नीतिवचन 20:22
मत कह, “मैं बुराई का बदला लूँगा;” वरन् यहोवा की बाट जोहता रह, वह तुझ को छुड़ाएगा।
क्या बदला लेना मनभावनी बात है? आपकी आत्मा और यह दुनिया कहती है कि यह मनभावनी बात है। लेकिन परमेश्वर कहता है कि यह पाप है। आप किस पर विश्वास करेंगे? सुलैमान ने अपने बेटे को चेतावनी दी कि वह किसी से बुराई का बदला लेने के बारे में न सोचे। अपने शत्रुओं का सब मसला अपने हाथ में लेने के बजाय, यहोवा को उनसे निपटने दो।
जब कोई आपको चोट पहुँचाता है, तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया क्रोध और आत्मरक्षा और बदले के विचार होते हैं। आप स्वभावतः तुरंत, सहज और हिंसक तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं। यह आपके मन की भ्रष्टता के कारण है जो आपको आदम से विरासत में मिला है। पौलुस ने मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति का वर्णन इस प्रकार किया: “क्योंकि हम भी पहले निर्बुद्धि, और आज्ञा न माननेवाले, और भ्रम में पड़े हुए और विभिन्न प्रकार की अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन व्यतीत करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे” (तीतुस 3:3)।
मर्दों को लड़ना और युद्ध करना अच्छा लगता है। अपने ख़िलाफ़ किएँ अपराधों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय, वे तुरंत बदला लेना चाहते हैं। गलतियों को माफ करने के बजाय, वे हमेशा के लिए द्वेष की भावना रखेंगे। पौलुस ने इन्सान के युद्धप्रिय चरित्र का बहुत सचित्र वर्णन किया है, “उनका मुँह श्राप और कड़वाहट से भरा है। उनके पाँव लहू बहाने को फुर्तीले हैं, उनके मार्गों में नाश और क्लेश है, उन्होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना। उनकी आँखों के सामने परमेश्वर का भय नहीं” (रोमियों 3:14-17)।
बदला के भावना अहंकार से उपजती है: जो मन का दीन होता है वह बुराई का बदला लेने की झंझट में नहीं पड़ता। बदला इंसान को अंधा कर देने वाला होता है। यह आसानी से हत्या सहित भयानक अपराधों को अंजाम दे सकता है। सुलैमान के नीतिवचन बुद्धि के बारे में हैं, और बदला लेने का अंधा कर देने वाला क्रोध आपकी समझने, सोचने और सही ढंग से निर्णय लेने की क्षमता को विकृत कर देता है। यह बुद्धि को नष्ट कर देता है। और यह पाप-कर्मों की ओर ले जाता है।
हम जिन स्थितियों पर चर्चा कर रहें हैं, वे आपके प्रति किसी के किएँ हुएं व्यक्तिगत अपराध हैं। परमेश्वर के विरुद्ध किएँ अपराधों से बाइबल की शिक्षा के अनुसार निपटा जाना चाहिए। विद्रोही बच्चों को दण्ड दिया जाना चाहिए; पाप करनेवाले चर्च के सदस्यों को बाहर कर दिया जाना चाहिए; हिंसक नागरिकों को फाँसी दी जानी चाहिए। परन्तु अपने ख़िलाफ किएँ किसी के व्यक्तिगत अपराधों को नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए, और अपने शत्रुओं से प्रेम किया जाना चाहिए (मत्ती 5:38-48)। यह यीशु मसीह की व्यवस्था है, और यह इस दुनिया में प्रेम और बुद्धि का उच्चतम रूप है। इस व्यवस्था को अपनाओ!
बुराई का बदला बुराई से देने के बजाय, एक नेक और बुद्धिमान व्यक्ति बुराई का बदला भलाई से देगा, और ऐसा करने से वह विद्वेष और बदले के भयानक खतरे से बच जाएगा, अपने दुश्मनों को अपनी दयालुता और धैर्य से शांत करेगा, और एक कठिन मामले में परमेश्वर की महिमा करेगा (नीतिवचन 25:21-22) ; लैव्य 19:18; रोमियों 12:17-21; 1 थिस्स 5:15; इब्रा 12:14; याकूब 3:16-18; 1 पतरस 3:8-11)। इस बुद्धि को आज ही सीखें।
आपको बदला लेने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, अपने मन में भी नहीं, तब भी नहीं जब आपके दुश्मनों पर अन्य स्रोतों से संकट आए। जब आपका दुश्मन गिरता है और आप खुश हो जाए तो परमेश्वर और सुलैमान ऐसी प्रवृत्ति की भर्त्सना करते हैं (नीतिवचन 24:17-18)। दूसरे के विरुद्ध पापपूर्ण विचार हत्या ही हैं (मत्ती 5:21-22)!
