काम कितना छोटा या बड़ा है, आपके शब्दों और कार्यों का संचित प्रभाव मिलकर परमेश्वर और मनुष्यों को आपके चरित्र और वफादारी का मूल्यांकन देता है। इसलिए, यह आपका गंभीर कर्तव्य और सौभाग्य है कि आप अपने मन, होंठ और पैरों की पूरी शिद्दत से रक्षा करें।
दयालुता एक अच्छा नाम कमाने और दूसरों की प्रसन्नता जितने के लिए सबसे बड़ा सद्गुण है, क्योंकि यह राजाओं की मित्रता भी जीत सकता है और जब यह सद्गुण महिलाओं में होता है तो यह हमेशा उनके सम्मान और प्रेम पाने का कारण बन सकता है (नीतिवचन 22:11; 11:16)। यह नम्रता, दयालुता, और प्रसन्नता का आदर्श संयोजन है जो पुरुषों और महिलाओं को आकर्षक और खुशमिजाज बनाता है। आप कितने दयालु हैं?
लोग उन लोगों से प्रेम करते हैं जो उनके जीवन को बनाने में उनकी मदद करते हैं (नीतिवचन 27:9,17; भजन 141:3)। क्या आप दूसरों के लिए जीवन का वृक्ष हैं (नीतिवचन 11:30; 15:4)? क्या आपके आसपास रहने से उन्हें लाभ होता है (नीतिवचन 9:8; 25:12; 28:23)? क्या वे आपसे मदद मांगते हैं? क्या आप यूसुफ के समान अपने साथी कैदियों (हर कोई किसी न किसी बंधन में होता है) की मदद करते हैं? या जैसे दानिय्येल ने उनकी मदद की थी जो उसे बन्दी बनाकर ले गएँ थे? या किसी सांसारिक व्यक्ति की जैसे एस्तेर राजा की मदद कीं थी? या दोरकास के समान जिसने कई विधवाओं की मदद कीं थी?
क्या आपके मुंह की बातें घाव चंगा करनेवाला मरहम हैं? या तंज कस्नेवाला कोड़ा, या एक मूर्खतापूर्ण शोर है? लोगों को मधुर और मनभावने शब्द सुनना अच्छा लगता है जो अनुग्रहसहित, सौम्य, मैत्रीपूर्ण और मददगार साबित हों (नीतिवचन 12:18; 16:24; 18:21; 25:11)। क्या आपकी वाणी हमेशा अनुग्रहसहित होती है और साथ ही थोड़ी-सी डांट-फटकार ताकि ग़लती करनेवाले को सुधारा जा सके (कुलुस्सियों 4:6)?
प्रेम कभी असफल नहीं होता! यदि आप 1 कुरिन्थ 13:4-7 से सच्चे प्रेम का वर्णन करने वाले पंद्रह वाक्यांश सीखते हैं और अपने व्यवहार और आचरण में उनका उपयोग करते हैं, तो आपका नाम किसी खुशबूदार सुंदर फूल के समान खिल जाएगा। यदि आपका नाम अच्छा नहीं है और आपके मित्र कम हैं, तो यह इस बात का प्रमाण है कि आपने सच्चा बाइबल-आधारित प्रेम नहीं सीखा है। प्रेम कभी असफल नहीं होता।
बस थोड़ी सी मूर्खता आपकी प्रतिष्ठा को चंद पलों में धूमिल कर सकती है (सभो 10:1), इसलिए आपको बुराई के हर स्वरुप से भी बचना है (1 थिस्स 5:22)। और जितना जल्दी हो, अपने अपराधों के लिए पश्चात्ताप करना चाहिए (मत्ती 5:23-24)। कुलीन और सद्गुणी बने रहने के लिए अपनी आत्मा पर लगातार शासन करना आवश्यक है (नीतिवचन 16:32)। पौलुस ने यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए कि उस पर कभी भी बेईमानी का आरोप न लगाया जा सके (2 कुरिन्थ 8:21)।
वॉरेन बफेट, जो दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं और जिनका हर जगह सबसे ज्यादा स्वागत किया जाता है, इस नीतिवचन की बुद्धि को जानते हैं। वह दूसरों को सिखाते हुए कहते हैं, “प्रतिष्ठा बनाने में बीस साल लगते हैं और इसे बर्बाद करने में सिर्फ पाँच मिनट। यदि आप इस बात पर विचार करें, तो आप चीजों को अलग तरीके से करेंगे।” यह मनुष्य परमेश्वर का भय नहीं मानता था, परन्तु फिर भी वह इस नीतिवचन की बुद्धि का अभ्यास करने से उसे भी लाभ हुआ है।
मानव इतिहास के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक, जॉन डी रॉकफेलर ने कहा, “एक युवा व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अपनी साख स्थापित करना है – अर्थात् प्रतिष्ठा, चरित्र।” उन्होंने यह भी कहा, “सही काम करने के अलावा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को यह बताना कि आप सही काम कर रहे हैं।” यह बाद वाला विचार प्रेरित पौलुस से अच्छी तरह सहमत है(रोमियों 12:17; 2 कुरिन्थ 8:21)।
