नीतिवचन 20:25
जो मनुष्य बिना विचारे किसी वस्तु को पवित्र ठहराए, और जो मन्नत मानकर पूछताछ करने लगे, वह फन्दे में फँसेगा।
परमेश्वर की आराधना करना आपको फन्दे में फँसा सकता है! यह बहुत गंभीर बात है; वह उन लोगों को शाप देगा जो उसके धर्म के साथ खिलवाड़ करते हैं (लैव्य 10:1-2; मलाकी 3:7-9)। बाइबल के महान और भयानक परमेश्वर की बिना विचारे आराधना करना अस्वीकार्य है; वह महान राजा है (मलाकी 1:14)। आजकल जिस प्रकार की आराधना कलीसियाओं में देखने मिलती है उस से सावधान रहें!
क्या आप परमेश्वर के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने सावधान हैं? जल्दबाजी, लालच, स्वार्थ या आलस आपको अपवित्र धार्मिक कर्मकाण्ड के फंदे में फँसा सकता है। हो सकता है आप अभिमानपूर्वक उस चीज़ से खिलवाड़ कर बैठें जो परमेश्वर की है, या हो सकता है आप ऐसी मन्नत मांगे जिसे आप पूरा नहीं कर सकते या नहीं करेंगे। यहाँ दो पाप हैं, दोनों ही पाप सांसारिक और लापरवाह ख्रिश्चन लोगों की उस मूर्खता को प्रकट करते हैं जो परमेश्वर का अनादर है।
यह सुलैमान के सबसे अस्पष्ट नीतिवचनों में से एक है, लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण भी है। आप इसके समग्र पाठ और दो पापों के बारे में इसकी चेतावनी को समझ सकते हैं। मन लगाकर पढ़ें। यहाँ पहला पाप है: एक व्यक्ति उस पवित्र वस्तु को खाता है जो परमेश्वर की है। पाप अपने लिए किसी ऐसी चीज़ का उपयोग करना है जो उचित रूप से परमेश्वर की है।
उदाहरण के लिए, व्यवस्था के अनुसार, इस्राएल में फसल का पहला फल परमेश्वर का भाग होता था (निर्गमन 23:19), लेकिन एक मूर्ख व्यक्ति अपने लालच के कारण उसे स्वयं खा लेता था। या, समझो एक और नियम जिसके अनुसार वह कोई मेमना स्वेच्छा बलि के रूप में परमेश्वर को चढ़ा सकता था (लैव्य 22:23), लेकिन वह अपने लालच के कारण उसे स्वयं खा लेता था। यह पहला पाप है – जो चीज़ परमेश्वर की है उसे लेना और अपने सुखविलास के लिए उसका उपभोग करना।
उसके बाद इस नीतिवचन में एक वाक्यांश है, “और जो मन्नत मानकर पूछताछ करने लगे।” क्या “और….मानकर पूछताछ करने लगे” का मतलब यह है कि यह अपवित्र मनुष्य मन्नत मांगने के बाद खुद ही उसे खा जाता है? या क्या “और….मानकर पूछताछ करने लगे” का मतलब यह है कि वह धार्मिक मन्नतों को पूरा करने में आनेवाली कठिनाईयों के बारे में पूछताछ किया बिना ही मन्नतें मांगता है? दूसरी सम्भावना सही व्याख्या होगी, क्योंकि पहली निरर्थक है।
परमेश्वर का भाग खा लेने के बाद एक अपवित्र मनुष्य किड विषय में पूछताछ करने की मन्नत माँगेगा? ऐसा अपवित्र मनुष्य मन्नत माँगेगा ही क्यों? वह क्या मन्नत माँगेगा? वह किस बारे में पूछताछ करेगा? यहां पाप मूर्खतापूर्ण, जल्दबाज़ी में और आवेगपूर्ण मन्नतें मांगना है, एक सामान्य पाप, जब कोई व्यक्ति केवल बाद में अपनी मन्नत और उसे चुकाने की लागत या कठिनाई के बारे में सोचता है।
