नीतिवचन 19:9

झूठी साक्षी का दण्ड न छुटेगा और मिथ्यावादी नाश हो जाएगा।

आपके विनाश की निश्चयता देने वाला सबसे तेज तरीका है झूठ बोलना। झूठों का विनाश करने परमेश्वर ने अपने आप को प्रतिबद्ध किया है, ऐसी ही प्रतिबद्धता धर्मी जनों ने भी की है, यहां तक कि अत्यंत दुष्ट लोगों ने भी ऐसा ही करने की शपथ ली है। झूठ बोलना किसी काम का नहीं।

परमेश्वर ने सुलैमान को नीतिवचन लिखने इसलिए प्रेरित किया ताकि वह आपको जीवन के लिए आवश्यक बुद्धि दे सके। सब समयों में इमानदारी का जीवन जीना और हमेशा सच बोलना आपकी समृद्धि और सफलता के लिए बुद्धि का एक सबसे बड़ा नियम है। इस से आसान और सरल क्या हो सकता है? अंततः इस से सस्ता सौदा और कौन-सा हो सकता है? इस संसार में यह सचमुच एक बड़े लाभ की बात है – हमेशा इमानदारी को मूल्यवान समझकर उसका व्यावहारिक उपयोग करना।

बुद्धि की इस पुस्तक में खरापन और सत्य सबसे अहम हैं, और झूठ बोलने के खतरनाक नतीजों को बारबार दोहराया गया है। परमेश्वर इस नीतिवचन में वर्णित झूठ बोलने के दो पहलुओं से घृणा रखता है (नीति 6:16-19)। इस विषय पर सुलैमान द्वारा दिए गए ज़ोर पर विचार करें (नीति 10:18; 12:19, 22; 13:5; 14:5; 17:7; 21:6; 26:24-26, 28)। किसी भी अधर्मी कारणों से किसी भी विषय पर झूठ बोलना किसी काम का नहीं। इस पर विश्वास करे!

लोग क्यों झूठ बोलते हैं? कुछ लोग जीवन में आगे बढ़ने के लिए झूठ बोलते हैं, उन्हें लगता है कि जीवन में तेजी से तरक्की पाने के लिए वे दूसरों को धोखा दे सकते हैं। वे अपने विषय में किसी कम्पनी को दी गई जानकारी के विवरण में, साक्षात्कारों (इंटरव्यू) में, हिसाब-किताब में, या जब उनसे कार्यपद्धती या समस्याओं के बारे में पूछताछ की जाती है, झूठ बोल सकते हैं। परंतु यह नीतिवचन सत्य है – जिस बात के विषय में उन्होंने सोचा कि उससे उन्हें सफल होने में सहायता होगी, अंत में वही बात उनके विनाश का कारण बनेगी।

कुछ लोग दण्ड से बचने झूठ बोलते हैं। बच्चों में यह आम वजह है। जब उनसे स्वाभाविक ग़लतियों के विषय में कोई प्रश्न पूछा जाता है, तब वे अक्सर किसी और व्यक्ति या किसी और बच्चे की ओर इशारा करते हैं और अपनी ग़लती को मानने से इनकार करते हैं। इस मामले में बड़े भी कुछ कम नहीं हैं, उन्हें लगता है कि झूठ बोल देने से वे अपने ग़लत कामों के नतीजों से बच निकलेंगे। परंतु यह नीतिवचन सत्य है – झूठ बोलने वाला क्या सोचता है इस से कोई फर्क नहीं पड़ता, वह दंड से नहीं छुटेगा।

कुछ लोग दूसरों को ऐसे पाप करने लुभाने के लिए झूठ बोलते हैं जिनसे उनकी वासनाएं तृप्त हो सके। यह व्यभिचारियों और झूठे शिक्षकों के विषय में सच है, दोनों ही अपने शिकार और बलि के बकरों का दिल पिघलाने और उन्हें मनाने के लिए झूठ बोलते हैं । वे लैंगिक-सम्भोग और धर्म के नाम पर अय्याशी करने के लिए पथभ्रष्ट करते हैं, धर्म का ग़लत प्रतिनिधित्व करते हैं, और ग़लत मार्ग पर ले जाते हैं। किंतु बाइबल का यह नीतिवचन सच है – वे अपने झूठ के कारण निश्चित नाश पाएंगे।

कुछ लोग अपने मित्रों और सहकर्मियों में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए झूठ बोलते हैं। वे दूसरों से स्वीकृति तथा प्रशंसा पाने अपनी वासनामय महत्वाकांक्षाओं की उपलब्धियों को सुशोभित करके बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। सुविख्यात और लोकप्रिय बनने का उनका जुनून उनके मनों और हृदयों में इतना प्रबल हो चूका होता है कि वे उसकी प्राप्ति के लिए सत्य को त्याग देते हैं। परंतु यह नीतिवचन सत्य है – वे ऐसी किसी भी बात के जरिए आदर नहीं हासिल कर पाएंगे जो अनादरणीय और घृणित है।

माता-पिता को चाहिए कि वे अपने सिद्ध आदर्श, ध्यानपूर्वक निर्देश, और झूठ बोलने के लिए नियमित रूप से दंड देकर अपने बच्चों के खातिर अपने घर में सत्य की स्थापना करें। एक सबसे उपयोगी चीज जो आप अपने बच्चों को दे सकते हैं वह है, सत्य निष्ठा के प्रति आपका प्रेम और झूठ के प्रति आपका तिरस्कार और दोनों बातों की उन्हें शिक्षा देना। रिश्तो में, व्यवसाय में, धर्म में, या राजनीति में यदि झूठ न बोला जाए तो यह धरती कितनी अद्भुत जगह बन सकती है! हमेशा एक सिद्ध सत्यनिष्ठा और इमानदारी के जीवन के द्वारा आप इस संसार में दूसरों के लिए एक मरहम और आशीष बन सकते हैं।

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