नीतिवचन 19:4

धनी के तो बहुत से मित्र हो जाते हैं, परन्तु कंगाल के मित्र भी उससे अलग हो जाते हैं।

पैसों से दोस्त भी ख़रीदे जा सकते हैं, बहुत सारे दोस्त। अमीरों को मित्रों का एक ऐसा दल बड़ी आसानी से मिल जाता है जो उन्हें खुश करता है और उनकी सेवा में लगा रहता है। तो वही, एक निर्धन मनुष्य, जिसके पास कोई पैसा नहीं होता, उसके पड़ोसी भी उसके मित्र नहीं बन पाते। एक बुद्धिमान राजा ने यह नीतिवचन को एक ऐसा पाठ पढ़ाने के लिए लिखा जिससे आपको समझ प्राप्त हो और आप सफल बन सकें।

एक ऐसी मित्रता जिसकी बुनियाद पैसों पर बनी हो, झूठी होती है, और खुश करनेवाला और हाँ-हुजूरी करनेवाला साथियों का दल स्वार्थी और अपना मतलब निकालनेवाला होता है। एक बार जब पैसा खत्म हो जाता है, तो सुहावने मौसम के ये सब दोस्त हवा हो जाते हैं, पूरा दल ही न जाने कहाँ गायब हो जाता है। कभी आपकी मदद के लिए दौड़ आनेवाले पड़ोसी भी आपके कंगाल हो जाने पर आपसे बचते हैं और कोई भाव नहीं देते।

कुछ कुछ नीतिवचन अपना पाठ स्पष्ट रूप से सिखाते हैं, जैसा कि नीतिवचन 22:6 को समझना कठिन नहीं है : ” लड़के को उसी मार्ग की शिक्षा दे जिसमें उसको चलना चाहिए, और वह बुढ़ापे में भी उससे न हटेगा।” उचित प्रशिक्षण, बच्चे का स्वभाव, उसे किस मार्ग पर जाना है, और एक बच्चे का बूढ़ापे में जाना क्या है, इन सब बातों की पूरी समझ की खोज करने से उस नीतिवचन का मूल्य समझा जा सकता है। सबक स्पष्ट है, लेकिन आपको विवरण के लिए उसमें खुदाई करनी होगी।

कुछ अन्य नीतिवचन जीवन से अवलोकन से शिक्षा देते हैं। उनके सबक केवल व्यक्त किये जाते हैं, और उन्हें खोजना आपका कर्तव्य है। सुलैमान ने इस प्रकार के बहुत से नीतिवचन लिखे, और यह नीतिवचन भी उन में से एक है। उसने इस विषय पर अपना अवलोकन लिखा कि पैसों का रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ता है, और उसमें जो पाठ है उस की पहचान करना आपका सौभाग्य है, और सबक है एक ऐसी मानसिकता की निंदा करना जिसमें लोगों को अक्सर पैसे से तौला जाता है।

उसका यह अवलोकन, या निरिक्षण सत्य है। लोग पैसे वालों के पीछे भागते हैं, क्योंकि वे अपने लिए कुछ पाने की उम्मीद करते हैं। ऐसे लोगों की झूठी बातों और कामों को देखना सीखो, जो अमीरों के बीच अपने मित्र बनाने की फिराक़ में रहते हैं। उनका लेनादेना धनवान मित्र से नहीं बल्कि उसके धन से है। वे उम्मीद करते हैं कि उनके धन में से जो कुछ भी टपक पड़े वह उनकी झोली में गिर जाए।

दोस्तों की संख्या आपको प्रभावित नहीं करने पाए: भीड़ कुछ ही पलों की होती है – केवल तब तक जब आपका पैसा टिकता है। किसी के पीछे चलने से या मित्रों की अधिकाई के कारण आपकी लोकप्रियता बढ़ने से आपके विषय में कुछ भी अच्छा या महान साबित नहीं होता। आपको रिश्वत की ताकत और लोगों के लालच को पहचानना होगा, और ज़रूरी है कि आप वित्तीय सफलता या पैसों के प्रभाव के कारण उभरनेवाली लोकप्रियता की पक्षपातपूर्ण प्रवृत्ति को समझे।

