नीतिवचन 2:3

हां, यदि तू ज्ञान के लिए पुकारेगा, और समझ के लिए अपनी पुकार को उंचा करेगा; (केजेवी)

क्या आप बुद्धि को पाने के लिए प्रार्थना करते हैं? बुद्धि सही-सही परख करने की शक्ति है, ताकि आप जान सके कि किसी भी परिस्थिति में क्या करना है। सच्चे और जीवित परमेश्वर के पास सारी बुद्धि है, और जो कोई उसे से बुद्धि मांगता है, उन्हें वह देता है। परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में महान बनना और सफल होना इतना आसान कभी नहीं था। आपको बुद्धि मांगने से कौन-सी बात रोक रही है?

आपने आखरी बार बुद्धि के लिए कब प्रार्थना की थी? यदि आप नहीं मांगोगे तो वह न देगा। आप अज्ञानता और मूर्खता से भरा जीवन जीएंगे, और ऐसी जीवनशैली के दर्दनाक नतीजों की कटनी भी करेंगे, और यह सब केवल इसलिए, क्योंकि आप इतने आलसी या इतने घमण्डी थे कि आपने इसे कभी मांगा ही नहीं। आज ही अपनी इस दशा से मुक्ति पाए। आज ही बुद्धि के लिए याचना करें।

क्या आप इसके लिए पूरी लगन से प्रार्थना करते हैं? अध्ययन आप को एक ज्ञानी विद्वान बना सकता है, लेकिन केवल प्रार्थना ही आप को एक संत बनाती है। ज्यादा पढाई-लिखाई से भले ही ज्ञान बढ़ जाए, लेकिन बुद्धि केवल आत्मा के प्रकाशन आती है। यदि आपको बुद्धि की आवश्यकता है, तो अपने घुटनों पर आ कर लालायित होकर इसे मांगे; और अपने घुटनों पर आकर सुलैमान के परमेश्वर से इस की प्राप्ति के लिए याचना करें। उसने सुलैमान को सब मनुष्यों से बढ़कर आशीष दी, और वह आपको भी आप के मित्रों से बढ़कर आशीष देने में सामर्थी है।

उपदेशक, सुलैमान राजा अपने पुत्र को ऐसे कई कर्तव्यों पर उपदेश दे रहा है जिन्हें बुद्धि की प्राप्ति के लिए सुनना और करना आवश्यक (नीति 2:1-9)। इस वचन से उस ने पूरी सरगर्मी से प्रार्थना करना सिखा, और आपको भी यह वचन यही सिखा रहा है। यह वचन आपको नहीं सिखा रहा कि आप बुद्धि के लिए केवल अनुरोध करें; नहीं; बल्कि यह कि आपको इस की प्राप्ति के लिए एक निरंकुश आक्रोश से भरी, आवेशपूर्ण, और सरगर्म पुकार के साथ परमेश्वर के सामने गिडगिडाना है। इस के लिए चिल्ला-चिल्लाकर प्रार्थना करे! इस के लिए अपनी आवाज़ उठाए! तीव्र इच्छा को प्रज्वलित करें!

परमेश्वर ने कुछ क्षेत्रों में केवल मनुष्यों के अनुरोध के द्वारा ही कार्य करना चुना, इसलिए याकूब ने लिखा, “तुम्हें इसलिए नहीं मिलता कि तुम मांगते नहीं” (याकूब 4:2)। जब तक आप कुछ बातों को मांगते नहीं या उनके लिए गिडगिडाते नहीं, तो परमेश्वर आपको उन के बिना ही रहने देगा। हमारे पिता के रूप में, उसने हमारे लिए यह आसान बनाया है कि हम उसे मांगे (लूका 11:9-13)। कही आप में बुद्धि की कमी इसलिए तो नहीं क्योंकि आपने शायद ही कभी उसके लिए प्रार्थना की हो?

बुद्धि एक ऐसी बात है जिसे पाने के लिए आपको प्रार्थना करनी चाहिए (याकूब 1:5)। यदि आपको अधिकाई से बुद्धि चाहिए, तो परमेश्वर आपकी विनती को बड़ी उदारता से सुनेगा और उत्तर भी देगा। कितनी मूल्यवान प्रतिज्ञा है, विशेष रूप से नीतिवचन की इस पुस्तक में सिखाई गई बुद्धि के महत्व के प्रकाश में। वह इसे उदारता से देगा और वह आपकी प्रबल विनतियों के लिए आपको दोष भी नहीं लगाएगा। आप परमेश्वर की उपस्थिति में खुलकर बुद्धि की लालसा कर सकते हैं।

परन्तु आपको विश्वास में होकर मांगना है, आपको परमेश्वर की देने की क्षमता और आपकी सहायता करने की उसकी इच्छा पर पूरा भरोसा रखना है, अन्यथा आपको उस से कुछ भी नहीं मिलेंगा (याकूब 1:6-8)। जैसे इब्राहीम ने अपनी वृद्धावस्था में सारा से पुत्र होने की सभी कठिनाईयों को मात कर दिया, आप भी इसके विपरीत उठनेवाले किसी भी विचार का बिलकुल वैसा ही खंडन करे और उसे भूल जाएं। बिना विश्वास के परमेश्वर को प्रसन्न करना असंभव है, वही बुद्धि का महान दाता है (इब्रानियों 11:6)।

