नीतिवचन 20:2

राजा का भय सिंह के गर्जन के समान है, जो कोई उसे भड़काता है सो अपने ही प्राण का घातक है। (केजेवी)

21वीं सदि में इस नीतिवचन को समझना मुश्किल है, क्योंकि ऐसे भय को उत्तेजित कर सके ऐसे राजा या राजनेता अब नहीं हैं। कुछ आधुनिक राजनेता, जो 275 किलो के एक सिंह की बराबरी कर सकते हैं, अपने क्षेत्र में बड़ी शान से इधर-उधर घूमते हैं। सुलैमान के दिनों में वास्तविक अधिकार, शानदार अधिकार हुआ करता था, जो उचित ही दहाड़ने वाले सिंह से तुलना किए जाने के योग्य होता था। उन दिनों राजनेताओं की आज्ञाओं का पालन करना बुद्धिमानिपूर्ण और गम्भीर माना जाता था, क्योंकि उन्हें भड़काने से व्यक्ति का जीवन तुरन्त ही विनाश के खतरे में पड़ जाता था।

बाइबल के प्राचीन समयों में एक ऐसे राजा को देखना जिसके पास परम-अधिकार होता था, जो अपनी प्रजा पर नियम और कानून लगाता था, और जो अपने शत्रुओं को कुचल देता था, एक अद्भुत नज़ारा हुआ करता था (नीति 30:29-31)। वह जंगली पशुओं के राजा के समान होता था, अर्थात् सिंह के समान, जो जंगल के सब प्राणियों पर अपना हुकुम चलाता है (नीति 30:29-31)। अफ्रीका के जंगलों में रात के समय सिंह की गर्जना को चार-पांच किलोमीटर के दायरे में सुना जा सकता है, जिसे सुनकर जंगल के सब प्राणी कांप उठते हैं। सिंह खुले होते हैं। महान राजा अपनी प्रजा में ऐसा ही भय उत्पन्न करते हैं : उनकी अवज्ञा करना मूर्खतापूर्ण और बहुत खतरनाक होता था।

बेबीलोन का राजा नबुकदनेस्सर एक ऐसा ही राजा था। संसार की सबसे महान इतिहास की पुस्तक, अर्थात् बाइबल में सबसे महान इतिहासकार अर्थात् परमेश्वर ने उसे सब राज्यों में सबसे प्रतापी राजा कहा (दानि 2:37-38)। ऐसा होता था, कि यदि उसके सलाहकार उसके पिछली रात के किसी स्वप्न का अर्थ नहीं बता पाते थे, तो वह उन्हें मौत के घाट उतार देता और उनके घरों को मिट्टी के ढेर में बदल देता था (दानि 2:5)। वैसा ही हश्र वह उन नागरिकों का करता था जो उसके नए धर्म का विरोध करते थे (दानि 3:29)। जब वह सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई दावत रखता तो उन्हें उसके संगीत की प्रशंसा करनी ही होती थी, अन्यथा उन्हें आग की भट्टी में डाल दिया जाता था (दानि 3:1-6)।

टीवी पर आधी-आधी रात तक चलने वाले बातचीत के कार्यक्रम और एमटीवी के मंदबुद्धि और मनचले युवा उसका मज़ाक नहीं उड़ा सकते थे। नाक और कान में नथुनियां पहने हुए और शरीर पर यहां-वहां गोंदे हुए कॉलेज के विद्यार्थी उसके खिलाफ युद्ध-विरोधी झंडे और बैनर लेकर प्रदर्शन नहीं किया करते थे; मतदान से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था। सनसनीखेज़ पत्रकारिताओं ने उसे बेइज्जत करने उसके जवानी के पापों के गड़े हुए मुर्दे नहीं खोदे। अधिनस्थों ने उसके विरोध में एक अलग विचारधारा को अपनाकर उसके ख़िलाफ जनता की राय नहीं ली। उसके राज्य में लोकशाही के लिए कोई स्थान न था। सब उसका भय मानते थे।

एक समय था जब जेलखानों की ज़रूरत कम ही पड़ती थी; बच्चें अपने माता-पिता की आज्ञा मानते थे; पत्नियां अपने पतियों के अधीन रहा करती थी; दास अपने स्वामियों की आज्ञा का पालन करते थे; चोरी-चकारी कम होती थी; युवा किसी नए नियम या कानून को लेकर जो संविधान के अनुकूल होते थे, सड़कों पर उतर के आगजनी नहीं किया करते थे, व्यापार और कामगार यूनियन देशव्यापी बंद नहीं पुकारा करती थी। संवैधानिक नए कानूनों पर बहस करने के बजाय उन पर अमल किया जाता था। न्यायपालिकाएं न्याय करने में समय नहीं लगाती थी।

परंतु आज के वैश्विक राजनेता और शासक जनता की ओर मुस्कुराहट देकर हाथ हिलानेवाले खेल के स्टेडियम के चीयर लीडर्स के समान हैं। वे विदेशों में जाकर कैटवाक करते हैं, वे कानून बनाकर विरोध के सामने अपने घुटने टेक देते हैं, और उन्हें रद्द करने विवश हो जाते हैं। उनकी कार्यनीतियों पर हमेशा प्रश्न उठाए जाते हैं, सार्वजनिक रूप से विरोध किया जाता है, और उनके मीम और कार्टून बनाकर उनका उपहास किया जाता है, और टीवी के चैनलों पर उमड़ती चर्चा में उनका मज़ाक उड़ाया जाता है; और जब पत्रकारिता तय करें कि अब नए नेता को खड़ा करने की ज़रूरत आ गई है, तब उन पर दबाव बनाकर उन्हें सेवानिवृत्त होने के लिए बाध्य किया जाता है। अपनी असंवैधानिक और रासलीला की हरकतों के कारण आज के राजनेता जनता में अपने लिए एक आदर-युक्त भय उत्पन्न करने में विफल रहे हैं, क्योंकि एक कमज़ोर और विद्रोही पीढ़ी ने उन्हें नपुंसक बनाकर रख दिया है, और एक समय फलफूल रहे एक मज़बूत अधिकार और शासन को नष्ट कर दिया है।

