नीतिवचन 20:1

दाखमधु ठट्ठा करनेवाला और मदिरा हल्ला मचानेवाली है; जो कोई उसके कारण चूक करता है, वह बुद्धिमान नहीं।

यहाँ शराब या मदिरा को लेकर एक बुद्धिमान चेतावनी दी गई है। केवल मूर्ख ही शराब को या इस नीतिवचन की चेतावनी को हल्के में लेंगे। शराब के दुरुपयोग के कारण जीवन, समाज और धर्म के हर क्षेत्र में भारी आघात पहुँचा है। हालांकि यह नीतिवचन शराब के उचित उपयोग पर रोक नहीं लगाता है, फिर भी यह एक गंभीर सावधानी का इशारा देता है।

दाखमधु कैसे ठट्ठा करनेवाला होता है? मदिरा किस प्रकार हल्ला मचाती है? दाखमधु और मदिरा मनुष्यों को कैसे भरमाते हैं? वे लोगों से ऐसे ऐसे काम करवाते हैं जो वे होश में रहने पर नहीं करते। सुलैमान ने ज़्यादा शराब पीने और पियक्कड़पन के खिलाफ चेतावनी देने के लिए इन शक्तिशाली रूपकों का उपयोग किया।

दाखमधु अच्छा है। परमेश्वर ने इसे इसलिए बनाया ताकि उसे पीकर मनुष्य का मन प्रसन्न हो सके (भजन 104:14-15; न्याय 9:13; ज़कराया 9:17)। नूह, मलिकिसिदक, और दाऊद जैसे परमेश्वर के महान लोगों की अपनी दाख की बारियाँ इसलिए नहीं थी कि वे किशमिश का सेवन करें। परमेश्वर और बाइबल के बारे में किसी व्यक्ति के ज्ञान का एक सरल, त्वरित परीक्षण इस बात से किया जा सकता है कि दाखमधु के विषय में उसकी क्या राय है।

परन्तु एक बहका हुआ मूर्ख कहलाने से बचने के लिए ज़रूरी है कि आप बहुत अधिक मदिरा पीने से बचे। जैसे अधिक खाना पेटूपन का पाप है, वैसे ही अधिक पीना पियक्कड़पन का पाप है (नीतिवचन 23:21)। आपको शराब के खतरे को समझना होगा और उससे डरना होगा और जब भी आप पीने की सोचे तो आपको उसकी मात्र को लेकर संयम रखना होगा।

बुद्धिमान होने के लिए, आपको हर उस चीज़ से सावधान रहना अवश्य है जो आपको शर्मसार कर सकती है या आपकी भावना को भड़का सकती है। यदि आप अपने पर घमण्ड करके यह मान लेते हैं कि आप बिना किसी संयम या बिना किसी सीमा के शराब को पीने पर भी अपने दिमाग और शरीर की हलचल पर क़ाबू रख सकते हैं, तो आप मूर्ख हैं। राजा, परमेश्वर के नबी, और उपदेशक अतिरिक्त सावधानी बरतते थें (नीतिवचन 31:4-5; 28:7-8; 1 तिमुथियुस 5:23)।

क्या यह नीतिवचन दाखमधु या शराब के संयमित उपयोग की भर्त्सना करता है? बिलकुल भी नहीं! परमेश्वर ने दोनों को हमारे सुख के लिये बनाया (व्यवस्था. 14:26; नीतिवचन 31:6-7; सभोपदेशक 9:7)। दाखमधु बाइबल द्वारा वर्णित एक श्रेष्ठ पेय है (उत्पत्ति 14:18; II शमूएल 6:19; सभो 10:19; यूहन्ना 2:1-11), परन्तु इसे नशा करने के लिए नहीं पीया जाता था (इफि 5:18; लुका 21:34)। यीशु मसीह स्वयं अक्सर दाखमधु पीते थे (लूका 7:33-35)।

