नीतिवचन 20:24

मनुष्य का मार्ग यहोवा की ओर से ठहराया जाता है; मनुष्य कैसे अपना चलना समझ सके?

आज का क्या प्रोग्राम है? यदि परमेश्वर चाहे तो वह आपके आज के प्रोग्राम को बदल देगा, और यदि वह उसे न बदलना चाहे, तो वह अपने निमित्त उसका उपयोग करेगा। जो भी हो, वह कुम्हार है, और तुम मिट्टी हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप परमेश्वर के संप्रभु होने पर विश्वास रखते हो या नहीं, क्योंकि परमेश्वर आपके जीवन पर संप्रभु है, चाहे आप इस पर विश्वास करें या न करें। लेकिन जो बुद्धिमान है वह उसके प्रति समर्पण करेगा, क्योंकि वह जानता है कि वह न तो भविष्य बता सकता है, न भविष्य को तय कर सकता है, और न ही भविष्य को बदल सकता है।

यहोवा परमेश्वर सब पर शासन करता है! उसने सबकुछ अपनी सुइच्छा के निमित्त बनाया (नीतिवचन 16:4; प्रकाशितवाक्य 4:11), और वह अपनी सुइच्छा के निमित्त सब पर शासन करता है (यशायाह 46:10; इफि 1:11)। उसके शासन में मानवीय दृष्टि से होने वाली आकस्मिक घटनाएँ और गौरैयों की चाल शामिल है (नीतिवचन 16:33; 1 राजा 22:34; मत्ती 10:29)। वह आरम्भ ही से अन्त जानता है, और आप कल क्या होगा यह भी नहीं जानते (नीतिवचन 27:1; यशायाह 44:7; 45:21)।

फिरौन, उसके माता-पिता और मिस्र ने सोचा कि वह एक बड़ा क़ामयाब मनुष्य था। उनका पूरा जीवन सिंहासन पर शासन करने में निरंतर प्रगति कर रहा था। वह धनवान, बलवान और विजयी था। वह पृथ्वी पर के उस समय के सबसे महान राष्ट्र पर शासन कर रहा था। लेकिन उसका अस्तित्व और राजा का पद केवल इसलिए था कि उसमें यहोवा परमेश्वर अपनी सामर्थ प्रकट करें और उसे कुचलकर अपनी ही महिमा करे (निर्गमन 9:16; रोमियों 9:17)। हालेलुयाह! आमीन!

अश्शूर के राजा ने सोचा कि वह जीवितों में सबसे महान राजा था, और उसकी बड़ी बड़ी और अनेकों विजयी सैन्य-उपलब्धियां उसके इस विश्वास की पुष्टि करती प्रतीत हो रही थी (यशायाह 10:8-11,13-14)। परन्तु परमेश्वर ने इस्राएल को ताड़ना देने के लिए बस एक छड़ी के समान उसका उपयोग किया था (यशायाह 10:5-15)। और जब यहोवा उसका उपयोग कर चुका, तब उस ने उसके घमण्ड के कारण बुरी रीति से उसका विनाश कर दिया (यशायाह 10:16-19)।

फारस का राजा क्षयर्ष सो नहीं पा रहा था, और उसने नींद आने के अन्य उपाय करने के बजाय साम्राज्य के इतिहास को पढ़ना शुरू किया, और इस के परिणाम स्वरुप मोर्दकै की अविश्वसनीय रूप से पदोन्नति हुई और हामान का भयानक पतन हुआ (एस्तेर 6: 1-14)। रूत ने नाओमी और अपनी रोजीरोटी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए सिला बीनने का चुनाव किया, लेकिन उसे धनवान बोअज के खेत में जाने का मौका मिला, जिसने जल्द ही उससे विवाह कर लिया (रूत 2:1-3)।

दुष्ट यहूदियों और रोमियों ने नासरत के यीशु को मार डाला, परन्तु वे परमेश्वर की उस सनातन सम्मति से अधिक कुछ नहीं कर पाएं जो पहले से ही निर्धारित कीं गईं थीं (प्रेरितों के काम 2:22-24; 4:27-28)। उन्होंने हर उस भविष्यवाणी को पूरा किया जो उसने सैकड़ों साल पहले अपने शास्त्रों में दी थीं (यूहन्ना 19:31-37)। फिर भी उसने उन्हें जवाबदेह ठहराया और उनके इस अपराध के लिए इन दोनों देशों को मिटा दिया (मत्ती 23:34-36; 1 थिस्स 2:14-16)।