इस दूसरे पाप को समझो। एक मूर्ख और अधार्मिक व्यक्ति परमेश्वर के सामने मन्नत मांगता है, और बाद में वह इस बारे में सोचता है कि वह इसे चुका सकता है या नहीं, और फिर वह मन्नत से बाहर निकलने की कोशिश करता है (सभो 5:6)। मन्नतें माँगने से पहले उन पर विचार किया जाना ज़रूरी होता: मन्नतें मांगना कोई दायित्व नहीं है, लेकिन आप जो भी मन्नतें मांगते हैं उन्हें पूरा करना एक भारी दायित्व बन जाता है (सभो 5:1-7)।
दूसरे वाक्यांश पर दूसरे तरीके से विचार करें। अन्य कई नीतिवचनों के समान ही इस नीतिवचन में कुछ शब्द अधूरे हैं, अर्थात् दीर्घवृत्तहै। दीर्घवृत्त में वे शब्द लुप्त रहते हैं जिन्हें पाठक समझ जाता है। शब्दों के दोहराव से बचने या वाक्य में बल जोड़ने के लिए शब्दों को छोड़ दिया जाता है। यहाँ दीर्घवृत्त इस प्रकार है, “यह एक फंदा है।” यदि आप उन्हें वहां जोड़ते हैं जहां वे लुप्त हैं, तो आप को दोनों पाप साफ़ साफ़ दिखाई देंगे। तो फिर यह नीतिवचन इस प्रकार होगा :
जो पवित्र वस्तु को खा जाता है उसके लिये यह फन्दा है, और जो मन्नत मानकर पूछताछ करने लगे, वह फन्दे में फँसेगा।
उपरोक्त दोनों काम मनुष्य के लिए फन्दा हैं, जिसमें वे खुद पर परमेश्वर का दण्ड ले आते हैं, जैसा कि बाकी सब परीक्षायें और पाप में होता हैं (नीतिवचन 18:7; 22:25; 29:6,8,25)। आपको अपने आप को पवित्र और जलनशील परमेश्वर के क्रोध से बचाने के लिए सभी धार्मिक कर्तव्यों में सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि नए नियम में भी वह केवल उस आराधना को स्वीकार करता है जो परमेश्वर का भय मानकर श्रद्धा से की जाती है (इब्रानियों 12:28-29)।
जब कोई वस्तु परमेश्वर की होती है, तो वह पवित्र होती है (लैव्य 27:9,30)। उसका उपयोग अपने लिए नहीं किया जा सकता। और जब आप मन्नत मानो, तो उसे पूरा भी करो; क्योंकि मन्नत न मानना, मन्नत मानकर उसे न चुकाने से उत्तम है (गिनती 30:2; व्यवस्थाविवरण 23:21-23; सभो 5:1-7)। आपको बाद में मन्नत से बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोजना चाहिए, भले ही मन्नत की कीमत आपकी सोच से अधिक हो, क्योंकि ऐसा करना दुष्ट हृदय को प्रकट करता है (भजन 15:4; सभो 5:6)।
यरीहो की लूट यहोवा परमेश्वर ही की थी (यहोशू 6:17-19), लेकिन आकान ने शापित वस्तुएं लीं, इसलिए इस्राएल ने उसे और उसके परिवार को पथराव किया और जला दिया (यहोशू 7:16-26)। यह लोभी मनुष्य उन चीज़ों को निगलने से खुद को रोक नहीं सका जो यहोवा के लिए पवित्र थीं। वह इस अनादर के पाप के कारण मर गया।
विश्राम के पवित्र दिन लकड़ियाँ उठाकर यहोवा के विश्रामदिन को अपवित्र करने के कारण मूसा ने एक व्यक्ति को पत्थरों से मरवा डाला (गिनती 15:30-36)। इस्राएल को हमेशा उसकी आराधना में बरती जाने वाली सावधानी की याद दिलाने के लिए, परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह अपने कपड़ों पर स्मरण करानेवाली नीले रंग की झालरें लगाए (गिनती 15:37-41)।
