नीतिवचन 19:5
झूठा साक्षी निर्दोष नहीं ठहरता, और जो झूठ बोला करता है, वह न बचेगा।
सच बोलना बहुत ज़रूरी होता है। बहुत ज़रूरी! झूठा गवाह वह है जो किसी व्यक्ति के खिलाफ़ झूठ बोलता है या किसी व्यक्ति के पक्ष में झूठ बोलता है, खासकर तब जब उस व्यक्ति पर किसी अपराध के लिए मुकदमा चल रहा हो। लेकिन यह नीतिवचन सब प्रकार के झूठ बोलने की भर्त्सना करता है। झूठ बोलने वाले सज़ा से बच नहीं पाएँगे, क्योंकि भले लोग, और न्यायाधीश और उनके नियोक्ता, और स्वर्ग का परमेश्वर ऐसे लोगों पर नज़र रखते हैं और उन्हें सज़ा देते हैं।
पाठक, झूठ बोलने के प्रति परमेश्वर की घृणा को अभिव्यक्त करनेवाला यह संक्षिप्त वाक्य आपको डरना सिखाने पाएं ताकि आपका दिल किसी भी मामले को गलत तरीके से पेश करने या झूठ बोलने के डर से काँप उठे। केवल वे लोग जो मृत्यु से प्रेम रखते हैं, इस नीतिवचन को अनदेखा करेंगे और परमेश्वर के वचन के सिद्ध दर्पण में बेईमानी के अपने गुनाहों का सावधानीपूर्वक परिक्षण किए बिना ही अपने दिन की शुरुआत करेंगे (नीतिवचन 12:19; 21:6; याकूब 1:21-26)।
परमेश्वर झूठ से और झूठ बोलने वालों से बैर रखता है (नीतिवचन 6:17,19; 12:22; भजन 5:5-6), और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा जो आग और गन्धक से जलती रहती है (प्रकाशितवाक्य 21:8; 22:15)। हर बार जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तो वह दिखाता है कि वह अपने पिता शैतान से है (उत्पत्ति 3:1-5; यूहन्ना 8:44)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने अपनी व्यवस्था में इसे नौवीं आज्ञा के रूप में दिया (निर्गमन 20:16), और नए नियम में उसके प्रेरितों ने भी झूठ की भर्त्सना की (इफिसियों 4:25; कुलुस्सियों 3:9; 1 तीमुथियुस 1:10)।
झूठ बोलने के कारण एक खास प्रकार का न्याय किया जाएगा और दंड दिया जाएगा। मनुष्य जीवित रहने और सफल होने के लिए सत्य पर निर्भर रहता है, इसलिए जो झूठ बोलता है वह टिक नहीं पाएगा, बल्कि दण्ड पाएगा (भजन 101:7)। सरकारी शासक और नियोक्ता सत्य पर निर्भर रहते हैं, इसलिए जैसे ही वे किसी झूठ बोलने वाले को पकड़ते हैं, वे उसे तुरन्त सज़ा देते हैं (16:13; 17:7; 29:12; व्यवस्थाविवरण 19:16-21)। और बेशक, परमेश्वर झूठ बोलने वालों का सख्त न्याय करेगा (2 राजा 5:25-27; प्रेरितों के काम 5:1-11)।
यह नीतिवचन एक गंभीर चेतावनी है – और इस चेतावनी को सिर्फ़ चार वचनों बाद फिर से दोहराया गया है (नीतिवचन 19:9)। क्या आपको बात समझ में आई? परमेश्वर और धर्मी लोग झूठ बोलने से घृणा करते हैं। आपको भी उनसे घृणा करनी चाहिए। बाइबल झूठ बोलने के विरुद्ध चेतावनियों से भरी हुई है (लैव्यव्यवस्था 19:11; भजन संहिता 101:7; यिर्मयाह 9:3-5; प्रेरितों के काम 5:3-4)। जान लो कि आपका पाप आपको लगेगा ही- खासकर झूठ बोलने का पाप (नीतिवचन 12:19; गिनती 32:23)। एक झूठ दूसरे झूठ को जन्म देता है, और यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक कि झूठा मनुष्य धोखे के जाल में फंस न जाए जो उसके प्राण और प्रतिष्ठा दोनों को नष्ट कर देता है।
