नीतिवचन 2:5
तब तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान पाएगा।
यहाँ दो अद्भुत आशीषें हैं – यहोवा का भय, और परमेश्वर का ज्ञान। ये दोनों आशीषें केवल महान पुरुषों और महान स्त्रियों को दी जाती हैं। क्या आप उनका महत्व समझते हैं? यदि आप इनके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं, तो वे आपको हासिल होगी। क्या आप वह करने को तैयार हैं जो इनकी प्राप्ति के लिए आवश्यक है?
यहोवा के भय को समझना सम्भव है। परमेश्वर का ज्ञान पाना सम्भव है। ये दोनों महान आशीषें पाई जा सकती हैं। परन्तु उचित दृष्टिकोण रखकर निकट आए बिना दोनों ही आशीषें सम्भव नहीं है। कोई सांसारिक मूल्य या मानवीय साधन उन्हें आपके लिए हासिल नहीं कर पाएंगे। ये आशीषें केवल परमेश्वर ही आपको दे सकता है, और वह केवल उन्हें ही देगा जो उचित रीति से उनकी खोज करते हैं।
जो मनुष्य यहोवा के भय को समझता है और परमेश्वर का ज्ञान पा लेता है, वही सचमुच धन्य है (नीति 8:11; भजन 112:1-3; 128:1-6)। इन दो अद्भुत आशीषों को अधिकांश लोगों से छुपाया जाता है, और बाकी लोग उन्हें प्राप्त करने के साधनों का उपयोग करने में विफल रहते हैं। यहां दो चीजें हैं जिन्हें खरीदने आपको अपना सब कुछ बेचना आवश्यक है, कि आप उस खेत को खरीद सकें जहां वे पाई जाती हैं (मत्ती 13:44-46)।
यह नीतिवचन बुद्धि को प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों की एक छोटी सूची का समापन है (नीति 2:1-5)। इन शर्तों में से किसी एक या उस से अधिक शर्तों को पूरा करने में विफलता के कारण मनुष्य प्रतिफल और धन पाने से वंचित रह जाता है। बड़ी बड़ी हस्तियों ने दिव्य समझ और ज्ञान को पाना चाहा, किन्तु कुछ ही लोगों ने इन्हें पाया। यदि आप नीचे वर्णित छह सरल शर्तों को पूरा करते हैं, तो इन आशीषों को पा लेंगे।
पहली शर्त यह है : “यदि तू मेरे वचनों को ग्रहण करेगा” (नीति 2:1)। सीखने के लिए एक सिखानेलायक भावना आवश्यक है। सब प्रकार की शिक्षा के लिए निर्देशों की आवश्यकता होती है, फिर भी ज्यादातर लोगों को दूसरों से शिक्षा की बातें सुनने में कठिनाई होती है। उन का मानना है कि उन के तर्क-वितर्क दूसरों से बेहतर हैं। वे सुनना नहीं, पर पढ़ाना चाहते हैं। वे वाद-विवाद करते हैं, सवाल करते हैं, बहस करते हैं, और अपना विरोध जताते हैं। केवल थोड़े ही ऐसे कुलीन मनुष्य हैं जो शिक्षा को सुनकर उसे ग्रहण करते हैं। कुरनेलियुस और बिरीया के निवासी इसका अच्छा उदहारण हैं (प्रेरितों के काम 10:33; 17:11)। जिस मनुष्य में यह सद्गुण हो वह उपदेश सुनने से प्रीति रखेगा – और जितना अधिक परिश्रम उतना ही अच्छा होगा (नेह 8:1-12; 1 थिस्स 5:20; 2 तीमु: 4:3-4)।
दूसरी शर्त है : “मेरी आज्ञाओं को अपने पास छिपाए रखेगा” (नीति 2:1)। एक बार जब आपको कुछ सिखाया जाता है, तो आपको उसे अपने चित्त में रखना है। कई लोग सत्य का उपदेश सुन चुके होते हैं, परन्तु वह प्रकाशन उनके खाली दिमाग के ऊपर से चला जाता है। शीघ्र ही लोप हो जाता है। आप पर्याप्त रूप से परमेश्वर के वचन पर चिंतन करके उसे अपनी स्मृति में या चित्त में छिपाए रखते हैं (भजन 119:11)। जो अच्छी बातें आप सुनते हैं, उन्हें आप मिटने नहीं दे सकते (इब्रानियों 2:1-3), अन्यथा आप उनके लाभ से वंचित रह जाएंगे (1 कुरिं 15:2)। इब्रानी विश्वासियों को फिर से सुसमाचार की प्रारंभिक शिक्षा को सुनने की आवश्यकता थी, इस कारण पौलुस ने उन्हें फटकार लगाई (इब्रानियों 5:12-14)।
तीसरी शर्त है : “बुद्धि की ओर अपना कान लगाए” (नीति 2:2)। अधीनता में आकर सुने, अर्थात्, सुधार को दीनता से ग्रहण करें। शिक्षा और ज्ञान की प्राप्ति के लिए आपको अपनी ग़लती को मानना होगा। अपने आपको विनम्र करें; दीन बने; आपके जीवन में जो जो दोष हैं उन्हें गम्भीरता से पहचानें। दूसरों में नहीं, पर अपने आप में सुधार करें। बुद्धिमानों के सुधार और ताड़ना पर अपना हृदय और कान लगाएं। केवल ठट्ठा करनेवाले ही जो विनाश की ओर बढ़ रहे हैं, सुधार से बैर रखते हैं (नीति 9:8; 13:13; 15:31-32; सभोपदेशक 7:5)।
