नीतिवचन 20:18

प्रत्येक उद्देश्य सम्मति ही से स्थापित होता हैं; और भली युक्ति के साथ युद्ध करना चाहिये।

अच्छे निर्णय लेने के लिए अच्छी सलाह आवश्यक होती है, और अच्छी सलाह केवल अच्छे सलाहकारों से ही मिलती है। सुलैमान यहां हमें सिखाता है कि हम अपनी बड़ी योजनाओं पर अमल करने से पहले उनका बुद्धिमान सलाहकारों से परिक्षण करा लें और उनमें मौजूद खामियों और खतरों का पता लगा लें, जिससे कि हम निराशाजनक असफलताओं और मुसीबत से से बच सकें। यह सच्ची बुद्धि और सच्चा ज्ञान है – काम शुरू करने से पहले विचार-विमर्श करना, और बुद्धिमान सलाह द्वारा अपनी योजनाओं के सत्यापन को स्थापित करना।

मनुष्य का हर चालचलन अपनी दृष्टि में अच्छा होता है, क्योंकि हमारा घमण्डी और कपटी मन हमें यह विश्वास दिलाता है कि हमारी योजनाएँ बहुत अच्छी हैं और उनका सफल होना निश्चित है। (नीतिवचन 16:2,25; 18:17; 21:2; 28:11; यिर्म 17:9)। इसलिए आपको एक सुरक्षित कार्यकाल (करिअर) के लिए अनेक परामर्शदाताओं का उपयोग करना ज़रूरी है (नीतिवचन 11:14; 15:22; 24:6)।

भावावेश में आकर मुँह खोलना या अपनी योजना पर अमल करने में उतावली करना पाप है (नीतिवचन 14:29; 29:20; 19:2)। जल्दबाजी विनाशकारी होती है, जैसा कि कहा जाता है, उतावली बर्बादी की ओर ले जाती है (नीतिवचन 21:5; 25:8)। पौलुस ने एक ऐसे ही पापपूर्ण गुण की निंदा की जिसे वह ढीठ होना कहता है, जिसमें इन्सान कोई भी काम या फैसला लेने में उतावली और लापरवाही करता है (2 तीमु 3:4)। धीरज धरें और सम्मति और अच्छी सलाह पाने के बाद ही आगे बढ़ें। यदि आप अपने स्वभाव या ग़लत प्रशिक्षण के कारण उतावले और आवेगी हैं, तो आपको इस चेतावनी पर दोगुना ध्यान देना ज़रूरी है।

परन्तु डर और असफलता की चिंता में कुछ न करना भी मूर्खता है जिसकी आपको क़ीमत चुकानी पद सकती है, क्योंकि इससे आप उन लाभों और सफलताओं के अवसरों को खो देंगे जिसका मौका हर किसी के जीवन में आता ही है। विश्लेषण से कमज़ोर पद जाना विषाद-रोग का एक अभिशाप है, और बुद्धिमान परामर्शदाता आपको लाभदायक मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे और पीछे से धक्का देंगे। वस्तुनिष्ठ परामर्शदाता आपके जीवन का बड़ा खज़ाना साबित हो सकते हैं।

यदि आप सलाह लेने की उपेक्षा करते हैं, तो आप मूर्ख, आलसी या घमंडी हैं। यदि आप दी गई सलाह को अस्वीकार करते हैं, तो आप विद्रोही या जिद्दी हैं। यदि आप आलोचना के डर से सलाह लेने से बचते हैं, तो आपका दिल पहले से ही किसी जोखिम भरी योजना की ओर मूर्खता से मोहित हो गया है – आप अपनी योजना से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। सावधान! किसी भी योजना में दिमाग से पहले अपनी भावना को सुनना मूर्खता है। (जब लोग कहते हैं कि अपने दिल की सुनों, वे असल में भावना को सुनने के लिए उकसा रहें होते हैं।)

एकमात्र सिद्ध और अद्भुत मन्त्री (परामर्शदाता) प्रभु यीशु मसीह है (यशायाह 9:6)। परन्तु उसने हमें अन्य सलाहकारों के बिना नहीं छोड़ा है। आपके पास उसका उत्तम वचन है, जो आपको बुद्धिमान बना सकता है (भजन 19:7-11; 119:98100)। आपके पास उसके ठहराएं हुए नियुक्त मंत्री हैं, जो उसके वचन का उपयोग करने की वजह से आपके लिए उत्तम परामर्शदाता साबित हो सकते हैं (2 तीमु 3:1617; मलाकी 2:7)। आपके माता-पिता हैं, जिनके पास आमतौर पर बहुत अधिक ज्ञान और अनुभव होता है, और उनके पास आपको मुसीबत और परेशानी से बचाने के लिए मज़बूत उद्देश्य भी होता है (निर्गमन 18:13-27)। आपके मित्र और भाई हैं जो बुद्धिमत्ता के लिए जाने जाते हैं (नीतिवचन 20:25; 27:9-10; प्रेरितों 15:1-6)।