क्या आप तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, कहानियां गढ़ते हैं, या अपने पक्ष में किसी हिसाब-किताब में हेराफेरी करते हैं? अगर आपके पक्ष में हो, तो क्या आप गलत बातों को सही ठहराते हैं? आह पाठक, हमेशा खुलकर और साफ़ साफ़ सच बोलें। झूठ और उसके किसी भी स्वरुप से, चाहे मामूली ही क्यों न हो, घृणा करें। ईमानदारी और सच्चाई से प्रेम रखें। प्रार्थना करें कि परमेश्वर आपको शैतान से विरासत में मिलें इस अभिशाप से मुक्ति दें (भजन 119:29)।
माता-पिता! अपने बच्चों को बचपन से ही सच बोलना सिखाएं और उनसे सच की ही माँग करें, क्योंकि बच्चे बोलने से पहले ही झूठ बोलना शुरू कर देते हैं (भजन 58:3-5)। परिवार के सभी कामों में हमेशा पूरी ईमानदारी पर ज़ोर दें और जब वे झूठ बोलते हैं तो उन्हें झूठ के लिए बाकी अन्य उल्लंघनों की अपेक्षा ज़्यादा सज़ा दें। बच्चे सज़ा से बचने के लिए अक्सर झूठ बोलते हैं, इस पर खास ध्यान दें, क्योंकि सच बोलना परमेश्वर का भय सीखना है। अगर आप उन्हें समय पर सज़ा नहीं देते और झूठ से नफरत करना नहीं सिखाते, तो बाद में ज़िन्दगी उन्हें और भी अधिक ज़्यादा सज़ा देगी।
क्या कुछ खांस अवसरों पर झूठ बोलना सही है? हाँ, जब किसी मासूम या निर्दोष की जान दांव पर लगी हो तब। राहाब ने दो जासूसों की रक्षा के लिए झूठ बोला और इसके लिए परमेश्वर ने उसे धर्मी ठहराया (याकूब 2:25)। जब मिस्र की दो दाइयों ने इस्राएल के बच्चों की रक्षा के लिए फिरौन से झूठ बोला तो परमेश्वर ने दोनों को आशीष दीं (निर्गमन 1:15-21)। दाऊद, जो परमेश्वर के मन के अनुसार मनुष्य था, उसने अनेक अवसरों पर झूठ बोला (1 शमूएल 19:11-17; 21:10-15; 2 शमूएल 15:31-37)। और परमेश्वर ने राजा अहाब के पास एक झूठ बोलने वाली आत्मा भेजी, जो न तो सत्य से प्रेम रखता था और न ही सत्य सुनने के योग्य था (1 राजा 22:19-22)। ये बाइबल में झूठ बोलने के कुछ उदाहरण हैं, जिनकी निंदा या भर्त्सना नहीं की गई है।
संभव है कि आज आप सत्य से समझौता करने या बेईमानी करने की परीक्षा में पड़े। बहुत से लोग परीक्षा में पड़ते हैं। अपने आपको इस नीतिवचन के अनुसार ढालें ताकि आप परमेश्वर की महिमा कर सकें और परिस्थिति की मांग या अपेक्षा के अनुसार ईमानदार और सत्यनिष्ठ बनकर धार्मिकता को ऊँचा उठा सकें। हर बार जब आप झूठ बोलने या गलत बयानी के बजाय सत्य और ईमानदारी को चुनते हैं, तो आप परमेश्वर और मनुष्यों के सामने अपनी प्रतिष्ठा में सुधार करते हैं। आने वाले दिनों में दोनों आपको सम्मानित और पुरस्कृत करेंगे।
यीशु मसीह विश्वासयोग्य और सच्चा गवाह है (प्रकाशितवाक्य 3:14)। अधिकांश लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया क्योंकि वह सत्य कहता था (यूहन्ना 8:45)। स्वाभाविक प्रवृत्तिवाला मनुष्य झूठ से प्रेम रखता है, और आज कुछ भी नहीं बदला है। बन्दर से मानव उद्विकास? कितना हास्यास्पद, पागलपन भरा झूठ! चर्चों में झूठ का प्रचार करने वालों की संख्या सत्य का प्रचार करने वालों वालों की तुलना में हमेशा ज्यादा ही होगी (1 तीमुथियुस 4:1-3; 2 तीमुथियुस 4:3-4)। बुद्धिमान लोग भक्तिमानता को आर्थिक उन्नति या सफलता से नहीं, बल्कि सत्य से मापते हैं(1 तीमुथियुस 6:3-6)।
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