नीतिवचन 20:27

मनुष्य की आत्मा यहोवा का दीपक है; वह पेट की सब बातों की खोज करता है।

मनुष्य कोई जानवर नहीं है, और न ही वह किसी जानवर जैसा है। स्वर्ग और पृथ्वी के रचयिता परमेश्वर यहोवा ने मनुष्य में कुछ ऐसा डाला है जो उसे सब प्राणियों से अलग रखता है। परमेश्वर ने मनुष्य को ज़मीर दिया है, और यह ज़मीर प्रत्येक पुरुष, स्त्री और बच्चे के लिए एक आन्तरिक कानून, आन्तरिक शिक्षक और आन्तरिक न्यायाधीश है।

आपका ज़मीर यहोवा का दीपक है। आपके अंदर परमेश्वर की यह ज्योति आपके विचारों, शब्दों और कार्यों को परखती और सही और ग़लत का निर्णय करती है। मनुष्य जब फैसले लेता है, उन्हें वह अपने प्राकृतिक सहज-ज्ञान से आगे बढ़कर लेता है, क्योंकि परमेश्वर ने प्रत्येक सचेत व्यक्ति को ज़मीर दिया है जिससे वह जान सके कि क्या सही है और वही कर सके।

ज़मीर या अंत:करण (Conscience / कांशेंस) का तात्पर्य उस अंदरूनी शक्ति से है जिससे व्यक्ति उचित और अनुचित का निर्णय करता है -अर्थात् अपने भीतर अपने बारे में जानता है। आपके अंदर की इस अदृश्य आत्मा को सही और गलत का एहसास है, और यह केवल उन्ही बातों को मंजूरी देगी जो सही हैं, और आपके द्वारा किए गए सब गलत कामों के लिए आपको दोषी ठहरायेगी। साथ ही, यह आत्मा या अन्त:करण दूसरों के कामों को भी परखेगा और निर्णय देगा कि वे काम सही हैं या गलत।

सोचकर देखें कि आप किस प्रकार अपने भीतर एक विचार को जन्म दे पाते हैं और फिर उस विचार का कैसे विश्लेषण और मूल्यांकन भी कर पाते हैं। मनुष्य स्वयं को केवल अपने ज़मीर से ही जान सकता है; वह इसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को नहीं जान सकता (1 कुरिन्थ 2:11)। कभी-कभी आपकी आत्मा आनंद और प्रसन्नता से भरी होती है, और कभी-कभी यह दुःख और निराशा से भरी होती है, और कोई अन्य व्यक्ति आपकी ऐसी भावनाओं को पूरी तरह से न तो महसूस कर सकता है और न जान सकता है (नीतिवचन 14:10)।

इस नीतिवचन में प्रयुक्त शब्द ‘पेट’ हमारे दिल (मन) और दिमाग के लिए दार्शनिक शब्द है। यह एक रूपक या भाषालंकार है जिसमें शरीर के एक अंग का उपयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि वहां क्या चल रहा है। जब आप प्रेम से भर जाते हैं या किसी बात से भयभीत हो जाते हैं, आप इसे अपने पेट में महसूस कर सकते हैं। जब यह प्रेम होता है, तो आप कहते हैं, “मेरा पेट उछल रहा है।” जब यह डर हो, तो आप कहते हैं, “मैं डर डर के थक गया हूँ।” इस नीतिवचन के अनुसार, आपका अन्त:करण आपको निर्णय लेने में मदद करने के लिए आपके संपूर्ण आंतरिक व्यक्तित्व की परख करता है।

आपका ज़मीर या विवेक आपको इस बात में दोषी ठहरा सकता है कि आपने या दूसरों ने जो कुछ भी सोचा है, कहा है, या किया है वह गलत है (रोमियों 2:15)। अपराध बोध की यह आंतरिक भावना बहुत प्रबल हो सकती है, और आप जो करते हैं या नहीं करते हैं उसपर इस आंतरिक भावना का नियंत्रण हो सकता है या यह उसे प्रभावित कर सकती है। व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री पर जो लोग आरोप लगा रहें थें वे सब एक-एक करके उसे अकेला छोड़कर निकल गएँ, क्योंकि उनकी अंतरात्मा ने उन्हें ही उनके दुष्कर्मों के लिए दोषी ठहराया था (यूहन्ना 8:9)।

