नीतिवचन 20:19

जो लुतराई करता फिरता है वह भेद प्रगट करता है; इसलिये बकवादी से मेल जोल न रखना।

दोमुंहे लोग खतरनाक होते हैं। वे अपने मुँह से वही बोलते हैं जो उनकी दृष्टि में ठीक लगता है। इस नीतिवचन का सबक यह है कि आप उनके साये से भी दूर रहें ताकि उनकी वजह से जो समस्याएँ आपके जीवन में पैदा होगी उन से आप बच जाएं। यहां दुनिया के सबसे बुद्धिमान मनुष्य की ओर से यह की अति मूल्यवान सलाह है – बकवादी मनुष्य को लुतराई करने के लिए भी दोषी ठहराया जाएगा।

लुतराई करनेवाला कौन होता है? यह एक ऐसा व्यक्ति है जो लोगों की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने के उद्देश्य से उनकी निजी ज़िन्दगी की जानकारी इकठ्ठा करता है और फिर उसे दूसरों को बताता फिरता है। लुतराई करना कानाफूसी का पाप है, और लोग भूल गएँ हैं कि यह एक पाप है। बाइबल इसे चुगली करना और दूसरों की उनकी पीठ पीछे बुराई करना भी कहती है। इसे आम तौर पर बकवाद कहा जाता है।

भेद क्या हैं? भेद किसी व्यक्ति के बारे में निजी जानकारी होती है जो गुप्त रहनी चाहिए और जिसकी जानकारी दूसरों को नहीं पता होनी चाहिए। भेद की बातें ऐसे तथ्य होते हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके खुल जाने से व्यक्ति की केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा। हर किसी की कुछ न कुछ भेद या गुप्त बातें होती हैं जिन्हें वे निजी रखना चाहते हैं।

मेल-जोल का क्या मतलब है? इसका अर्थ है व्यक्तियों या वस्तुओं से घुलना-मिलना। इस मामले में, इसका मतलब ऐसे चुगलखोरों के ताल्लुक रखना जिन्हें आप जानते हैं कि वे ऐसा ही करते हैं। सुलैमान की चेतावनी यह है कि ऐसे लोगों के साथ मेलजोल या दोस्ती करने से बचें जिन्हें लुतराई (कानाफूसी) करने में मज़ा आता है, क्योंकि वे आप की इज्ज़त के लिए ख़तरा हैं।

बकवाद (या चापलूसी) क्या है? यह किसी व्यक्ति का विश्वास, उसकी सम्मति या एहसान जीतने के लिए ज़रूरत से ज्यादा प्रशंसा या तारीफ़ करना होता है, जिसे आम लोग चने के झाड़ पर चढ़ाना कहते हैं। इसका मक़सद सिर्फ़ किसी व्यक्ति के आत्म-घमंड को संतुष्ट करना और उसे सम्मानित या प्रतिष्ठित महसूस कराना होता है। यह अलग-अलग स्तर तक कुटिल मन से की जानेवाली तारीफ़ होती है, क्योंकि इसके पीछे आमतौर पर गुप्त उद्देश्य होते हैं।

यह नीतिवचन हमें ऐसे ही चापलूसों से दूर रहने की चेतावनी देता है, क्योंकि ये ही लोग अक्सर लुतराई या कानाफूसी करनेवाले होते हैं। यदि आप किसी चापलूस को आपकी अत्यधिक प्रशंसा करते हुए पाते हैं और देखते हैं कि वह कैसे आपको आपके जीवन में हो रही चीजों को लेकर आपको निश्चिन्त रहने उकसा रहा है, तो जान लें वह आपसे आपकी निज़ी ज़िन्दगी की जानकारी ले रहा और उसे वह दूसरों के साथ साझा करेगा, जिससे आपके अस्तित्व और नाम को नुकसान पहुँचेगा।

इस नीतिवचन में दो बातें हैं जिनपर आपकी सफलता निर्भर करती है। सबसे पहली, आपको चापलूसी करनेवालों से बचना ज़रूरी है, क्योंकि वे यहाँ-वहाँ लुतराई करते फिरनेवाले भी होते हैं और आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरी, आपको स्वयं की चापलूसी करवाने और खुद भी लुतराई करने से बचना ज़रूरी है, क्योंकि दोनों ही बातें परमेश्वर और भले मनुष्यों की दृष्टि में पाप हैं।