चौथी शर्त है : “समझ की ओर अपना मन लगाए” (नीति 2:2)। बुद्धि जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है, और इसके लिए शिद्दत की आवश्यकता है। आपका हृदय स्नेह का स्रोत है, और समझ प्राप्त करने के लिए आपको गम्भीर और जोशीले होना आवश्यक हैं। बुद्धि के प्रति लापरवाह रवैया काम नहीं आएगा। आप उत्तीर्ण होने की उम्मीद नहीं कर सकते यदि आप इस कक्षा में सो रहे हैं। बुद्धि से प्रीति रखना आवश्यक है (नीति 8:17, 21; 18:1; सभो 1:13; दानि 10:12; 2 थिस्स 2:10-12)।
पाँचवीं शर्त है : “यदि तू ज्ञान के लिए पुकारेगा, और समझ के लिए अपनी पुकार को ऊँचा करेगा” (नीति 2:3)। बुद्धि परमेश्वर का वरदान है, और वह उन्हें उदारता से देता है जो इसे मांगते हैं (याकूब 1:5)। परन्तु कुछ ही लोग हैं जो वास्तव में इसे रो-रोकर मांगते हैं। सुलैमान ने एक सपना देखा जिस में उसे उसकी मनमर्जी की वस्तु देने की प्रतिज्ञा दी गई थी, वह कुछ और नहीं बल्कि आप के लिए बुद्धि के वरदान की प्रतिज्ञा थी। यहाँ तक कि परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने के लिए भी, जो न तो विशुद्ध रूप से विज्ञान है और न ही कला, परमेश्वर का जन यहोवा पर निर्भर रहता है कि वही उसमें छिपी अद्भुत बातें देखने के लिए उसकी आखों को खोल दे (भजन 119:18; इफ 1:17)।
छठी शर्त है : “यदि तू चान्दी की नाईं उसे खोजेगा, और छिपे हुए धन की नाईं उसे ढूंढेगा” (नीति 2:4)। परमेश्वर आलसी लोगों से बैर रखता है, जो चीटियों की सी बुद्धि या जोश तक नहीं दिखाते। वह आलसी मनुष्य को कुछ नहीं देगा। वह आज्ञा देता है कि आलसी लोगों को भूखा ही मरने दिया जाए (नीति 20:4; 2 थेस्स 3:10)। अध्ययन श्रमसाध्य कार्य है (सभो 12:12; 2 तीमुथियुस 2:15)। परन्तु उस से प्राप्त होने वाले प्रतिफल के कारण परिश्रम करना योग्य है! वचन को पढ़ना, उसकी समीक्षा करना, उस पर मनन करना, उसे याद करना, और प्रार्थना करना कठिन काम है, परन्तु कौन सा धन है जो कभी दरवाजे पर पड़ा पाया गया हो?
यहाँ आपके लिए यहोवा के भय को समझने और परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिए छह सरल कदम दिए गए हैं। बुद्धि की सुनो, उसकी समीक्षा करो, उसे समर्पित हो जाओ, उसकी लालसा करो, इसकी प्राप्ति के लिए प्रार्थना करो, और इसे ढूंढ़ों। आप इसे पाएंगे और प्राप्त करेंगे। यदि आप इनमें से किसी भी एक या एक से अधिक शर्तों की उपेक्षा करेंगे, तो आप अपने प्रतिफल से वंचित रह जाएंगे। आपके जीवन में क्या है जो आपको बुद्धि से दूर रख रहा है? आपके मन में क्या है जो आपको इससे दूर रखता है?
क्या आप इतने घमण्डी हैं कि सुन नहीं सकते? इतने आलसी हैं कि इसकी समीक्षा नहीं कर सकते? इतने हठीले हैं कि झुक नहीं सकते? इतने सांसारिक मन के हैं कि सरगर्मी से इसकी लालसा नहीं कर सकते? इतने व्यस्त हैं कि इसे पाने के लिए प्रार्थना नहीं कर सकते? सुख-विलास से इतने भटक गए हैं कि इसे खोज नहीं सकते? तो फिर आप मुर्ख व्यक्ति के रूप में ही मर जाएंगे! बुद्धि को ठट्ठा में नहीं उड़ाया जाएगा; आप पर विपत्तियां आ रही हैं; स्वर्ग से कोई दया नहीं होगी (नीति 1:20-31)। परमेश्वर आप से वह सब भी ले लेगा जो आप को लगता है कि आप के पास है (लूका 8:18)।
हमारा धन्य प्रभु यीशु मसीह, जब वह एक बालक ही था, इन्हीं कदमों पर चला (लूका 2:42-51)। और इन्हीं के द्वारा वह परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टी में बुद्धि और अनुग्रह में बढ़ता गया (लूका 2:52)। यदि आप उसके उदाहरण का अनुसरण करते हैं और उसके विषय में सीखते हैं, तो आप बुद्धि तथा ज्ञान के छिपे हुए धन को पाएंगे और विश्व के बड़े बड़े रहस्यों को जान लेंगे (कुलु 2:2-3)। आप इस बड़े धन की परिश्रम से खोज करने अपने आप को समर्पित करे, ऐसे साहस का वरदान परमेश्वर आपको दे ऐसी मैं प्रार्थना करता हूँ।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।