नीतिवचन 20:12
सुनने के कान और देखने की आखें, दोनों को यहोवा ने बनाया है। (केजेवी)
नवजात शिशुओं का यह देखने के लिए निरीक्षण किया जाता है कि उनके कान और आँखें काम कर रहे हैं या नहीं। विश्वासीजन अपने स्वस्थ बच्चे के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। विधर्मी भाग्य को, या अपनी किस्मत को धन्यवाद देते हैं। सुननेवाले कान और देखनेवाली आंखें बहुत मूल्यवान और उपयुक्त होती हैं। परंतु दोनों ही परमेश्वर की इच्छा से हैं; वह किसी भी बात के लिए किसी मनुष्य का ऋणी नहीं है, फिर चाहे कान हो या आंखें।
यदि किसी को सुनने के कान और देखने की आंखें हैं तो यह परमेश्वर का सर्वोच्च और अनुग्रहकारी चुनाव है। सुनना और देखना हमारा अधिकार नहीं है; वे धन्य अनुग्रह हैं। और सुनने और देखने का सबसे बड़ा वरदान वह है जब आप यीशु मसीह के गौरवशाली सुसमाचार, और बुद्धि तथा सत्य के वचनों को समझ पाते हैं और उन्हें बड़ी तत्परता से ग्रहण करते हैं। सुसमाचार को समझना, पश्चाताप करना, और उस पर विश्वास करना बहुत ही दुर्लभ सामर्थ्य है।
बहरा या अंधा बच्चा पैदा होना कोई इत्तेफाक नहीं है। यह भाग्य या किस्मत का परिणाम नहीं है। इसे विज्ञान के द्वारा पलटा नहीं जा सकता। यह सच्चे परमेश्वर का चुनाव है, उसकी मर्जी है। वह अपने सभी चुनावों में निर्दोष है, और वह प्रत्येक व्यक्ति के लिए ऐसे हज़ारों चुनाव करता है। उसकी सामर्थ्य असीम और उसका अधिकार मुकम्मल हैं। एक विद्रोही मानवजाति के सृष्टिकर्ता के रूप में उसे वह सब करने का अधिकार है जैसा वह करना चाहता है।
आप जीवन चाहते थे या नहीं, आप अस्तित्व में आना चाहते थे या नहीं, इस विषय में उसने आपसे आपकी सलाह तक नहीं ली। आप पर उसके परम अधिकार और परम सम्प्रभुता पर विचार करें। एक बार आप जीवित प्राणी बनने के पश्चात आप अपने अस्तित्व को बुझा नहीं पाए। आत्महत्या से आप केवल अपने शरीर को मारते हैं, जिसके बाद आपकी आत्मा को एक दोषी हत्यारे के रूप में परमेश्वर का सामना करना होता है। आपका अस्तित्व सर्वशक्तिमान परमेश्वर का चुनाव है, जिसमें आपकी रज़ामंदी नहीं ली गई थी।
आप किस घराने में जन्म लेंगे, आप की ऊंचाई क्या होगी, आप किस राष्ट्र में जन्म लेंगे, आपका लिंग क्या होगा, आपके माता-पिता कौन होंगे, आपका स्वभाव क्या होगा, आपके भाई-बहन कौन होंगे, आप में बुद्धि कितनी होगी, आप में क्या कौशल्य होगा या आपके जीवन में कौन-कौन से अवसर आएंगे, आप के अस्तित्व को कौन-कौन सी बातें प्रभावित करेगी, यह सब उसी ने तय किया। वह यहोवा है! आप कुछ भी नहीं है! वह कुम्हार है! आप मिट्टी हैं! उसके चुनाओं ने आपके जीवन को प्रचंड रूप में प्रभावित किया है जिसमें आपकी कोई भी स्वीकृति नहीं ली गई थी।
