नीतिवचन 2:13
जो खराई के पथ को छोड़ देते हैं, कि अन्धकार के मार्गों पर चले; (केजेवी)
क्या आप का जीवन सीधे मार्ग पर हैं? क्या आप उसी पर बने रहेंगे? कई लोग ऐसे हैं जिन्हें सही रास्ता नहीं मिल पाता, और जितने उसे पा लेते हैं उन में से अधिकतर उसे छोड़ देते हैं। जो खराई के पथ को छोड़ देते हैं, उन में से अधिकतर लोग आपको भी खराई के पथ से भटकाना चाहते हैं, ताकि अंधकार के मार्गों पर आपको अपना हमसफर बना ले। यह नीतिवचन दुष्ट मनुष्यों और स्त्रियों के, जो आपके सफल जीवन के लिए एक खतरा बने हुए हैं, एक लंबे वर्णन का हिस्सा है।
आपके मन में बुद्धि का निवास होना और आपके प्राण में ज्ञान का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि इन दुष्ट मनुष्यों और स्रियों से आप को बचाकर रखा जा सके। बुद्धि और ज्ञान के मूल्य को आर्थिक लाभ, सुखी वैवाहिक जीवन, या व्यावसायिक सफलता जैसी सकारात्मक आशिषों तक ही सीमित न करें, क्योंकि बुद्धि और ज्ञान आपको भ्रष्ट पुरुषों और स्त्रियों से बचाकर रखने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साधन हैं, क्योंकि वे जीवनशैली, तत्वज्ञान के द्वारा आपको नाश करने का इरादा रखते हैं।
धार्मिकता के मार्ग का त्याग करनेवाले लोग ज्यादा घातक होते हैं। देह-स्वभाव के मसीही आपके प्राण के लिए खतरा हैं। दुष्ट लोग अच्छी शिक्षा के बावजूद, धार्मिकता के मार्ग पर बने नहीं रहते। वे पाप के पीछे जाने के लिए जल्द ही उस शिक्षा से भटक जाते हैं (नीति 2:12-15)। आपको ऐसे दुष्ट मनुष्यों से बचाना ही बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समझ का उद्देश्य है (नीति 2:10-17)।
पवित्रशास्त्र के दोनों नियम ऐसे मनुष्य की जन्मजात मूर्खता का वर्णन करते हैं, जो उन प्राचीन मार्ग पर विश्वासयोग्य नहीं रहेंगे, और न रह सकते हैं, जिस पर चलने की शिक्षा उन्हें दी गई थी। पुराने नियम के कुछ उदाहरणों पर विचार करें (न्यायियों 2:1-23; 1 शमू. 8:8; भज 78:40-42; यिर्म 6:16; 1 कुरि 10:1-11)। नए नियम के भी कुछ उदाहरणों पर विचार करें (1 कुरिं 15:12; गल 1:6-9; 4:9; फिल 3:18-19; 2 तीमु 4:10)।
सुअरियों को कीचड़ में लोटना अच्छा लगता है। आप एक सुअरी को नहलाकर उसे साफ-सुथरे फूलों के बगीचे में भी रखे तौभी आप उसे सुधार नहीं सकते। वह जल्दी ही उस सुन्दर बगीचे को गन्दगी में बदल देगी, ताकि वह सुअरी ही बनी रहे! एक कुत्ता अपनी ही उल्टी को चाटता है फिर चाहे आप उसे कितने ही अच्छे आचरण की शिक्षा क्यों न दे। मूर्ख अधिक समय तक पाप से दूर नहीं रह सकते (नीति 26:11; 2 पतरस 2:20-22)। किन्तु आप मूर्खों से दूर रह सकते हैं!
परमेश्वर की बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समझ की शिक्षा पाना आप का कर्तव्य है, ताकि आप पथभ्रष्ट मनुष्यों और उनकी पापमय चालों से खुद को बचा सके (नीति 2:10-17)। प्रत्येक विश्वासी को परमेश्वर के वचन में मज़बूती से स्थापित होना आवश्यक है, ताकि संसार के सब तत्वज्ञान को तुच्छ जानकार उसका खंडन कर सके (भजन 119:128; रोम 16:17-18; 2 थिस्स 3:6; 1 तीमु 6:3-5)। परन्तु इसके लिए बुद्धि की शिक्षा पाना आवश्यक है (नीति 2:1-9; कुलु 1:23)!
परमेश्वर धर्मत्याग से घृणा रखता है! और जो धर्मत्याग करते हैं उन्हें वह कठोर दण्ड देता है (नीति 14:14)। जब परमेश्वर आपको सत्य का ज्ञान देकर समृद्ध करता है, जो कि एक बड़ा लाभ है, तब परमेश्वर चाहता है कि आप उसका उपयोग करे, अन्यथा उसे खो दे (लूक 8:18)। क्योंकि आपने सत्य को जान लिए है, इस कारण आपको और भी कड़ा दण्ड दिया जाएगा यदि आप उस सत्य के विरोध में खड़े होते हैं (लूक 12:47-48)। पौलुस ने सत्य से फिरने के विरोध में इब्रानी मसीहियों को कई बार चितौनी दी (इब्रानियों 2:1-3; 6:4-6; 10:26-31, 38-39; 12:25-29)!
हम अंतिम दिनों के संकटपूर समयों में हैं (2 तीमुथियुस 3:1-4:5)। पौलुस द्वारा तीमुथियुस को लिखे ये 22 वचन एक ऐसी मसीहत की भविष्यवाणी है जो डरपोक और विश्वासघाती होगी, सुखविलासिता की धुन में होगी, और जो धर्म का केवल एक कमज़ोर दिखावा करेगी। इस चितौनी में आज के “मसीहियों” का एक बड़ा हिस्सा आता है; क्योंकि वे अब खरी धर्मशिक्षा को नहीं सहेंगे। वे ऐसे शिक्षकों की चाहत रखते हैं जो उन्हें सत्य नहीं, पर दंत-कथाएं सुनाए!
दाऊद राजा दृढ़ था कि वह ऐसी दुष्टतापूर्ण मानसिकता के द्वारा अपने परमेश्वर से दूर नहीं जाएगा; यद्यपि उसने बतशेबा के साथ घिनौना पाप किया, फिर भी जब उसका पाप उजागर किया गया तब उसने बिना किसी विलम्ब के पश्चात्ताप किया (भजन 18:21)। जितना सम्भव हो, वह पापियों की संगति से बचा रहा, और धर्मियों से मित्रता रखी (भजन 101:3-8; 119:63)। उसके समान बनने के लिए अवश्य है कि, आप परमेश्वर के वचन को दृढ़ता से अपने सम्मुख रखे (भजन 18:22)।
कलीसिया के अस्तित्व का प्राथमिक उद्देश्य यह है कि विश्वासी जन पाप के धोखे के द्वारा जीवित परमेश्वर को त्याग देने से एक दुसरे की रखवाली करें (इब्रानियों 3:12-13; 10:23-25)। और साथ ही यह हर माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को इसके विरोध में शिक्षा दें (भजन 78:1-8)। प्रभु यीशु मसीह और उसके सुसमाचार की महिमा के लिए, अवश्य है कि आप सब भटके हुओं को फेर लाए या उनका खंडन करें (गल 6:1; याकूब 5:19-20)।
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