नीतिवचन 2:6

क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुँह से निकलती हैं।

बुद्धि का एक ही स्रोत है। उसे कहीं और ढूंढना मूर्खता और व्यर्थ का परिश्रम है। समस्त बुद्धि यहोवा परमेश्वर की ओर से है, और वह जिसे चाहता है उसे देता है। ज्ञान और समझ भी उसके वरदान हैं, और वह उन्हें अपनी आत्मा, वचन और प्रचारकों के द्वारा बोलता है।

बुद्धि, ज्ञान और समझ उचित रीति से न्याय करने की क्षमता के परस्पर सम्बन्धित पहलू हैं –अद्वितीय दुविधाओं या परिस्थितियों के लिए उचित नैतिक या व्यावहारिक समाधान जानना। वे वे माध्यम हैं जिनके द्वारा आप सत्य और झुठ, सही और ग़लत, भले और बुरे की पहचान कर सकते हैं। वे शान्ति और धार्मिकता के एक धन्य और सफल जीवन की शर्तें हैं। बुद्धि को बौद्धिक स्तर, शैक्षणिक उपाधियों, या उपलब्धियों से मापा नहीं जा सकता है। बुद्धि इन सब से श्रेष्ठ है।

मानव बौद्धिकता बुद्धि का स्रोत नहीं है। बौद्धिकता अक्सर अपंग होती है। विनम्र बौद्धिकता का एक विनम्र दिहाड़ी मजदूर जो परमेश्वर का भय मानता है और उसकी आज्ञा का पालन करता है, उस व्यक्ति से कही अधिक बुद्धिमान होता है जो विश्लेषणात्मक किन्तु भ्रष्ट दिमाग पर भरोसा करने वाले अभिमानी प्रतिभाशाली व्यक्ति के रुप में जाना जाता है। क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है! माता-पिता औसत से कम बच्चे पर दुखी न हो; आप उसे ऐसी बुद्धि सिखा सकते हैं, जो उसे परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ाएगी। बुद्धि और चरित्र का मूल्य बौद्धिकता से बढ़कर है।

मानव-शिक्षा बुद्धि का स्रोत नहीं है। मानव-शिक्षा अपंग हो सकती है। औसत दर्जे का पढ़ा-लिखा एक दिहाड़ी मजदूर जो परमेश्वर का भय मानता है, वह परमाणु विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त शहरी लड़के को पीछे छोड़ देगा। क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है! इन में से एक अपने साधारण जीवन के हर पहलू में परमेश्वर को देखता है; तो दूसरा, महाविस्फोट सिद्धान्त (बिग बैंग थ्योरी) और अपनी बन्दर माता के विषय में मतिभ्रम होता है। परमेश्वर ने बुद्धि के इस दृष्टिकोण के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की है (1 कुरि. 1:19-20; 3:18-20; 1 तिमु. 6:20-21)।

मानव-परिश्रम बुद्धि का स्रोत नहीं है। यद्यपि बुद्धि की खोज करने वाले मनुष्यों को इसका पीछा करने में ऊर्जावान होकर परिश्रम करने की आवश्यकता है (नीति. 2:4; 18:1; 2 तीमु. 2:15), फिर भी, जब तक कि परमेश्वर इस परिश्रम को आशीष न दे, यह व्यर्थ होगा (भजन 127:1-2; सभो. 8:17)। पढ़ते और अध्ययन करते समय एक धर्मी मनुष्य को परमेश्वर से याचना करना आवश्यक है कि वह मार्ग में उसकी अगुवाई करें और उसे सफल बनाएं (भजन 119:18; मत्ती 13:17; इफि. 1:17-18)। फरीसी और शास्त्री धर्मशास्त्र के अक्षर को बखुबी जानते थे, परन्तु उन्हें उसकी समझ नहीं थी।

मनुष्य इस संसार में जंगली गदहे के बच्चे की नाईं आता है, और वह वैसे ही गुज़र जाता है (अय्य. 11:12; सभो. 3:19-21)। अपने जीवन के दौरान वह एक धोखेबाज और भ्रष्ट हृदय से पीड़ित होता है, इतना बुरा कि वह इसे पूरी तरह से समझ नहीं पाता (यिर्म. 17:9-10)। इन गदहों में से सबसे बुद्धिमान गदहे ने सूर्य, फिरौन, कुलदेवता के प्रतीकों और जन्तुओ की पूजा करना सिखाया (यशा 44:9-20; रोमि. 1:20-23)। परन्तु आज आप नए-नए प्रकार के पतन देख सकते हैं -वे अपनी ही तथा अपनी कमज़ोरियों की उपासना करते हैं! वे अपने सभी साथियों को मरते हुए देखते हैं, पर फिर भी उसी अज्ञानी गन्दगी को उगलते रहते हैं (भजन 49:10-13)।