आपने अब तक जो पढ़ा है, क्या आप उस पर नम्रता से विश्वास करते हैं? परमेश्वर आपको उसके, या उसकी संप्रभुता के विरुद्ध लड़ने के विषय में चेतावनी देता है (यशा 45:7)। क्योंकि वह कुम्हार है, और आप मात्र मिट्टी है, इस कारण वह आपके तर्क-वितर्को को केवल टूटे हुए मिट्टी के बर्तन के तुल्य समझता है। जब किसी व्यक्ति को बिना कानों या बिना आखों के बनाया जाता है, तब मिट्टी को कुम्हार से सवाल करने का भी अधिकार नहीं है (यशा 45:7)।
इस महान और भयानक परमेश्वर के सामने नम्र हो जाओ। अपने व्यर्थ विचारों को कुचल दो। उसकी स्तुति करो और आराधना करो। उसकी प्रशंसा करो। आपके पास जो कुछ है, और आप जो हैं, उसके लिए उसका धन्यवाद करो। उस को वह सब चढ़ाओ जो आपके पास है, और जो आप हैं। तुम्हारे पापों के कारण तुम पर अनुग्रह होने के लिए उस से प्रार्थना करो। आज ही अपना जीवन उसे समर्पित करो।
जब चेलों ने एक ऐसे मनुष्य को देखा जो जन्म से ही अंधा था, तब वे जानते थे कि यह परमेश्वर की इच्छा से ही था। यीशु ने उन्हें बताया कि यह परमेश्वर की महिमा के लिए था (युहन्ना 9:1-3)। क्या परमेश्वर किसी व्यक्ति को केवल अपनी महिमा के लिए 30 वर्षों तक अंधा रख सकता है? बिल्कुल! क्या परमेश्वर अपनी महिमा के लिए किसी मनुष्य को बैल के सामान घांस खाने के लिए चारागाह में डाल सकता है? बेशक! नबूकदनेस्सर के विषय में दानियल का चौथा अध्याय पढ़े। क्या तुम इस परमेश्वर से प्रेम करते हो और उसका भय मानते हो?
आत्मिक कान और आत्मिक आंखें शारीरिक कान और शारीरिक आंखों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह केवल परमेश्वर के बिना-मूल्य अनुग्रह से ही है कि किसी भी पापी को परमेश्वर की बातें सुनने और देखने के लिए आत्मिक कान और आंखें दी जाती हैं। मानवजाति अपने पूरे जीवन भर परमेश्वर के विषय में सार्थक रूप से कोई विचार नहीं रखती (भजन 10:4)। जब आपका नया जन्म होता है तब आपको सुनने और देखने की आत्मिक इंद्रिया दी जाती हैं। आपने अपने शारीरिक जन्म में प्राकृतिक कान और आंखें पाई; अब आप अपने आत्मिक जन्म में आत्मिक कान और आंखें पाते हैं।
यीशु ने कहा, “यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता” (युहन्ना 3:3) । उस ने यह भी कहा, “जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो” (युहन्ना 8:47)। देखने की आंखें और सुनने के कान दोनों ही परमेश्वर के वरदान हैं। यीशु मसीह ने यहूदियों से सत्य को छिपाकर रखा, परंतु उसने अपने शिष्यों पर इसे प्रकट किया (मत्ती 11:25-27; 13:10-16)।
क्यों अधिकांश मनुष्य परमेश्वर और सत्य पर विचार तक नहीं करते? क्यों ज्यादातर मनुष्य सुसमाचार को मूर्खता समझते हैं? क्योंकि परमेश्वर ने इसे विश्वाससहित समझने और सुनने के लिए उनके कान नहीं खोले हैं। क्यों अधिकांश लोग सृष्टि में उसकी महिमामय रचना को देखकर भी अपने अस्तित्व का श्रेय विकासवाद और भाग्य को देते हैं? क्योंकि परमेश्वर ने उनकी आंखें नहीं खोली कि वे उसे और उसके सत्य को देखें। आपका अस्तित्व और उद्धार परमेश्वर के चुनाव पर निर्भर है।
