नीतिवचन 2:10
जब बुद्धि तेरे मन में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तेरे प्राण को मधुर लगेगा;
यदि आप जीवन में सफलता और सुरक्षा की चाहत रखते हैं, तो यहां उन्हें पाने की शर्तें हैं। यदि आप परमेश्वर की बुद्धि से प्रीति रखने का चुनाव करते हैं, और यदि आप ज्ञान को एक बहुमूल्य वरदान के रूप में महत्व देते हैं, तो कुछ खास और ठोस दृढ़ आशीषें यकिनन आप के पीछे आएगी। परन्तु यदि आप इन शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं, तो आपका जीवन एक बेकार और दर्दनाक अनुभव से भरा होगा।
बुद्धि और ज्ञान के साथ आनेवाली ये विशेष और दृढ़ आशीषें क्या हैं? वे विवेक और समझ हैं (नीति 2:11)। इन से आप को दुष्ट लोगों की जीवनशैली और दण्ड से छुटकारा मिलेगा (नीति 2:12-15, 20-22)। वे वेश्या के प्रलोभन और उनसे उभरनेवाले दर्दनाक परिणामों से आप को छुटकारा देंगे (नीति 2:16-22)। ये सचमुच महान आशीषें हैं।
बुद्धि क्या है? सही सही परख करने की शक्ति – यह किसी भी परिस्थिति को समझने और उस पर अपनी पकड़ जमाने का कौशल है ताकि यह जान सके कि परमेश्वर और मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए क्या किया जाए। बुद्धि का आरम्भ परमेश्वर का भय मानने से होता है, अर्थात् आज्ञाकारी श्रद्धा जो उसे सभी बातों में प्रसन्न करने का प्रयास करती है (नीति 9:10)। बुद्धि का विस्तृत विवरण बाइबल में पाई जाने वाली परमेश्वर की आज्ञाओं में पाया जाता है (भजन 19:7-9; सभो. 12:13)।
बुद्धि आपके मन में कैसे प्रवेश करती है? तब जब आप इससे प्रीति रखने का चुनाव करते हैं! आप हर किमत पर उसका पीछा करके उसे अपने जीवन की प्राथमिकता बनाने का चुनाव करते हैं (नीति 18:1-2; मत्ती 6:21)। अय्यूब ने अपने आवश्यक भोजन से भी अधिक परमेश्वर के वचनों को महत्व दिया (अय्यूब 23:12)। दाऊद ने बुद्धि को उत्तम सोने से अधिक मूल्यवान और मधु से भी बढ़कर मधुर माना (भजन 19:10)। दाऊद ने अपना मन बुद्धि पर लगाया (भजन 119:97, 103, 111, 162)। क्या आप ने ऐसा चुनाव किया है? आपको भी ऐसा करना चाहिए (कुलु. 3:16)।
ज्ञान क्या है? यह इस जगत की ओर देखने की दार्शनिकता है जिसका विवरण बाइबल में है – वास्तविकता को कल्पना से, सत्य को झूठ से अलग करना, सच्चाई और धार्मिकता को जानना। ज्ञान का आरम्भ भी परमेश्वर के भय से होता है (नीति 1:7), क्योंकि परमेश्वर का अस्तित्व ही सभी बातों का प्रथम तथ्य और प्रथम कारक है (उत्पत्ति 1:1; रोम 11:33-36)। जो लोग परमेश्वर के अस्तित्व से इन्कार करते हैं वे तर्कहीन हैं; वे अपवित्र और व्यर्थ बड़बोले हैं, भले ही उन्हें वैज्ञानिक कहा जाए (2 थिस्स 3:2; 1 तीमु 6:20-21)।
आपके प्राण के लिए ज्ञान मधुर क्यों है? इसलिए क्योंकि आप इसे एक मूल्यवान और महत्वपूर्ण वस्तु समझते हैं और सराहना करते हैं। आप इसे पाने के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं (नीति 2:3; भजन 119:66); आप इसके लिए निर्देश पाने को तरसते हैं (नीति 12:1; 19:27; 21:11); आप शुद्ध साहस के साथ उसका व्यवहारिक उपयोग करते हैं (नीति 22:17-21; अय्यूब 36:1-4)। जब आप ज्ञान में आनंदित होते हैं, तब आप निश्चित रूप से प्रतिफल पाएंगे (नीति 24:13-14)।
विश्व में सबसे महानतम बुद्धि और ज्ञान वे रहस्य हैं जिन्हें सुसमाचार में प्रकट किया गया है (1 कुरिं 2:6-16; 1 तीमु 3:16)। सुसमाचार में अद्भुत रहस्य छिपे हैं जो शारीरिक स्वभाव के मनुष्य के लिए अज्ञात हैं, परन्तु जो सचमुच विश्वास रखते हैं उनके लिए वे स्पष्ट रूप से प्रकट किये गए हैं (मत्ती 13:35; रोम 16:25-27)। क्या यह अनमोल बुद्धि आपके मन में प्रवेश कर चुकी है? क्या यह अतुल्य ज्ञान आपकी आत्मा को मधुर लगता है? यह उन लोगों को समझ और अनन्त जीवन की निश्चयता देगा जो इसका मूल्य जानते हैं और इसे गले लगाते हैं।
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