समय और अवसर, जिन्हें परमेश्वर ठहरता है, मनुष्य की सफलताओं में मनुष्य की अपनी तेजी, शक्ति, ज्ञान, समझ या कौशल की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण कारक हैं (सभोपदेशक 9:11)। मनुष्य नहीं जानते कि कब क्या होने वाला है (सभोपदेशक 9:12)। परमेश्वर ने होनेवाली सभी घटनाओं को इस प्रकार निर्धारित कर रखा है कि मनुष्य विश्व पर उसकी प्रभुता के बाहर कुछ भी हासिल नहीं कर सकते (सभोपदेशक 7:14)।

इसलिए, धर्मिजन की बुद्धि सबकुछ परमेश्वर की इच्छा के अधीन कर देती है (याकूब 4:13-15)। क्योंकि विश्वासी उसकी गुप्त बातों को नहीं जानते हैं, अत: वे तब तक प्रार्थना करते हैं जब तक कि वे गुप्त बातें प्रकट न हो जाएँ (व्यवस्था 29:29; 2 शमूएल 12:22-23)। वे नम्रता और आज्ञाकारिता में अपने महान परमेश्वर के सामने थरथराते हैं (सभोपदेशक 12:13-14; यशायाह 66:1-2)। वे योजनाएं और तैयारियां करते हैं, परन्तु सफलता के लिए उससे विनती करते हैं (नीतिवचन 21:31; भजन 127:1)।

वे योजनाएँ बनाते हैं, परन्तु वे जानते हैं कि बड़ी-छोटी सब बातों पर केवल परमेश्वर ही प्रभुता करता है (नीतिवचन 16:9)। जो कुछ भी उनके पास है, वे किसी भी वस्तु पर घमण्ड नहीं करते, क्योंकि वे जानते हैं कि सब वस्तुएँ परमेश्वर की सम्प्रभु इच्छा के कारण दिए हुए वरदान हैं (1 कुरिन्थियों 4:7; 15:10)। वे निराशा में नहीं होते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वह भविष्य पर प्रभुता करता है (2 कुरिन्थियों 4:8-18)। वे किसी से नहीं डरते, क्योंकि वे जानते हैं कि परमेश्वर की इच्छा अवश्य पूरी होगी (दानिय्येल 3:16-18; प्रेरितों के काम 21:14)।

यहाँ परमेश्वर के चुने हुओं का विश्वास है। वे अपने सृष्टिकर्ता को क्रोध दिलाने के बजाय, जैसे बेलशस्सर ने दिलाया था, उसकी महिमा करते हैं (दानिय्येल 5:21-24)। वे जानते हैं कि उनके जीवन का मार्ग उनके ज्ञान और समझ की क्षमता से परे है, क्योंकि यह परमेश्वर के हाथों में है (यिर्मयाह 10:23; प्रेरितों के काम 17:28)। वे यह जानते हुए यत्न से उसकी खोज करते हैं, कि वह उनके लिए अनुकूल परिस्थितियों की व्यवस्था करने में सामर्थी है (भजन 37:23; इब्रानियों 11:6)। वे संयोग, नियति और इत्तेफ़ाक के सिद्धांत को ठुकरा देते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि सभी घटनाएँ उसकी प्रभुता में होती हैं।

चूँकि उनके जीवनों के लिए परमेश्वर की गुप्त इच्छा अज्ञात है, अत: परमेश्वर के चुने हुए लोग खुद को उन चीजों को करने के लिए समर्पित करते हैं जो प्रकट हुई हैं और जिनसे वे ज्ञात हैं – वे आज्ञाएँ जिन्हें उन्हें मानना है (व्यव. 29:29)। उसके गुप्त और सर्वोच्च विधान के विषय में संदेहवादी के समान सोचकर निराश होने के बजाय, वे उसे पूरे मन से खोजते हैं, और जीवन में उनके हिस्से में जो भी आये उसकी परवाह किए बिना बड़े आनन्द से समर्पण करते हैं और सब प्रकट बातों में उसे धन्यवाद देते हैं।

चुने हुए, जो यीशु मसीह की ओर उस विश्वास के द्वारा, जिसे उसने उन्हें अपनी संप्रभुता में वरदान के रूप में दिया, शरण लेने के लिए दौड़े आते हैं, वे हमेशा जानते हैं कि उनके सिर के बाल भी गिने हुए हैं और वे कई गौरैयों से अधिक मूल्यवान हैं (मत्ती 10:30-31)। इस महान कुम्हार ने उन्हें जगत की उत्पत्ति से पहिले ही अनन्त जीवन के लिये अपने अनुग्रह के पात्र होने के लिये तैयार किया है (रोमियों 9:21-24; इफि 1:3-12)। उसने उन्हें उद्धार के लिए पहले से ठहराया, और वह निश्चित रूप से इसे पूरा करेगा (रोमियों 8:28-39)। उस महान संप्रभु परमेश्वर की महिमा!

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।