यदि आप युवा हैं, तो आपके पास मौका है। आपकी प्रतिष्ठा अब भी बन रही है, और आपको इसे परमेश्वर और मनुष्यों के सामने सर्वोत्तम बनाने के लिए पूरी लगन से काम करना होगा। यदि आप युवा हैं, तो आपने वृद्ध व्यक्तियों जितनी गलतियाँ नहीं की हैं, जिसका अर्थ है कि आपके पास उन गलतियों को न करने का मौका है। इस नीतिवचन को उच्च लक्ष्य बनाने और उसके अनुसार जीने के लिए आज ही फैसला लें।
क्या आपने पहले ही अपनी प्रतिष्ठा धूमिल कर ली है? क्या आपको लगता है कि बहुत देर हो चुकी है? यदि आप परमेश्वर के सामने पश्चाताप करेंगे, उसके सामने अपने पापों को स्वीकार करेंगे, दूसरों के सामने अपनी गलतियों को मान लेंगे, और आपने की हुई किसी भी गलती के लिए सुधार या क्षतिपूर्ति करेंगे, तो अब भी देर नहीं हुई है। दाऊद ने भयानक पापों के बाद अपनी प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त की, और जक्कई और पतरस ने भी ऐसा ही किया (लूका 19:1-9; गलातियों 2:9)।
आपका नाम और प्रतिष्ठा रोजमर्रा के फैसलों का मामला हैं, और आपको किसी भी अन्य उद्यम या लक्ष्य से अधिक उन्हें बनाने और संरक्षित करने का चयन करना चाहिए। आप अपना नाम और प्रतिष्ठा बदल सकते हैं, इसलिए इसे अपने जीवन के लिए एक धन्य विशेषाधिकार, कर्तव्य और उच्च प्राथमिकता मानें। अपने शरीर के निर्माण के लिए व्यायाम, आहार और नींद पर जोर देने के बजाय, जिसका परमेश्वर या मनुष्यों के लिए बहुत कम मूल्य है, अपने आप को भक्ति और दूसरों से प्यार करने के लिए तैयार करें (1 तीमुथियुस 4:7)।
पतियों, क्या आप अपनी अपनी पत्नी से इतना प्यार करते हैं कि उसका नाम बनाने में और दूसरों की प्रसन्नता और प्रशंसा प्राप्त करने में उसकी मदद कर सकें? माता-पिता, क्या आप इस नीतिवचन के महत्व को समझते हैं ताकि आप अपने बच्चों के सामने इसे लक्ष्य के रूप में रखें? यह सुनिश्चित करने के लिए हर दिन मेहनती प्रयास किए जाने चाहिए कि आपके परिवार और घराने का नाम और परिवार के प्रत्येक सदस्य का नाम अपराध से मुक्त हो। यह कितना अद्भुत पारिवारिक लक्ष्य होगा!
यदि आप ख्रिश्चन व्यक्ति हैं तो जान लें कि आपके नाम के साथ यीशु मसीह का नाम जुड़ गया है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आपका नाम और प्रतिष्ठा आपके इस प्रभु और उसके धर्म की प्रतिष्ठा को बढ़ाएं (2 तीमुथियुस 2:19)। पिन्तेकुस्त के लोगों के समान बनो, जिनसे सब लोग बड़े प्रसन्न थें (प्रेरितों 2:47; फिलि 2:14-16)। आपका जीवन परमेश्वर की शिक्षा को महिमा और सुंदरता से सुशोभित करे (तीतुस 2:5,8,10)। उन अनाम भाइयों के समान बनें जिन्हें पौलुस ने “मसीह की महिमा” के रूप में सम्मान दिया (2 कुरिन्थ 8:23)। मत भूलो कि इस देश में शिक्षा, स्वस्थ, और सामाजिक सुधार करने में ख्रिश्चन समाज का सबसे बड़ा योगदान और बलिदान रहा है, और यह सिलसिला आज भी जारी है, और आपको इस विरासत को आगे बढ़ाना है। ‘ख्रिश्चन’ नाम का महिमामंडन करें।
नाज़रेथ के यीशु अपनी युवावस्था में ही परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ते गएँ (लूका 2:52)। उनके आचरण और वाणी में अत्यंत अनुग्रह था (भजन 45:2; लूका 4:22)। चूँकि वह सत्य से प्रेम रखते थे और दुष्टता से घृणा रखते थे, इसलिए परमेश्वर की प्रेमपूर्ण कृपा ने उन्हें अपने साथियों से अधिक आनन्द के तेल से अभिषेक किया (इब्रानियों 1:9)। उनका नाम कई मायनों में हर नाम से ऊपर है। एक आदर्श नाम चुनें, जैसे उनका नाम स्वर्ग और पृथ्वी पर परिपूर्ण है।
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