नीतिवचन 2:8
वह न्याय के मार्ग की रक्षा करता है, और अपने पवित्र लोगों के मार्ग की चौकसी करता है। (केजेवी)
स्वर्ग बुद्धिमान मनुष्यों को प्रतिफल देता है। जो परिश्रम से ज्ञान और समझ की खोज करते हैं, उन्हें परमेश्वर समृद्ध बनाता है और उन पर अनुग्रह करता है। ऐसे लोग अपने अच्छे निर्णय और पवित्र जीवन के लिए जाने जाते हैं, क्योंकि ये बुद्धि के दो लाभ हैं, और तब बुद्धि का यहोवा उन्हें और भी प्रतिफल देता है। चीज़ों को सही तरीके से करने पर आपके लिए सुख और समृद्धि आती है (भजन 19:10-11)।
यहोवा परमेश्वर सारी बुद्धि, उपकार और आशीष का स्रोत है। जब कोई व्यक्ति जीवन में निष्पक्षता और न्याय को अपने मार्ग के रूप में चुनता है, तो सृष्टिकर्ता परमेश्वर उसे समृद्ध बनाएगा और उसकी रक्षा करेगा। जब कोई व्यक्ति पवित्र जीवन को अपनी जीवनशैली बनाता है, तो वही परमेश्वर उसकी रक्षा करेगा और उसकी ज़रूरतें पूरी करेगा। बुद्धि को ढूंढने से निश्चित प्रतिफल मिलते हैं। हे धन्य परमेश्वर, तेरा धन्यवाद।
सुलैमान ने अपने पुत्र को ज्ञान और समझ की सरगर्मी से खोज करने प्रोत्साहित किया, और उसने वादा किया कि उसे लक्ष्य प्राप्त होगा (नीति 2:1-5)। फिर उसने समझाया कि यहोवा बुद्धि, ज्ञान और समझ देता है (नीति. 2:6), यहोवा उन लोगों की रक्षा करता है जो खरी चाल चलते हैं (नीति. 2:7), और यहोवा अपने विश्वासियों के जीवन की रक्षा करता है (नीति. 2:8)। अपनी सारी शक्ति के साथ बुद्धि का पीछा करने से ही उसका पुत्र बुद्धि से जुड़ी हर आशीष को समझेगा (नीति. 2:9)।
शब्दों और वाक्यांशों को समझने के लिए संदर्भ महत्वपूर्ण होता है, विशेष रूप से पवित्रशास्त्र में। सुलैमान के अधिकतर नीतिवचन जीवन और सफलता के नियमों के विषय में अलग-अलग अवलोकन हैं, इसलिए बाइबल की अन्य पुस्तकों की तुलना में नीतिवचन की पुस्तक में संदर्भ का कम महत्व है। परन्तु यह भाग परस्पर सम्बंधित है, और इस में हम बुद्धि की खोज करने (नीति. 2:1-4) और उसे प्राप्त करने के प्रोत्साहन को देखते हैं (नीति. 2:5-9)।
सच्चा परमेश्वर न केवल बुद्धि, ज्ञान और समझ का स्रोत है (नीति. 2:6), बल्कि वह उन लोगों का दाता और रक्षक भी है जो उसे और उसकी बुद्धि को खोजते हैं (नीति. 2:7-8)। आशीषों और पुरस्कारों का यही महिमामय मिश्रण है जो धर्मियों की सभी ज़रूरतों और अभिलाषाओं को पूरा करता है (नीति. 2:9)। वह उनकी रक्षा करेगा और उन्हें सम्भालेगा (नीति. 2:8)।
वचन के प्रथम खंड पर ध्यान दे, “वह न्याय के मार्ग की रक्षा करता है।” जो मनुष्य बुद्धि का पीछा करता है वह न्याय के पथ पर चलता है, इसलिए क्योंकि वह सच्चा, न्यायी, सही और निष्पक्ष है। वह बाहरी रूप को देखकर निर्णय नहीं लेता, बल्कि न्यायपूर्ण और विवेकपूर्ण निष्कर्ष निकालने के लिए परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करता है (नीति. 17:15; 24:23; व्यव. 1:16-17; 16:18-29; यशा. 11:1-5; यूहन्ना 7:24; इफि. 5:15)।
परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि जो मनुष्य धर्म के मार्गों पर चलता है, वह उसकी रक्षा करेगा, और वह उसे धर्म के पथ पर ही रखेगा। परमेश्वर उसके जीवन को आशीष से भर देगा और उसकी रक्षा करेगा, क्योंकि वह ऐसा परमेश्वर है जो धार्मिकता से न्याय करता है, और वह उसकी बुद्धि और धार्मिकता से प्रीति रखने वालों से प्रीति रखता है। वह उसे ईश्वरीय सामर्थ्य देकर आशीषित करेगा, ताकि वह ईश्वरीय स्वभाव का सहभागी बने, और इस संसार की सड़ाहट से बचा रहे (2 पतरस 1:1-4)।
इस प्रथम खंड में एक पदलोप है, जो कि एक भाषालंकार है जिसमें स्पष्ट शब्दों को छोड़ दिया जाता है। परमेश्वर स्वयं न्याय के मार्ग पर चलता है, और वह स्वयं न्याय के मार्गों का समर्थन और सम्मान करता है (व्यवस्थाविवरण 32:4; 1 शमू. 2:3; भज 99:4; 42:1-4)। परन्तु संदर्भ इस बात पर ज़ोर देता है कि परमेश्वर न्याय के पथ पर चलने वालों की रक्षा करता है, क्योंकि इस नीतिवचन में धर्मी (नीति. 2:7), सीधे (नीति. 2:7), और पवित्र जनों की ही बात की जा रही है (नीति. 2:8) जिनकी वह रक्षा करता है।
इस खंड में एक पदलोप है, इसलिए क्योंकि यहां आसानी से पढ़ा जा सकता है कि वह धर्मियों के लिए न्याय के मार्ग की रक्षा करता है, अर्थात् उनके लिए जो सीधी चाल चलते हैं, या अपने पवित्र जनों के मार्ग की। मुद्दा यह है कि वह धार्मिकता से भी बढ़कर धर्मी जनों की रक्षा करता है। परमेश्वर उन्हें आशीष देता है और उनकी रक्षा करता है जो भले और धर्मी न्याय के मार्ग पर चलते हैं, और उन्हीं पथों पर बने रहने में वह उनकी सहायता करता है।
अब दूसरे खंड पर विचार करें, “और अपने पवित्र लोगों के मार्ग की चौकसी करता है।” एक संत एक पवित्र किया हुआ व्यक्ति होता है, एक पवित्र व्यक्ति जिसे परमेश्वर के लिए अलग किया जाता है। जो लोग इस संदर्भ में हैं वे वे लोग हैं जो परमेश्वर की बुद्धि और ज्ञान का पीछा कर रहे हैं (नीति. 2:1-5)। इसमें प्रभु का भय मानना शामिल है, जो उसकी पवित्रता के प्रति भययुक्त आदर और सब पाप से बैर रखना है (नीति. 2:5; 8:13; 16:6; भजन 97:10; 119:104; आमोस 5:15)।
महान परमेश्वर ऐसे लोगों के मार्ग की चौकसी करने की प्रतिज्ञा करता है, क्योंकि वह उनमें आनंदित होता हैं (व्यवस्थाविवरण 33:3, 26-29; भजन 34:11-22; 37:23-24)। वह उनके धर्मी जीवन को समृद्धि से भर देगा और उनकी रक्षा करेगा, और साथ ही उसमें दृढ़ रहने में उनकी सहायता करेगा। ये लोग जब परमेश्वर को प्रसन्न करने सतर्कता का जीवन जीते हैं तब वह उन्हें भिन्न भिन्न मार्गों से बड़ी आशीष देता है (भजन 112:1-10)।
यहां आपके लिए क्या सबक है? यही कि परमेश्वर की बुद्धि की खोज पूरे समर्पण और परिश्रम से करने पर सफलता मिलेगी ही। परन्तु यह सफलता आपके जीवन में परमेश्वर की आशीष और सुरक्षा को भी ले आएगी, जो परमेश्वर की बुद्धि की उपेक्षा करनेवालों को कभी नहीं दी जाएगी। एक व्यक्ति बुद्धि की प्राप्ति के लिए जो समर्पण करता है क्या आपका जीवन ऐसे व्यक्ति के वर्णन से मेल खाता है (नीति. 2:1-5)?
क्या आपने अपने आप को उस ज्ञान और बुद्धि की खोज करने के लिए समर्पित किया है जो केवल परमेश्वर और उसके वचन से आते हैं? यदि आपने समर्पण किया है, तो आप बड़े साहस से इन आशीषों को मान सकते हैं जिन्हें देने की यहाँ प्रतिज्ञा दी गई है, क्योंकि वे आपके लिए सुलैमान की कलम से परमेश्वर की प्रेरणा द्वारा लिखी गई थीं।
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