परमेश्वर ने सुलैमान से कहां कि वह उसे कुछ भी मांग सकता है, और परमेश्वर ने बुद्धि के लिए उसकी लालसा को बड़ी आशीष दी। उस ने उसे वे चीज़ें भी दीं जो उस ने मांगी न थीं (2 इति 1:7-12)। परन्तु आज आपके सामने स्वर्ग के उसी वरदान को रखा जा रहा है! आप भी सुलैमान के समान विनती क्यों नहीं करते (मत्ती 7:7-11; 11:24; 18:19; यूहन्ना 14:13-14)? दानिय्येल ने भी बुद्धि के लिए प्रार्थना की और इसे भरपूरी से पाया (दानिय्येल 2:16-19; 5:11; 9:20-23; 10:10-21)।

साहसी बने! और भी अधिक बुद्धि पाने के लिए प्रार्थना करें। जिसने उदारता से बुद्धि को आपके सामने रखा है, उस परमेश्वर को आपकी प्रार्थना से उसे कोई ठेंस नहीं पहुचेगी। एलिय्याह एक महान भविष्यवक्ता था। यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, जो एक स्त्री से जन्मा सबसे महान मनुष्य था, वह परमेश्वर की आत्मा और सामर्थ में आया (लूका 1:17)। एलिय्याह को स्वर्ग में उठा लिए जाने से पहले, उसने एलीशा से कोई भी वरदान मांगने के लिए कहा। उसने क्या मांगा? उसने विनती की कि उसे एलिय्याह के आत्मा का दो गुना भाग दिया जाए! और उसने पाया भी (2 राजा 2:9-15)!

परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में महान बनने का यह सबसे सरल तरीका है – परमेश्वर से बुद्धि मांगे। स्मरण रहे, बुद्धि ही मनुष्य का मुकुट है और वही उसका सम्मान बढ़ाती है (नीति 4:5-9)। इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसकी तुलना बुद्धि से की जा सके (नीति 3:13-18; 8:11; 16:16)। यह आप को दूसरों से एक अलग पहचान देगी, और परमेश्वर तथा मनुष्य की ओर से कई मार्गों से समृद्धि की आशीष ले आएगी।

कुलीन मनुष्य के पास बुद्धि की ख़ोज करने की पवित्र वजह हैं। भजनकार की प्रार्थना पर विचार करें, उस ने परमेश्वर से प्रार्थना की कि वह उसे परमेश्वर के वचन और सत्य की समझ दे (भजन 119:11, 18, 26-27, 34, 73, 125)। पौलुस ने पवित्र जनों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की कि वह उन्हें बुद्धि का आत्मा और ज्ञान का प्रकाश दे (इफ 1:15-20; कुल 1:9-11), और पवित्र आत्मा एक ऐसा वरदान है जिसे पाने के लिए भी आपको प्रार्थना करनी आवश्यक है (लूका 11:13)।

यदि आप बुद्धि को उचित मूल्य न दे, और परमेश्वर से न मांगे, तो आपको उसकी उपस्थिति में थरथराना चाहिए; क्योंकि वह आप की आखों को अंधा कर के आप को दण्ड देगा, जैसा कि उसने कई मनुष्यों के साथ किया भी है (मत्ती 11:25-27; 13:10-17; 2 थिस्स 2: 9-12; यूहन्ना 9:39-41)। यह मान लेने में कोई शर्म नहीं, कि आप बुद्धि में अभी बच्चे ही हैं, जैसा कि सुलैमान ने माना और परमेश्वर ने वर्णन किया, क्योंकि परमेश्वर ऐसे दीन आत्मावाले व्यक्ति को बहुतायत से आशीष देगा।

यीशु परमेश्वर और मनुष्यों के सामने बुद्धि और डील-डौल में बढ़ता गया (लूका 2:52; मत्ती 13:54)। इस में कोई संदेह नहीं है कि उस ने इसके लिए प्रार्थना की थी, क्योंकि आप के मानव-स्वभाव के समान ही उस के मानव-स्वभाव को परमेश्वर से बुद्धि के आशीष की आवश्यकता थी (लूका 6:12; 9:28; 22:39-45)। परन्तु उस की प्रार्थनाएँ आपकी प्रार्थनाओं से अधिक हो गईं, और इस कारण परमेश्वर की आशीष भी बाकी सब मनुष्यों से अधिक हो गई, इस कारण, यीशु सच सच कह सका, “यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है” (मत्ती 12:42)।

जब आप परमेश्वर से अपने लिए बुद्धि मांगते हैं, तब अन्य सच्चे विश्वासियों के लिए भी जो उसकी लालसा करते हैं, और जिन्हें इसकी ज़रूरत है, मांगना न भूले। प्रभु यीशु मसीह ने प्रेरितों के लिए ऐसी ही प्रार्थना की (यूहन्ना 14:15-17)। और पौलुस ने कलीसियाओं के लिए बार-बार बुद्धि मांगी (इफि 1:15-19; कुल 1:9-11)। यदि आप अपने परिवार और मित्रों के लिए प्रार्थना करते हैं, और वे आपके लिए, तो क्या ही उन्नति होगी।

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