नीतिवचन 19:7

जब निर्धन के सब भाई उससे बैर रखते हैं, तो निश्चय है कि उसके मित्र उससे दूर हो जाएँ। वह बातें करते हुए उनका पीछा करता है, परन्तु उनको नहीं पाता।

यहाँ सुलैमान का एक वास्तविक निरिक्षण है। जब मनुष्य के कार्यों और उद्देश्यों का ईमानदारी से विश्लेषण किया जाता है तो मानव-स्वभाव पूरी तरह से बदसूरत प्रमाणित होता है। अगर कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से कंगाल हो जाए तो उसका अपना परिवार उसे छोड़कर चला जाएगा। और निश्चय है कि वह अपने मित्रों को खो देगा, क्योंकि उन्हें अब उसके साथ संगति करने का कोई कारण नहीं दिखता। भले ही वह उनके प्रति बहुत प्रेम व्यक्त करे, फिर भी वे उसे छोड़कर चले जाएंगे।

परिवार का बन्धन आमतौर पर दोस्ती के बन्धन से ज्यादा मज़बूत होता है, इसलिए दुनिया कहती है, “अपना सो अपना, पराया सो पराया।” लेकिन सुलैमान ने यहां सिखाया कि पैसा परिवार से ज्यादा महत्वपूर्ण है। दुनिया को एक नई कहावत गढ़नी चाहिए, “बाप बडा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया।” अमर प्रेम और अंदरूनी सूरत के अनमोल मूल्य के बारे में दार्शनिक बातें और रोमांटिक फ़िल्मी गीत सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन जीवन की वास्तविकता यह है कि अगर व्यक्तिगत लाभ के अवसर न हो, तो अधिकांश लोग अपने ही परिवार और जिगरी दोस्तों दोनों को छोड़ देंगे।

कुछ नीतिवचन चीजों का परिक्षण करके उनकी सच्चाई को प्रकट करते हैं, और हमें उनमें सबक की खोज करनी है ताकि हम शिक्षा प्राप्त कर सकें। सुलैमान ने अपने निरिक्षण में पाया कि ज्यादातर लोग स्वार्थी होते हैं। जब उन्हें किसी रिश्ते में कोई आर्थिक फायदा औ अवसर नज़र नहीं आता, तो वे उस व्यक्ति को कचरा के समान छोड़कर चले जाते हैं। और उसने देखा कि यह भयानक लक्षण परिवार के लोगों और दोस्तों में भी किसी संक्रमण की नाई फैला हुआ है। आप अपनी मानव-जाति पर इस भयानक अभियोग से क्या सीख सकते हैं?

मानवजाति जन्म और स्वभाव ही से स्वार्थी, लालची और अवसरवादी है। लोग प्रेम, या आत्म-बलिदान की तुलना में वासना, या आत्म-संतुष्टि की ओर ज्यादा प्रवृत्त होते हैं। एक बुद्धिमान व्यक्ति लोगों में मौजूद इस गुण को जान लेता है और जब वह किन्हीं मामलों का विश्लेषण करता है या उनमें दूसरों को शामिल करने का निर्णय लेता है तब वह इस गुण पर विचार करता है। वह याद करता है कि कौन कौन-से रिश्तेदार और मित्र महत्वाकांक्षा और स्वार्थ से भरें हैं।

अधिकांश मित्र अच्छे सुख के दिनों वाले मित्र होते हैं। आपके प्रति उनका प्रेम और वफादारी उतनी ही गहरी होती है जितनी कि आपकी जेब। जैसे ही आपके हालात बिगड़ जाते हैं, तो वे अपने रास्ते निकल जाते हैं – सीधे दरवाजे से बाहर। सच्चे दोस्त, जिनके बारे में दुनिया बहुत कम जानती है, इतने चंचल और अस्थिर नहीं होते। सुलैमान ने यह भी लिखा, ” [सच्चा] मित्र सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है” (नीतिवचन 17:17)।