आप अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के समय किस प्रकार के परामर्शदाताओं के पास जाते हैं और किस प्रकार उनके ज्ञान का उपयोग करते हैं? हालाँकि सभी वृद्ध पुरुष हमेशा ही बुद्धिमान नहीं होते (अय्यूब 32:9), फिर भी वे आम तौर पर बुद्धिमान होते हैं (अय्यूब 12:12)। जब मामला नैतिक निर्णयों का हों तो केवल ख्रिश्चन सलाहकारों के पास जाएं, न कि किसी मूर्तिपूजक सलाहकार के पास; उनमें परमेश्वर की बुद्धि होनी चाहिए और आपकी सुरक्षा और समृद्धि के लिए उच्चतम स्तर की चिंता होनी चाहिए। सुनिश्चित करें कि आप ऐसे परामर्शदाताओं के पास जाएँ जो आपकी योजनाओं में खामियों और खतरों को परखते हैं, उनका आलोचनात्मक रूप से विश्लेषण करते हैं, क्योंकि ज़मीन आशावादियों की लाशों से भरी पड़ी है।

जब एक बार किसी योजना या लक्ष्य की सत्यता स्थापित हो जाती है, तो उसपर अमल किया जाता है, सुरक्षित समझा जाता है और उसे स्थायी बना दिया जाता है। उस योजना में भविष्य के लिए एक ठोस आधार की पुष्टि हो जाता है, और यह मुक़ाम केवल अच्छी सलाह से प्राप्त होता है। जब अच्छी सलाह के बिना योजनाओं पर अमल किया जाता है और लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा जाता है, तो वे आमतौर पर देखा यह गया है कि इससे केवल असफ़लता और निराशा ही हाथ लगती है (नीतिवचन 15:22)। आप खुद को उन गलतियों से कैसे बचा सकते हैं जिन्हें बहुत से लोग कर बैठतें हैं? इस नीतिवचन का पूरी शिद्द्त और यत्नपूर्वक पालन करने के द्वारा!

इस नीतिवचन पर चलने के लिए परामर्शदाता से केवल सम्मति लेना ही काफी नहीं है, बल्कि आपको सलाह भी सुननी होगी और उसका पालन भी करना होगा। अन्यथा, सुरक्षा और सफलता की पूरी व्यवस्था का उल्लंघन हो जाता है और सबकुछ उलटा हो जाता है। रहूबियाम ने सलाह मांगी, परन्तु उसने उन बुद्धिमान लोगों की सलाह को अस्वीकार कर दिया जिन्होंने उसके पिता को सलाह दी थी (1 राजा 12:1-19)। और इस कारण उसने अपना राज्य खो दिया।

प्रत्येक निर्णय और योजना की पुष्टि करने के लिए हर बार बहुत सारे सलाहकारों की आवश्यकता नहीं होती है, और इस बात को आप इस नीतिवचन में प्रयुक्त किए गए शब्द ‘युद्ध’ में देख सकते हैं। युद्ध मनुष्यों द्वारा लिया जानेवाला सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है, क्योंकि यह संपूर्ण राष्ट्रों के जीवन और भविष्य तथा भारी कठिनाइयों को निर्धारित करता है। इस निर्णय पर कई दृष्टिकोणों से गहन सलाह के बाद ही आगे बढ़ा जाना चाहिए (लूका 14:31-32)। इसलिए यह सबक सभी निर्णयों पर लागू नहीं होता, बल्कि गंभीर परिणामों और जोखिम वाले बड़े निर्णयों पर लागू होता है।

लेकिन विवाह जैसे मामले निश्चित रूप से सलाह के योग्य मामले होते हैं। इस मामले में ग़लत निर्णय की पीड़ा और परिणाम भयानक हो सकते हैं; जो पहली बार विवाह करते हैं उन्हें इसका कोई अनुभव नहीं होता है, इसलिए उन्हें दूसरों की अच्छी सलाह की आवश्यकता होती है (नीतिवचन 19:13)। एक ऐसा तीसरा पक्ष जिसका दोनों परिवारों से कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध नहीं है, वह आपको इस निर्णय में बहुत अधिक दुःख से बचा सकता है, और वह संभवतः संभावित समस्याओं को आपसे अधिक आसानी से पहचान सकता है।