आपको आपका ज़मीर कैसे मिला? यहोवा परमेश्वर ने इसे आपको दिया है, इसलिए इसे यहोवा का दीपक कहा गया है। यह आपको निर्णय लेने में मदद करने के लिए परमेश्वर की ओर से एक प्रकाश है। यह आपकी पापपूर्णता को भी साबित करता है, क्योंकि आपने कई बार अपने ज़मीर के ख़िलाफ़ जाकर पाप किया है। भले ही परमेश्वर ने आपके किसी काम के लिए आपको अब तक दोषी न ठहराया हो, फिर भी यदि आपका ज़मीर उसके लिए आपको दोषी ठहराता है तो वह काम आपके लिए पाप है, (रोमियों 14:22-23; याकूब 4:17)।

सब मनुष्यों में ज़मीर होता है। अन्यजातियों, विद्रोहियों और फरीसियों में ज़मीर था, हालाँकि उनके लिए विश्वास करना कठिन था (रोमियों 2:15; 1:32; यूहन्ना 8:9)। अम्नोन और यहूदा इस्किरियोती में ज़मीर था (2 शमू 13:1-2; मत्ती 27:3-5)। बुरे और गैर-कानूनी कामों पर विश्वभर के देशों में प्रतिबन्ध और ईश्वरीय कानून-व्यवस्थाएं मनुष्य में विद्यमान इसी ज़मीर या विवेक को प्रतिबिंम्बित करते हैं, हालाँकि पाप के लिए उनका दुःख ईश्वरीय दुःख नहीं है, जो उन्हें पश्चात्ताप की ओर ले जाए (2 कुरिन्थ 7:9-11)। जिस व्यक्ति का नया जन्म नहीं हुआ होता है उसके लिए उसका ज़मीर केवल उसे दोषी ठहराने वाला एक और स्रोत या गवाह होता है।

परमेश्वर ने अपनी प्राकृतिक सृष्टि में सब मनुष्यों के सामने स्वयं को प्रकट किया है। दाऊद ने लिखा, “आकाश परमेश्वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है” (भजन 19:1)। पौलुस ने लिखा कि यद्यपि परमेश्वर आप अदृश्य है, जिन बातों की उसने सृष्टि की है उन्हें देखा जा सकता है, और वे मनुष्य के लिए यह साबित करती हैं कि एक सर्वशक्तिमान और सनातन परमेश्वर है, इस कारण मानव जाति के पास कोई बहाना नहीं है। परमेश्वर मनुष्यों के ज़मीर में भी, जो उसका दीपक है, अपने होने की घोषणा करता है, जो उन्हें उसके बारे में कुछ ज्ञान देता है।

महान पुरुषों और कुलीन स्त्रियों का ज़मीर बलवान होता है, और वे अपने ज़मीर (ज़मीर) की आवाज़ सुनते हैं। बलवान ज़मीर या विवेक वह है जिसे सुशिक्षा से प्रशिक्षित किया जाता है और जो जीवन की सब बातों के वसूलों का अध्ययन करता है, और महान लोग इन वसूलों को स्थापित कर उनपर चलते हैं। ऐसे लोग जो सही है उसे करने और जो गलत है उससे बचने के प्रति बहुत सतर्क होते हैं।। वे बुराई के प्रति बहुत पत्थर-दिल होते हैं। परमेश्वर ने आपको ज़मीर दिया है कि वह आपका दैनिक साथी बना रहे और जो आपकी सही काम करते रहने में और बुराई से दूर रहने में लगातार अगुवाई कर सके। अपने इस ज़मीर को और भी शक्तिशाली बनायें। उसका उपयोग करते रहे।