नरक में यातनाएं भोग रहे धनवान मनुष्य ने अब्राहम से कहा कि वह लाज़र को मरे हुए में से जिलाकर वापस भेज दे कि वह उसके भाईयों के पास जाकर उन्हें चेतावनी दे, कही वे भी उसके साथ पीड़ा भोगने नरक में न आए जाये। परंतु अब्राहम ने बड़ी शालीनता से उत्तर दिया कि यदि परमेश्वर उनके कान और आंखें खोलने के लिए उन पर अनुग्रह नहीं करता, तो मुर्दों में से वापस जानेवाला व्यक्ति भी उनके भ्रष्ट और विद्रोही हृदयों को न तो विश्वास दिला पाएगा और न बदल पाएगा (लुका 16:27-31)। यदि उन्हें बाइबल पढ़ने में दिलचस्पी नहीं है, तो वे मरे हुए में से किसी मनुष्य की सुनने में भी कोई दिलचस्पी नहीं लेंगे।
क्या आपने कभी सोच कर देखा है कि आपका परिवार और मित्र उन बातों को क्यों मूल्य नहीं देते जो परमेश्वर ने आपको उसके वचन में प्रकट की? उन्हें परमेश्वर और भक्तिमानता के विषय में वैसी प्रतीति क्यों नहीं है जैसी आपको है? आप जानते हैं कि क्या होगा जब आप अपने सहपाठियों या सहकर्मियों को यीशु मसीह, आने वाले न्याय, और एक पवित्र जीवन जीने के विषय में बताएंगे। वे आपकी बातों को ठुकरा देंगे, और आपके शत्रु बन जाएंगे। इसका क्या स्पष्टीकरण है? तुम्हारे सुननेवाले कान और देखने वाली आंखें हैं, परंतु उनकी नहीं।
सत्य और बुद्धि को अस्वीकार करने वाली भीड़ को देखकर निराश न हो, (क्योंकि कान और आँख खोलना परमेश्वर का कार्य है) चाहे आप इसे कितनी भी अच्छी तरह से प्रस्तुत क्यों न करें। यीशु और पौलुस को भी ऐसी ही प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था। यहूदियों के धार्मिक अगुओं ने यीशु को सूली पर चढ़ा दिया और उन्होंने रोमी साम्राज्य के चारों ओर और उसका तब तक पीछा किया जब तक कि उसका शिरच्छेद नहीं किया गया। अपने सुनने वाले कानों और देखने वाली आंखों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करो, और उस से प्रार्थना करो कि वह आपको उन लोगों तक ले जाए जो आत्मा की सामर्थ्य से नया जन्म पा चुके हैं। परमेश्वर आपको कुरनेलियुस या लुदिया तक ले जा सकता है और ले भी जाएगा।
सुनने के कान और देखने की आखें बनाने का कोई मानवीय माध्यम नहीं है। यह महान कार्य केवल यहोवा ही कर सकता है। बहरे कानों को सुसमाचार सुनाने या अंधी आंखों को उद्धारकर्ता को दिखाने के लिए मानव निर्मित सुसमाचारवादी प्रयास मूर्खता से भरे और व्यर्थ हैं। सुसमाचार को केवल वे लोग सुन और देख सकते हैं जो आत्मा के कार्य के द्वारा पहले ही नया जन्म पा चुके हैं, अर्थात वे जिनके अब सुननेवाले कान और देखनेवाली आंखें हैं (1 कुरिन्थ 1:18,24; 2:14-15).।
उद्धार तो यहोवा ही से होता है! परमेश्वर ने कुछ लोगों को अनंत जीवन के लिए चुना है (इफि 1:4)। उसने यीशु मसीह को उनके पापों के लिए मरने भेजा, और वह निश्चित रूप से उन्हें नया जन्म देगा और उनकी महिमा करेगा (रोमि 8:29-33)। वह उन्हें सुननेवाले कान और देखनेवाली आंखें देता है। लुका ने उन लोगों का वर्णन जिन्होंने पौलुस के सुसमाचार पर विश्वास किया, इस प्रकार किया, “और जितने अनन्त जीवन के लिये ठहराए गए थे, उन्होंने विश्वास किया”(प्रेरितों 13:48)।