अन्य मामले भी जैसे व्यावसायिक उद्यम, नौकरी में परिवर्तन, नया घर लेना, स्वास्थ्य से सम्बंधित मुद्दे, बच्चों की शिक्षा और अनुशासन, निवेश के विकल्प और इसी तरह की बाकी सभी योजनाओं में परामर्श लेना आवश्यक होता है। बिना अच्छी सलाह लिए आप इतने बड़े फैसले लेने में भला जल्दबाजी क्यों करेंगे? जब आप इन मामलों में ग़लत निर्णय ले बैठते हैं तो इनके नतीजों की पीड़ा उस पीड़ा से कई अधिक भयावह होती है जो आपको सुधार के कारण अपने अभिमान के आहत हो जाने पर होती है।

परामर्शदाताओं की बहुतायत बुद्धिमानी है, क्योंकि कई सलाहकार आपको विभिन्न दृष्टिकोणों और विभिन्न अनुभवों से विचार करने के लिए बहुत कुछ दे सकते हैं। किसी बुद्धिमान व्यक्ति के साथ उनकी सलाह साझा करें, और इससे सलाह में और भी बेहतर सुधार होगा; आपके पास उन्नत परामर्शदाता होंगे। जब आप सबसे बुद्धिमान परामर्शदाताओं से उत्तर पाते हैं और सलाहकार की सलाह के आधार पर आप अपनी योजना या उद्देश्य के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार कर लेते हैं, केवल तब ही आपको अपना अंतिम निर्णय लेना चाहिए।

अच्छे सलाहकार को ढूंढने में जो आपके अच्छे विचार पर आपको अमल करने देने से पहले आपके उत्साह और जल्दबाजी का विरोध करेगा, समय लगता है, इसलिए इसमें अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होती है। दूसरों से उनकी राय पूछने के लिए भी विनम्रता की आवश्यकता होती है, जिससे यह पता चलता है कि आपको उनकी सहायता की सच में आवश्यकता है। ऐसी सावधानी ही विवेकपूर्ण कदम है, और ऐसी विनम्रता ही बुद्धिमानी है। कोई भी ऐसी बात आपको यह यकीन न देने पाए कि आप सम्मति के लिए समय नहीं दे सकते या आप स्वयं बेहतर निर्णय लेने में सक्षम हैं।

जवानों, तुम्हें तो बुद्धिमान सलाहकार की सबसे अधिक आवश्यकता है। जन्म से ही तुम्हारे मन में मूर्खता और व्यर्थ विचार की गाँठ बन्धी हुई है; संयम रखकर ली गई सलाह आपको मुसीबतों और दर्द से बचा सकती है। बुजुर्गों, आप इस पाठ से ऊपर नहीं हैं, क्योंकि उम्र चाहे जो भी हो, मनुष्य का मन अपनी भ्रामक कल्पनाओं के कारण सबसे अधिक धोखा देनेवाला होता है (यिर्म 17:9)। यह अहंकार है, जीवन-नीति नहीं, जो आपको दूसरों से सलाह लेने और उन्हें अपनी योजनाओं का परीक्षण करने से रोकता है।

परम-सामर्थी परामर्शदाता पवित्र आत्मा है, जो भावनाओं से नहीं, बल्कि बाइबल से आपका मार्गदर्शन करता है। यह आपके पैरों के लिए दीपक और आपके मार्ग के लिए ज्योति है (भजन 119:105)। यदि आप अपनी योजनाएँ प्रभु को सौंपते हैं, तो वह आपके विचारों को स्थापित करेगा (नीतिवचन 16:3; 3:5-6)। यदि आपका हृदय उसके साथ संगति में है, तो आप अपनी योजनाओं में आगे बढ़ सकते हैं, और सब कुछ उसकी इच्छा के अधीन कर दें (नीतिवचन 16:9; याकूब 4:13-15)।

जितना अधिक आप परमेश्वर के वचन से सीखेंगे, आपके पास उतनी ही अधिक बुद्धि होगी (भजन 19:7-11; 119:98-100; यशायाह 8:20)। और नीतिवचन की यह पुस्तक जीवन के सर्वाधिक अनुभवों वाले सबसे बुद्धिमान व्यक्ति की बुद्धि से भरी हुई है, और उसने परमेश्वर की प्रेरणा से इसे लिखा है (नीतिवचन 1:1-9)। बुद्धि और ज्ञान का सब भण्डार प्रभु यीशु मसीह के पास है, और जितना करीब आप उसके साथ चलेंगे, उतना ही अधिक ज्ञान आपके पास होगा (कुलुस्सियों 2:8)।

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