अवश्य है कि आप अपने ज़मीर को परमेश्वर के सत्य और उसकी बुद्धि में प्रशिक्षित करें, और जब जब वह आपको कुछ ख़ास मौकों पर कोई विशिष्ट काम करने के लिए कहता है और जब जब वह कहता है कि ये काम गलत हैं तो आपको उसकी सुनना है। परमेश्वर ने यह दीपक आपको महान बनाने में मदद करने के लिए दिया है, लेकिन आपके आस-पास की इस पापी दुनिया के लोग आपके उस ज़मीर को चुप कराने की कोशिश करते हैं ताकि वे जो जो करना चाहते हैं आप भी उन सब बातों को स्वीकार कर सकें। इसलिए अवश्य है कि आप इस दुनिया के तरह तरह के माध्यमों द्वारा प्रस्तुत सांसारिक जीवनशैली के द्वारा अपने ज़मीर को भ्रष्ट होने या मृत होने से बचाए।

आपके ज़मीर को प्रशिक्षित किया जा सकता है और किया भी जाना चाहिए। जितना अधिक आप सीखेंगे, उतना ही बेहतर आपका ज़मीर आपके लिए उपयुक्त ठहरेगा। यदि आप इन नीतिवचनों और बाकी बाइबल से परमेश्वर का ज्ञान और उस की बुद्धि को सीखते हैं, तो आपका यह ज़मीर आपकी और भी अधिक मदद करेगा (1 कुरिन्थ 8:1-7)। आप अपने अंत:करण, या विवेक, या ज़मीर को अज्ञानी भी रख सकते हैं ताकि आप उसे उन बातों के लिए आपको दोषी ठहराने से रोक सकें जिनकी अनुमति परमेश्वर ने दी है (1 कुरिन्थ 10:25-27)।

अफ्रीका और एशिया के कई देशों में यीशु मसीह का सुसमाचार पहुँचने से पहले वहां के आदिवासी-बहुल समाजों में स्त्रियाँ अपने स्तनों को नग्नावस्था में रखती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि आदतों और सामाजिक तथा धार्मिक परम्पराओं ने उनके ज़मीर को ऐसा प्रशिक्षित कर रखा था कि इसमें उन्हें कोई दोष नज़र नहीं आता था। और अगर कोई उन्हें टोकता, या आपत्ति जताता, तो इससे उन्हें ठेंस पहुंचती और वे आहत हो जाती थीं। केवल ख्रिश्चन मिशनरियों की शिक्षा ने ही उनके मरे हुए ज़मीर को जगाया जिससे कि उन्हें अपनी इन परम्पराओं पर लज्जा महसूस हुई और उन्होंने उनसे छुटकारा पाया। अब, ज़रा ध्यान से सोचें कि आपके बच्चे घर पर, टेलीविज़न पर या स्कूल में क्या देखते हैं।

आपके ज़मीर को शिक्षा देना अवश्य है। परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए, आपको एक ऐसे ज़मीर की आवश्यकता है जो परमेश्वर की इच्छा को जानता हो और उसी इच्छा के अनुसार अपने जीवन को चलाने का प्रयास करता हो। यह ज़मीर जो सत्य और बुद्धि से प्रेम रखता है, केवल परमेश्वर के नए जन्मे बच्चों में ही मौजूद है, पर फिर भी इसे लगभग हर विषय पर अपनी विचारधाराओं में सुधार करने के लिए परमेश्वर के वचन से शिक्षा की आवश्यकता होती है (इब्रानियों 5:14)।

अवश्य है कि आप अपने ज़मीर की बात माने। यदि आप उसकी पुकार को नजरअंदाज करते हैं, तो यह चीजों के प्रति धीरे धीरे कठोर, दागदार और असंवेदनशील होता जाएगा, जिससे आप किसी भी प्रलोभन में फसने के प्रति पूरी तरह असुरक्षित हो जायेंगे (1 तीमु 4:2; इफि 4:19)। यदि आप परमेश्वर और उसके वचन को नहीं मानते हैं, तो वह आपके ज़मीर को अंधा कर देगा और वह दीपक जो आपका मार्गदर्शक है, उसे वह बूझा देगा (रोमियों 1:21-28; 2 कुरिन्थ 4:2-4)।