जब अनंत जीवन की बात आती है, तो उसमे परमेश्वर कुम्हार भी है और मैं और आप केवल मिट्टी हैं (रोमि 9:20-24)। वह कुछ लोगों को प्रतिष्ठा के पात्र (अनन्त जीवन पाने) बनाता है, और कुछ लोगों को अप्रतिष्ठा के पात्र (नरक की अनन्त यातना भोगने) बनाता है। आपको उससे सवाल करने का भी अधिकार नहीं है। इस गौरवशाली शास्त्र पाठ को पढ़े और उसकी आराधना करें। हम एक विद्रोही जाति है, और वह कुछ लोगों का उद्धार करने और कुछ लोगों को दंड देने के अपने उद्देश्य में पूरी तरह से न्यायी है। उसने कुछ को चुना कि उनमें अपना क्रोध और सामर्थ्य प्रकट करें, और कुछ को इसलिए चुना कि उन में अपनी महिमा को प्रकट करें ।
एक व्यक्ति नया जन्म कैसे पाता है जिसके सुनने के आत्मिक कान और देखनेवाली आत्मिक आंखें होती हैं? परमेश्वर का पुत्र यीशु उसे जीवित होने की आज्ञा देता है, और उसकी आत्मा को आत्मिक मृत्यु से पुनर्जीवित करता है (युहन्ना 5:25-29)। यह महिमामय कार्य परमेश्वर की सामर्थ्य और अनुग्रह के द्वारा, और बिना किसी मानवीय सहयोग के होता है (युहन्ना 1:13; 3:8; रोमि 9:16; इफि 1:19-20; 2:1-10)। प्रभु यीशु मसीह सृष्टि की निर्मिती करने के उस सामर्थ्य का उपयोग करता है जिसका उपयोग उसने आदि में अंधकार में से ज्योति को लाने के लिए किया था (2 कुरिन्थ 4:3-6; इफि 2:10)।
इस महान घटना के बाद ही आप परमेश्वर की बातें सुन पाते हैं और देख पाएंगे। इस नए जन्म के कार्य के बाद ही कुरनेलियुस जैसे विधर्मी परमेश्वर का भय मानना, प्रतिदिन प्रार्थना करना, और निर्धनों को बहुत दान देना शुरू करते हैं (प्रेरितों 10:1-4)। और जब परमेश्वर द्वारा पहले ही से ठहराएँ हुए माध्यम से ऐसे व्यक्ति के पास सुसमाचार लाया जाता है, तब वह उस पर महिमामय सुसमाचार के रूप में विश्वास करता है और मानता है (प्रेरितों 10:33, 44-48)।
यदि आप आज परमेश्वर की बातों को सुन या देख सकते हैं, तो उसे धन्यवाद दें, और उस प्रतीति की दिशा में आज ही दौड़ें चले जाएं। अगर आपको डर है कि आपका नया जन्म नहीं होगा, तो आपका कर्तव्य वही है। प्रभु यीशु मसीह के पास दौड़ें, उसे अपना सम्प्रभु और एकमात्र आशा समझे, और उसकी आज्ञा का पालन करें। यह सुननेवाले आत्मिक कानों और देखनेवाली आत्मिक आँखों का प्रमाण है (2 पतरस 1:5-10; 1 यूहन्ना 2:29; 3:7; 5:1-5)।
यीशु मसीह इस संसार पर अपने आप को प्रकट करने वाला है, क्योंकि वही धन्य और एकमात्र अधिपति, राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है (1 तीमु 6:14-15)। वह अपने दस हजार स्वर्गदूतों के साथ अपने शत्रुओं का नाश करने के लिए आ रहा है (यहूदा 1:14; 2 थिस्स 1:7-9)। आज ही उस पर विश्वास करो और उसकी आज्ञा मानो, क्योंकि कल जब वह आएगा तो पश्चाताप न करनेवालों और अविश्वासियों के लिए शाप की घोषणा करेगा (1 कुरिं 16:22)।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।