किसी की चापलूसी करना या किसी के मुँह से अपनी चापलूसी सुनना बड़ा सुखद होता है, लेकिन मूलतः यह झूठ बोलना है। यह रिश्तों में ज़हर घोल देता है। परमेश्वर चापलूसी करने या अपनी चापलूसी सुनने, दोनों के खिलाफ सावधानी का इशारा देता है (भजन 5:9; 12:2-3; 78:36; नीतिवचन 2:16; 6:24; 7:5,21; 20:19; 29:5; 1 थिस्स 2: 5)। यदि आप किसी ख़रीदी-बिक्री के व्यवसाय में हैं, या ख़ुशमिज़ाज हैं, या अभिव्यक्ति में बड़बोले हैं, तो सावधान रहें।

आपको किसी की चापलूसी नहीं करनी है। अय्यूब ने कहा, “जो लूट के भाग के लिये अपने मित्रों की चुगली खाता है, उसके लड़कों की आँखें अंधी हो जाएँगी” (अय्यूब 17:5)। एलीहू, जो अय्यूब का सबसे बुद्धिमान मित्र, लोगों को चने के झाड़ पर चढ़ाकर चापलूसी से भरी बड़ी बड़ी उपाधियाँ नहीं देता था (अय्यूब 32:21-22)। यीशु ने इसकी भर्त्सना कीं, विशेषकर धार्मिक उपाधियों, जैसे रेवरेन्ट, राईट रेवरेन्ट, बिशप, सीनियर पास्टर, के मामलों में (मत्ती 23:5-12)।

आपको किसी के मुँह से अपनी भी चापलूसी नहीं सुननी चाहिए। सुलैमान ने कहा, “जो पुरुष किसी से चिकनी चुपड़ी बातें करता है, वह उसके पैरों के लिये जाल लगाता है” (नीतिवचन 29:5)। और फिर, “जिसने किसी को झूठी बातों से घायल किया हो वह उससे बैर रखता है, और चिकनी चुपड़ी बात बोलनेवाला विनाश का कारण होता है” (नीतिवचन 26:28)। अपनी तारीफ़ सुनना भले ही बड़ा सुखद लगता है, फिर भी यह बहुत खतरनाक है।

क्या आपको दूसरों की ज़ुबान पर भरोसा करना चाहिए? क्या आप अपनी जीभ पर काबू रखने में समर्थ हैं? हालाँकि हर प्रकार के जानवर को मनुष्य ने अपने वश में कर लिया है, लेकिन कोई भी आज तक मनुष्य वास्तव में अपनी जीभ को वश में नहीं कर पाया है – यह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं, वह प्राणनाशक विष से भरी हुई है। आपकी जीभ को लेकर इतनी बेअदबी से किसने लिखा? परमेश्वर-प्रेरित याकूब ने जो खुद प्रभु यीशु का प्रेरित था (याकूब 3:7-8)!

जीभ शारीरिक अंगों में एक छोट सा अंग है, लेकिन वह हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है, ठीक उसी तरह जैसे एक माचिस की छोटी सी तीलिया सारे जंगल को जला सकती है। उसी प्रेरित ने लिखा, “जीभ भी एक आग है; जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है, और सारी देह पर कलंक लगाती है, और जीवन–गति में आग लगा देती है, और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है” (याकूब 3:6)।

सुलैमान के नीतिवचन से हम जान सकते हैं कि वह वाणी के विषय में बहुत कुछ लिख सकता था। वह हमें मनुष्यों को उनकी वाणी के आधार पर परखने के लिए कहता है (नीतिवचन 7:4-5; 14:7; 19:27; 23:6-8; 27:15), और हमें अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने के लिए भी कहता है (नीतिवचन 10:21) ; 15:1; 17:27; 25:15)। क्या आपने इन महत्वपूर्ण सबकों को सिखा?

आप यीशु मसीह के चर्चों में निष्कपट और संयमित बातों को सुन सकते हैं। वहाँ के पास्टर आपको आपके बारे में सच्चाई बताएँगे, क्योंकि वे परमेश्वर के राजदूतों के रूप में बोलते हैं। वहां के सदस्य भी ऐसा ही बोलेंगे, क्योंकि वे मन से चाहते हैं कि आपका सांसारिक और आत्मिक दोनों ही क्षेत्रों में केवल कल्याण ही हो।

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