नीतिवचन 2:12
कि तुझे दुष्ट के मार्ग से, और उस मनुष्य से जो हठीली बातें कहता है, छुड़ाए;
बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समझ दुष्ट मनुष्यों को पहचानने और उनसे दूर रहने की मूल्यवान दक्षता प्रदान करते हैं। सत्य का मार्ग साफ साफ दिखाई देने से और मूर्खों की संगति के खतरे से वाकिब हो जाने से, एक बुद्धिमान मनुष्य उनकी विनाशकारी जीवनशैली और लुभावने अवसरों से बच जाएगा। ये दुष्ट मनुष्य अक्सर अपनी हठीली या उद्दंड जीभ से अपने आप को उजागर करते हैं।
यह नीतिवचन एक लंबे वाक्य के बीचोबीच है (नीति 2:10-17)। सुलैमान ने सबसे पहले बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समझ को पाने का वर्णन किया (नीति 2:10-11)। इन से आप बुरे मनुष्यों से दूर रहने पाएंगे (नीति 2:12), जिनका चरित्र और आचरण अधर्मी होता है (नीति 2:13-15)। फिर उसने आगे वेश्याओं से बचने के लाभों का वर्णन किया (नीति 2:16-17)।
मानव जाति दो वर्गों में विभाजित है। परमेश्वर के पुत्र और शैतान की संतान। एक वर्ग के लोगों में जीवन और ज्योति पाए हुए नए हृदय होते हैं; तो दूसरे वर्ग के लोगों के हृदय नरक की नाईं काले और अंधकारमय होते हैं। एक वर्ग में बुद्धिमान मनुष्य हैं, तो दुसरे वर्ग में मूर्ख मनुष्य हैं। भले मनुष्य, और अधर्मी मनुष्य। कुलीन मनुष्य, और नीच मनुष्य। चुने हुए मनुष्य, और विनाश के लिए ठहराए गए मनुष्य। नया जन्म पाए हुए मनुष्य, और दो बार मरे हुए मनुष्य। इन दोनों वर्गों के बीच एक रेखा खींची गई है। व्यक्तियों के बीच इस भेदभाव को समझना शुद्ध और उचित है।
दुष्ट मनुष्य अपने आप को अक्सर अपने हठीले मुहं से उजागर करता है। वह स्वयं ही अपनी बातों का खंडन करता है, शुद्ध बातों से बैर रखता है, अधिकार की आलोचना करता है, दूसरों को नीचा दिखाता है, अपनी ही सराहना करता है, स्वयं को ही सही समझता है, व्यर्थ की बातें करता है, परम्पराओं का मज़ाक उड़ाता है। उसे प्रसन्न करना कठिन है, वह तर्कहीन, अनियंत्रित, अवज्ञाकारी, बेईमान और दुष्ट होता है। वह घिनौना और भ्रष्ट होता है।
एक बुद्धिमान मनुष्य दुष्ट जन की परख करके उसे पहचान सकता है। वह उन पर आने वाले न्याय को जानता है, जो प्राकृतिक और आत्मिक दोनों ही हैं, और वह उनकी संगति से दूर रहता है (भजन 1:1-6)। वह उनके घमण्डपूर्ण शब्दों और षड्यंत्रों के द्वारा उनके दुष्ट चरित्र को देख सकता है। वह उनकी व्यर्थ योजनाओं पर हंसता है। वह उन्हें चिन्हित कर उन से बचता है (नीति 14:7; रोमि 16:17-18)। उसने अपने जीवन के लिए समझ का मार्ग चुन लिया है, इस कारण वह उनमें से कुछ का सामना करता है, क्योंकि वह शायद ही कभी ऐसे स्थानों पर होता है या शायद ही उनके जैसे कार्य करता है।
दाऊद की बहन सरूयाह से उत्पन्न हुए उसके तीन भांजों ने कई वर्षों तक बड़ी निष्ठा से उसकी सेवा की, किन्तु दूसरों के साथ जो बुरा बर्ताव वे कर रहे थे इस कारण उसने उनके कपटी मनों को भांप लिया। उसने अपने और उनके मध्य एक विवेकपूर्ण और शुद्ध विभेद को खींच लिया। उसने कहा, “सरूयाह के ये पुत्र मेरे लिए कठिन समस्या बन गए हैं। यहोवा बुराई करने वाले को उसकी बुराई के अनुरुप बदला दे” (2 शमूएल 3:39)। और अपनी मृत्युशय्या पर, उसने सुलैमान से कहा, कि वह योआब को, जो उन में सब से दुष्ट था, मार डाले।
जैसे दाऊद ने बुद्धिमानी से अपने घर को दुष्ट मनुष्यों से मुक्त रखना चुना (भजन 101:1-8; 119:63), वैसे ही दाऊद के पुत्र, अर्थात् यीशु मसीह ने भी जान लिया कि मनुष्य के भीतर अर्थात् उसके हृदय में क्या था, और उसने अपने आप को उनसे सुरक्षित रखा (यूहन्ना 2:23-25), उनको फटकार लगाई (मत्ती 22:15-26), और उन्हें दोषी ठहराया (मत्ती 23:13-36)। आप भी बुद्धि और समझ को सीखकर उसके पवित्र और उपयुक्त उदाहरण का अनुसरण करें, ताकि आप स्वयं भी ऐसे मनुष्यों से बच सकें।
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