इस नीतिवचन में दो प्रमुख पर्यायवाची या लाक्षणिक शब्द हैं। पर्यायवाची शब्द अलंकार या रूपक होता है जो किसी दूसरी वस्तु के लिए प्रयुक्त होता है। जो शब्द समान अर्थ के कारण किसी दूसरे शब्द की जगह ले लेते हैं उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं या समान अर्थ प्रदान करने वाले शब्द पर्यायवाची शब्द अथवा समानार्थक शब्द कहलाते हैं। सामान्य अर्थ में ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान हों, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। यह भाषा में सौंदर्य और बल जोड़ता है। बाइबल अलंकारों और अन्य कई रूपकों से भरी हुई है, जिस वजह से सतही समझ और उपरी परिभाषाएँ अक्सर हास्यास्पद लगती हैं, विशेषकर नीतिवचन में (नीतिवचन 1:6)। पर्यायवाची शब्दों के इन सामान्य उदाहरणों को पूरी तरह से समझें:

1. “हवा से बातें करना” तेज़ी से भागने या तेज़ी से वाहन चलाने के लिए प्रयुक्त होता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम अक्षरशः हवा से संभाषण करते हैं। मतलब सिर्फ ड्राइवर को गाड़ी की स्पीड बढ़ाने से है।

2. “उसने सच में अपनी खोपड़ी पीट ली” दिमाग के लिए प्रयुक्त हुआ है जो कि सोचने का है। आशय केवल इतना है कि उसने समझदारी से एक समस्या का समाधान किया।

3. “प्रधानमंत्री कार्यालय ने घोषणा की” उस स्थान का प्रतिस्थापक शब्द है जहां प्रधानमंत्री रहते हैं। कोई भी विश्वास नहीं करता कि उनका कार्यालय सचमुच बोलता है, क्योंकि यह स्थायी रूप से निर्जीव वस्तु है। तात्पर्य केवल इतना है कि प्रधानमंत्री ने जनता को नई जानकारी दी।

इस नीतिवचन के प्रथम खंड “दाखमधु ठट्ठा करनेवाला” है का परिक्षण करें। दाखमधु अंगूर से बना किण्वित, मादक रस होता है, और किसी की ठट्ठा करने का अर्थ है उसका उपहास करना या उसे मूर्ख बनाना। दाखमधु जब बोतल या गिलास में होती है तब तक वह बहुत शान्त और चुप रहेगी। यह अपने आप में कुछ भी अशिष्टता नहीं करती। यह बिना किसी का उपहास किए या बिना किसी को शर्मसार किए कई वर्षों तक वाइन-शॉप में रह सकती है। तो फिर दाखमधु कैसे ठट्ठा करनेवाला होता है?

दाखमधु अपने आप में ठट्ठा करनेवाला नहीं होता है। दाखमधु पियक्कड़पण के लिए प्रयुक्त रूपक शब्द है। अलंकारिक शब्द किसी अन्य वस्तु के प्रभाव को दर्शाता है। बाइबल कहती है कि जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक पूरा लोक है (याकूब 3:6)। कैसे? जीभ आपके मुंह में केवल एक पेशी है। लेकिन जब जीभ का गलत उपयोग होता है तब यह पाप को जन्म देती है। जैसे कि हमने पहले देखा, अलंकारिक शब्द या रूपक के समान ही, किसी भी परिणाम के पीछे एक कारण होता है।

जब आप अधिक मात्रा में दाखमधु पीते हो, तो वह आपका ही ठट्ठा उड़ाएगा (नीतिवचन 23:29-35)। अत्यधिक दाखमधु पीने से आप नशे में धुत्त हो सकते हैं, जिसके चलते आप अपना नैतिक गुण, व्यक्तिगत आत्म-संयम, या यहां तक कि वाहन चलाने का मौलिक कौशल भी खो सकते हैं। तब आप अपने आप को मूर्ख बना लोगे। बुद्धि के प्रति आपके इरादे नेक होने के बावजूद आप अपनी ही प्रतिष्ठा का मज़ाक बना देंगे। गौर कीजिए कि इसने नूह (उत्प. 9:21), लूत (उत्प. 19:31-36), नाबाल (1 शमूएल 25:36-38), और एला (1राजा 16:8-10) के साथ क्या किया।

