नीतिवचन 2:4

और उसको चाँदी के समान ढूँढ़े, और गुप्त धन के समान उसकी खोज में लगा रहे;

क्या बुद्धि, ज्ञान और समझ आपके लिए चाँदी या छिपे हुए खज़ाने के समान मूल्यवान हैं? लोग चाँदी और छिपे हुए खज़ाने को बड़े उत्साही मन से और बड़ी क़ीमत चुकाकर और प्रयास सहित खोजते हैं, और सुलैमान ने चेतावनी दी कि केवल ऐसी इच्छा और कार्य से ही परमेश्वर की बुद्धि प्राप्त होगी। जब तक आप में ऐसा जोश और जज़्बा नहीं होगा, आप सच्चे ज्ञान और समझ को पा न सकेंगे।

क्या आपने नोवा स्कोटिया के ओक द्वीप के रहस्यमय धन की खान का नाम सुना है? अगर आप इस पर मौजूद जानकारी पढेंगे, तो आप छिपे हुए खजाने की विशेषता को जान लेंगे । इस खान के द्वार पर ही, जिसे बड़ी चतुराई से बनाया गया होगा, अनुमानित खजाने को खोजने के लिए अब तक कम से कम छह लोग मारे जा चुके हैं, लाखों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं, और भारी प्रयास किए जाते आ रहे हैं, और इस के बावजूद पिछले 210 वर्षों में अनगिनत निराशाएं ही हात आई हैं।

बुद्धि अस्तित्व में है, और आपको इसे ढूंढ़कर प्राप्त करना चाहिए, क्योंकि यह सब धन से अधिक मूल्यवान है (नीति 4:7; 16:16; भजन 19:10; 119:14, 72, 127)। आप जीवन की अन्य बातों का त्याग कर के बुद्धि को खरीदते हैं, ताकि आप समय का सदुपयोग करके परमेश्वर के वचन का अध्ययन करने कठिन परिश्रम कर सकें; जब यह संसार बुद्धि का पीछा करने के आपके संकल्प से आपके मन को विचलित करने आप के सामने प्रलोभनों को रखता है, तब आप उन प्रलोभनों को ठुकराकर इस धन को बेचने से बचते हैं (नीति 23:23; 18:1)।

यीशु मसीह ने सिखाया कि परमेश्वर का राज्य जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है (मत्ती 6:33), और उसने इसे चित्रित करने के लिए ऐसे मनुष्यों का दृष्टांत दिया जिसमें वे खेत खरीदने के लिए या एक मूल्यवान मोती खरीदने के लिए अपना सब कुछ बेच देते हैं (मत्ती 13:44-46)। इस खज़ाने को पाने के लिए आपने क्या बेचा या त्याग दिया है? या कही ऐसा तो नहीं कि आपका सब धन इसी पृथ्वी पर है? यदि आपने इसका मूल्य जानकार इसकी कीमत नहीं चुकाई, तो आप यीशु मसीह के सच्चे शिष्य नहीं हैं।

बुद्धि आपकी गोद में नहीं आ पड़ेगी, क्योंकि यदि ऐसा होता तो ग़लत लोग उसे पा लेते। ज्ञान और सत्य आपका अधिकार नहीं है, क्योंकि सभी मनुष्यों ने आदम के द्वारा अदन में झूठ को चुना। बुद्धि उन लोगों के लिए एक प्रतिफल है जो इसे माँगते हैं और इसे पाने के लिए परिश्रम करते हैं। धर्मी और जलन रखनेवाला परमेश्वर इसे ऐसे लोगों को न देगा जो इसे पाने के लिए अस्थिर, आलस्यपूर्ण, और मामूली प्रयास करते हैं, बल्कि जो सरगर्मी से उसे ढूंढते हैं उन्हें वह प्रतिफल देगा (यिर्म 29:13)।