परमेश्वर ने शाऊल को इस्राएल के राजा के रूप में अस्वीकार कर दिया क्योंकि उसने अपवित्रता से एक बलिदान चढ़ाया था जब शमूएल एक नियुक्ति के लिए दो मिनट देर से आया था (1 शमू 13:8-14)। यह मनुष्य जीवन भर यह साबित करता रहा कि इस नीतिवचन में वर्णित फंदे ने उसे पूरी तरह निगल लिया था।
हनन्याह और सफीरा ने सोचा कि वे परमेश्वर को दी गई अपनी भेंट में से कुछ खा सकते हैं, लेकिन उसने यरूशलेम में गवाहों के सामने उन्हें मार डाला (प्रेरितों 5:1-11)। जब तक वह भूमि उनके स्वामित्व में थी तब तक वह उनकी थी, परन्तु जब उनके मुंह ने उसे समर्पित कर दिया, तो वह यहोवा की हो गई थी।
यीशु ने अपने दिनों में इज़राइल में मन्नतों के भ्रष्ट उपयोग के खिलाफ चेतावनी दी थी। लालची यहूदी अपने माता-पिता को आर्थिक रूप से कोई मदद नहीं कर रहें थे, वे अपने माता-पिता को यह बताकर खुद को इस दायित्व से मुक्त कर देते थें कि जो “कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुँच सकता था, वह कुरबान अर्थात् संकल्प हो चुका” (मरकुस 7:9-13)। यीशु ने इस अपवित्र परंपरा की निंदा की।
यह नीतिवचन स्वर्ग के पवित्र परमेश्वर से मानी मन्नत को पूरी तरह से चुकाने की चेतावनी देता है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आप अपनी आत्मा को पापपूर्ण अपराध में फँसा लेंगे और ईर्ष्या रखनेवाला परमेश्वर का उचित प्रतिशोध अपने ऊपर ले लेंगे। जो श्रेष्ठ है उस से कम मत लाओ। जैसा कि स्वयं परमेश्वर ने तर्क दिया, जिस तरह आप परमेश्वर को धोखा देते हैं, उसी तरह अपनी सरकार या कर संग्रह करनेवाले आयकर विभाग को धोखा देने की कोशिश करके देखें (मलाकी 1:6-14)।
यीशु ने अपने सुननेवालों को चेला बनने से पहले इसकी कीमत का हिसाब लगाने की चेतावनी दी, क्योंकि उसके पीछे चलने की क़ीमत न चुकाने पर वे फन्दे में फंस जाएंगे और लज्जित होंगे (लूका 14:25-35; मत्ती 10:34-39)। मसीह के पीछे चलना गंभीर बलिदान हैं, जैसा कि बाइबल में बताया गया है, जिसे लापरवाह आवेगी उपासक अनदेखा कर देते हैं। जब तक आप उसकी माँग की गई पूरी कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं, आप उसके शिष्य नहीं बन सकते। सांत्वना के रूप में, बलिदान करने वाले शिष्यों को हमेशा भारी प्रतिफल दिया जाता है (मरकुस 10:28-30)।
बाइबल पर विचार करें। यह आपके लिए परमेश्वर के अनमोल वचन हैं, और उसने इसे अपने सभी नामों से ऊपर ऊँचा किया है (भजन 138:2)। क्या आप उसके वचन का आदर करते हैं और उसे अपने मौलिक भोजन से भी अधिक महत्व देते हैं (अय्यूब 23:12)? आप इसे कितनी बार पढ़ते हैं? आप इस पर कितना प्रार्थनापूर्वक मनन करते हैं? या क्या आपकी बाइबल किसी मेज पर अप्रयुक्त पड़ी रहती है? उससे उपदेश सुनने से पहले आप अपने मन को कितना तैयार करते हैं?