परमेश्वर और सुलैमान चाहते हैं कि आप महान बनें। दाखमधु सुकून देनेवाला एक अद्भुत पेय है जिसके पीने से पुरुषों का मन प्रसन्न होता है और उन्हें खुश करता है, लेकिन बहुत अधिक मात्रा में पीना आपके पौरुष्यत्व को अस्थायी रूप से हानि पहुंचा सकता है और संभावित रूप से आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। आपको दाखमधु पीने की सीमा तय करनी ज़रूरी है ताकि आप हमेशा खुद पर अच्छा नियंत्रण बनाए रख सकें। दाखमधु को लेकर जो नियम हैं वे उन नियमों से अलग नहीं हैं जो भोजन, यौन-सम्बन्ध, नींद आदि जैसी चीजों के लिए हैं।

अब दूसरे खंड का परिक्षण करें, “मदिरा हल्ला मचानेवाली है।” मदिरा विभिन्न पदार्थों के किण्वन या आसवन से बना पेय है, और हल्ला मचाने का अर्थ है हिंसक क्रोध का प्रकोप को जन्म देना। शराब की दुकानों वालो और बार मालिकों के लिए यह खुशी की बात यह है कि जब तक बीयर और व्हिस्की बोतलों में होती हैं तब तक वे बिना हल्ला मचाये या कोई लड़ाई के रहेंगे, यहां तक कि सालों तक, यहां तक कि एक ही शेल्फ पर भी। मदिरा किस प्रकार हल्ला मचानेवाली होती है?

मदिरा अपने आप ही हल्ला नहीं मचाती। मदिरा पियक्कड़पन के लिए प्रयुक्त रूपक या आलंकारिक या पर्यायवाची शब्द है। रूपक या आलंकारिक शब्द प्रभाव के कारण को दिखानेवाला वैकल्पिक शब्द होता है। बाइबल कहती है कि छड़ी और डाँट से बुद्धि प्राप्त होती है (नीतिवचन 29:15)। कैसे? एक छड़ी एक एक लकड़ी होती है। आप छड़ी को जहां छोड़ते हैं वह वहां से यह नहीं हटेगी; यह कुछ नहीं जानती; यह सिखा नहीं सकती। तो फिर इससे बुद्धि कैसे प्राप्त होती है? जब शारीरिक दंड के लिए विवेकपूर्ण ढंग से इस्तेमाल किया जाता है तब छड़ी सिखा सकती है और सिखाएगी। जैसे कि हमने पहले देखा, अलंकारिक शब्द या रूपक के समान ही, किसी भी परिणाम के पीछे एक कारण होता है।

मदिरा यदि आप बहुत अधिक पीते हैं, तो हल्ला मचाने या क्रोध का कारण बन सकती है। अत्यधिक शराब पीने से आप मदहोश हो कर नशे में धुत्त हो जाएंगे, और आप बिना किसी कारण के किसी से भी लड़-झगड़ सकते हैं। आत्म-संयम के खो जाने से आप अपना आपा खो सकते हैं और चिल्लाने या झगड़ने के परिणामों को अनदेखा कर सकते हैं। इसमें सबसे पहले जीभ का बंधन खुल जाता है, फिर क्रोध खुल जाता और फिर मुट्ठियाँ। बार में हुएं झगड़ों के किस्से असंख्य हैं। यह नीतिवचन सच है।

यदि आप शराब के इन खतरों पर गौर किये बिना निडर होकर पीते हैं, तो आप मूर्ख हैं। पियक्कड़पन आप पर हावी हो सकता है और इससे पहले कि आप इसका एहसास करें, आपको यह अपनी मूर्खता में बहका सकता है। कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति नशे से बचने के लिए निश्चित सीमा तय करेगा और बिना सावधानी के नहीं पीएगा। वह विवेकपूर्ण आचरण के लिए प्रतिबद्ध होता है, जो थोड़ी-सी भी मूर्खता होने नहीं देता (सभोपदेशक 10:1), इसलिए वह अपनी प्रतिष्ठा को खतरे में डालने से बचने के लिए पियक्कड़पन के करीब भी नहीं जाएगा।