धन का लोभ सारी बुराइयों की जड़ है। यह मनुष्यों के लिए चरित्र के बजाय वित्तीय लाभ के आधार पर मित्रता करने का कारण बनता है। ये सच्चें दोस्त नहीं, बल्कि लालच और लोभ के रिश्ते हैं। जब पैसा खत्म हो जाता है तो दोस्ती खत्म हो जाती है। यहां तक कि पड़ोसी, जिनमें एक दूसरे के प्रति कर्तव्य की भावना होनी चाहिए, वे गरीबों से दूर रहेंगे और उनके साथ कोई सहभागिता नहीं करेंगे।

सुलैमान ने अपने पुत्र के लिए यह बात कई बार कही (नीतिवचन 14:20; 18:16; 19:6-7)। क्योंकि वह एक धनवान राजा का बेटा है, इस कारण उसके साथ चापलूसी करनेवाले जोंक जुड़ने की संभावना होगी। इसलिए अवश्य था कि वह बुद्धिमान बने और उनके चरित्र को मापने के लिए उनकी दोस्ती के पहलू को बारीकी से देखे। धर्मपरायण उसूलों पर चलनेवाले पुरुष धन या लाभ की परवाह नहीं करते; वे यहाँ एक लंबी दौड़ दौड़ने के लिए हैं (नीतिवचन 17:17)। राजा, और सफल पुरुष, जीवन को बनाए रखने के लिए चरित्र की खोज करते हैं (नीतिवचन 25:4-5; भजन 101:1-8; 144:11-15)।

वित्तीय सफलता, अपने आप में, किसी मनुष्य का सटीक पैमाना नहीं है। चरित्र और क्षमता के अलावा और भी बहुत से कारक हैं जो धन में योगदान करते हैं। ऐसे धनवान हैं जो असल में मूर्ख होते हैं, और ऐसे निर्धन हैं जो असल में बुद्धिमान होते हैं। समय और अवसर दोनों को मिलता है और साबित करता है (सभोपदेशक 9:11)। यह सबक सीख लो: एक गरीब बुद्धिमान व्यक्ति एक अमीर मूर्ख से कहीं अधिक श्रेष्ठ है (नीतिवचन 19:1; 28:6; सभोपदेशक 4:13; 9:13-16)।

बाइबल में दिए दो उदाहरणों पर गौर कीजिए कि कैसे दौलत दोस्ती को प्रभावित करती है। अय्यूब, जो कभी बहुत धनी था, उसने शिकायत की कि कैसे उसके सबसे करीबी दोस्तों और परिवार के सदस्यों ने उसे उसकी भयानक कंगाली और विपत्ति में छोड़ दिया था (अय्यूब 19:8-19)। परन्तु इस्राएल के राजकुमार योनातन ने, जो सच्चे मित्र का सबसे बड़ा उदाहरण था, गरीब चरवाहे दाऊद से मित्रता करने के लिए अपने राजकुमार होने के ऊँचे पद और बड़े धन को त्याग दिया (1 शमूएल 18:1-4; 20:30)। सच्चे मित्र धन से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होते।

आप दूसरों के लिए अपने प्रेम की बुनियाद इस बात को न बनाए कि वे आपके लिए क्या कर सकते हैं। यीशु ने कहा, “तब उसने अपने नेवता देनेवाले से भी कहा, “जब तू दिन का या रात का भोज करे, तो अपने मित्रों या भाइयों या कुटुम्बियों या धनवान पड़ोसियों को न बुला, कहीं ऐसा न हो कि वे भी तुझे नेवता दें, और तेरा बदला हो जाए। परन्तु जब तू भोज करे तो कंगालों, टुण्डों, लंगड़ों और अन्धों को बुला। तब तू धन्य होगा, क्योंकि उनके पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा” (लूका 14:12-14)। केवल उनसे प्रेम करना जो आपसे प्रेम करते हैं परमेश्वर की दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है (लूका 6:32)।

यीशु मसीह, जो अति धनवान था, वह हमसे मित्रता करने और कंगाली से पीड़ित हम जैसे अभागों को पापों से बचाने के लिए निर्धन बन गया, ताकि वे उसकी निर्धनता से धनी हो सकें (2 कुरिन्थियों 8:9)। इस आशय की मित्रता और उसके अर्थ की समझ से वे लोग अज्ञात हैं जो अपने शरीर की वासनाओं के चलाये चलते हैं। यहाँ सुसमाचार का अकथनीय उपहार है। जो लोग यीशु मसीह को जानते हैं वे आसानी से उन लोगों की सेवा में अपना जीवन अग्निबली के रूप में चढ़ा देंगे जो उनके उपकारों का बदला नहीं चूका सकते (2 कुरिन्थियों 12:15)।

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