क्या आप परमेश्वर की ओर से मिले अपने ज़मीर का मूल्य समझते हैं? आत्म-परिक्षण, जो सच्चे ख्रिश्चन व्यक्ति का कर्तव्य है, आंशिक रूप से ज़मीर द्वारा किया जाता है (भजन 26:2; 139:23-24)। यह कुरिन्थियों को न्याय से बचा सका (1 कुरिन्थ 11:28-31)। क्या आप रात को अपने मन में ध्यान करते हैं (भजन 4:4; 16:7)? क्या आप परमेश्वर के वचन के प्रचार के द्वारा खुद को दोषी ठहराने देते हैं (भजन 73:17,21)? शुद्ध ज़मीर या शुद्ध विवेक वाला विश्वास एक अद्भुत और शक्तिशाली बात है (नीतिवचन 28:1)।

अवश्य है कि आपका ज़मीर या आपकी अंतरात्मा हमेशा दूसरों के बारे में ज्यादा सोचे (1 कुरिन्थ 10:28-33)। पौलुस सदाचार का जीवन जीता था, इसलिए कि अपने विवेक या ज़मीर को परमेश्वर और मनुष्यों के प्रति शुद्ध रख सके (प्रेरितों 24:16)। परमेश्वर के प्रति ऐसा जागृत ज़मीर आपको परमेश्वर से प्रेम रखने की पहली आज्ञा को पूरा करने में सहायता करेगा, और दूसरों के प्रति ऐसा जागृत ज़मीर आपको अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखने की दूसरी आज्ञा का पालन करने में सहायता करेगा।

आपका सबसे बड़ा लक्ष्य है परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ना (नीतिवचन 3:1-4; लूका 2:52)। आपका लक्ष्य परिपूर्ण होना है। आपका ज़मीर आप को गलत काम करने के लिए और भली बातों को न चुनने का बहाना देने के विषय में दोषी ठहराकर इन लक्ष्यों को हासिल करने में आपकी मदद कर सकता है। पौलुस ने हर समय एक अच्छा विवेक बनाए रखा (2 कुरिन्थ 1:12; इब्रा 13:18), और उसने तीमुथियुस और कलीसिया के सेवकों से भी ऐसा ही करने ले लिए कहा (1 तीमुथियुस 1:5,19; 3:9)।

परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता के सबसे पहले कामों में से एक बपतिस्मा है, जिसे बाइबल परमेश्वर के प्रति शुद्ध विवेक की प्रतिक्रिया कहती है (1 पतरस 3:21)। (जिन शिशुओं में सक्रिय ज़मीर नहीं होता है, उन्हें नए नियम में कभी बपतिस्मा नहीं दिया गया।) सुसमाचार सुनने से पहले, नया जन्म पाए हुए मनुष्य का ज़मीर दूषित होता है, वह जानता है कि वह पापी है और परमेश्वर के क्रोध का पात्र है। लेकिन सुसमाचार उसे बताता है कि यीशु मसीह ने उसके पापों का दाम चूका दिया है, जो उसे अपराध-मुक्त ज़मीर देता है, जो उसे दयालु अनुग्रह के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए प्रेरित करता है (इब्रानियों 9:14; 10:19-22)।

आपका ज़मीर अभी इसी वक़्त आपको या तो स्वीकार करेगा या दोष देगा। यदि आप पवित्र और धार्मिक जीवन जी रहे हैं, तो इस नीतिवचन का पालन करने के लिए आपका ज़मीर आपकी प्रशंसा करेगा। यदि आप मूर्खतापूर्ण या सांसारिक जीवन जी रहे हैं, और अक्सर अपने ज़मीर की पुकार की अनदेखी कर रहे हैं, तो यह आपको गलत काम करने के लिए दोषी ठहराएगा। आप यहोवा के इस दीपक का कैसे उपयोग करोगे? परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपके अन्दर इस की ज्योत को फिर से जलाए (भजन 51:10), और फिर अपने जीवन के हर फैसले में आपका मार्गदर्शन करने के लिए इसका सावधानीपूर्वक उपयोग करें, ताकि आप परमेश्वर को प्रसन्न कर सके।

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