बुद्धिमान बनो! इसका समाधान शराबबंदी आंदोलन का ढोंग से भरा झूठ नहीं है – जैसा कि हमारे देश के कुछ राज्यों और शहरों में है, जिसका विपरीत नतीजा यह है कि इसकी उन राज्यों और शहरों में तस्करी होती है और अपराध को जन्म देता है। और एक अर्थ से यह उन राज्यों और शहरों में रहने वाले लोगों पर अन्याय है, क्योंकि एक ही देश की जनता के बीच यह भेदभाव कानूनी दृष्टी से भी तर्कहीन है। अगर शराबबंदी बुद्धिमानीपूर्ण है, तो पेटूपन को जन्म देनेवाले फास्टफूड और पिज्जा पर भी बंदी लगनी चाहिए और लोलुपता में इन चीजों की भूमिका को देखते हुए इन्हें भी गैरकानूनी घोषित किया जाना चाहिए।

संयम का अर्थ परहेज़ या मद्य-त्याग नहीं है; संयम आत्म-अनुशासन है, मसीही जीवन का एक प्रमुख नियम (1 कुरिन्थ 9:24-27; फिलिप्पियों 4:5)। यह सुनना शर्म की बात है कि अज्ञानी मसीही लोग बीयर और दाखमधु की भर्त्सना करते हैं, जबकि सस्ते बुफे पार्टियों में जाकर खुद को मोटापे से भर लेते हैं। सुलैमान के नीतिवचन उन लोगों को ज्ञान सिखाएंगे जो अपने दिल और दिमाग को पवित्र शास्त्र की शिक्षा की ओर लगाएंगे।

जो मनुष्य परमेश्वर की महिमा के लिए एक पवित्र और सदाचारी जीवन जीने के लिए समर्पित है वह दाखमधु और मदिरा के सेवन के प्रति उतना ही सतर्कता की भूमिका लेगा और भयभीत रहेगा, जितना कि वह भोजन, यौन-सम्बन्ध, नींद, वाणी और मनोदशाओं के के प्रति सतर्क रहेगा। वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में पाप नहीं करना चाहता। अगुवों और शासकों को पवित्रता के इस रूढ़िवादी सम्मान का उदाहरण बनना चाहिए, इसलिए न्याय करने में बुद्धिमान होने की उनकी आवश्यकता के कारण परमेश्वर ने उन्हें शराब के सम्बन्ध में सख्त कानून दिए (नीतिवचन 31:4-5; 1 तीमु 3:3,8; तीतुस 1:7)।

यीशु को उसके शत्रु पेटू और पियक्कड़ मनुष्य कहते थें (लूका 7:33-35), परन्तु वह कभी नशे में नहीं था। वह अक्सर दाखमधु पीता था, और उसने एक विवाह उत्सव में उत्तम दाखमधु बनाया था, लेकिन वह हमेशा इसके उपयोग के प्रति सचेत और संयमी था। वह धर्मी संयम की मिसाल था। उसने सदैव वही किया जो उसके पिता को प्रसन्न करता था, और पियक्कड़पन परमेश्वर को प्रसन्न नहीं करता (यूहन्ना 8:29; गल 5:16-21)। याद रखें, स्वर्ग में कोई पियक्कड़ नहीं है (1 कुरिन्थियों 6:9-10)।

क्या आप इस सिद्ध मनुष्य को जानते हैं, अर्थात मसीह यीशु को (1 तीमुथियुस 2:5)? वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी है, और वह जल्द ही इस संसार का न्याय करने के लिए फिर से आ रहा है। वह उन सभी दुष्टों को नष्ट कर देगा जिन्होंने उसे और उसके सुसमाचार को को नहीं माना (2 थिस्स 1:1-9)। उसी समय वह अपने चुने हुओं को अपने पास इकट्ठा करने आएगा, और वे उसकी बड़ी प्रशंसा और महिमा करेंगे (2 थिस्स 1:10)।

आनंद देनेवाले प्रभाव के लिए वह मात्र दाखमधु पर निर्भर रहने के बजाय, यीशु पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साथ चलने में अपना सबसे बड़ा आनंद और सुख पाता था। पौलुस ने हमें उसी संतुलन की खोज में रहना सिखाया, “दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ” (इफिसियों 5:18)। ऐसे मनुष्य क्या करेंगे? पियक्कड़ लोगों के गीत गाने के बजाय, वे अपने मनों में भजन, गीत और आत्मिक गीत गाने की धुन में रहेंगे (इफिसियों 5:19)।

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