मसीही सेवकों पर विचार करें। उन्हें परिश्रम करने वालों के समान बाइबल का अध्ययन करना चाहिए (2 तीमुथियुस 2:15); उन्हें बाइबल पढ़ने, उपदेश देने और खरी धर्मशिक्षा के लिए समर्पित रहना चाहिए (1 तीमु 4:13-15); और उन्हें सांसारिक दायित्वों में उलझे बिना सैनिकों के रूप में कठोर परिश्रम को सहते हुए ऐसा करना चाहिए (2 तीमु 2:3-4)। यदि कोई सेवक इन में से किसी भी क्षेत्र में समझौता करता है, तो वह और उसके सुनने वाले सबकुछ खो देंगे (1 तीमु 4:16)।

मसीहियों पर विचार करें। उन्हें अवश्य ही बुद्धि का उपयोग करना चाहिए अन्यथा वे इसे खो देंगे, जैसा कि पौलुस ने इब्रानियों को चेतावनी दी (इब्रानियों 5:12-14)। यदि वे उपदेश को सुनने पर अपना मन नहीं लगाएंगे, तो वे सब कुछ खो देंगे, यहाँ तक कि उस ज्ञान को भी खो देंगे जो उन्हें लगता है कि उनके पास है (लूका 8:18)। बिरिया के यहूदी कुलीन थे इसके पीछे एक स्पष्ट कारण था (प्रेरितों के काम 17:11), और अवश्य है कि आप भी उनकी अच्छी बातों को पकड़े रहे (1 थिस्स 5:21)।

प्रिय मित्र, क्या आप परमेश्वर का वचन पढ़ते हैं? क्या आप इसे सम्पूर्ण सरगर्मी और मेहनत से पढ़ते हैं? क्या आप परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि जब आप उसका वचन पढ़ते हैं तब वह उसमें छिपी रहस्यमय अद्भुत गुप्त बातें आप पर प्रकट करे (भजन 119:18)? क्या आप इसका अध्ययन करते हैं? क्या आप उससे शिक्षा पाने के लिए तरसते हैं? क्या आप दिन-रात इस पर मनन करते हैं? क्या आप दूसरों के साथ इस पर चर्चा करते हैं? क्या आप इसके लिए सुख-विलासों का त्याग करते हैं? क्या आप बाइबल अध्ययन में सहायक सामग्री, बाइबल टीकाएं और अध्ययन के तरीके सिखानेवाले अन्य साहित्य खरीदते हैं?

ज्यादातर लोग प्रयास भी नहीं करते हैं, इसलिए वे मूर्खों के समान जीते हैं और उसी अवस्था में मरते हैं। वे सांसारिक खिलौनों और सांसारिक सुखों की चमक-धमक से मोहित हो जाते हैं। एज्रा जैसे कुछ ही तत्पर शास्त्री हैं (एज्रा 7:6); कुछ ही फलदायी वृक्ष हैं (भजन 1:1-3)। केवल कुछ ही परमेश्वर के वचनों को मानते हैं, उन पर मनन करते हैं, और एलीहू और दाऊद की बुद्धि प्राप्त करने के लिए उनका पालन करते हैं (भजन 119:98-100)।

यीशु मसीह ने परमेश्वर से बुद्धि पाने के लिए सारी रात पहाड़ पर बिताई (लूका 6:12)। और जब उसके चेले सो रहे थे, तब उसने आंसू बहा-बहाकर और लहू के रूप में पसीना बहा-बहाकर परमेश्वर की इच्छा के धन की खोज की (लूका 22:39-46)। क्या उसकी प्रार्थना सुनी गई? सचमुच उसकी प्रार्थना सुनी गई! वह सदा के लिए सिय्योन पहाड़ पर राजा के रूप में विराजमान है, और संपूर्ण बुद्धि, धार्मिकता और सत्य के साथ समस्त विश्व पर शासन करता है। आज ही परमेश्वर की बहुमूल्य बुद्धि की खोज करें!

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