एक वास्तविक राजा परमेश्वर को समझने अपनी जनता की सहायता करेगा। वह मर्दों को अच्छा पिता बनने, बालकों को अच्छे बच्चे बनने, स्त्रियों को अच्छी पत्नियां बनने और बड़ी धुन और संतुष्टि के साथ अपने घरेलू कर्तव्यों को पूरा करने में सहायता करेगा। जब परमेश्वर ने आपका जन्म स्थान, जन्म तिथि, मां-बाप, आपका कद, आपकी बुद्धि, कमज़ोरियों, और जीवन के अवसरों को चुना तब उसने आपकी राय नहीं पूछी। और जब आप न्याय के महान दिन उसके सामने नंगे और अपराधी के रूप में खड़े रहेंगे तब वह आप से आपकी राय नहीं पूछेगा। वह राजा होगा। और आप थरथराएंगे। हर एक घुटना टेकेगा और हर एक ज़बान कबूल करेगी कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

पुरुषों को आज बताया जाता है कि वे अपने अंदर स्त्री के तत्वों से सम्पर्क करें, और अगर वे अपने आप को स्त्री महसूस करें तो स्त्री के समान आचरण रखें। पत्नियों से कहा जाता है कि वे अपने पतियों के तुल्य या उनसे भी अधिक बढ़कर प्रधान हैं। बच्चों को अपने माता-पिता की अवज्ञा करने और उनके अधिकार को ललकारने कहा जाता है। कामगार संघटनाएं अधिकारियों को ललकारने और सरकारी सम्पत्ति का नुकसान करने इकट्ठा होती हैं। स्त्रियां पुरुषों पर अधिकारी बनने का प्रयास करती हैं; बच्चों पर अनुशासन के उनके माता-पिता के अधिकार छीन लिए जाते हैं। राजा का कोई भय नहीं रहा – इस कारण परमेश्वर, माता-पिता, पतियों, मालिकों, और पास्टरों का कोई भय नहीं रहा।

यदि हम कानून का पालन करनेवाला और परमेश्वर की आज्ञाओं पर चलनेवाला जीवन जीए तो एक सम्प्रभु शासक से भयभीत होना कोई नकारात्मक बात नहीं है। ऐसे कुलीन और सामर्थी राजनेता को गुन्हेगारों का विनाश करते देखना मन को तसल्ली देने वाला और न्याय-प्रिय है (नीति 20:8, 26)। परमेश्वर ने बुरे-बुरे काम करने वालों को दहशत में रखने के लिए जनता के शासकों को नियुक्त किया है; इस प्रकार का भय कल्याणकारी है, क्योंकि सही करने का चुनाव करने से आप राजा से आशीष और प्रशंसा पाएंगे (रोमि 13:3-5; 1 पतरस 2:13-17)। यदि आप किसी शक्तिशाली शासक के क्रोध को भड़काते हैं, तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? समर्पित होकर उसके क्रोध को शांत करो (नीति 16:14-15; सभो 10:14)।

भारत के मसीहियों, क्या आप सरकार के प्रत्येक अध्यादेश और फ़र्मान का आज्ञापालन करते हो, भले ही उस सरकार में गरजने वाले सिंह के गुण मौजूद न हो? शासक अब भी अपराधियों पर मुकदमे चलाकर उन्हें दण्ड दे सकता है, और उनके क्रोध से बचने तथा परमेश्वर को प्रसन्न करने आप को समर्पित और आज्ञाकारी बनना है (रोमि 13:1-7)। क्या आप एक मज़बूत अधिकार की मौलिक आवश्यकता को समझते हैं, और जो आप पर अधिकारी हैं उनके अधिकार को ऊंचा उठाते हैं, और जो आप के अधीन है उन पर अपने अधिकार का उपयोग करते हैं? यदि आपके बस में हो तो परमेश्वर की महिमा और मनुष्यों के कल्याण के लिए परमेश्वर-प्रदत्त अधिकार की पुनर्स्थापना करे, और ऐसा करने में अपना इरादा नेक और तरस से भरा रखें।

यदि आप एक परम, निर्णयों में स्वतंत्र, और सत्ता चलाने में सम्प्रभु शासक को नापसंद करते हो, तो आप उस अंतिम न्याय के दिन क्या करोगे जो बड़ी तेजी से नज़दीक आ रहा है? धन्य और एकमात्र अधिपति, जो राजाओं का राजा और प्रभु का प्रभु है, यीशु मसीह शीघ्र ही इस धरती का उसके अधर्म के लिए न्याय करने प्रकट होने वाला है। पुस्तकें खोली जाएगी, और एक शुद्ध तथा बेदाग न्यायप्रणाली से आपका न्याय किया जाएगा (प्रका 20:11-15)। इस आने वाले न्याय की दहशत ने प्रेरित पौलुस तथा अन्य प्रेरितों को विवश कर दिया कि वे पश्चात्ताप और विश्वास के लिए मनुष्यों को समझाएं (2 कुरिं 5:10-11)। वहां कोई त्रिशंकु न्यायपीठ नहीं होगी, न कोई क्षमाप्रार्थी होगा, और न ही मृत्युदण्ड पर कोई स्टे-आर्डर अर्थात् स्थगन-आदेश होगा। अपने पापों की क्षमा पाने तथा अनंतकाल के लिए उद्धार पाने आज ही प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखें।

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