बपतिस्मा के बारे में क्या? बपतिस्मा लेते समय आपने यीशु मसीह के नाम पर एक नए जीवन की प्रतिज्ञा कीं थी (रोमियों 6:1-6; गलातियों 3:27; कुलुस्सियों 3:1-4; 1 पतरस 3:21)। क्या आप अपने बपतिस्मे के अनुसार जी रहे हैं?
अपने चर्च पर विचार करें। आप परमेश्वर के पवित्र घर, जो पवित्र आत्मा का मंदिर है, के ऋणी हैं (1 कुरिन्थ 3:16-17; इफि 2:20-22; 1 तीमु 3:15)। जब इस्राएल ने परमेश्वर का मंदिर बनाने से पहले अपने घर बनाए, तो उसने उनकी आर्थिक उन्नति रोक दीं (हाग्गै 1:1-11)। क्या आप अपना चर्च बनाने में मदद कर रहे हैं (इफि 4:16)? यदि आप चर्च जाना या वह करना छोड़ देते हैं जो आपको करना चाहिए, तो आपको मुसीबत भुगतनी होगी (इब्रानियों 10:23-31)।
आपके दान और दशमांश देने के बारे में क्या? आप अपनी बढ़ती का सबसे पहला फल परमेश्वर को देने के लिए ऋणी हैं (नीति 3:9)। जब इस्राएल ने दान और दशमांश नहीं दिएँ, तो उसने उन पर चोरी का आरोप लगाया और उन्हें शाप दिया (मलाकी 3:8-9)। क्या आप दे रहे हैं?
आपके शरीर के बारे में क्या? आपका शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर है (1 कुरिन्थ 6:15-20)। परमेश्वर ने उसे बनाया और मोल लिया, और आप उसे अपना शरीर बलिदान के रूप में चढ़ाने के लिए उसके ऋणी हैं (रोमियों 12:1-2)। क्या आपका शरीर पवित्र है?
आपके वैवाहिक जीवन का क्या? अपने परमेश्वर और गवाहों के सामने अपने जीवनसाथी से कसमें खाई। अपने वैवाहिक जीवन से बाहर निकलने के तरीकें मत ढूंढें, क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे विश्वासघात को देख रहा है और माप रहा है (मलाकी 2:10-16)। जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे (मत्ती 19:3-9)।
आपके बच्चों का क्या? वे आपके नहीं हैं – वे केवल परमेश्वर से कुछ महीनों या वर्षों के लिए आपको भंडारी के रूप में सौंपे गएँ हैं (भजन 127:3)। क्या आप उन्हें परमेश्वर की शिक्षा और पालन-पोषण में बड़ा कर रहे हैं (इफि 6:4)?
समय का क्या? आपको समय का सदुपयोग करने का हर संभव प्रयास चाहिए ताकि आप मूर्खतापूर्ण उद्यम में अपना जीवन बर्बाद न करें (भजन 90:12; इफि 5:6)। समय परमेश्वर का उपहार है। क्या आप इसका उपयोग उसका सम्मान करने के लिए करते हैं?
आप इस में और भी बातों को जोड़ सकते हैं। प्रिय पाठक, आपने किस मामलें में अपनी आत्मा को फँसा रखा है? आप अपने लिए कौन-सी वस्तु का उपयोग कर रहे हैं जो परमेश्वर की है? आपने क्या मन्नतें मानी हैं जिन्हें आप पूरा नहीं कर रहे हैं?
इस रविवार, परमेश्वर के दिन, आप कहाँ आराधना करेंगे? कैसे आराधना करेंगे? आप कितने उत्साही और जोशीले होंगे? बाइबल के महान और भयानक परमेश्वर की बिना विचारे आराधना करना अस्वीकार्य है; वह महान राजा है (मलाकी 1:14)। आजकल जिस प्रकार की आराधना कलीसियाओं में देखने मिलती है उस से सावधान रहें!
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