यदि आप अपने आलसीपन या मूर्खतापूर्ण निर्णयों के कारण गरीब ही बने रहते हैं या कंगाल हो जाते हैं, तो आपको अपने मित्रों की कमी के बारे में शिकायत नहीं करनी चाहिए। आपने खुद ही अपनी ही मूर्खता से उन्हें भगा दिया है। मेहनती और ईमानदार लोग आलसी और अड़ियल लोगों से घृणा करते हैं। वे ये सोचकर आपके निकट मित्र बनने से डरते हैं, कि कहीं आप अपने आलसीपन का पोषण करने के लिए कोई अन्य सहायता माँग लें। काम करो, मेहनत करो, मूर्खतापूर्ण घोटालों से बचो, और कुछ पैसे बचाओं; आपको जो मित्र छोड़कर गएँ हैं, वे वापस आ सकते हैं (नीतिवचन 19:4,6; 20:4; 1 थिस्स 4:11-12; 2 थिस्स 3:6-12; इफि 4:28)।

सच्चे मित्र केवल वे हैं जो परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह में आपके साथ रिश्ते में जुड़ गएँ हैं। वे सिर्फ़ अच्छे दिनोंवाले मित्र नहीं हैं, क्योंकि बाहरी परिस्थितियाँ या महत्वाकांक्षा न तो उन्हें प्रेरित करती हैं और न ही उन्हें प्रभावित करती हैं। वे परमेश्वर और उसके परिवार के प्रति अपने प्रेम के कारण आपके प्रति प्रतिबद्ध बने रहते हैं। वे अपने लाभ से अधिक आपकी उन्नति में रुचि रखते हैं। और वे दुनिया में किसी भी खाने की सूचि या फैंसी भोजन के माहौल की तुलना में प्रेम और शांति को अधिक महत्व देते हैं (नीतिवचन 15:17; 17:1)। ऐसे अनमोल दोस्त कहाँ मिलते हैं? यीशु मसीह के चर्च में, जहां वे इसी मक़सद से इकट्ठा होते हैं।

सच्चे ख्रिश्चन मित्रों के बारे में यह कहा जा सकता है, “खून खून से अधिक गाढ़ा होता है,” जिसका अर्थ है कि यीशु मसीह के लहू के द्वारा स्थापित यह खून का रिश्ता खून या एक ही डीएनए के पारिवारिक रिश्तों से अधिक मज़बूत होता है। ऐसे दोस्तों के बारे में यह भी कहा जा सकता है, “पराया सो अपना, अपना सो पराया।,” क्योंकि यीशु मसीह के बहाए गए खून से बना यह रिश्ता चांदी या सोने से बने रिश्तों से बढ़कर होता है। नया जन्म पायें मसीहियों के साथ मित्रता सुलैमान द्वारा निरिक्षण किए सांसारिक मित्रों से बिलकुल भिन्न होगी।

जो लोग यीशु मसीह पर विश्वास रखते हैं, और उसके सिखाएं वसूलों पर चलते हैं, उन्हें उस गरीबी से जो वास्तविक है, कोई शर्म नहीं आती, क्योंकि परमेश्वर ने इस दुनिया के गरीबों और कंगालों को अपनी संतान होने के लिए चुना है (1 कुरिन्थ 1:26-29; याकूब 2:5)। भले ही झूठे दोस्त आपको छोड़कर चले जाएँ और आपको त्याग दें, फिर भी धन्य परमेश्वर, जिसने आपको अपने अनंत धन का वारिस होने के लिए अपनी संतान के रूप अपनाया है, वह आपको कभी नहीं त्यागेगा (रोमियों 9:23; इफि 1:18; 2:7)। लाजर के बारे में सोचें कि कैसे वह उस धनवान पुरुष के स्थान पर जिसने उसकी उपेक्षा की थी, स्वर्ग में सुख का वारिस बना, जबकि धनवान मनुष्य अनंतकाल की आग में डाला गया (लूका 16:19-23)। परिस्थितियाँ चाहे जो भी , परमेश्वर का प्रेम शाश्वत और अपरिवर्तनीय है (रोमियों 8:38-39)।

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