नीतिवचन 19:6

उदार मनुष्य को बहुत से लोग मना लेते हैं, और दानी पुरुष का मित्र सब कोई बनता है।

क्या आप नियत की परख कर सकते हैं? क्या आप उचित न्याय कर सकते हैं? बुद्धिमान लोग व्यक्तियों और स्थितियों का विवेकपूर्वक मूल्यांकन करने के लिए लोगों की कमजोरियों और वे कहाँ फिसल सकते हैं, उसे पहचानते हैं। शासक की शक्ति और प्रभाव, और अमीरों का पैसा और उनकी उदारता चापलूस चाटुकारों और जोंकों को आकर्षित करती है। बहुत से लोग जो शक्तिशाली लोगों का फायदा लेना चाहते हैं, और वह प्रत्येक व्यक्ति जो धनवानों से मित्रता करता है, वे आम तौर पर धोखेबाज और खतरनाक लोग होते हैं।

यह नीतिवचन सुलैमान ने जो देखा उसकी अभिव्यक्ति है। एक शक्तिशाली और धनी राजा के रूप में, वह खुद इस अनुभव से गुज़रा कि हस्तक्षेप करने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं की भीड़ और लगातार उत्पीड़न क्या होता है। अपने बेटे को सिखाने के लिए उसने यह चेतावनी दी कि एक राजकुमार के भी ऐसे कई अनुयायी होंगे। इनमें से कुछ लोग खून चूसनेवाले जोंक होंगे, जो थोड़ा बहुत सकारात्मक चरित्र या वफादारी का दिखावा करेंगे, परन्तु बुद्धिमान व्यक्ति उनके शब्दों या कार्यों पर आँखे मूंदकर पूरी तरह से भरोसा नहीं करेगा।

एक और नीतिवचन इस पर प्रकाश डालता है। सुलैमान ने लिखा, “जब निर्धन के सब भाई उससे बैर रखते हैं, तो निश्चय है कि उसके मित्र उससे दूर हो जाएँ। वह बातें करते हुए उनका पीछा करता है, परन्तु उनको नहीं पाता” (नीतिवचन 19:7)। जब किसी व्यक्ति के पास पैसा या शक्ति नहीं होती है, तो दोस्त और रिश्तेदार उसका हालचाल भी नहीं पूछते, क्योंकि उनके पास रिश्ता बनाए रखने का कोई और कारण नहीं होता है। दरअसल, उन्हें डर है कि वह उनसे आर्थिक मदद मांग सकता है, इसलिए वे भाग जाते हैं। इन्हें सुख के मित्र कहा जाता है।

ये दो नीतिवचन मिलकर निकटवर्ती संदर्भ में एक अन्य नीतिवचन को समझाने में मदद करते हैं, जहां सुलैमान ने लिखा, “धन से कई मित्र बनते हैं; परन्तु कंगाल अपने पड़ोसी से अलग हो जाता है” (नीतिवचन 19:4)। तीनों नीतिवचन मिलकर झूठे दोस्त, स्वार्थी मनुष्य, विश्वासघाती अनुयायी और खतरनाक जोंक का वर्णन करते हैं। बुद्धिमान मनुष्यों के लिए अवश्य है कि वे लोगों की कमज़ोरियों की पहचानना सीखें और इस तरह उन्हें उनके शब्दों और कार्यों का सही आकलन करने में मदद होगी।

सुलैमान ने यह सिद्धांत पहले भी सिखाया। वहाँ उसने लिखा, “निर्धन का पड़ोसी भी उस से घृणा करता है, परन्तु धनी के बहुतेरे प्रेमी होते हैं” (नीतिवचन 14:20)। सबक सरल है: ज्यादातर लोगों की नियत स्वार्थी होती है जो उन्हें उन लोगों से मित्रता करने और उनके प्रति वफादारी का दिखावा करने के लिए प्रेरित करती है जो उन्हें लाभ पहुंचा सकते हैं। यह एक बुद्धिमान व्यक्ति की समझ है जो लोगों की इस कमजोरी को याद रखता है और उस पर विचार करता है और निर्णय लेते समय इसे ध्यान में रखता है।