आज आपके दुश्मन कौन हैं? क्या कोई ऐसा है जिस पर आप क्रोधित हैं? क्या आपके मन में किसी के प्रति द्वेष या बदला लेने का विचार है? शायद आपका जीवनसाथी? शायद ऑफिस में कोई सहकर्मी या बॉस? शायद कोई पड़ोसी? शायद कोई चर्च का सदस्य? अपने पापों को परमेश्वर के सामने मान लें और उनसे मित्रता करने के अवसरों की खोज करें। उनके साथ वैसा व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं कि वे आपके साथ व्यवहार करें, न कि वैसा व्यवहार जैसा उन्होंने आपके साथ किया है (लूका 6:27-36)। यही सच्चा ज्ञान है। यह सच्चा ख्रिश्चन धर्म है।
बलवान लोग दूसरों के व्यक्तिगत अपराधों को नजरअंदाज कर देते हैं (नीतिवचन 19:11)। वे दूसरों के अपराधों के कारण विशेषकर क्रोध या बदला लेने के लिए प्रेरित नहीं होते हैं। वे इतने महान हैं कि ऐसी छोटी और महत्वहीन चीज़ों से परेशान, विचलित या नष्ट नहीं हो सकते। यदि आप छोटी-मोटी ग़लतियों को सज्जनतापूर्वक नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, तो समाधान के लिए केवल एक ही विकल्प है – परमेश्वर का मार्ग (मत्ती 18:15-17)।
यूसुफ ने अपने भाइयों के अपने खिलाफ किएँ अपराधों को परमेश्वर की संप्रभुता के तहत देखा और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया, हालांकि बाद में वे उसके सामने नतमस्तक हुएं (उत्पत्ति 45:5; 50:20)। अबीगैल ने दाऊद को नाबाल के विरुद्ध मूर्खतापूर्ण बदला लेने से रोका (1 शमू 25:23-35), और उसने शिमी को श्राप देने दिया, क्योंकि उसने विश्वास किया कि परमेश्वर सुनेगा (2 शमू 16:5-14)। अपना प्राण अपने भरोसेमंद सृष्टिकर्ता को सौंपना सीखें (1 पतरस 2:23; 4:19)।
सबसे अच्छा बदला है अपने दुश्मनों को परमेश्वर पर छोड़ देना। वह पूरा पूरा न्यायी है, उसके फैसलें सबसे भयानक हैं। प्रतिशोध उसका है; वह बदला चुकाएगा (व्यवस्था 32:25; लूका 18:7-8; रोमियों 12:19; इब्रा 10:30)। दाऊद ने शाऊल को परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया, यद्यपि वह उसे मार सकता था। नतीजा क्या हुआ? शाऊल ने डरकर एक जादूगरनी से सलाह ली, उसने आत्महत्या कर लीं, पलिश्तियों ने उसका सिर काट दिया और उसका तमाशा बनाने के लिए लटका दिया, उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, उसकी हड्डियों को एक पेड़ के नीचे दफना दिया गया, और उसके परिवार को सिंहासन के उत्तराधिकार से वंचित कर दिया गया!
मूसा की बहन मरियम और कोरह ने दुष्टतापूर्वक उसका सामना किया। इन अभिमानी और अपवित्र विद्रोहियों को स्वयं दंडित करने के बजाय, उसने मामले को यहोवा पर छोड़ दिया। मरियम को यहोवा ने कड़ी फटकार लगाई, वह कुष्ठ रोग से सफेद हो गई, और उसे छावनी के बाहर अलग रखा गया (गिनती 12:1-15)। कोरह का क्या? उसे धरती ने जीवित ही निगल लिया (गिनती 16:1-40)!
केवल पवित्र आत्मा ही मनुष्य में प्रेमपूर्ण और शांतिपूर्ण भावना पैदा कर सकता है और उसे कायम रख सकता है, जिससे क्रोध और बदला केवल मूर्खता के क्षणभंगुर विचार साबित हो सकें। परमेश्वर में विश्वास ही समाधान है, क्योंकि वह हमेशा अपनों का ख्याल रखता है। इस पर विश्वास करो! यदि आप प्रतिशोधपूर्ण विचारों के दोषी हैं, तो परमेश्वर के सामने अपनी दुष्टता को मान लें, धैर्य के लिए उससे शक्ति मांगे और खुद को उनकी दया पर छोड़ दें, अपने दुश्मनों के लिए प्रार्थना करें और उनके साथ भलाई ही करने के अवसर खोजें। यह बुद्धि और परमेश्वर की इच्छा है।
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