यहां तक कि प्राकृतिक बुद्धि भी यहोवा ही से आती है। परमेश्वर ने बसलेल को निवास-स्थान का जटिल तम्बू बनाने के लिए महान् कौशल दिया (निर्ग 31:1-11)। खेती-बाड़ी से सम्बन्धित बुद्धि कहां से आई, क्या परीक्षण और ग़लतियों से (यशा. 28:23-29)? बिल्कुल नहीं! आविष्कारक शिक्षित नहीं हैं; उन्हें उत्पन्न किया गया है (नीति. 8:12)। थॉमस एडिसन और अन्य लोगों को स्कूल से बहुत कम लाभ हुआ। परमेश्वर ने उन्हें आविष्कार करनेवाली प्रतिभा दी। और परमेश्वर ऐसे लोगों को किसी देश से दूर कर देता है जब वह ऐसा करने का चुनाव करता है (यशा. 3:1-5)।

आध्यात्मिक बुद्धि अपने मूल में और भी एकतरफा है। मनुष्य स्वाभाविक रूप से आत्मिक सत्य को नहीं समझ सकता, और न ही समझेगा (रोमि. 3:11; 8:7-8; 1 कुरि. 2:14)। अवश्य है कि परमेश्वर नए जन्म के द्वारा सामर्थ्यशाली रूप से उसके आत्मा को फिर से नया बनाए (1 कुरि. 2:15; इफि. 1:19; 2:1-2)। और जब तक कि परमेश्वर ऐसा नहीं करता, तब तक मनुष्य सही या स्थायी मूल्य की किसी भी बात को समझने में असमर्थ है (यूह. 3:3; 8:43, 47)।

बुद्धि प्राप्त करने के लिए आप क्या कर सकते हैं? अपने आप को नम्र करें और अपनी प्रचण्ड अज्ञानता और लाचारी को स्वीकार करें। परमेश्वर से ज्ञान प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को मूर्ख बनने की आवश्यकता है (1 कुरि. 3:18-20)। अवश्य है कि आप परमप्रधान परमेश्वर के सामने दीन और नम्र होकर थरथराएं (यशा. 57:15; 66:2)।

तब, आपको इसके लिए याचना करनी है। यहोवा ने सुलैमान को उसके सरल और नेक निवेदन के कारण बड़ी बुद्धि और विवके से भरा मन दिया (1 राजा 3:5-15; 4:29-34)। और जो कोई उससे बिनती करता है उसके सामने वह उन्हीं उदार शर्तों को रखता है (याक. 1:5)। यह सोचने की अपेक्षा कि काश आप सुलैमान होते, प्रार्थना करें (याक. 4:2)!

तब, आपको इसके लिए बाइबल पढ़नी होगी। यहोवा ने बाइबल में अपनी बुद्धि प्रकट की है। यदि कोई व्यक्ति पवित्रशास्त्र पर भरोसा करने के लिए अपने स्वयं के विचारों और अपनी अज्ञानी जाति के विचारों को ठुकरा देगा, तो वह तेजी से ज्ञान प्राप्त करेगा (भजन 119:98-100, 130; यशा. 8:20; 2 तीमु. 3:16-17; 2 पत. 1:19)।

तब आपको इसकी सुनना चाहिए। यहोवा अपनी बुद्धि देकर राजदूतों को नियुक्त करता है, तैयार करता है, और उन्हें भेजता है (नहे. 8:8; सभो. 12:9-11; यिर्म. 3:15; मला. 2:7; प्रेरितों. 8:30-31; 26:16-18)। परन्तु वे केवल उन्हीं को लाभान्वित करेंगे जो ग्रहणशील मन से उनकी सुनते हैं (प्रेरितों. 17:11; 1 थिस्स. 5:20-21)।

तब आपको नीतिवचन और सभोपदेशक को पढ़ने और उन पर चिन्तन करने की आवश्यकता है। परमेश्वर ने अन्य पुस्तकों की तुलना में व्यावहारिक ज्ञान पर अधिक ज़ोर देते हुए बाइबल में दो पुस्तकें दीं। जो लोग सचमुच बुद्धि की खोज में हैं वे इन दो पुस्तकों का अध्ययन करेंगे ताकि परमेश्वर के अनुग्रहपूर्ण वरदान से बुद्धि प्राप्त कर सकें (नीति. 1:1-7)।

पाठक, आप बुद्धि की खोज कहां पर करते आ रहे हैं? ज्ञान और समझ के लिए आप किस पर भरोसा करते आ रहे हैं? सुलैमान ने लिखा, “तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।” (नीति. 3:5-6)। अपने अभिमतों और सोच पर भरोसा करना मूर्खता है।

बुद्धि के लिए जंगली गदहे के बच्चे के पास क्यों जाएं? यीशु मसीह के पास जाओ, क्योंकि बुद्धि और ज्ञान के सभी भण्डार उसी में छिपे हैं (कुलु. 2:3)। आज अपने आप को नम्र करें और अपनी बड़ी आवश्यकता को उसके सामने स्वीकार करें। बुद्धि मांगे; उसके लिए पढ़ें; इसके लिए सुनें; और इस नीतिवचन पर चिन्तन करें। वह विश्व में बुद्धि, ज्ञान और समझ का एकमात्र महान् स्वामी है, और वह आपको पवित्र आत्मा की सामर्थ्य द्वारा ईमानदारी से इसकी खोज करने के लिए बहुत कुछ देगा।

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