नीतिवचन 2:21
क्योंकि खरे लोग देश में बसे रहेंगे, और सिद्ध उस में बने रहेंगे। (केजेवी)
भले लोग ही सबसे अच्छा जीवन जीते हैं। बुद्धि ही आपके भविष्य के लिए एक उपयुक्त साधन है। सुरक्षा और साहस धर्मपरायण जीवन के प्रतिफल हैं। आज ही अपने जीवन का निर्माण चट्टान पर करें। भले लोगों की मृत्यु भी सबसे अच्छी होती हैं।
यह नीतिवचन एक लंबे अनुच्छेद का हिस्सा है (नीति 2:10-22)। जो व्यक्ति बुद्धि और ज्ञान पा लेता है (नीति 2:10) वह विवेक और समझ का धनि होगा (नीति 2:11)। यह बुनियाद उसे बुरे पुरुषों (नीति 2:12-15) और बुरी स्त्रियों (नीति 2:16-19) से सुरक्षित रखेगी, और यह उसे भले मनुष्यों की जीवन शैली की ओर ले जाएगी (नीति 2:20), जिन्हें पुरस्कृत किया जाता है, परन्तु दुष्टों को दण्ड दिया जाता है (नीति 2:21-22)।
बुद्धि के प्रतिफल हैं (यशा 58:1-11)। परमेश्वर भले लोगों को दीर्घायु, शांति और सुरक्षा देने की प्रतिज्ञा करता है। वे स्थापित होंगे और आनंद से रहेंगे। अन्य लोगों का नामोनिशान मिट जाएगा, पर वे लम्बे समय तक स्थिर बने रहेंगे। दुष्टों को जिस तरीके से दण्ड दिया जाता है, धर्मियों के जीवन के नतीजे उससे ठीक भिन्न हैं (नीति 2:22)। और सनातनकाल तो स्वर्ग और नर्क का भेद दिखाकर इस भेद को और भी बढ़ा देता है ।
इस नीतिवचन का संदर्भ बुरे मनुष्यों (नीति 2:10-15) और वेश्यावृत्ति करनेवाली स्त्रियों (नीति 2:16-19) के खतरे के विषय में चेतावनी देता है। सुलैमान ने अपने पुत्र को सिखाया ताकि उसे बुरी संगति से बचा सके, और धर्मियों के मार्ग पर चलने उसकी अगुवाई कर सके (नीति 2:20)। इस नीतिवचन में भले मनुष्यों को दिए जाने वाले प्रतिफल का वर्णन एक सुरक्षित भविष्य के रूप में किया गया है, परन्तु परमेश्वर दुष्टों के जीवनों का विनाश कर देगा।
यहोवा परमेश्वर ने अपने चुने हुए इस्राएली लोगों को मिस्र से छुड़ाया, और मिरास के रूप में उसने उन्हें कनान देश दिया, और उनके सामने आनेवाले उनके सब शत्रुओं का समूल विनाश किया (उत्पत्ति 15:18-21; व्यव 7:1-3)। किन्तु यह प्रतिज्ञात देश उन्हें उनकी आज्ञाकारिता की शर्त पर दिया गया था। यदि वे विद्रोह करें या पाप करें, तो वह उन से देश वापिस ले लेगा (लैव्य 26:1-46; व्यव. 28:1-68)। प्रत्येक इस्राएली इस नीतिवचन को बड़ी गहराई से और शक्तिशाली तरीके से समझता था।
दीर्घायु, शांति, समृद्धि और सुरक्षा ये सब धर्मियों पर परमेश्वर की आशीषें हैं। इन प्रतिफलों का उल्लेख सुलैमान ने नीतिवचन की पुस्तक में और साथ ही भजन संहिता में दाऊद ने बार बार किया है (नीति 1:33; 3:2, 13-18; 4:10; 9:11; 16:7; 28:2; भजन 37: 3, 9, 11, 22, 29)। खुशहाल दिनों का एक आनंद भरा जीवन परमेश्वर का आज्ञापालन करने से प्राप्त होता है, विशेषकर तब जब आप अपनी वाणी पर लगाम लगाते हैं, और दूसरों के साथ शराफत और इंसानियत का व्यवहार करते हैं (भजन 34:12-16; 1 पतरस 3:10-12)। धार्मिकता आशीषें ले आती है (यशा 3:10)!
परमेश्वर की पहली आज्ञा पर चिंतन करें जिसके साथ प्रतिज्ञा भी जुडी है। वह मांग करता है कि बच्चे अपने माता-पिता का आदर करें, जो कि मात्र आज्ञाकारिता से कहीं अधिक व्यापक है। इसका अर्थ है अपने माता-पिता को ऊंचा स्थान देना और हमेशा उनके साथ विशेष सम्मान का व्यवहार करना, यहाँ तक कि अपने विचारों, वाणी, चेहरे के हावभावों और उनका समर्थन करने के द्वारा भी (नीति 20:20; 30:17; व्यव 27:16; 1 तीमु: 5:4, 8)। परन्तु अब एक नज़र उस प्रतिफल पर भी डाले जो उनका सम्मान करने से मिलता है – “कि तेरा भला हो, और तू इस पृथ्वी पर बहुत दिनों तक जीवित रहे” (इफि 6:2-3)! इस पर आज ही विश्वास करे!
“जादुई शक्ति” एक मूर्खतापूर्ण काल्पनिक चरित्र की ओर संकेत करता है। किन्तु अय्यूब की गाथा परमेश्वर-प्रेरित इतिहास है! परमेश्वर ने अय्यूब के चारों ओर एक बाड़ा बांधा, ताकि वह जो करे और जो कुछ उस के पास था उस पर आशीष दे, क्योंकि वह एक धर्मी मनुष्य था जो परमेश्वर का भय मानता था (अय्यूब 1:1-5, 10)। और भले ही परमेश्वर ने बड़ी कठोरता से उस की परीक्षा ली, फिर भी अंत में उसने उसे पहले से कहीं बढ़कर आशीषें दीं – सचमुच, धर्मियों के लिए प्रतिफल रखा है (अय्यूब 42:10-17; याकूब 5:11)।
परन्तु सबसे बड़ा प्रतिफल तो भविष्य में है – अर्थात् स्वर्ग में परमेश्वर, प्रभु यीशु मसीह, चुने हुए स्वर्गदूतों और हमारे पहले जा चुके सभी धर्मियों के साथ अनंतकाल का जीवन (इब्रानियों 11:8-16)। प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवनकाल के दौरान दुष्टों का त्याग कर दिया, और जीवन के हर पहलू में परमेश्वर के सिद्ध पथ पर चला, और अब वह युगानुयुग के लिए परमेश्वर के सिंहासन पर विराजमान हैं। क्या आपने विश्व के प्रभु के रूप में उसका अंगीकार किया है, और क्या बपतिस्मा और भले कामों से अपने अंगीकार की पुष्टि की है?
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