यहाँ तक कि यीशु मसीह की कलीसियाओं में भी ऐसे दुष्ट लोग हैं जो समय-समय चुपके से अन्दर घुंस जाते हैं। यहूदा ने उन लोगों के विरुद्ध चेतावनी दी जो लाभ पाने की उम्मीद में लोगों की प्रशंसा करते हैं और उनकी चापलूसी करते हैं (यहूदा 1:16)। यह बेहद शर्म की बात है कि लोग एक भक्तिमान और प्रेमपूर्ण चर्च से बहने वाली दान की धारा से पीने के लिए ख्रिश्चन धर्म का प्रचार करेंगे और सुसमाचार में रुचि दिखाएंगे। परमेश्वर, जैसा कि दाऊद ने प्रार्थना की, अपने चर्चों को ऐसे परदेशियों के वश से छुड़ाए, जिन के मुँह से व्यर्थ बातें निकलती हैं, और जिनका दाहिना हाथ झूठ का दाहिना हाथ है (भजन 144:11)।

प्रभु यीशु मसीह पर विचार करें। ऐसे लोग भी थे जो केवल मछली और रोटी के मुफ़्त भोजन के लिए उसके पीछे चल रहें थे जो उसने उनके लिए उपलब्ध कराया था। वे मुफ़्त भोजन पाने के लिए इतने उत्सुक और नियत वाले थे कि उन्होंने उसे जबरन राजा बनाने की कोशिश की (यूहन्ना 6:1-27)। जब तक वे अंत में उसे छोड़कर चले नहीं गए तब तक उसने उनकी मूर्खता को डाँटा और उनका उपहास किया (यूहन्ना 6:28-71)। बुद्धिमान लोग इस पाठ से खाद्य कार्यक्रमों और चिकित्सा को सुसमाचार से जोड़ने की अंतर्निहित मूर्खता को पहचानेंगे। बाइबल के यीशु मसीह ने ऐसी किसी भी चीज़ को ठुकरा दिया जो आधुनिक साधक के संवेदनशील चलन के करीब भी थी।

इस नीतिवचन का सबक हम कैसे लागू करेंगे? नीतिवचन 31:30 से तुलना करें, जहां पुरुषों को किसी औरत की तरफदारी के धोखे के ख़िलाफ़ चेतावनी दी गई है। परमेश्वर का भय ही एक सद्गुणी पत्नी का एकमात्र माप है। विवेकशील लोग ऐसी औरत के प्रलोभन और कमजोरी को देखते हैं जो किसी भले मनुष्य को फंसाने के लिए लुभा सकती है, और वे उसके शब्दों और आचरण को चापलूसी जानकर उसे ठुकरा देते हैं। प्रेमालाप के दौरान एक घिनौनी महिला भी प्रसन्न हो सकती है (नीतिवचन 30:21-23)! बुद्धिमान लोग व्यक्ति में परमेश्वर के स्वतंत्र भय और आत्मिक बातों के लिए उसके जोश को देखते हैं।

सच्ची मित्रता और सेवा का इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि रिश्तों से क्या फायदा हो सकता है, क्योंकि सच्ची मित्रता और सेवा की बुनियाद परमेश्वर का भय, मसीही प्रेम, धार्मिक चरित्र और व्यक्तिगत ईमानदारी के उच्च सिद्धांतों पर खड़ी की जाती है। सच्चे मित्रों को विपत्ति या गरीबी से कोई फ़र्क नहीं पड़ता; वे अपने मित्रों की मदद करने के लिए सब कुछ निछावर कर देंगे (नीतिवचन 17:17; 18:24; यूहन्ना 15:13)।

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